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अन्योक्तयः | Class 10 Sanskrit Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन

अन्योक्तयः – this guide gives you a concise, exam-ready overview of अन्योक्तयः from Class 10 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

अन्योक्तयः में शब्दार्थ और व्याकरण

अन्योक्तयः की गहरी समझ के लिए शब्दार्थ और व्याकरण का ज्ञान आवश्यक है। इस भाग में अन्योक्तयः में प्रयुक्त विशेष शब्दों के अर्थ और उनके व्याकरणिक रूपों का विस्तृत अध्ययन किया गया है। उदाहरण के लिए, 'सरस:' का अर्थ है तालाब, 'बकसहस्रेण' का अर्थ है हजारों बगुलों से, और 'परित:' का अर्थ है चारों ओर। ऐसे शब्दों के अर्थ जानने से श्लोकों की अभिव्यक्ति और भाव की गहराई समझ में आती है।

व्याकरणिक दृष्टि से, शब्दों के संधि-विच्छेद, समास, और विशेषण-प्रत्यय के प्रयोग को समझना आवश्यक है। जैसे 'निपीतानि' का अर्थ है भलीभाँति पाये गये, और 'कृतोपकार:' का अर्थ है उपकार किया हुआ। इस प्रकार के शब्दों का सही अर्थ और प्रयोग अन्योक्तयः के अर्थ को स्पष्ट करते हैं।

इस भाग में छात्रों को संधि-विच्छेद, समास-विग्रह, और व्याकरणिक नियमों के अभ्यास के लिए प्रश्न और उदाहरण भी दिए गए हैं, जिससे वे अन्योक्तयः की भाषा को बेहतर समझ सकें।

📊 Diagram: Table on page 2 (10×4); Table on page 4 (17×4)

🧪 Activity: अधोलिखित प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में लिखना, संधि-विच्छेद करना, समास-विग्रह करना, और वाक्यों से प्रश्न बनाना।

🔗 Connection: यह अन्योक्तयः के साहित्यिक महत्व और प्रयोग के नियम की ओर ले जाता है।

Table on page 2 (10×4)

सरस:- तडागस्य- तालाब का- Of a lake
बकसहस्रेण- बकानां सहस्रेण- हजारों बगुलों से- By thousand of herons
परित:- सर्वत:- चारों ओर- All around
तीरवासिना- तटनिवासिना- तटवासी के द्वारा- By resident of the shore
मृणालपटली- कमलनालसमूह:- कमलनालों का समूह- Bunch of lotus stems
निपीतानि- नि:शेषण पीतानि- भलीभाँति पाये गये- Well drunk
अम्बूनि- जलानि- जल- Waters
नलिनानि- कमलानि- कमलों को- The lotuses
निषेवितानि- सेवितानि- सेवन किये गये- Used
भविता- भविष्यति- होगा- You will become

Table on page 4 (17×4)

मानी- स्वाभिमानी- स्वाभिमानी- Self respectful
अभ्युपेतु- प्राप्नोतु- प्राप्त करें- Shall get
आश्वास्य- आश्वासनं प्रदाय- तृप्त करके- Satisfying
पर्वतकुलम्- पर्वतानां कुलम्- पर्वतों के समूह को- The group of mountains
तपनोष्णतप्तम्- तपनस्य उष्णेन तप्तम्,- सूर्य की गर्मी से तपे हुए को- Heated by Sun
उद्गमदाबविधुराणि-- उन्नतकाष्ठरहितानि- ऊँचे काष्ठों (वृक्षों) से रहित को- Lacking high trees
नानानदीनदशतानि-- विविधानां नदीनां, नदानां शतानि च- अनेक नदियों और सैकड़ों- नदों को- Hundreds of small and big rivers
काननानि- वनानि- वन- Forests
पूरयित्वा- पूर्ण कृत्वा- पूर्ण करके (भरकर)- Filling
पिपासितः- तृषितः- प्यासा- Thirsty
सावधानमनसा- ध्यानेन- ध्यान से- Carefully
अम्भोदाः- मेघाः- बादल- Clouds
गगने- आकाशो- आकाश में- In the sky
आर्द्रयन्ति- जलेन क्लेदयन्ति- जल से भिगो देते हैं- Wet with water
वसुधाम्- पृथ्वीम्- पृथ्वी को- The earth
गर्जन्ति- गर्जनं (ध्वनिम्) कुर्वन्ति- गर्जना करते हैं- Thunder
पुरतः- अग्रे- आगे, सामने- In front

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. एकपदेन उत्तरं लिखत- (क) कस्य शोभा एकेन राजहंसेन भवति? (ख) सरसः तीरे के वसन्ति? (ग) कः पिपासितः प्रियते? (घ) के रसालमुकुलानि समाश्रयन्ते? (ङ) अम्भोदा: कुत्र सन्ति?

1. एकपदेन उत्तरं: (क) राजहंसस्य शोभा एकेन राजहंसेन भवति। (ख) सरसः तीरे पक्षिणः वसन्ति। (ग) पिपासितः प्रियते। (घ) रसालमुकुलानि भूड़ाः समाश्रयन्ते। (ङ) अम्भोदा: जलाशयेषु सन्ति।

2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत- (क) सरसः शोभा केन भवति? (ख) चातकः किमर्थ मानी कथ्यते? (ग) मीनः कदा दीनां गतिं प्राप्नोति? (घ) कानि पूर्यित्वा जलदः रिक्तः भवति? (ङ) वृष्टिभिः वसुधां के आर्द्र्यन्ति?

2. संस्कृतभाषया उत्तराणि: (क) सरसः शोभा तोयैः भवति। (ख) चातकः मानी कथ्यते कारणं तस्य जलस्य पिपासायाम्। (ग) मीनः दीनां गतिं जलस्य प्राप्तौ प्राप्नोति। (घ) जलदः नानानदीनदशतानि पूर्यित्वा रिक्तः भवति। (ङ) वृष्टिभिः वसुधां मेघाः आर्द्र्यन्ति।

3. अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत- (क) मालाकार: तोयै: तरो: पुष्टिं करोति। (ख) भूड़ाः रसालमुकुलानि समाश्रयन्ते। (ग) पतड़ाः अम्बरपथम् आपेदिरे। (घ) जलद: नानानदीनदशतानि पूर्यित्वा रिक्तोऽस्ति। (ङ) चातक: वने वसति।

3. प्रश्ननिर्माणं: (क) मालाकार: किम् करोति? (ख) भूड़ाः किं समाश्रयन्ते? (ग) पतड़ाः कुत्र आपेदिरे? (घ) जलद: किम् पूर्यित्वा रिक्तोऽस्ति? (ङ) चातक: कुत्र वसति?

4. अधोलिखितयो: श्लोकयो: भावार्थ स्वीकृतभाषया लिखत- (अ) तोयैरल्पैरपि ... वारिदेन। (आ) रे रे चातक ... दीनं वच:।

4. भावार्थ: (अ) तोयैरल्पैरपि वारिदेन जल से भी वृक्षों को पुष्ट करता है। (आ) रे रे चातक, दीनं वच: अर्थात् हे चातक, दीन व्यक्ति की बात सुनो।

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