संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ | Class 11 Psychology Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ – this guide gives you a concise, exam-ready overview of संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ from Class 11 Psychology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
भ्रम
भ्रम वह स्थिति है जिसमें हम संवेदी सूचनाओं की गलत व्याख्या करते हैं और वस्तु या घटना का वास्तविक स्वरूप समझ नहीं पाते। भ्रम बाह्य उद्दीपकों की स्थिति में उत्पन्न होते हैं और सभी व्यक्तियों में सामान्यतः पाए जाते हैं। इन्हें आदिम संगठन भी कहा जाता है। भ्रम के प्रकारों में सार्वभौम भ्रम और वैयक्तिक भ्रम शामिल हैं। सार्वभौम भ्रम सभी में समान होते हैं, जैसे रेल की पटरियों का मिलना। वैयक्तिक भ्रम व्यक्ति विशेष के अनुभव और संस्कृति पर निर्भर करते हैं। प्रमुख चाक्षुष भ्रमों में मूलर-लायर भ्रम और ऊर्ध्वाधर-क्षैतिज भ्रम शामिल हैं। आभासी गतिभ्रम (phi-phenomenon) में गतिहीन चित्रों के अनुक्रम से गति का भ्रम उत्पन्न होता है, जैसे सिनेमा में। भ्रम यह दर्शाते हैं कि हमारा प्रत्यक्षण हमेशा वास्तविक नहीं होता, बल्कि यह एक निर्माण प्रक्रिया है।
📊 Diagram: चित्र 4.13 : मूलर-लायर भ्रम; चित्र 4.14 : ऊर्ध्वाधर-क्षैतिज भ्रम
🔗 Connection: यह खंड प्रत्यक्षण पर सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव की चर्चा से जुड़ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ क्या हैं और ये संज्ञान के किस पहलू को दर्शाती हैं?
संवेदी प्रक्रियाएँ वे हैं जिनमें ज्ञानेंद्रियाँ बाह्य एवं आंतरिक जगत से सूचनाएँ ग्रहण करती हैं। अवधानिक प्रक्रियाएँ सूचनाओं के चयन और ध्यान केंद्रित करने की मानसिक क्रियाएँ हैं। प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ सूचनाओं की व्याख्या और समझ से संबंधित होती हैं। ये तीनों प्रक्रियाएँ संज्ञान के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती हैं।
हमारे आस-पास के जगत का ज्ञान किन तीन प्रमुख प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है? प्रत्येक का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
हमारे आस-पास के जगत का ज्ञान संवेदना, अवधान और प्रत्यक्षण पर निर्भर करता है।
(1) संवेदना: ज्ञानेंद्रियों द्वारा उद्दीपकों की सूचना ग्रहण करना। (2) अवधान: सूचनाओं में से कुछ पर ध्यान केंद्रित करना। (3) प्रत्यक्षण: सूचनाओं की व्याख्या कर उन्हें समझना।
उदाहरण के लिए, आँखों से वस्तु देखना (संवेदना), उस वस्तु पर ध्यान देना (अवधान), और उसे पहचानना (प्रत्यक्षण)।
निम्नलिखित में से कौन-सी ज्ञानेंद्रि स्वाद के लिए उत्तरदायी है?
जिह्वा
निरपेक्ष सीमा (absolute threshold) क्या है? एक उदाहरण सहित समझाइए।
निरपेक्ष सीमा वह न्यूनतम तीव्रता या मान है जिसके ऊपर कोई उद्दीपक ज्ञानेंद्रि द्वारा ध्यान में लाया जाता है। उदाहरण के लिए, पानी में चीनी के कणों की वह न्यूनतम संख्या जिससे हमें मिठास का अनुभव होता है, वह मिठास की निरपेक्ष सीमा कहलाती है।
इस अध्याय में महारत हासिल करें
पूरा संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ अध्याय — इंटरैक्टिव नोट्स, चित्र, हल किए गए प्रश्न, पोल्स और मुफ़्त अभ्यास क्विज़ — ConceptScroll ऐप में।
ConceptScroll के साथ स्मार्ट पढ़ें
रोज़ाना एनसीईआरटी रील्स, एआई डाउट सॉल्विंग और अध्याय क्विज़ — सब मुफ़्त।
मुफ़्त सीखना शुरू करेंऔर पढ़ें
- अभिप्रेरणा एवं संवेग | Class 11 Psychology Notes
Clear NCERT-aligned notes on अभिप्रेरणा एवं संवेग for Class 11 Psychology.
- अभिप्रेरणा एवं संवेग | Class 11 Psychology Notes
Clear NCERT-aligned notes on अभिप्रेरणा एवं संवेग for Class 11 Psychology.
- अभिप्रेरणा एवं संवेग | Class 11 Psychology Notes
Clear NCERT-aligned notes on अभिप्रेरणा एवं संवेग for Class 11 Psychology.