जननी तुल्यवत्सला | Class 10 Sanskrit Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

जननी तुल्यवत्सला – this guide gives you a concise, exam-ready overview of जननी तुल्यवत्सला from Class 10 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
शब्दार्थाः
इस खंड में 'जननी तुल्यवत्सला' पाठ में प्रयुक्त संस्कृत शब्दों के हिंदी अर्थ दिए गए हैं। प्रत्येक शब्द का सरल और स्पष्ट अर्थ प्रस्तुत किया गया है ताकि छात्र पाठ को बेहतर समझ सकें। उदाहरण के लिए, 'बलीवर्दाभ्याम्' का अर्थ है दो बैलों से, 'क्षेत्रकर्षणम्' का अर्थ खेत की जुताई, 'जवेन' का अर्थ तीव्रगति से, 'तोदनेन' का अर्थ कष्ट देने से, 'नुदन्' का अर्थ बलात् धकेलता हुआ, 'हलमूढ्वा' का अर्थ हल उठाकर, 'पपात' का अर्थ गिर गया, 'कृषीवल:' का अर्थ किसान, और 'उत्थापचितुम्' का अर्थ उठाने के लिए होता है। इस प्रकार के शब्दार्थ से छात्र संस्कृत शब्दों के सही अर्थ और प्रयोग को समझ पाते हैं।
📊 Diagram: Table on page 2 (9×7)
🧪 Activity: विद्यार्थियों से कहा जाए कि वे दिए गए शब्दों के अर्थों का उपयोग करते हुए वाक्य बनाएं।
🔗 Connection: यह खंड पाठ के भावार्थ और व्याख्या को समझने के लिए आवश्यक शब्द ज्ञान प्रदान करता है।
Table on page 2 (9×7)
| बलीवर्दाभ्याम् | - | वृषभाभ्याम् | - | दो बैलों से | - | By two bullocks |
|---|---|---|---|---|---|---|
| क्षेत्रकर्षणम् | - | क्षेत्रस्य कर्षणम् | - | खेत की जुताई | - | Plough the field |
| जवेन | - | तीव्रगत्या | - | तीव्रगति से | - | With speed |
| तोदनेन | - | कष्टप्रदानेन | - | कष्ट देने से | - | By torturing |
| नुदन् | - | बलात् प्रथ्यन् | - | धकेलता हुआ | - | Pulling |
| हलमूढ्वा | - | हलम् उत्थाप्य | - | हल उठाकर, हल ढोकर- | - | Carrying the plough |
| पपात | - | भूमौ अपतत् | - | गिर गया | - | Fell down |
| कृषीवल: | - | कृषक: | - | किसान | - | Farmer |
| उत्थापचितुम् | - | उपरि नेतुम् | - | उठाने के लिए | - | To uplift |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. एकपदेन उत्तरं लिखत- (क) वृषभ: दीन: इति जानन्नपि क: तं नुदन् आसीत्? (ख) वृषभ: कुत्र पपात? (ग) दुर्बले सुते कस्या: अधिका कृपा भवति? (घ) कयो: एक: शरीरेन दुर्बल: आसीत्? (ङ) चण्डवातेन मेघरवैश्च सह क: समजायत?
उत्तर- (क) कृषक: तं नुदन् आसीत्। (ख) वृषभ: खेतौ पपात। (ग) माता सुरभि: दुर्बले सुते अधिका कृपा भवति। (घ) वृषभ: एक: शरीरेन दुर्बल: आसीत्। (ङ) चण्डवातेन मेघरवैश्च सह पुत्र: समजायत।
2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत- (क) कृषक: किं करोति स्म? (ख) माता सुरभि: किमर्थम् अश्रुणि मुज्ज्वति स्म? (ग) सुरभि: इन्द्रस्य प्रश्नस्य किमुतरं ददाति? (घ) मातु: अधिका कृपा कस्मिन् भवति? (ङ) इन्द्र: दुर्बलवृषभस्य कष्टानि अपाकर्तुं किं कृतवान्? (च) जननी क्रीदृशी भवति? (छ) पाटेऽस्मिन् कयो: संवाद: विद्यते?
उत्तर- (क) कृषक: क्षेत्रकर्षणं कुर्वन् आसीत्। (ख) माता सुरभि: दुर्बलपुत्रस्य दुःखात् अश्रुणि मुज्ज्वति स्म। (ग) सुरभि: इन्द्रस्य प्रश्नस्य स्नेहपूर्णं उत्तरं ददाति। (घ) मातु: दुर्बलपुत्रे अधिका कृपा भवति। (ङ) इन्द्र: दुर्बलवृषभस्य कष्टानि हरितुं उपायं कृतवान्। (च) जननी क्रीदृशी स्नेहमयी भवति। (छ) पाटे कृषकः वृषभस्य संवादः विद्यते।
3. ‘क’ स्तम्भे दत्तानां पदानां मेलनं ‘ख’ स्तम्भे दत्तै: समानार्थकपदै: कुरुत– क स्तम्भ ख स्तम्भ (क) कृच्छ्रेण (i) वृषभ: (ख) चक्षुर्भ्याम् (ii) वासव: (ग) जवेन (iii) नेत्राभ्याम् (घ) इन्द्र: (iv) अचिरम् (ङ) पुत्रा: (v) द्वुतगत्या (च) शीघ्रम् (vi) काटिन्येन (छ) बलीवर्द: (vii) सुता:
उत्तर- (क) कृच्छ्रेण — (vi) काटिन्येन (ख) चक्षुर्भ्याम् — (iii) नेत्राभ्याम् (ग) जवेन — (v) द्वुतगत्या (घ) इन्द्र: — (ii) वासव: (ङ) पुत्रा: — (vii) सुता: (च) शीघ्रम् — (iv) अचिरम् (छ) बलीवर्द: — (i) वृषभ:
4. स्थूलपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत– (क) स: कृच्छ्रेण भारम् उद्वहति। (ख) सुराधिप: ताम् अपृच्छत्। (ग) अयम् अन्येभ्यो दुर्बल:। (घ) धेनूनाम् माता सुरभि: आसीत्। (ङ) सहस्राधिकेषु पुत्रेषु सत्स्वपि सा दु:खी आसीत्।
उत्तर- (क) स: कृच्छ्रेण किं करोति? (ख) सुराधिप: किमर्थं ताम् अपृच्छत्? (ग) अयम् अन्येभ्यो कथं दुर्बल:? (घ) धेनूनाम् माता कः आसीत्? (ङ) सहस्राधिकेषु पुत्रेषु सा कथं दु:खी आसीत्?
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