NCERTCh 4निःशुल्क

Chapter 4

🎓 Class 10📖 Shemushi📖 10 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~15 मिनट
Chapter 3अध्याय 4 / 10Chapter 5

Chapter 4अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

प्रस्तुत: पाठ:

व्याख्या

प्रस्तुत: पाठ:

इस खंड में 'जननी तुल्यवत्सला' पाठ का परिचय और उसका स्रोत बताया गया है। यह पाठ महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत के 'वनपर्व' से लिया गया है। इस कथा का मुख्य उद्देश्य समाज में सभी प्राणियों के प्रति समान दृष्टिकोण और विशेषकर मातृवात्सल्य की महत्ता को समझाना है। कथा में एक कृषक अपने दो बैलों से खेत की जुताई कर रहा होता है, जिनमें से एक बैल शारीरिक रूप से दुर्बल होता है। कृषक उस दुर्बल बैल को तोदने (कष्ट देने) के द्वारा तेज गति से चलाने का प्रयास करता है, जिससे वह गिर जाता है। किसान उसे बार-बार उठाने की कोशिश करता है, पर बैल नहीं उठ पाता। इस घटना को देखकर सभी गायों की माता सुरभि अपने आँसुओं से व्यथित हो जाती है और देवताओं के राजा इन्द्र से पुत्र के प्रति अपने वात्सल्य के विषय में चर्चा करती है। इस संवाद के माध्यम से पाठ में मातृस्नेह की गहराई और उसकी सार्वभौमिकता को दर्शाया गया है। पाठ का उद्देश्य यह भी है कि समाज में दुर्बल प्राणियों के प्रति करुणा और दया भाव होना चाहिए।

  • पाठ महाभारत के वनपर्व से लिया गया है।
  • कथा में कृषक और उसके दो बैलों का वर्णन है।
  • दुर्बल बैल को किसान कष्ट देता है जिससे वह गिर जाता है।
  • गायों की माता सुरभि पुत्र के प्रति मातृवात्सल्य व्यक्त करती है।
  • देवताओं के राजा इन्द्र के साथ संवाद के माध्यम से मातृस्नेह की महत्ता समझाई गई है।
  • पाठ सभी जीवों के प्रति समान दृष्टिकोण और करुणा का संदेश देता है।
  • 📌 जननी तुल्यवत्सला - ऐसी माता जो सभी पुत्रों के प्रति समान स्नेह रखती है।
  • 📌 वृषभ - बैल।
  • 📌 तोदनेन - कष्ट देने से।

शब्दार्थाः

परिभाषा

शब्दार्थाः

इस खंड में 'जननी तुल्यवत्सला' पाठ में प्रयुक्त संस्कृत शब्दों के हिंदी अर्थ दिए गए हैं। प्रत्येक शब्द का सरल और स्पष्ट अर्थ प्रस्तुत किया गया है ताकि छात्र पाठ को बेहतर समझ सकें। उदाहरण के लिए, 'बलीवर्दाभ्याम्' का अर्थ है दो बैलों से, 'क्षेत्रकर्षणम्' का अर्थ खेत की जुताई, 'जवेन' का अर्थ तीव्रगति से, 'तोदनेन' का अर्थ कष्ट देने से, 'नुदन्' का अर्थ बलात् धकेलता हुआ, 'हलमूढ्वा' का अर्थ हल उठाकर, 'पपात' का अर्थ गिर गया, 'कृषीवल:' का अर्थ किसान, और 'उत्थापचितुम्' का अर्थ उठाने के लिए होता है। इस प्रकार के शब्दार्थ से छात्र संस्कृत शब्दों के सही अर्थ और प्रयोग को समझ पाते हैं। **Table on page 2 (9×7)** | बलीवर्दाभ्याम् | - | वृषभाभ्याम् | - | दो बैलों से | - | By two bullocks | | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | | क्षेत्रकर्षणम् | - | क्षेत्रस्य कर्षणम् | - | खेत की जुताई | - | Plough the field | | जवेन | - | तीव्रगत्या | - | तीव्रगति से | - | With speed | | तोदनेन | - | कष्टप्रदानेन | - | कष्ट देने से | - | By torturing | | नुदन् | - | बलात् प्रथ्यन् | - | धकेलता हुआ | - | Pulling | | हलमूढ्वा | - | हलम् उत्थाप्य | - | हल उठाकर, हल ढोकर- | - | Carrying the plough | | पपात | - | भूमौ अपतत् | - | गिर गया | - | Fell down | | कृषीवल: | - | कृषक: | - | किसान | - | Farmer | | उत्थापचितुम् | - | उपरि नेतुम् | - | उठाने के लिए | - | To uplift |

