Chapter 5
Chapter 5 — अध्ययन नोट्स
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अधिगम का परिचय
व्याख्याअधिगम का परिचय
अधिगम (Learning) मनोविज्ञान का एक महत्वपूर्ण विषय है, जो यह समझने का प्रयास करता है कि अनुभवों के आधार पर व्यवहार में किस प्रकार परिवर्तन आता है। अधिगम का अर्थ है नए ज्ञान, कौशल, व्यवहार या मूल्यों को प्राप्त करना या उनमें स्थायी परिवर्तन लाना। यह प्रक्रिया व्यक्ति के जीवन में निरंतर चलती रहती है और इसके माध्यम से व्यक्ति अपने पर्यावरण के अनुसार अनुकूलित होता है। अधिगम केवल स्कूल या शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के हर क्षेत्र में होता है। अधिगम के बिना व्यक्ति का विकास संभव नहीं है। मनोविज्ञान में अधिगम को व्यवहार में आए स्थायी परिवर्तन के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो अनुभव या अभ्यास के कारण होता है। अधिगम की प्रक्रिया में अनुभव, अभ्यास, प्रेरणा, और पर्यावरण का महत्वपूर्ण योगदान होता है। अधिगम के माध्यम से व्यक्ति न केवल नई जानकारियाँ प्राप्त करता है, बल्कि अपनी भावनाओं, सोच, और व्यवहार में भी बदलाव लाता है। अधिगम के अध्ययन से यह समझने में मदद मिलती है कि कैसे हम सीखते हैं, कौन-कौन से कारक अधिगम को प्रभावित करते हैं, और अधिगम की विभिन्न प्रक्रियाएँ क्या हैं। यह ज्ञान शिक्षण, प्रशिक्षण, और व्यवहार सुधार के क्षेत्र में अत्यंत उपयोगी होता है।
- अधिगम का अर्थ है अनुभवों के आधार पर स्थायी व्यवहार परिवर्तन।
- यह मनोविज्ञान का एक महत्वपूर्ण विषय है।
- अधिगम केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि कौशल और मूल्यों को भी शामिल करता है।
- व्यक्ति के जीवन में अधिगम निरंतर चलता रहता है।
- अधिगम के बिना व्यक्ति का विकास संभव नहीं है।
- अधिगम की प्रक्रिया में अनुभव, अभ्यास, प्रेरणा और पर्यावरण का योगदान होता है।
- 📌 अधिगम: अनुभवों के आधार पर व्यवहार में स्थायी परिवर्तन।
- 📌 व्यवहार: किसी जीवित प्राणी की प्रतिक्रिया या क्रिया।
क्लासिकल कंडीशनिंग
व्याख्याक्लासिकल कंडीशनिंग
क्लासिकल कंडीशनिंग अधिगम की वह प्रक्रिया है जिसमें एक तटस्थ उत्तेजना (Neutral Stimulus) को एक अप्राकृतिक उत्तेजना (Unconditioned Stimulus) के साथ जोड़ा जाता है, जिससे तटस्थ उत्तेजना पर भी अप्राकृतिक प्रतिक्रिया उत्पन्न होती है। इस प्रक्रिया का अध्ययन सबसे पहले इवान पावलव ने किया था। पावलव ने अपने प्रयोगों में कुत्तों को भोजन (US) देने पर उनकी लार (UR) निकलती देखी। जब भोजन के साथ घंटी की ध्वनि (NS) को बार-बार जोड़ा गया, तो अंततः केवल घंटी की ध्वनि सुनते ही कुत्ते की लार निकलने लगी, जिसे सशर्त प्रतिक्रिया (CR) कहा गया। इस प्रकार, तटस्थ उत्तेजना (घंटी की ध्वनि) अप्राकृतिक उत्तेजना (भोजन) के साथ जुड़कर सशर्त उत्तेजना (CS) बन गई। क्लासिकल कंडीशनिंग में तीन मुख्य तत्व होते हैं: अप्राकृतिक उत्तेजना (US), अप्राकृतिक प्रतिक्रिया (UR), और तटस्थ उत्तेजना (NS) जो बाद में सशर्त उत्तेजना (CS) बन जाती है। यह अधिगम स्वाभाविक प्रतिक्रियाओं को नए उत्तेजकों से जोड़ने की प्रक्रिया है। क्लासिकल कंडीशनिंग का उपयोग व्यवहार संशोधन, फोबिया के उपचार, और विज्ञापन में किया जाता है।
- क्लासिकल कंडीशनिंग में तटस्थ उत्तेजना अप्राकृतिक उत्तेजना के साथ जुड़ती है।
- इवान पावलव ने इस प्रक्रिया का अध्ययन किया।
- अप्राकृतिक उत्तेजना पर स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है।
- तटस्थ उत्तेजना सशर्त उत्तेजना बन जाती है।
- इस प्रक्रिया में सशर्त प्रतिक्रिया उत्पन्न होती है।
- क्लासिकल कंडीशनिंग का व्यवहार संशोधन में उपयोग होता है।
