NCERTCh 4निःशुल्क

Chapter 4

🎓 Class 11📖 Manovigyan📖 16 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~24 मिनट
Chapter 3अध्याय 4 / 8Chapter 5

Chapter 4अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 16 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

इस अध्याय में हम संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करेंगे, जो हमारे बाह्य और आंतरिक जगत से सूचनाओं को ग्रहण करने, उनका चयन करने और उन्हें समझने में सहायक होती हैं। हमारे शरीर में कुछ ज्ञानेंद्रियाँ (जैसे आँख, कान) स्पष्ट रूप से देखी जा सकती हैं, जबकि कुछ आंतरिक होती हैं जिनका निरीक्षण बिना यांत्रिक या विद्युत उपकरणों के संभव नहीं होता। ज्ञानेंद्रियाँ बाहरी और आंतरिक जगत से सूचनाओं को प्राप्त कर मस्तिष्क तक पहुँचाती हैं, जिससे हम अपने पर्यावरण का ज्ञान प्राप्त करते हैं। इस ज्ञान के लिए तीन प्रमुख प्रक्रियाएँ आवश्यक हैं: संवेदना (संज्ञानेंद्रियों द्वारा सूचनाओं का ग्रहण), अवधान (ध्यान केंद्रित करना), और प्रत्यक्षण (सूचनाओं की व्याख्या और समझ)। ये प्रक्रियाएँ परस्पर जुड़ी हुई हैं और संज्ञान के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती हैं। इस अध्याय में हम इन प्रक्रियाओं के स्वरूप, प्रकार, और उनके प्रभावों का गहन अध्ययन करेंगे।

  • ज्ञानेंद्रियाँ बाह्य एवं आंतरिक जगत से सूचनाएँ ग्रहण करती हैं।
  • संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ संज्ञान के मुख्य अंग हैं।
  • संवेदी प्रक्रियाएँ उद्दीपकों को ग्रहण करती हैं।
  • अवधानिक प्रक्रियाएँ सूचनाओं के चयन और ध्यान केंद्रित करने से संबंधित हैं।
  • प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ सूचनाओं की व्याख्या और समझ प्रदान करती हैं।
  • 📌 ज्ञानेंद्रियाँ: वे अंग जो सूचनाएँ ग्रहण करते हैं।
  • 📌 संवेदी प्रक्रियाएँ: सूचनाओं को ग्रहण करने की प्रक्रिया।
  • 📌 अवधान: ध्यान केंद्रित करने की मानसिक प्रक्रिया।

जगत का ज्ञान

व्याख्या

जगत का ज्ञान

हमारे आस-पास का जगत वस्तुओं, लोगों और घटनाओं की विविधता से भरा है। हम अपने परिवेश में अनेक वस्तुओं को बिना किसी विशेष प्रयास के देख और पहचान सकते हैं। यह ज्ञान हमारी ज्ञानेंद्रियों के माध्यम से प्राप्त होता है, जो बाह्य जगत के साथ-साथ हमारे शरीर के अंदर से भी सूचनाएँ ग्रहण करती हैं। ज्ञानेंद्रियाँ वस्तुओं के आकार, आकृति, रंग आदि गुणों की सूचनाएँ पंजीकृत करती हैं। लेकिन किसी वस्तु की सूचना मस्तिष्क तक पहुँचने और उसे समझने के लिए उस वस्तु को हमारा ध्यान आकर्षित करना आवश्यक होता है। इस प्रकार, हमारे आस-पास के जगत का ज्ञान तीन प्रमुख प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है – संवेदना, अवधान, और प्रत्यक्षण। ये प्रक्रियाएँ परस्पर अंतर्संबंधित हैं और संज्ञान के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती हैं।

  • हमारे आस-पास की वस्तुएँ ज्ञानेंद्रियों के माध्यम से ज्ञात होती हैं।
  • ज्ञानेंद्रियाँ बाह्य और आंतरिक जगत से सूचनाएँ ग्रहण करती हैं।
  • वस्तुओं के गुण जैसे आकार, रंग, आकृति आदि का ज्ञान होता है।
  • ध्यान आकर्षित करने पर ही सूचनाएँ मस्तिष्क तक पहुँचती हैं।
  • संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ ज्ञान का आधार हैं।
  • 📌 ज्ञानेंद्रियाँ: सूचना ग्रहण करने वाले अंग।
  • 📌 ध्यान: किसी वस्तु पर मानसिक केंद्रित होना।
  • 📌 संवेदी प्रक्रिया: सूचना ग्रहण की प्रारंभिक अवस्था।

