Chapter 9
Chapter 9 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 12 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
प्रस्तुत: पाठ:
व्याख्याप्रस्तुत: पाठ:
इस पाठ में हमारे वातावरण में उत्पन्न होने वाली विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं में से भूकम्प की विभीषिका पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्राकृतिक आपदाएँ जैसे झंझावात, भूकम्प, जलोपप्लव, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, शिलास्खलन, भूविदारण, ज्वालामुखस्फोट आदि मानव जीवन में भयावह प्रलय उत्पन्न करती हैं। ये आपदाएँ न केवल जीवन को संकट में डालती हैं, बल्कि प्राणियों के सुखमय जीवन को दुःखमय बना देती हैं। इस पाठ का उद्देश्य भूकम्प की विभीषिका को समझना और आपत्काल में साहसपूर्वक सुरक्षित रहने के उपायों पर विचार करना है। पाठ में 2001 ईस्वी में गुजरात के भूकम्प का उदाहरण दिया गया है, जिसने पूरे गुजरात क्षेत्र को ध्वंसावशेषों में परिवर्तित कर दिया था। भूकम्प के कारण भवन क्षणभर में धराशायी हो गए, विद्युत् स्तम्भ टूट गए और लोग संकट में पड़ गए। इस प्रकार की विभीषिका का सामना करने के लिए हमें जागरूक और सतर्क रहना आवश्यक है।
- प्राकृतिक आपदाएँ मानव जीवन को प्रभावित करती हैं।
- भूकम्प एक तीव्र और अचानक उत्पन्न होने वाली प्राकृतिक आपदा है।
- 2001 में गुजरात में आए भूकम्प ने व्यापक विनाश किया।
- भूकम्प के कारण भवन, पुल, सड़कें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं।
- आपदाओं के समय साहस और सुरक्षा के उपाय आवश्यक हैं।
- 📌 भूकम्प: भूमि का कम्पन जो पृथ्वी के अंदर उत्पन्न होता है।
- 📌 विभीषिका: भयावह त्रास या प्रलय।
- 📌 ध्वंसावशेष: विनाश के बाद बची हुई वस्तुएं।
भूकम्प परिचय
अवधारणाभूकम्प परिचय
भूकम्प का अर्थ है भूमि का कम्पन। यह कम्पन पृथ्वी के अंदर उत्पन्न होता है और कम्पन तरंगों के रूप में विभिन्न दिशाओं में फैलता है। भूकम्प का उद्गम केन्द्र वह बिन्दु होता है जहाँ से कम्पन शुरू होता है। कम्पन तरंगें उसी प्रकार फैलती हैं जैसे शांत तालाब में पत्थर फेंकने पर तरंगें उत्पन्न होती हैं। पृथ्वी के कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ भूकम्प अधिक आते हैं, जैसे प्रशान्त महासागर के चारों ओर, हिमाचल प्रदेश, गंगा और ब्रह्मपुत्र के तटीय भाग। सुनामी भी भूकम्प का एक रूप है, जिसमें समुद्र के जल में तीव्र कम्पन उत्पन्न होता है और तटीय क्षेत्र प्रभावित होते हैं। 2004 में आई सुनामी ने भारत सहित कई देशों को प्रभावित किया। प्राकृतिक पंचतत्वों - धृति (भूमि), जल, पावक (अग्नि), गगन (आकाश), और समीर (हवा) - के संतुलन से ही प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा संभव है।
- भूकम्प भूमि का कम्पन है जो पृथ्वी के अंदर उत्पन्न होता है।
- कम्पन तरंगों के रूप में विभिन्न दिशाओं में फैलता है।
- भूकम्प के उद्गम केन्द्र को भूकम्प का केन्द्र कहा जाता है।
- प्रशान्त महासागर के चारों ओर और हिमाचल प्रदेश जैसे क्षेत्र भूकम्प प्रवण हैं।
- सुनामी भी भूकम्प की एक प्रकार की आपदा है।
- पंचतत्वों के संतुलन से प्राकृतिक आपदाओं से बचाव संभव है।
- 📌 कम्पन तरंग: भूकम्प के दौरान उत्पन्न होने वाली ऊर्जा की तरंगें।