  • प्रत्येक संस्कृत शब्द का हिंदी में सरल अर्थ दिया गया है।
  • 'बलीवर्दाभ्याम्' का अर्थ दो बैलों से है।
  • 'क्षेत्रकर्षणम्' का अर्थ खेत की जुताई है।
  • 'जवेन' का अर्थ तीव्रगति से है।
  • 'तोदनेन' का अर्थ कष्ट देने से है।
  • 'नुदन्' का अर्थ बलात् धकेलता हुआ है।
  • 'हलमूढ्वा' का अर्थ हल उठाकर है।
  • 'पपात' का अर्थ गिर गया है।
  • 'कृषीवल:' का अर्थ किसान है।
  • 'उत्थापचितुम्' का अर्थ उठाने के लिए है।

पाठ का भावार्थ

व्याख्या

पाठ का भावार्थ

इस खंड में 'जननी तुल्यवत्सला' कविता का भावार्थ विस्तार से समझाया गया है। कविता में एक कृषक अपने दो बैलों से खेत की जुताई कर रहा होता है। उनमें से एक बैल शारीरिक रूप से दुर्बल होता है। कृषक उस दुर्बल बैल को कष्ट देकर तेज गति से चलाने का प्रयास करता है

अभ्यास प्रश्नChapter 4

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. एकपदेन उत्तरं लिखत- (क) वृषभ: दीन: इति जानन्नपि क: तं नुदन् आसीत्? (ख) वृषभ: कुत्र पपात? (ग) दुर्बले सुते कस्या: अधिका कृपा भवति? (घ) कयो: एक: शरीरेन दुर्बल: आसीत्? (ङ) चण्डवातेन मेघरवैश्च सह क: समजायत?

उत्तर:

उत्तर- (क) कृषक: तं नुदन् आसीत्। (ख) वृषभ: खेतौ पपात। (ग) माता सुरभि: दुर्बले सुते अधिका कृपा भवति। (घ) वृषभ: एक: शरीरेन दुर्बल: आसीत्। (ङ) चण्डवातेन मेघरवैश्च सह पुत्र: समजायत।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर पाठ के अनुसार एकपदेन दिया गया है। कृषक ने वृषभ को नुदित किया, वृषभ खेत में गिरा, माता सुरभि दुर्बल पुत्र के प्रति अधिक कृपा दिखाती है, वृषभ एक शरीरेन दुर्बल था, और चण्डवात मेघ के साथ पुत्र का जन्म हुआ।

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Q2.2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत- (क) कृषक: किं करोति स्म? (ख) माता सुरभि: किमर्थम् अश्रुणि मुज्ज्वति स्म? (ग) सुरभि: इन्द्रस्य प्रश्नस्य किमुतरं ददाति? (घ) मातु: अधिका कृपा कस्मिन् भवति? (ङ) इन्द्र: दुर्बलवृषभस्य कष्टानि अपाकर्तुं किं कृतवान्? (च) जननी क्रीदृशी भवति? (छ) पाटेऽस्मिन् कयो: संवाद: विद्यते?

उत्तर:

उत्तर- (क) कृषक: क्षेत्रकर्षणं कुर्वन् आसीत्। (ख) माता सुरभि: दुर्बलपुत्रस्य दुःखात् अश्रुणि मुज्ज्वति स्म। (ग) सुरभि: इन्द्रस्य प्रश्नस्य स्नेहपूर्णं उत्तरं ददाति। (घ) मातु: दुर्बलपुत्रे अधिका कृपा भवति। (ङ) इन्द्र: दुर्बलवृषभस्य कष्टानि हरितुं उपायं कृतवान्। (च) जननी क्रीदृशी स्नेहमयी भवति। (छ) पाटे कृषकः वृषभस्य संवादः विद्यते।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर संस्कृत में पाठ के अनुसार दिया गया है। कृषक क्षेत्रकर्षण करता था, माता सुरभि अश्रु बहाती है क्योंकि वह दुर्बल पुत्र के प्रति करुणा रखती है, सुरभि इन्द्र के प्रश्न का स्नेहपूर्ण उत्तर देती है, माता दुर्बल पुत्र के प्रति अधिक कृपा करती है, इन्द्र ने दुर्बल वृषभ के कष्ट दूर करने का प्रयास किया, जननी स्नेहमयी होती है, और पाटे कृषक और वृषभ के बीच संवाद होता है।