उद्दीपक का स्वरूप एवं विविधता

व्याख्या

उद्दीपक का स्वरूप एवं विविधता

हमारे आस-पास के वातावरण में विभिन्न प्रकार के उद्दीपक पाए जाते हैं, जो हमें अलग-अलग प्रकार की सूचनाएँ प्रदान करते हैं। कुछ उद्दीपक दृष्टि द्वारा देखे जाते हैं (जैसे घर), कुछ श्रवण द्वारा सुने जाते हैं (जैसे संगीत), कुछ घ्राण द्वारा सूंघे जाते हैं (जै

अभ्यास प्रश्नChapter 4

15 विस्तृत उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न

Q1.संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ क्या हैं और ये संज्ञान के किस पहलू को दर्शाती हैं?

उत्तर:

संवेदी प्रक्रियाएँ वे हैं जिनमें ज्ञानेंद्रियाँ बाह्य एवं आंतरिक जगत से सूचनाएँ ग्रहण करती हैं। अवधानिक प्रक्रियाएँ सूचनाओं के चयन और ध्यान केंद्रित करने की मानसिक क्रियाएँ हैं। प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ सूचनाओं की व्याख्या और समझ से संबंधित होती हैं। ये तीनों प्रक्रियाएँ संज्ञान के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती हैं।

व्याख्या:

संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ संज्ञान के तीन मुख्य अंश हैं। संवेदी प्रक्रियाएँ बाहरी और आंतरिक उद्दीपकों से सूचनाएँ ग्रहण करती हैं। अवधानिक प्रक्रियाएँ सूचनाओं के चयन और ध्यान केंद्रित करने में सहायक होती हैं। प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ प्राप्त सूचनाओं की व्याख्या कर उन्हें अर्थपूर्ण बनाती हैं। ये प्रक्रियाएँ मिलकर हमें अपने पर्यावरण का ज्ञान प्राप्त करने में सहायता करती हैं।

Easy
Q2.हमारे आस-पास के जगत का ज्ञान किन तीन प्रमुख प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है? प्रत्येक का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर:

हमारे आस-पास के जगत का ज्ञान संवेदना, अवधान और प्रत्यक्षण पर निर्भर करता है। (1) संवेदना: ज्ञानेंद्रियों द्वारा उद्दीपकों की सूचना ग्रहण करना। (2) अवधान: सूचनाओं में से कुछ पर ध्यान केंद्रित करना। (3) प्रत्यक्षण: सूचनाओं की व्याख्या कर उन्हें समझना। उदाहरण के लिए, आँखों से वस्तु देखना (संवेदना), उस वस्तु पर ध्यान देना (अवधान), और उसे पहचानना (प्रत्यक्षण)।

व्याख्या:

संवेदना वह प्रक्रिया है जिसमें ज्ञानेंद्रियाँ बाह्य और आंतरिक उद्दीपकों से सूचना ग्रहण करती हैं। अवधान वह मानसिक क्रिया है जिससे हम सूचनाओं में से कुछ चुनकर उन पर ध्यान केंद्रित करते हैं। प्रत्यक्षण वह प्रक्रिया है जिसमें प्राप्त सूचनाओं को समझकर अर्थपूर्ण बनाया जाता है। ये तीन प्रक्रियाएँ मिलकर हमारे पर्यावरण का ज्ञान प्रदान करती हैं।

Medium
Q3.निम्नलिखित में से कौन-सी ज्ञानेंद्रि स्वाद के लिए उत्तरदायी है?
A.A) आँख
B.B) कान
C.C) जिह्वा
D.D) नाक

उत्तर:

जिह्वा

व्याख्या:

स्वाद की संवेदना जिह्वा द्वारा ग्रहण की जाती है, जबकि आँख दृष्टि, कान श्रवण और नाक घ्राण के लिए उत्तरदायी होती हैं।

Easy
Q4.निरपेक्ष सीमा (absolute threshold) क्या है? एक उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:

निरपेक्ष सीमा वह न्यूनतम तीव्रता या मान है जिसके ऊपर कोई उद्दीपक ज्ञानेंद्रि द्वारा ध्यान में लाया जाता है। उदाहरण के लिए, पानी में चीनी के कणों की वह न्यूनतम संख्या जिससे हमें मिठास का अनुभव होता है, वह मिठास की निरपेक्ष सीमा कहलाती है।