- 📌 सुनामी: समुद्र में भूकम्प के कारण उत्पन्न विशाल जल तरंग।
- 📌 पंचतत्व: धृति, जल, पावक, गगन, समीर - प्रकृति के पांच तत्व।
भूकम्पविषये प्राचीनमतम्
अवधारणाभूकम्पविषये प्राचीनमतम्
भूकम्प की घटनाएँ प्राचीन काल से मानव जीवन का हिस्सा रही हैं। ऋषि-मुनियों ने अपने श्लोकों और साहित्य में भूकम्प का उल्लेख किया है, जिससे ज्ञात होता है कि भूकम्प प्राचीनकाल से ज्ञात और अनुभव किया गया प्रकोप है। उदाहरण के लिए, वराहसंहिता में भूकम्प का व
अभ्यास प्रश्न — Chapter 9
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. एकपदेन उत्तरं लिखत- (क) कस्य दारुण-विभीषिका गुर्जरक्षेत्रं ध्वंसावशेषेषु परिवर्तितवती? (ख) कीदृशानि भवनानि धाराशायीनि जातानि? (ग) दुर्वार-जलधाराभिः किम् उपस्थितम्? (घ) कस्य उपशमनस्य स्थिरोपायः नास्ति? (ङ) कीदृशाः प्राणिनः भूकम्पेन निहन्यन्ते?
उत्तर:
1. एकपदेन उत्तरं लिखत- (क) भूकम्पविभीषिका गुर्जरक्षेत्रं ध्वंसावशेषेषु परिवर्तितवती। (ख) धाराशायीनि भवनानि भूकम्पे नष्टानि जातानि। (ग) दुर्वार-जलधाराभिः विनाशं उपस्थितम्। (घ) भूकम्पस्य उपशमनस्य स्थिरोपायः नास्ति। (ङ) भूकम्पेन आकाशो पिपीलिकाः इव विवशाः प्राणिनः निहन्यन्ते।
व्याख्या:
प्रत्येक प्रश्न का एकपद उत्तर दिया गया है जो पाठ के अनुसार है। उदाहरणतः (क) में भूकम्पविभीषिका गुर्जरक्षेत्रं ध्वंसावशेषेषु परिवर्तितवती, अर्थात् भूकम्प ने गुर्जरक्षेत्र को नष्ट कर दिया। इसी प्रकार अन्य प्रश्नों के भी संक्षिप्त उत्तर दिए गए हैं।
Q2.2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत- (क) समस्तराष्ट्रं कीदृशे उल्लासे मग्नम् आसीत्? (ख) भूकम्पस्य केन्द्रबिन्दुः कः जनपदः आसीत्? (ग) पृथिव्या: स्खलनात् किं जायते? (घ) समग्रं विश्वं कैः आतद्भ्रितं दृश्यते? (ङ) केषां विस्फोटैरपि भूकम्पो जायते?
उत्तर:
2. संस्कृतभाषया उत्तराणि- (क) समस्तराष्ट्रं उल्लासे मग्नम् आसीत्। (ख) भूकम्पस्य केन्द्रबिन्दुः कच्छजनपदः आसीत्। (ग) पृथिव्या: स्खलनात् भूकम्पः जायते। (घ) समग्रं विश्वं पञ्चतत्त्वैः आतद्भ्रितं दृश्यते। (ङ) पर्वतविस्फोटैरपि भूकम्पो जायते।
व्याख्या:
प्रत्येक प्रश्न का संस्कृत में संक्षिप्त उत्तर दिया गया है। उदाहरणतः (ख) में भूकम्प का केन्द्रबिन्दु कच्छजनपद बताया गया है। (ग) में पृथ्वी के स्खलन से भूकम्प उत्पन्न होता है।
Q3.3. स्थूलपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत- (क) भूकम्पविभीषिका विशेषेण कच्छजनपदं ध्वंसावशेषेषु परिवर्तितवती। (ख) वैज्ञानिकाः कथयन्ति यत् पृथिव्या: अन्तर्गर्भे, पाषाणशिलानां संघर्षणेन कम्पनं जायते। (ग) विवशाः प्राणिनः आकाशो पिपीलिकाः इव निहन्यन्ते। (घ) एतादृशी भयावहघटना गढवालक्षेत्रे घटिता। (ङ) तद्द्वानीम् भूकम्पकारणं विचारणीयं तिष्ठति।
उत्तर:
3. स्थूलपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं- (क) भूकम्पविभीषिका विशेषेण कच्छजनपदं ध्वंसावशेषेषु परिवर्तितवती किम्? (ख) वैज्ञानिकाः कथयन्ति यत् पृथिव्या: अन्तर्गर्भे पाषाणशिलानां संघर्षणेन कम्पनं कथं जायते? (ग) विवशाः प्राणिनः आकाशो पिपीलिकाः इव कथं निहन्यन्ते? (घ) एतादृशी भयावहघटना गढवालक्षेत्रे कथं घटिता? (ङ) तद्द्वानीम् भूकम्पकारणं कथं विचारणीयं तिष्ठति?
