अन्योक्तयः | Class 10 Sanskrit Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन
अन्योक्तयः – this guide gives you a concise, exam-ready overview of अन्योक्तयः from Class 10 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
अन्योक्तयः के उदाहरण और उनका विश्लेषण
इस भाग में प्रस्तुत सात अन्योक्तियों के उदाहरणों का विस्तार से अध्ययन किया गया है। प्रत्येक अन्योक्ति में प्रयुक्त प्रतीक और माध्यमों के अर्थ और भावों को समझाया गया है। उदाहरण के लिए, पहले श्लोक में राजहंस की उपमा से तालाब की शोभा और उसके चारों ओर हजारों बगुलों की उपस्थिति का वर्णन है, जो प्राकृतिक सौंदर्य और शील की ओर संकेत करता है। दूसरे श्लोक में कमलनालों के बीच जल का सेवन करने वाले राजहंस से कृतज्ञता और सत्कर्म की प्रेरणा मिलती है।
तीसरे श्लोक में मालाकार (माली) की करुणा से वृक्षों की पुष्टता और वर्षा के महत्व को दर्शाया गया है। चौथे श्लोक में अम्बरपथ (आकाश मार्ग) में उड़ते पक्षी और रसाल मञ्जरियों के माध्यम से जीवन के संघर्ष और आश्रय की आवश्यकता को समझाया गया है।
पाँचवें श्लोक में चातक पक्षी की एकाकी और स्वाभिमानी प्रकृति का वर्णन है, जो मनुष्य के आदर्शों की ओर संकेत करता है। छठे श्लोक में पर्वतों, नदियों और वनस्पतियों के माध्यम से प्रकृति की समृद्धि और जल की महत्ता को बताया गया है। सातवें श्लोक में बादलों, वर्षा और पृथ्वी के बीच संबंध को दर्शाते हुए जीवन के चक्र और प्राकृतिक घटनाओं का वर्णन है।
प्रत्येक श्लोक में प्रयुक्त शब्दों के अर्थ और व्याकरणिक रूपों का भी विस्तृत अध्ययन किया गया है, जिससे पाठक को श्लोकों की गहराई और भाव की स्पष्टता मिलती है।
📊 Diagram: Table on page 2 (10×4); Table on page 4 (17×4)
🔗 Connection: यह अन्योक्तयः में शब्दार्थ और व्याकरण के अध्ययन की ओर बढ़ता है।
Table on page 2 (10×4)
| सरस: | - तडागस्य | - तालाब का | - Of a lake |
|---|---|---|---|
| बकसहस्रेण | - बकानां सहस्रेण | - हजारों बगुलों से | - By thousand of herons |
| परित: | - सर्वत: | - चारों ओर | - All around |
| तीरवासिना | - तटनिवासिना | - तटवासी के द्वारा | - By resident of the shore |
| मृणालपटली | - कमलनालसमूह: | - कमलनालों का समूह | - Bunch of lotus stems |
| निपीतानि | - नि:शेषण पीतानि | - भलीभाँति पाये गये | - Well drunk |
| अम्बूनि | - जलानि | - जल | - Waters |
| नलिनानि | - कमलानि | - कमलों को | - The lotuses |
| निषेवितानि | - सेवितानि | - सेवन किये गये | - Used |
| भविता | - भविष्यति | - होगा | - You will become |
Table on page 4 (17×4)
| मानी | - स्वाभिमानी | - स्वाभिमानी | - Self respectful |
|---|---|---|---|
| अभ्युपेतु | - प्राप्नोतु | - प्राप्त करें | - Shall get |
| आश्वास्य | - आश्वासनं प्रदाय | - तृप्त करके | - Satisfying |