व्याख्या:

निरपेक्ष सीमा किसी उद्दीपक की वह न्यूनतम तीव्रता है जिसे व्यक्ति 50 प्रतिशत अवसरों पर महसूस कर सकता है। यह सीमा व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक स्थिति के अनुसार बदलती रहती है। उदाहरण के लिए, पानी में चीनी के कणों की संख्या जब इतनी हो जाती है कि हम उसमें मिठास महसूस कर सकें, तो वह निरपेक्ष सीमा होती है।

Medium
Q5.भेद सीमा (difference threshold) किसे कहते हैं? इसे समझाने के लिए कौन-सा प्रयोग दिया गया है?

उत्तर:

भेद सीमा वह न्यूनतम अंतर है जो दो उद्दीपकों के बीच होता है और जिसे हम भेद सकते हैं। इसे समझाने के लिए पानी में चीनी के कणों को धीरे-धीरे मिलाने का प्रयोग दिया गया है, जिसमें हम यह देखते हैं कि मिठास में कितना अंतर होने पर हम भेद कर सकते हैं।

व्याख्या:

भेद सीमा वह न्यूनतम परिवर्तन है जो 50 प्रतिशत प्रयासों में दो उद्दीपकों के बीच भेद करने में सक्षम होता है। उदाहरण के लिए, पानी में चीनी के कणों की संख्या को धीरे-धीरे बढ़ाकर देखा जाता है कि कब मिठास का अनुभव पिछले अनुभव से अलग होता है। यह भेद सीमा को दर्शाता है।

Medium
Q6.अवधान क्या है और इसके मुख्य गुण कौन-कौन से हैं?

उत्तर:

अवधान वह मानसिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा हम अनेक उद्दीपकों में से कुछ महत्वपूर्ण सूचनाओं को चुनते हैं और अन्य को नजरअंदाज करते हैं। इसके मुख्य गुण हैं सतर्कता (तत्परता), एकाग्रता (ध्यान केंद्रित करना), और खोज (विशिष्ट वस्तुओं की तलाश)।

व्याख्या:

अवधान में हम अपने ध्यान को सीमित उद्दीपकों पर केंद्रित करते हैं, जिससे महत्वपूर्ण सूचनाएँ प्राप्त होती हैं। सतर्कता का अर्थ है तत्परता से उद्दीपक का सामना करना, एकाग्रता का अर्थ है किसी वस्तु पर ध्यान केंद्रित करना, और खोज का अर्थ है विशिष्ट वस्तुओं की खोज करना। ये गुण अवधान की प्रक्रिया को प्रभावी बनाते हैं।

Easy
Q7.अवधान के केंद्र और किनारे का क्या अर्थ है?

उत्तर:

अवधान का केंद्र वह वस्तु या घटना होती है जिस पर हमारा ध्यान पूरी तरह केंद्रित होता है। अवधान का किनारा वे वस्तुएँ या घटनाएँ होती हैं जिन पर हमारा ध्यान कम या धुंधला होता है।

व्याख्या:

जब हम किसी विशेष वस्तु पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करते हैं तो वह अवधान का केंद्र कहलाती है। किनारे पर स्थित वस्तुएँ हमारे ध्यान के दायरे से बाहर या कम ध्यान प्राप्त करती हैं, इसलिए उनकी जानकारी धुंधली होती है। यह अवधान के केंद्र और किनारे की अवधारणा को दर्शाता है।

Easy
Q8.विभक्त अवधान (divided attention) के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
A.A) विभक्त अवधान में हम एक समय में केवल एक ही उद्दीपक पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
B.B) विभक्त अवधान में हम एक समय में दो या अधिक क्रियाकलापों पर ध्यान दे सकते हैं।
C.C) विभक्त अवधान का अर्थ है किसी वस्तु पर लंबे समय तक ध्यान देना।
D.D) विभक्त अवधान में ध्यान की क्षमता पूरी तरह समाप्त हो जाती है।

उत्तर:

विभक्त अवधान में हम एक समय में दो या अधिक क्रियाकलापों पर ध्यान दे सकते हैं।

व्याख्या:

विभक्त अवधान वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति एक ही समय में दो या अधिक क्रियाकलापों पर ध्यान केंद्रित कर सकता है। यह मुख्यतः स्वचालित क्रियाकलापों में संभव होता है, जैसे कार चलाते हुए मित्र से बात करना।

Medium