- 📌 तटस्थ उत्तेजना (NS): वह उत्तेजना जो प्रारंभ में कोई विशेष प्रतिक्रिया उत्पन्न नहीं करती।
- 📌 अप्राकृतिक उत्तेजना (US): वह उत्तेजना जो स्वाभाविक प्रतिक्रिया उत्पन्न करती है।
- 📌 सशर्त उत्तेजना (CS): वह उत्तेजना जो तटस्थ उत्तेजना से जुड़ने के बाद प्रतिक्रिया उत्पन्न करती है।
अनुबंधन के चरण
व्याख्याअनुबंधन के चरण
क्लासिकल कंडीशनिंग में अनुबंधन की प्रक्रिया तीन मुख्य चरणों में होती है, जो अधिगम की पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट करते हैं। पहला चरण है 'अनुबंधन के पूर्व' (Before Conditioning), जिसमें अप्राकृतिक उत्तेजना (US) जैसे भोजन कुत्ते को दिया जाता है, जिससे स्वा
अभ्यास प्रश्न — Chapter 5
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. अधिगम क्या है? इसकी प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर:
अधिगम वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति अनुभवों से ज्ञान, कौशल, व्यवहार और मूल्य प्राप्त करता है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं: (1) यह अनुभवजन्य प्रक्रिया है, (2) यह स्थायी परिवर्तन लाता है, (3) यह व्यवहार में परिवर्तन करता है, (4) यह अभ्यास और अनुभव से होता है, (5) यह पर्यावरण के साथ अंतःक्रिया पर आधारित है।
व्याख्या:
अधिगम का अर्थ है सीखना। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति अपने अनुभवों के आधार पर नए ज्ञान, कौशल या व्यवहार सीखता है। यह परिवर्तन स्थायी होता है और व्यक्ति के व्यवहार में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। अधिगम के दौरान व्यक्ति पर्यावरण से जानकारी ग्रहण करता है और उसे अपने व्यवहार में लागू करता है।
Q2.2. प्राचीन अनुबंधन किस प्रकार साहचर्य द्वारा अधिगम को प्रदर्शित करता है?
उत्तर:
प्राचीन अनुबंधन में अधिगम साहचर्य (association) के माध्यम से होता है। इसका अर्थ है कि दो या दो से अधिक अनुभवों या उत्तेजनाओं के बीच संबंध स्थापित हो जाता है, जिससे एक उत्तेजना के आने पर दूसरी प्रतिक्रिया उत्पन्न होती है। साहचर्य अधिगम में अनुभवों के बीच संबंध बनना आवश्यक होता है।
व्याख्या:
साहचर्य अधिगम में व्यक्ति दो उत्तेजनाओं को जोड़ता है। जैसे, यदि एक घंटी की आवाज़ के साथ भोजन दिया जाए तो बाद में केवल घंटी की आवाज़ सुनते ही भूख लगने लगती है। यह प्राचीन अनुबंधन का उदाहरण है, जिसमें दो उत्तेजनाओं के बीच संबंध स्थापित होता है और अधिगम होता है।
Q3.3. क्रियाप्रसूत अनुबंधन की परिभाषा दीजिए। क्रियाप्रसूत अनुबंधन को प्रभावित करने वाले कारकों पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
क्रियाप्रसूत अनुबंधन वह अधिगम प्रक्रिया है जिसमें किसी क्रिया या व्यवहार को किसी विशेष उत्तेजना या परिस्थिति के साथ जोड़ दिया जाता है। इसे ऑपेरेंट कंडीशनिंग भी कहते हैं। इसे प्रभावित करने वाले कारकों में प्रबलन (reinforcement), दंड (punishment), समय का अंतराल, प्रबलन की आवृत्ति, और पर्यावरणीय परिस्थितियाँ शामिल हैं।
व्याख्या:
क्रियाप्रसूत अनुबंधन में व्यवहार के परिणामों का महत्व होता है। यदि किसी व्यवहार के बाद सकारात्मक परिणाम मिलता है तो वह व्यवहार बढ़ता है, और यदि नकारात्मक परिणाम मिलता है तो वह व्यवहार कम होता है। प्रबलन और दंड की प्रकृति, समय, और आवृत्ति इस प्रकार के अधिगम को प्रभावित करते हैं।
Q4.4. एक विकसित होते हुए शिशु के लिए एक अच्छा भूमिका-प्रतिरूप अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। अधिगम के उस प्रकार पर विचार-विमर्श कीजिए जो इसका समर्थन करता है।
उत्तर:
यह सामाजिक अधिगम (social learning) से संबंधित है जिसमें बच्चे अपने आस-पास के वयस्कों और अन्य लोगों के व्यवहार को देखकर सीखते हैं। भूमिका-प्रतिरूप (role model) बच्चे के लिए व्यवहार का उदाहरण प्रस्तुत करता है, जिससे वह अनुकरण करता है और सीखता है। इस प्रकार का अधिगम पर्यवेक्षण और अनुकरण पर आधारित होता है।
व्याख्या:
सामाजिक अधिगम में बच्चे अपने पर्यावरण में उपलब्ध लोगों के व्यवहार को देखते हैं और उसे अपनाते हैं। एक अच्छा भूमिका-प्रतिरूप बच्चे के लिए सही व्यवहार का मार्गदर्शन करता है, जिससे उसका विकास सकारात्मक होता है। यह अधिगम मॉडलिंग और अनुकरण के माध्यम से होता है।
Q5.5. वाचिक अधिगम के अध्ययन में प्रयुक्त विधियों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
वाचिक अधिगम के अध्ययन में मुख्य रूप से प्रयोगात्मक विधि, पर्यवेक्षण विधि, और सर्वेक्षण विधि का उपयोग किया जाता है। प्रयोगात्मक विधि में नियंत्रित परिस्थितियों में अधिगम की प्रक्रिया का अध्ययन किया जाता है। पर्यवेक्षण विधि में प्राकृतिक वातावरण में अधिगम को देखा जाता है। सर्वेक्षण विधि में प्रश्नावली आदि के माध्यम से अधिगम के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है।
व्याख्या:
वाचिक अधिगम का अध्ययन करने के लिए विभिन्न विधियाँ अपनाई जाती हैं। प्रयोगात्मक विधि में अधिगम के विभिन्न पहलुओं को नियंत्रित करके परखा जाता है। पर्यवेक्षण विधि में बच्चे या प्रतिभागी के व्यवहार को बिना हस्तक्षेप के देखा जाता है। सर्वेक्षण विधि में अधिगम से संबंधित जानकारियाँ एकत्रित की जाती हैं।
Q6.6. कौशल से आप क्या समझते हैं? किसी कौशल के अधिगम के कौन-कौन से चरण होते हैं?
उत्तर:
कौशल का अर्थ है किसी कार्य को दक्षता और कुशलता के साथ करने की क्षमता। कौशल के अधिगम के तीन चरण होते हैं: (1) संज्ञानात्मक चरण – जिसमें व्यक्ति कार्य के बारे में सोचता है और समझता है, (2) साहचर्यात्मक चरण – जिसमें व्यक्ति अभ्यास करता है और सुधार करता है, (3) स्वायत्त चरण – जिसमें कार्य स्वतःस्फूर्त और बिना अधिक प्रयास के किया जाता है।
व्याख्या:
कौशल सीखने की प्रक्रिया में प्रारंभ में व्यक्ति कार्य को समझता है, फिर अभ्यास के द्वारा उसे सुधारता है और अंत में वह कार्य बिना सोच-विचार के सहजता से कर लेता है। यह तीन चरण कौशल अधिगम के महत्वपूर्ण अंग हैं।
Q7.7. सामान्यीकरण तथा विभेदन के बीच आप किस तरह अंतर करेंगे?
उत्तर:
सामान्यीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति एक उत्तेजना के आधार पर समान प्रकार की अन्य उत्तेजनाओं पर भी समान प्रतिक्रिया करता है। विभेदन वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति विभिन्न उत्तेजनाओं के बीच अंतर करता है और केवल विशिष्ट उत्तेजना पर प्रतिक्रिया करता है।
व्याख्या:
सामान्यीकरण में सीखने के बाद व्यक्ति समान या मिलती-जुलती वस्तुओं पर भी प्रतिक्रिया करता है, जबकि विभेदन में वह केवल विशेष वस्तु या उत्तेजना पर प्रतिक्रिया करता है और अन्य से भेद करता है। यह दोनों अधिगम की प्रक्रियाएँ हैं जो व्यवहार को प्रभावित करती हैं।
Q8.8. अधिगम के लिए अभिप्रेरणा का होना क्यों अनिवार्य है?
उत्तर:
अभिप्रेरणा अधिगम की प्रक्रिया को सक्रिय और निरंतर बनाए रखने में सहायक होती है। बिना अभिप्रेरणा के व्यक्ति सीखने में रुचि नहीं लेता और अधिगम की प्रक्रिया धीमी या रुक जाती है। इसलिए अधिगम के लिए अभिप्रेरणा आवश्यक है ताकि व्यक्ति सीखने के लिए प्रेरित हो और प्रयास करता रहे।
व्याख्या:
अभिप्रेरणा व्यक्ति के अंदर सीखने की इच्छा और तत्परता उत्पन्न करती है। यह सीखने के लिए आवश्यक ऊर्जा और उत्साह प्रदान करती है। अभिप्रेरणा के बिना अधिगम अधूरा रहता है क्योंकि व्यक्ति सीखने के लिए प्रेरित नहीं होता।
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Psychology · Class 11