| पर्वतकुलम् | - पर्वतानां कुलम् | - पर्वतों के समूह को | - The group of mountains |
| तपनोष्णतप्तम् | - तपनस्य उष्णेन तप्तम्, | - सूर्य की गर्मी से तपे हुए को | - Heated by Sun |
| उद्गमदाबविधुराणि- | - उन्नतकाष्ठरहितानि | - ऊँचे काष्ठों (वृक्षों) से रहित को | - Lacking high trees |
| नानानदीनदशतानि- | - विविधानां नदीनां, नदानां शतानि च | - अनेक नदियों और सैकड़ों- नदों को | - Hundreds of small and big rivers |
| काननानि | - वनानि | - वन | - Forests |
| पूरयित्वा | - पूर्ण कृत्वा | - पूर्ण करके (भरकर) | - Filling |
| पिपासितः | - तृषितः | - प्यासा | - Thirsty |
| सावधानमनसा | - ध्यानेन | - ध्यान से | - Carefully |
| अम्भोदाः | - मेघाः | - बादल | - Clouds |
| गगने | - आकाशो | - आकाश में | - In the sky |
| आर्द्रयन्ति | - जलेन क्लेदयन्ति | - जल से भिगो देते हैं | - Wet with water |
| वसुधाम् | - पृथ्वीम् | - पृथ्वी को | - The earth |
| गर्जन्ति | - गर्जनं (ध्वनिम्) कुर्वन्ति | - गर्जना करते हैं | - Thunder |
| पुरतः | - अग्रे | - आगे, सामने | - In front |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. एकपदेन उत्तरं लिखत- (क) कस्य शोभा एकेन राजहंसेन भवति? (ख) सरसः तीरे के वसन्ति? (ग) कः पिपासितः प्रियते? (घ) के रसालमुकुलानि समाश्रयन्ते? (ङ) अम्भोदा: कुत्र सन्ति?
1. एकपदेन उत्तरं: (क) राजहंसस्य शोभा एकेन राजहंसेन भवति। (ख) सरसः तीरे पक्षिणः वसन्ति। (ग) पिपासितः प्रियते। (घ) रसालमुकुलानि भूड़ाः समाश्रयन्ते। (ङ) अम्भोदा: जलाशयेषु सन्ति।
2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत- (क) सरसः शोभा केन भवति? (ख) चातकः किमर्थ मानी कथ्यते? (ग) मीनः कदा दीनां गतिं प्राप्नोति? (घ) कानि पूर्यित्वा जलदः रिक्तः भवति? (ङ) वृष्टिभिः वसुधां के आर्द्र्यन्ति?
2. संस्कृतभाषया उत्तराणि: (क) सरसः शोभा तोयैः भवति। (ख) चातकः मानी कथ्यते कारणं तस्य जलस्य पिपासायाम्। (ग) मीनः दीनां गतिं जलस्य प्राप्तौ प्राप्नोति। (घ) जलदः नानानदीनदशतानि पूर्यित्वा रिक्तः भवति। (ङ) वृष्टिभिः वसुधां मेघाः आर्द्र्यन्ति।
3. अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत- (क) मालाकार: तोयै: तरो: पुष्टिं करोति। (ख) भूड़ाः रसालमुकुलानि समाश्रयन्ते। (ग) पतड़ाः अम्बरपथम् आपेदिरे। (घ) जलद: नानानदीनदशतानि पूर्यित्वा रिक्तोऽस्ति। (ङ) चातक: वने वसति।
3. प्रश्ननिर्माणं: (क) मालाकार: किम् करोति? (ख) भूड़ाः किं समाश्रयन्ते? (ग) पतड़ाः कुत्र आपेदिरे? (घ) जलद: किम् पूर्यित्वा रिक्तोऽस्ति? (ङ) चातक: कुत्र वसति?
4. अधोलिखितयो: श्लोकयो: भावार्थ स्वीकृतभाषया लिखत- (अ) तोयैरल्पैरपि ... वारिदेन। (आ) रे रे चातक ... दीनं वच:।
4. भावार्थ: (अ) तोयैरल्पैरपि वारिदेन जल से भी वृक्षों को पुष्ट करता है। (आ) रे रे चातक, दीनं वच: अर्थात् हे चातक, दीन व्यक्ति की बात सुनो।
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