अभिप्रेरणा एवं संवेग | Class 11 Psychology Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

अभिप्रेरणा एवं संवेग – this guide gives you a concise, exam-ready overview of अभिप्रेरणा एवं संवेग from Class 11 Psychology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
मैस्लो का आवश्यकता पदानुक्रम
अग्राहम एच. मैस्लो ने मानव आवश्यकताओं को एक पदानुक्रम में व्यवस्थित किया है, जिसे आत्म-सिद्धि का सिद्धांत कहा जाता है। यह पदानुक्रम पिरामिड के रूप में होता है जिसमें सबसे नीचे मूल जैविक आवश्यकताएँ होती हैं जैसे भूख, प्यास। जब ये आवश्यकताएँ संतुष्ट हो जाती हैं तो व्यक्ति सुरक्षा की आवश्यकता की ओर बढ़ता है, जिसमें भौतिक और मनोवैज्ञानिक सुरक्षा शामिल है। इसके बाद प्रेम और आत्मीयता की आवश्यकता आती है, फिर आत्म-सम्मान की आवश्यकता और अंत में सबसे ऊपर आत्म-सिद्धि की आवश्यकता होती है, जो व्यक्ति की अपनी संभावनाओं को पूर्ण रूप से विकसित करने की अभिप्रेरणा है। यह सिद्धांत बताता है कि निचले स्तर की आवश्यकताएँ जब तक पूरी नहीं होतीं, तब तक उच्च स्तर की आवश्यकताएँ प्रभावी नहीं होतीं। हालांकि, कुछ परिस्थितियों में व्यक्ति निचले स्तर की आवश्यकताओं के विपरीत भी कार्य कर सकता है, जैसे सैनिकों द्वारा जोखिम उठाना।
📊 Diagram: चित्र 8.3 : मैस्लो का आवश्यकता पदानुक्रम
🧪 Activity: क्रियाकलाप 8.1: सैनिक, पुलिस और अग्निशमन कर्मियों के जोखिम भरे व्यवहारों पर चर्चा करना।
🔗 Connection: अगले खंड में संवेगों के स्वरूप और उनके अनुभव की व्याख्या की जाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अभिप्रेरणा शब्द का अर्थ क्या है और यह व्यवहार में किस प्रकार गति लाता है? उदाहरण सहित समझाइए।
अभिप्रेरणा वह प्रक्रिया है जिससे व्यवहार में गति आती है। यह व्यक्ति को किसी लक्ष्य की ओर प्रेरित करती है। उदाहरण के लिए, विद्यालय जाना ज्ञान प्राप्ति, मित्र बनाना या अच्छी नौकरी पाने के लिए हो सकता है।
चित्र 8.1 में दिखाए गए अभिप्रेरणात्मक चक्र का वर्णन कीजिए। इसमें अंतर्नोद और आवश्यकता का क्या संबंध है?
अभिप्रेरणात्मक चक्र में आवश्यकता के कारण अंतर्नोद उत्पन्न होता है, जो यादृच्छिक क्रियाकलापों को ऊर्जा प्रदान करता है। जब लक्ष्य प्राप्त हो जाता है तो अंतर्नोद समाप्त हो जाता है और प्राणी संतुलित स्थिति में लौटता है।
अभिप्रेरक किन दो मुख्य प्रकारों में विभाजित होते हैं? प्रत्येक का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
अभिप्रेरक दो प्रकार के होते हैं: जैविक अभिप्रेरक और मनोसामाजिक अभिप्रेरक। जैविक अभिप्रेरक शरीर के अंदरूनी तंत्रों पर निर्भर करते हैं, जैसे भूख और प्यास। मनोसामाजिक अभिप्रेरक सामाजिक पर्यावरण के साथ अंत:क्रिया से विकसित होते हैं, जैसे संबंधन और शक्ति की आवश्यकता।
भूख एक जैविक अभिप्रेरक है। भूख के उद्दीपकों के बारे में विस्तार से बताइए।
a) भूख शरीर की एक जैविक आवश्यकता है जो भोजन प्राप्ति के लिए प्रेरित करती है। b) भूख के उद्दीपकों में अमाशय का संकुचन, रक्त में ग्लूकोज की कमी, प्रोटीन और वसा के स्तर का कम होना शामिल हैं। c) यकृत मस्तिष्क को तंत्रिका आवेग भेजता है जो भूख की अनुभूति को नियंत्रित करता है। d) भोजन की सुगंध, स्वाद और दर्शन भी भूख को बढ़ाते हैं। अतः भूख एक जटिल जैविक प्रक्रिया है जो शरीर के अंदरूनी और बाहरी संकेतों के संयोजन से नियंत्रित होती है।
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