भूकम्पविभीषिका | Class 10 Sanskrit Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन

भूकम्पविभीषिका – this guide gives you a concise, exam-ready overview of भूकम्पविभीषिका from Class 10 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
शब्दार्थाः
इस भाग में पाठ में प्रयुक्त कठिन शब्दों के अर्थ दिए गए हैं, जो पाठ को समझने में सहायता करते हैं। जैसे पर्याकुलम् का अर्थ है चारों ओर से बेचैन, विपर्यस्तम् का अर्थ है अस्तव्यस्त, दारुणविभीषिका का अर्थ है अत्यधिक भय, ध्वंसावशेषेषु का अर्थ है विनाश के बाद बची हुई वस्तु, मूर्तिकाळीडनकमिव का अर्थ है मिट्टी के खिलौने के समान, बहुभूमिकानि भवनानि का अर्थ है बहुमंजिले मकान, उत्खाता: का अर्थ है उत्पाटित, विशीर्णाः का अर्थ है बिखर गए, फालद्व्ये का अर्थ है दो खण्डों में, कालकवलिता: का अर्थ है मृत्यु को प्राप्त हुए, संस्खलनम् का अर्थ है विचलन, जनयति का अर्थ है उत्पन्न करना, भूकम्पविशेषज्ञा: का अर्थ है भूमि कम्पन के रहस्य विशेषज्ञ आदि। ये शब्दार्थ पाठ के गहन अध्ययन में सहायक हैं।
📊 Diagram: Table on page 3 (14×4); Table on page 4 (16×4)
🧪 Activity: इस अनुभाग में कोई गतिविधि नहीं है, परन्तु शब्दार्थों के अभ्यास से भाषा कौशल विकसित होता है।
🔗 Connection: शब्दार्थों की समझ पाठ के अभ्यास प्रश्नों और व्याकरणिक अभ्यासों के लिए आधार प्रदान करती है।
Table on page 3 (14×4)
| पर्याकुलम् | – परित: व्याकुलम् | – चारों ओर से बेचैन | – Restless all over |
|---|---|---|---|
| विपर्यस्तम् | – अस्तव्यस्तम् | – अस्तव्यस्त | – Disturbed |
| विपन्नम् | – विपत्तियुक्तम् | – (विपत्तिग्रस्त) मुसीबत में | – Troubled |
| दारुणविभीषिका | – भयङ्करत्रास: | – अत्यधिक भय | – Horrendous |
| ध्वंसावशेषेषु | – नाशानन्तरम् | – विनाश के बाद बची हुई वस्तु | – Debris after the destruction |
| मूर्तिकाळीडनकमिव | – मूर्तिकाया: क्रीडनकम् इव | – मिट्टी के खिलौने के समान | – Like a toy made of mud |
| बहुभूमिकानि भवनानि | – बहव: भूमिका: येषु | – बहुमंजिले मकान | – Multi storey buildings |
| उत्खाता: | – उत्पाटिता: | – उत्खाड़े गये | – Demolished |
| विशीर्णाः | – विकीर्णाः | – बिखर गये | – Scattered |
| फालद्व्ये | – खण्डद्व्ये | – दो खण्डों में | – In two segments |
| निस्सरन्तीभि: | – निर्गच्छन्तीभि: | – निकलती हुई | – Outcoming |
| दुर्वारः | – दुःखेन निवारयितुं योग्यः | – जिनको हटाना कठिन है | – Difficult to get rid of |
| महाप्लावनम् | – महत् प्लावनम् | – विशाल बाढ़ | – Heavy flood |
| श्रुत्क्षामकण्ठः | – श्रुत्क्षा श्राम: कण्ठा: येषाम् ते | – भूख से दुर्बल कण्ठ वाले | – Having dry throats due to hunger |
Table on page 4 (16×4)
| कालकवलिता: | - मृता: | - मृत्यु को प्राप्त हुए | - Dead |
|---|---|---|---|
| संस्खलनम् | - विचलनम् | - स्थान से हटना | - Distract |
| जनयति | - उत्पन्नं करोति | - उत्पन्न करती है | - Creates |
| भूकम्पविशेषज्ञा: | - भुव: कम्पनस्य रहस्यज्ञातार: | - भूमि कम्पन के रहस्य विशेषज्ञ | - Experts in science of earthquake |
| खनिजम् | - उत्खननात् प्राप्तं द्रव्यम् | - भूमि को खोदने से प्राप्त वस्तु | - Mineral |
| क्वथयति | - उत्तप्तं करोति | - उबालती है, तपाती है | - Decocts |
| विदार्थ | - विद्योर्ण कृत्वा, भित्वा | - फाड़कर | - Tearing |
| पाश्वस्थ-ग्रामा: | - निकटस्था: ग्रामा: | - समीप के गाँव | - Nearby villages |
| उदरे | - कुक्षौ | - पेट में | - In the stomach |
| समाविशन्ति | - अन्त: गच्छन्ति | - समा जाती हैं | - Merge |
| उद्विरन्त: | - प्रकटयन्त: | - प्रकट करते हुए | - Emerging |
| उपशमनस्य | - शान्ते: | - शान्त करने का | - Of pacifying |
| वामनकल्प: | - वामनसदृश: | - बौना | - Dwarf |
| निर्माय | - निर्माणं कृत्वा | - बनाकर | - Constructing |
| पुञ्जीकरणीयम् | - संग्रहणीयम् | - इकट्ठा करना चाहिए | - Should be collected |
| योगक्षेमाभ्याम् | - अप्राप्तस्य प्राप्ति: योग:, प्राप्तस्य रक्षणं क्षेम: ताभ्याम् | - अप्राप्त की प्राप्ति योग है, प्राप्त की रक्षा क्षेम है- उन दोनों के लिए | - Procurement and welfare |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. एकपदेन उत्तरं लिखत- (क) कस्य दारुण-विभीषिका गुर्जरक्षेत्रं ध्वंसावशेषेषु परिवर्तितवती? (ख) कीदृशानि भवनानि धाराशायीनि जातानि? (ग) दुर्वार-जलधाराभिः किम् उपस्थितम्? (घ) कस्य उपशमनस्य स्थिरोपायः नास्ति? (ङ) कीदृशाः प्राणिनः भूकम्पेन निहन्यन्ते?
