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अधिगम | Class 11 Psychology Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

अधिगम | Class 11 Psychology Notes

अधिगम – this guide gives you a concise, exam-ready overview of अधिगम from Class 11 Psychology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

अधिगम का परिचय

अधिगम (Learning) मनोविज्ञान का एक महत्वपूर्ण विषय है, जो यह समझने का प्रयास करता है कि अनुभवों के आधार पर व्यवहार में किस प्रकार परिवर्तन आता है। अधिगम का अर्थ है नए ज्ञान, कौशल, व्यवहार या मूल्यों को प्राप्त करना या उनमें स्थायी परिवर्तन लाना। यह प्रक्रिया व्यक्ति के जीवन में निरंतर चलती रहती है और इसके माध्यम से व्यक्ति अपने पर्यावरण के अनुसार अनुकूलित होता है। अधिगम केवल स्कूल या शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के हर क्षेत्र में होता है। अधिगम के बिना व्यक्ति का विकास संभव नहीं है। मनोविज्ञान में अधिगम को व्यवहार में आए स्थायी परिवर्तन के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो अनुभव या अभ्यास के कारण होता है। अधिगम की प्रक्रिया में अनुभव, अभ्यास, प्रेरणा, और पर्यावरण का महत्वपूर्ण योगदान होता है। अधिगम के माध्यम से व्यक्ति न केवल नई जानकारियाँ प्राप्त करता है, बल्कि अपनी भावनाओं, सोच, और व्यवहार में भी बदलाव लाता है। अधिगम के अध्ययन से यह समझने में मदद मिलती है कि कैसे हम सीखते हैं, कौन-कौन से कारक अधिगम को प्रभावित करते हैं, और अधिगम की विभिन्न प्रक्रियाएँ क्या हैं। यह ज्ञान शिक्षण, प्रशिक्षण, और व्यवहार सुधार के क्षेत्र में अत्यंत उपयोगी होता है।

🧪 Activity: इस खंड में कोई विशिष्ट गतिविधि नहीं दी गई है।

🔗 Connection: यह परिचय अधिगम की विभिन्न प्रक्रियाओं जैसे क्लासिकल और ऑपेरेंट कंडीशनिंग की ओर ले जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अधिगम (Learning) का मनोविज्ञान में क्या अर्थ है और यह व्यक्ति के जीवन में किस प्रकार महत्वपूर्ण है?

अधिगम वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति अनुभवों के आधार पर नए ज्ञान, कौशल, व्यवहार या मूल्यों को प्राप्त करता है या उनमें स्थायी परिवर्तन लाता है। यह व्यक्ति को अपने पर्यावरण के अनुसार अनुकूलित होने में मदद करता है। उदाहरण के लिए, बच्चे स्कूल में पढ़ाई के माध्यम से नई जानकारियाँ सीखते हैं।

क्लासिकल कंडीशनिंग की प्रक्रिया क्या है? इसे इवान पावलव के प्रयोग के संदर्भ में समझाइए।

क्लासिकल कंडीशनिंग वह अधिगम प्रक्रिया है जिसमें एक तटस्थ उत्तेजना (जैसे घंटी की ध्वनि) को अप्राकृतिक उत्तेजना (जैसे भोजन) के साथ जोड़ा जाता है, जिससे तटस्थ उत्तेजना पर भी अप्राकृतिक प्रतिक्रिया (जैसे लार निकलना) उत्पन्न होती है। पावलव ने कुत्तों पर प्रयोग कर यह दिखाया कि भोजन के साथ घंटी की ध्वनि जोड़ने पर अंततः केवल घंटी की आवाज सुनते ही कुत्ते लार निकालने लगते हैं।

निम्नलिखित में से कौन सा क्लासिकल कंडीशनिंग के तटस्थ उत्तेजना (Neutral Stimulus) का उदाहरण है?

घंटी की ध्वनि

चित्र 5.1 : पावलव के शिकंजे में अनुबंधन के लिए कुत्ता के बारे में बताइए। इस चित्र में कुत्ते के व्यवहार और अनुबंधन की प्रक्रिया को समझाते हुए वर्णन करें। चित्र में एक कुत्ता दिखाया गया है जो भोजन के लिए लार निकाल रहा है। इसके साथ एक घंटी की ध्वनि का प्रतीक भी है, जो भोजन के साथ जोड़ी जा रही है।

यह चित्र पावलव के क्लासिकल कंडीशनिंग प्रयोग को दर्शाता है जिसमें कुत्ते को भोजन (US) दिया जाता है जिससे लार (UR) निकलती है। घंटी की ध्वनि (NS) को भोजन के साथ बार-बार जोड़ा जाता है। अंततः घंटी की ध्वनि सशर्त उत्तेजना (CS) बन जाती है और कुत्ता केवल घंटी सुनकर भी लार (CR) निकालने लगता है।

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