व्याख्या:
प्रत्येक स्थूलपद से प्रश्न बनाए गए हैं, जो पाठ के मुख्य बिंदुओं पर आधारित हैं। विद्यार्थी को स्थूलपदों के आधार पर प्रश्न निर्माण करना है।
Q4.4. ‘भूकम्पविषये’ पञ्चवाक्यमितम् अनुच्छेदं लिखत।
उत्तर:
4. भूकम्पविषये पञ्चवाक्यमितम् अनुच्छेदः- भूकम्पः पृथिव्याः कम्पनं भवति। तस्य केन्द्रबिन्दुः कम्पनस्य उद्गमः। कम्पनतरंगाः सर्वदिशि प्रसारिताः भवन्ति। भूकम्पः प्रायः प्रशान्तमहासागरपरिधौ, हिमाचले, गङ्गा-ब्रह्मपुत्रतटे च भवति। सुनामी अपि भूकम्पस्य प्रकारः अस्ति। भूकम्पे भयमुपजायते परन्तु धैर्येण स्वसुरक्षां कर्तुं शक्यते।
व्याख्या:
पाठ के मुख्य बिंदुओं को समाहित करते हुए पाँच वाक्यों का अनुच्छेद लिखा गया है जो भूकम्प के परिचय, केन्द्र, प्रभाव, सुनामी और सुरक्षा पर आधारित है।
Q5.5. कोष्ठकेषु दत्तेषु धातुषु निर्देशानुसारं परिवर्तनं विधाय रिक्तस्थानानि पूर्यत- (क) समग्रं भारतम् उल्लासे मग्नम् ……………………1 (अस् + लट् लकारे) (ख) भूकम्पविभीषिका कच्छजनपदं विनष्टं ……………………1 (कृ + क्तवतु + ङौप्) (ग) क्षणेनैव प्राणिनः गृहविहीनाः ……………………1 (भू + लङ्, प्रथम-पुरुषः बहुवचनम्) (घ) शान्तानि पञ्चतत्वानि भूतलस्य योगक्षेमाभ्यां ……………………1 (भू + लट्, प्रथम-पुरुषः बहुवचनम्) (ड) मानवा: ………………… यत् बहुभूमिकभवननिर्माणं करणीयम् न वा? (प्रच्छ्व + लट्, प्रथम-पुरुष: बहुवचनम्) (च) नदीवेगेन ग्रामा: तद्दरे …………………¹ (सम् + आ + विश् + विधिलिङ्, प्रथम पुरुष: बहुवचनम्)
उत्तर:
5. रिक्तस्थानानि पूर्यत- (क) समग्रं भारतम् उल्लासे मग्नम् अस्ति। (ख) भूकम्पविभीषिका कच्छजनपदं विनष्टवत्। (ग) क्षणेनैव प्राणिनः गृहविहीनाः भूयन्ति। (घ) शान्तानि पञ्चतत्वानि भूतलस्य योगक्षेमाभ्यां भवन्ति। (ड) मानवा: प्रच्छन्ति यत् बहुभूमिकभवननिर्माणं करणीयम् न वा? (च) नदीवेगेन ग्रामाः तद्दरे समाविशन्ति।
व्याख्या:
प्रत्येक रिक्त स्थान में दिए गए धातु और निर्देशानुसार उचित रूप में शब्द भरे गए हैं। जैसे (अस् + लट् लकारे) से 'अस्ति' बना। (कृ + क्तवतु + ङौप्) से 'विनष्टवत्'।