1. एकपदेन उत्तरं लिखत- (क) भूकम्पविभीषिका गुर्जरक्षेत्रं ध्वंसावशेषेषु परिवर्तितवती। (ख) धाराशायीनि भवनानि भूकम्पे नष्टानि जातानि। (ग) दुर्वार-जलधाराभिः विनाशं उपस्थितम्। (घ) भूकम्पस्य उपशमनस्य स्थिरोपायः नास्ति। (ङ) भूकम्पेन आकाशो पिपीलिकाः इव विवशाः प्राणिनः निहन्यन्ते।
2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत- (क) समस्तराष्ट्रं कीदृशे उल्लासे मग्नम् आसीत्? (ख) भूकम्पस्य केन्द्रबिन्दुः कः जनपदः आसीत्? (ग) पृथिव्या: स्खलनात् किं जायते? (घ) समग्रं विश्वं कैः आतद्भ्रितं दृश्यते? (ङ) केषां विस्फोटैरपि भूकम्पो जायते?
2. संस्कृतभाषया उत्तराणि- (क) समस्तराष्ट्रं उल्लासे मग्नम् आसीत्। (ख) भूकम्पस्य केन्द्रबिन्दुः कच्छजनपदः आसीत्। (ग) पृथिव्या: स्खलनात् भूकम्पः जायते। (घ) समग्रं विश्वं पञ्चतत्त्वैः आतद्भ्रितं दृश्यते। (ङ) पर्वतविस्फोटैरपि भूकम्पो जायते।
3. स्थूलपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत- (क) भूकम्पविभीषिका विशेषेण कच्छजनपदं ध्वंसावशेषेषु परिवर्तितवती। (ख) वैज्ञानिकाः कथयन्ति यत् पृथिव्या: अन्तर्गर्भे, पाषाणशिलानां संघर्षणेन कम्पनं जायते। (ग) विवशाः प्राणिनः आकाशो पिपीलिकाः इव निहन्यन्ते। (घ) एतादृशी भयावहघटना गढवालक्षेत्रे घटिता। (ङ) तद्द्वानीम् भूकम्पकारणं विचारणीयं तिष्ठति।
3. स्थूलपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं- (क) भूकम्पविभीषिका विशेषेण कच्छजनपदं ध्वंसावशेषेषु परिवर्तितवती किम्? (ख) वैज्ञानिकाः कथयन्ति यत् पृथिव्या: अन्तर्गर्भे पाषाणशिलानां संघर्षणेन कम्पनं कथं जायते? (ग) विवशाः प्राणिनः आकाशो पिपीलिकाः इव कथं निहन्यन्ते? (घ) एतादृशी भयावहघटना गढवालक्षेत्रे कथं घटिता? (ङ) तद्द्वानीम् भूकम्पकारणं कथं विचारणीयं तिष्ठति?
4. ‘भूकम्पविषये’ पञ्चवाक्यमितम् अनुच्छेदं लिखत।
4. भूकम्पविषये पञ्चवाक्यमितम् अनुच्छेदः- भूकम्पः पृथिव्याः कम्पनं भवति। तस्य केन्द्रबिन्दुः कम्पनस्य उद्गमः। कम्पनतरंगाः सर्वदिशि प्रसारिताः भवन्ति। भूकम्पः प्रायः प्रशान्तमहासागरपरिधौ, हिमाचले, गङ्गा-ब्रह्मपुत्रतटे च भवति। सुनामी अपि भूकम्पस्य प्रकारः अस्ति। भूकम्पे भयमुपजायते परन्तु धैर्येण स्वसुरक्षां कर्तुं शक्यते।
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