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अभिप्रेरणा एवं संवेग | Class 11 Psychology Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

अभिप्रेरणा एवं संवेग | Class 11 Psychology Notes

अभिप्रेरणा एवं संवेग – this guide gives you a concise, exam-ready overview of अभिप्रेरणा एवं संवेग from Class 11 Psychology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

जैविक अभिप्रेरक

जैविक अभिप्रेरक शरीर के अंदरूनी तंत्रों और जैविक आवश्यकताओं पर आधारित होते हैं। ये जन्मजात होते हैं और जीव के जीवन निर्वाह के लिए आवश्यक होते हैं। भूख, प्यास और काम जैविक अभिप्रेरकों के प्रमुख उदाहरण हैं। भूख तब उत्पन्न होती है जब शरीर में पोषण की कमी होती है, जैसे अमाशय का रिक्त होना, रक्त में ग्लूकोज की कमी, प्रोटीन और वसा के स्तर का कम होना। प्यास तब उत्पन्न होती है जब शरीर में जल की कमी होती है और कोशिकाओं में निर्जलीकरण होता है। काम अंतर्नोद एक शक्तिशाली जैविक अभिप्रेरक है, जो जीवन निर्वाह के लिए आवश्यक नहीं है, परन्तु मानव व्यवहार को गहराई से प्रभावित करता है। ये अभिप्रेरक शरीर के हार्मोन, तंत्रिका संचारक और मस्तिष्क के अधश्चेतक भागों द्वारा नियंत्रित होते हैं।

📊 Diagram: चित्र 8.2 : अभिप्रेरकों के प्रकार

🔗 Connection: अगले खंड में मनोसामाजिक अभिप्रेरकों जैसे संबंधन, शक्ति, उपलब्धि और जिज्ञासा की चर्चा की जाएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिप्रेरणा शब्द का अर्थ क्या है और यह व्यवहार में किस प्रकार गति लाता है? उदाहरण सहित समझाइए।

अभिप्रेरणा वह प्रक्रिया है जिससे व्यवहार में गति आती है। यह व्यक्ति को किसी लक्ष्य की ओर प्रेरित करती है। उदाहरण के लिए, विद्यालय जाना ज्ञान प्राप्ति, मित्र बनाना या अच्छी नौकरी पाने के लिए हो सकता है।

चित्र 8.1 में दिखाए गए अभिप्रेरणात्मक चक्र का वर्णन कीजिए। इसमें अंतर्नोद और आवश्यकता का क्या संबंध है?

अभिप्रेरणात्मक चक्र में आवश्यकता के कारण अंतर्नोद उत्पन्न होता है, जो यादृच्छिक क्रियाकलापों को ऊर्जा प्रदान करता है। जब लक्ष्य प्राप्त हो जाता है तो अंतर्नोद समाप्त हो जाता है और प्राणी संतुलित स्थिति में लौटता है।

अभिप्रेरक किन दो मुख्य प्रकारों में विभाजित होते हैं? प्रत्येक का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

अभिप्रेरक दो प्रकार के होते हैं: जैविक अभिप्रेरक और मनोसामाजिक अभिप्रेरक। जैविक अभिप्रेरक शरीर के अंदरूनी तंत्रों पर निर्भर करते हैं, जैसे भूख और प्यास। मनोसामाजिक अभिप्रेरक सामाजिक पर्यावरण के साथ अंत:क्रिया से विकसित होते हैं, जैसे संबंधन और शक्ति की आवश्यकता।

भूख एक जैविक अभिप्रेरक है। भूख के उद्दीपकों के बारे में विस्तार से बताइए।

a) भूख शरीर की एक जैविक आवश्यकता है जो भोजन प्राप्ति के लिए प्रेरित करती है। b) भूख के उद्दीपकों में अमाशय का संकुचन, रक्त में ग्लूकोज की कमी, प्रोटीन और वसा के स्तर का कम होना शामिल हैं। c) यकृत मस्तिष्क को तंत्रिका आवेग भेजता है जो भूख की अनुभूति को नियंत्रित करता है। d) भोजन की सुगंध, स्वाद और दर्शन भी भूख को बढ़ाते हैं। अतः भूख एक जटिल जैविक प्रक्रिया है जो शरीर के अंदरूनी और बाहरी संकेतों के संयोजन से नियंत्रित होती है।

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