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संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ | Class 11 Psychology Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ | Class 11 Psychology Notes

संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ – this guide gives you a concise, exam-ready overview of संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ from Class 11 Psychology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

उद्दीपक का स्वरूप एवं विविधता

हमारे आस-पास के वातावरण में विभिन्न प्रकार के उद्दीपक पाए जाते हैं, जो हमें अलग-अलग प्रकार की सूचनाएँ प्रदान करते हैं। कुछ उद्दीपक दृष्टि द्वारा देखे जाते हैं (जैसे घर), कुछ श्रवण द्वारा सुने जाते हैं (जैसे संगीत), कुछ घ्राण द्वारा सूंघे जाते हैं (जैसे फूल की खुशबू), कुछ स्वाद द्वारा अनुभव किए जाते हैं (जैसे मिठाई), और कुछ स्पर्श द्वारा महसूस किए जाते हैं (जैसे कपड़े की चिकनाहट)। हमारे पास सात प्रमुख ज्ञानेंद्रियाँ हैं, जिनमें पाँच बाह्य (आँख, कान, नाक, जिह्वा, त्वचा) और दो आंतरिक (गतिसंवेदी एवं प्रघाण तंत्र) शामिल हैं। ये ज्ञानेंद्रियाँ विभिन्न उद्दीपकों को ग्रहण कर मस्तिष्क तक पहुँचाती हैं। प्रत्येक ज्ञानेंद्रि विशेष प्रकार की सूचनाओं को ग्रहण करने में सक्षम होती है। उदाहरण के लिए, आँखें मुख्यतः दृष्टि के लिए, कान श्रवण के लिए, नाक घ्राण के लिए, जिह्वा स्वाद के लिए, और त्वचा स्पर्श, तापमान तथा पीड़ा के लिए उत्तरदायी होती हैं।

🔗 Connection: यह खंड संवेदन प्रकारताओं की चर्चा की ओर अग्रसर करता है, जो ज्ञानेंद्रियों के कार्य को विस्तार से समझाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ क्या हैं और ये संज्ञान के किस पहलू को दर्शाती हैं?

संवेदी प्रक्रियाएँ वे हैं जिनमें ज्ञानेंद्रियाँ बाह्य एवं आंतरिक जगत से सूचनाएँ ग्रहण करती हैं। अवधानिक प्रक्रियाएँ सूचनाओं के चयन और ध्यान केंद्रित करने की मानसिक क्रियाएँ हैं। प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ सूचनाओं की व्याख्या और समझ से संबंधित होती हैं। ये तीनों प्रक्रियाएँ संज्ञान के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती हैं।

हमारे आस-पास के जगत का ज्ञान किन तीन प्रमुख प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है? प्रत्येक का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

हमारे आस-पास के जगत का ज्ञान संवेदना, अवधान और प्रत्यक्षण पर निर्भर करता है।

(1) संवेदना: ज्ञानेंद्रियों द्वारा उद्दीपकों की सूचना ग्रहण करना। (2) अवधान: सूचनाओं में से कुछ पर ध्यान केंद्रित करना। (3) प्रत्यक्षण: सूचनाओं की व्याख्या कर उन्हें समझना।

उदाहरण के लिए, आँखों से वस्तु देखना (संवेदना), उस वस्तु पर ध्यान देना (अवधान), और उसे पहचानना (प्रत्यक्षण)।

निम्नलिखित में से कौन-सी ज्ञानेंद्रि स्वाद के लिए उत्तरदायी है?

जिह्वा

निरपेक्ष सीमा (absolute threshold) क्या है? एक उदाहरण सहित समझाइए।

निरपेक्ष सीमा वह न्यूनतम तीव्रता या मान है जिसके ऊपर कोई उद्दीपक ज्ञानेंद्रि द्वारा ध्यान में लाया जाता है। उदाहरण के लिए, पानी में चीनी के कणों की वह न्यूनतम संख्या जिससे हमें मिठास का अनुभव होता है, वह मिठास की निरपेक्ष सीमा कहलाती है।

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