Q6.6. सन्धि/सन्धिविच्छेदं च कुरुत— (अ) परसवर्णसन्धिनियमानुसारम्— (क) किञ्च = ………………… + च (ख) ………………… = नगरम् + तु (ग) विपन्नञ्च = ………………… + ………………… (घ) ………………… = किम् + नु (ङ) भुजनगरन्तु = ………………… + ………………… (च) ………………… = सम् + चय: (आ) विसर्गसन्धिनियमानुसारम्— (क) शिशवस्तु = ………………… + ………………… (ख) ………………… = विस्फोटै: + अपि (ग) सहस्रशोऽन्ये = ………………… + अन्ये (घ) विचित्रोऽयम् = विचित्र: + ………………… (ङ) ………………… = भूकम्प: + जायते (च) वामनकल्प एव = ………………… + …………………
उत्तर:
6. सन्धि/सन्धिविच्छेदं- (अ) परसवर्णसन्धि- (क) किञ्च = किम् + च (ख) नगरतु = नगरम् + तु (ग) विपन्नञ्च = विपन्न + च (घ) किम्नु = किम् + नु (ङ) भुजनगरन्तु = भुजन् + नगरन्तु (च) समचयः = सम् + चयः (आ) विसर्गसन्धि- (क) शिशवस्तु = शिशुः + तु (ख) विस्फोटैपि = विस्फोटै: + अपि (ग) सहस्रशोऽन्ये = सहस्रशः + अन्ये (घ) विचित्रोऽयम् = विचित्र: + अयम् (ङ) भूकम्पजायते = भूकम्प: + जायते (च) वामनकल्प एव = वामनकल्प + एव
व्याख्या:
प्रत्येक शब्द को उसके सन्धि या सन्धिविच्छेद रूप में विभाजित किया गया है। परसवर्णसन्धि और विसर्गसन्धि के नियमों के अनुसार सही विभाजन प्रस्तुत किया गया है।
Q7.7. (अ) ‘क’ स्तम्भे पदानि दत्तानि ‘ख’ स्तम्भे विलोमपदानि, तयो: संयोगं कुरुत— क सम्पन्नम् ध्वस्तभवनेषु निस्सरन्तीभि: निर्माय क्षणेनैव ख प्रविशन्तीभि: सुचिरेणैव विपन्नम् नवनिर्मितभवनेषु विनाश्य
उत्तर:
7. (अ) विलोमपदानि संयोगः- सम्पन्नम् — विपन्नम् ध्वस्तभवनेषु — नवनिर्मितभवनेषु निस्सरन्तीभिः — प्रविशन्तीभिः निर्माय — विनाश्य क्षणेनैव — सुचिरेणैव
व्याख्या:
प्रत्येक शब्द का विलोम शब्द स्तम्भ 'ख' से मिलाया गया है। जैसे 'सम्पन्नम्' का विलोम 'विपन्नम्' है। इसी प्रकार अन्य शब्दों के भी विलोम जोड़े गए हैं।
Q8.(आ) ‘क’ स्तम्भे पदानि दत्तानि ‘ख’ स्तम्भे समानार्थकपदानि तयो: संयोगं कुरुत – क प्यार्याकुलम् नष्टा: विशीर्णा: क्रोधयुक्ताम् उद्गिरन्त: संत्रोद्य विदार्य व्याकुलम् प्रकुपिताम् प्रकट्यन्त:
उत्तर:
7. (आ) समानार्थकपदानि संयोगः- प्यार्याकुलम् — व्याकुलम् नष्टाः — विदार्य विशीर्णाः — प्रकुपिताम् क्रोधयुक्ताम् — संत्रोद्य उद्गिरन्तः — प्रकट्यन्तः
व्याख्या:
प्रत्येक शब्द का समानार्थक शब्द स्तम्भ 'ख' से मिलाया गया है। जैसे 'प्यार्याकुलम्' का समानार्थक 'व्याकुलम्' है। इसी प्रकार अन्य शब्दों के भी समानार्थक जोड़े गए हैं।