Psychologyकक्षा 11संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँहिंदी

संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ | Class 11 Psychology Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ | Class 11 Psychology Notes

संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ – this guide gives you a concise, exam-ready overview of संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ from Class 11 Psychology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

परिचय

इस अध्याय में हम संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करेंगे, जो हमारे बाह्य और आंतरिक जगत से सूचनाओं को ग्रहण करने, उनका चयन करने और उन्हें समझने में सहायक होती हैं। हमारे शरीर में कुछ ज्ञानेंद्रियाँ (जैसे आँख, कान) स्पष्ट रूप से देखी जा सकती हैं, जबकि कुछ आंतरिक होती हैं जिनका निरीक्षण बिना यांत्रिक या विद्युत उपकरणों के संभव नहीं होता। ज्ञानेंद्रियाँ बाहरी और आंतरिक जगत से सूचनाओं को प्राप्त कर मस्तिष्क तक पहुँचाती हैं, जिससे हम अपने पर्यावरण का ज्ञान प्राप्त करते हैं। इस ज्ञान के लिए तीन प्रमुख प्रक्रियाएँ आवश्यक हैं: संवेदना (संज्ञानेंद्रियों द्वारा सूचनाओं का ग्रहण), अवधान (ध्यान केंद्रित करना), और प्रत्यक्षण (सूचनाओं की व्याख्या और समझ)। ये प्रक्रियाएँ परस्पर जुड़ी हुई हैं और संज्ञान के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती हैं। इस अध्याय में हम इन प्रक्रियाओं के स्वरूप, प्रकार, और उनके प्रभावों का गहन अध्ययन करेंगे।

🔗 Connection: यह परिचय हमें जागरूक करता है कि संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ हमारे संज्ञान का आधार हैं, जो आगे संवेदन प्रकारताओं और अवधानिक प्रक्रियाओं के अध्ययन से जुड़ती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ क्या हैं और ये संज्ञान के किस पहलू को दर्शाती हैं?

संवेदी प्रक्रियाएँ वे हैं जिनमें ज्ञानेंद्रियाँ बाह्य एवं आंतरिक जगत से सूचनाएँ ग्रहण करती हैं। अवधानिक प्रक्रियाएँ सूचनाओं के चयन और ध्यान केंद्रित करने की मानसिक क्रियाएँ हैं। प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ सूचनाओं की व्याख्या और समझ से संबंधित होती हैं। ये तीनों प्रक्रियाएँ संज्ञान के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती हैं।

हमारे आस-पास के जगत का ज्ञान किन तीन प्रमुख प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है? प्रत्येक का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

हमारे आस-पास के जगत का ज्ञान संवेदना, अवधान और प्रत्यक्षण पर निर्भर करता है।

(1) संवेदना: ज्ञानेंद्रियों द्वारा उद्दीपकों की सूचना ग्रहण करना। (2) अवधान: सूचनाओं में से कुछ पर ध्यान केंद्रित करना। (3) प्रत्यक्षण: सूचनाओं की व्याख्या कर उन्हें समझना।

उदाहरण के लिए, आँखों से वस्तु देखना (संवेदना), उस वस्तु पर ध्यान देना (अवधान), और उसे पहचानना (प्रत्यक्षण)।

निम्नलिखित में से कौन-सी ज्ञानेंद्रि स्वाद के लिए उत्तरदायी है?

जिह्वा

निरपेक्ष सीमा (absolute threshold) क्या है? एक उदाहरण सहित समझाइए।

निरपेक्ष सीमा वह न्यूनतम तीव्रता या मान है जिसके ऊपर कोई उद्दीपक ज्ञानेंद्रि द्वारा ध्यान में लाया जाता है। उदाहरण के लिए, पानी में चीनी के कणों की वह न्यूनतम संख्या जिससे हमें मिठास का अनुभव होता है, वह मिठास की निरपेक्ष सीमा कहलाती है।

इस अध्याय में महारत हासिल करें

पूरा संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ अध्याय — इंटरैक्टिव नोट्स, चित्र, हल किए गए प्रश्न, पोल्स और मुफ़्त अभ्यास क्विज़ — ConceptScroll ऐप में।

ConceptScroll में खोलें →

ConceptScroll के साथ स्मार्ट पढ़ें

रोज़ाना एनसीईआरटी रील्स, एआई डाउट सॉल्विंग और अध्याय क्विज़ — सब मुफ़्त।

मुफ़्त सीखना शुरू करें
#cbse notes#class 11#ncert#psychology

और पढ़ें