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मनोविज्ञान में जाँच की विधियाँ | Class 11 Psychology Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

मनोविज्ञान में जाँच की विधियाँ | Class 11 Psychology Notes

मनोविज्ञान में जाँच की विधियाँ – this guide gives you a concise, exam-ready overview of मनोविज्ञान में जाँच की विधियाँ from Class 11 Psychology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

मनोवैज्ञानिक जाँच के लक्ष्य

मनोवैज्ञानिक जाँच के मुख्य लक्ष्य पाँच हैं: वर्णन, पूर्वकथन, व्याख्या, नियंत्रण और अनुप्रयोग।

1. वर्णन: इसमें व्यवहार या घटना का यथासंभव सटीक और विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया जाता है ताकि उस व्यवहार को अन्य व्यवहारों से अलग पहचाना जा सके। उदाहरण के लिए, विद्यार्थियों की अध्ययन की आदतों का वर्णन जिसमें नियमित उपस्थिति, कार्य समय पर प्रस्तुत करना आदि शामिल हैं।

2. पूर्वकथन: यह लक्ष्य व्यवहार के भविष्य में घटित होने की संभावना का अनुमान लगाने से संबंधित है। यदि व्यवहारों के बीच संबंध समझ में आ जाए तो हम भविष्य में किसी व्यवहार के घटित होने की भविष्यवाणी कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, अध्ययन समय और परीक्षा में प्राप्त अंकों के बीच धनात्मक संबंध।

3. व्याख्या: यह व्यवहार के कारणों और निर्धारकों को समझने का प्रयास है। मनोवैज्ञानिक यह जानना चाहते हैं कि कोई व्यवहार किन कारणों से होता है और किन दशाओं में नहीं होता। उदाहरण के लिए, कुछ बच्चे अधिक ध्यान क्यों देते हैं।

4. नियंत्रण: व्याख्या के आधार पर व्यवहार को नियंत्रित करने का प्रयास किया जाता है, जैसे किसी व्यवहार को बढ़ाना या कम करना। उदाहरण के लिए, अध्ययन के घंटों को नियंत्रित करना।

5. अनुप्रयोग: अनुसंधान का अंतिम लक्ष्य व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाना है। जैसे योग और ध्यान से दबाव कम करना। इस प्रकार, ये लक्ष्य मनोवैज्ञानिक अनुसंधान को वैज्ञानिक और व्यावहारिक बनाते हैं।

🔗 Connection: यह खंड वैज्ञानिक अनुसंधान के चरणों की व्याख्या के लिए आधार प्रदान करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनोविज्ञान में जाँच के मुख्य पाँच लक्ष्य कौन-कौन से हैं? प्रत्येक का संक्षिप्त अर्थ लिखिए।

मनोविज्ञान में जाँच के पाँच मुख्य लक्ष्य हैं: वर्णन (किसी व्यवहार या घटना का यथासंभव सही विवरण), पूर्वकथन (भविष्य में व्यवहार घटित होने की संभावना का अनुमान), व्याख्या (व्यवहार के कारणों को समझना), नियंत्रण (व्यवहार को बढ़ाना या कम करना), और अनुप्रयोग (प्राप्त ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग करना)।

वैज्ञानिक अनुसंधान के चार मुख्य चरण कौन-कौन से हैं? प्रत्येक चरण का संक्षिप्त विवरण दीजिए।

वैज्ञानिक अनुसंधान के चार चरण हैं: (1) समस्या का संप्रत्ययन - अध्ययन का विषय चुनना और समस्या निर्धारित करना; (2) प्रदत्त संग्रह - सूचनाएँ एकत्रित करना; (3) निष्कर्ष निकालना - संग्रहित डेटा का विश्लेषण करना; (4) शोध निष्कर्षों का पुनरीक्षण - निष्कर्षों की पुष्टि या वैकल्पिक परिकल्पना बनाना।

निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक जाँच का लक्ष्य नहीं है? A) वर्णन B) पूर्वकथन C) मनोरंजन D) नियंत्रण

मनोरंजन

वैज्ञानिक अनुसंधान में वस्तुनिष्ठता का क्या अर्थ है? उदाहरण सहित समझाइए।

वस्तुनिष्ठता का अर्थ है कि अनुसंधान में निष्कर्ष स्वतंत्र और निष्पक्ष होते हैं, जिससे दो या अधिक व्यक्ति एक ही परिणाम पर पहुँचते हैं। उदाहरण के लिए, यदि दो व्यक्ति एक मेज की लंबाई मापते हैं और दोनों को लगभग समान परिणाम मिलता है, तो वह वस्तुनिष्ठता है।

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