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Q3.3. ‘क’ स्तम्भे दत्तानां पदानां मेलनं ‘ख’ स्तम्भे दत्तै: समानार्थकपदै: कुरुत– क स्तम्भ ख स्तम्भ (क) कृच्छ्रेण (i) वृषभ: (ख) चक्षुर्भ्याम् (ii) वासव: (ग) जवेन (iii) नेत्राभ्याम् (घ) इन्द्र: (iv) अचिरम् (ङ) पुत्रा: (v) द्वुतगत्या (च) शीघ्रम् (vi) काटिन्येन (छ) बलीवर्द: (vii) सुता:

उत्तर:

उत्तर- (क) कृच्छ्रेण — (vi) काटिन्येन (ख) चक्षुर्भ्याम् — (iii) नेत्राभ्याम् (ग) जवेन — (v) द्वुतगत्या (घ) इन्द्र: — (ii) वासव: (ङ) पुत्रा: — (vii) सुता: (च) शीघ्रम् — (iv) अचिरम् (छ) बलीवर्द: — (i) वृषभ:

व्याख्या:

प्रत्येक शब्द के समानार्थक पदों का मेल किया गया है। कृच्छ्रेण का अर्थ काटिन्येन (कठिनता से), चक्षुर्भ्याम् का अर्थ नेत्राभ्याम् (आंखों से), जवेन का अर्थ द्वुतगत्या (तेजी से), इन्द्र: का पर्याय वासव: है, पुत्रा: का पर्याय सुता: है, शीघ्रम् का अर्थ अचिरम् (शीघ्र), और बलीवर्द: का पर्याय वृषभ: है।

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Q4.4. स्थूलपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत– (क) स: कृच्छ्रेण भारम् उद्वहति। (ख) सुराधिप: ताम् अपृच्छत्। (ग) अयम् अन्येभ्यो दुर्बल:। (घ) धेनूनाम् माता सुरभि: आसीत्। (ङ) सहस्राधिकेषु पुत्रेषु सत्स्वपि सा दु:खी आसीत्।

उत्तर:

उत्तर- (क) स: कृच्छ्रेण किं करोति? (ख) सुराधिप: किमर्थं ताम् अपृच्छत्? (ग) अयम् अन्येभ्यो कथं दुर्बल:? (घ) धेनूनाम् माता कः आसीत्? (ङ) सहस्राधिकेषु पुत्रेषु सा कथं दु:खी आसीत्?

व्याख्या:

प्रत्येक वाक्य से प्रश्न बनाए गए हैं। जैसे 'स: कृच्छ्रेण भारम् उद्वहति।' से प्रश्न होगा 'स: कृच्छ्रेण किं करोति?'। इसी प्रकार अन्य वाक्यों से भी प्रश्न बनाए गए हैं।

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Q5.5. रेखाद्भितपदे यथास्थानं सन्धि विच्छेदं वा कुरुत– (क) कृषक: क्षेत्रकर्षणं कुर्वन्+आसीत्। (ख) तयोरेक: वृषभ: दुर्बल: आसीत्। (ग) तथापि वृष: न+उत्थित:। (घ) सत्स्वपि बहुषु पुत्रेषु अस्मिन् वात्सल्यं कथम्? (ड) तथा+अपि+अहम्+एतस्मिन् स्नेहम् अनुभवामि। (च) मम बहूनि+अपत्यानि सन्ति। (छ) सर्वत्र जलोपप्लव: सञ्जात:।

उत्तर:

उत्तर- (क) कृषक: क्षेत्रकर्षणं कुर्वन् आसीत्। सन्धि विच्छेदः: कुर्वन् + आसीत् (ख) तयोरेक: वृषभ: दुर्बल: आसीत्। (ग) तथापि वृष: न उत्थित:। (घ) सत्स्वपि बहुषु पुत्रेषु अस्मिन् वात्सल्यं कथम्? (ड) तथा अपि अहम् एतस्मिन् स्नेहम् अनुभवामि। (च) मम बहूनि अपत्यानि सन्ति। (छ) सर्वत्र जलोपप्लव: सञ्जात:

व्याख्या:

प्रत्येक वाक्य में संधि विच्छेद किया गया है। उदाहरण के लिए 'कृषक: क्षेत्रकर्षणं कुर्वन्+आसीत्' में 'कुर्वन्' और 'आसीत्' अलग-अलग शब्द हैं। इसी प्रकार अन्य वाक्यों में भी संधि विच्छेद किया गया है।

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Q6.6. अधोलिखितेषु वाक्येषु रेखांकितं सर्वनामपदं कस्मै प्रयुक्तम्— (क) सा च अवदत् भो वासव! अहम् भूशं दु:खिता अस्मि। (ख) पुत्रस्य दैन्यं दृष्ट्वा अहम् रोदिमि। (ग) स: दीन: इति जानन् अपि कृषक: तं पीडयति। (घ) मम बहूनि अपत्यानि सन्ति। (ङ) स: च ताम् एवम् असान्त्वयत्। (च) सहस्रेषु पुत्रेषु सत्स्वपि तव अस्मिन् प्रीति: अस्ति।

उत्तर:

उत्तर- (क) 'सा' सर्वनामपदः माता सुरभि के लिए प्रयुक्तम्। (ख) 'अहम्' सर्वनामपदः स्वयं के लिए प्रयुक्तम्। (ग) 'स:' सर्वनामपदः वृषभ के लिए प्रयुक्तम्। (घ) 'मम' सर्वनामपदः स्वयं के लिए प्रयुक्तम्। (ङ) 'स:' सर्वनामपदः वृषभ के लिए प्रयुक्तम्। (च) 'तव' सर्वनामपदः इन्द्र के लिए प्रयुक्तम्।

व्याख्या:

प्रत्येक वाक्य में रेखांकित सर्वनामपद का अर्थ और प्रयोजन स्पष्ट किया गया है। 'सा' माता के लिए, 'अहम्' स्वयं के लिए, 'स:' वृषभ के लिए, 'मम' स्वयं के लिए, 'तव' इन्द्र के लिए प्रयुक्त है।

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Q7.7. ‘क’ स्तम्भे विशेषणपदं लिखितम्, ‘ख’ स्तम्भे पुन: विशेष्यपदम्। तयो: मेलनं कुरुत— | क स्तम्भ | ख स्तम्भ | | --- | --- | | (क) कश्चित् | (i) वृषभम् | | (ख) दुर्बलम् | (ii) कृपा | | (ग) क्रुद्ध: | (iii) कृषीवल: | | (घ) सहस्राधिकेषु | (iv) आखण्डल: | | (ङ) अभ्यधिका | (v) जननी | | (च) विस्मित: | (vi) पुत्रेषु | | (छ) तुल्यवत्सला | (vii) कृषक: |

उत्तर:

उत्तर- (क) कश्चित् — (vii) कृषक: (ख) दुर्बलम् — (i) वृषभम् (ग) क्रुद्ध: — (iv) आखण्डल: (घ) सहस्राधिकेषु — (vi) पुत्रेषु (ङ) अभ्यधिका — (ii) कृपा (च) विस्मित: — (iii) कृषीवल: (छ) तुल्यवत्सला — (v) जननी

व्याख्या:

विशेषण और विशेष्य पदों का मेल किया गया है। कश्चित् कृषक के लिए, दुर्बलम् वृषभम् के लिए, क्रुद्ध: आखण्डल: के लिए, सहस्राधिकेषु पुत्रेषु के लिए, अभ्यधिका कृपा के लिए, विस्मित: कृषीवल: के लिए, तुल्यवत्सला जननी के लिए उपयुक्त हैं।

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Q8.कृषक: बलीवर्दाभ्याम् क्षेत्रकर्षणं कुर्वन् एक: दुर्बल: जवेन्न किमर्थं न गतुम् अर्हत्?
A.A) सः शारीरिकदृष्ट्या दुर्बल: आसीत्
B.B) सः आलस्यम् आसीत्
C.C) सः स्वस्थ: आसीत्
D.D) सः तेजस्वी आसीत्

उत्तर:

सः शारीरिकदृष्ट्या दुर्बल: आसीत्

व्याख्या:

कृषक: के दो बैलों में से एक शारीरिक रूप से दुर्बल था, इसलिए वह तेज गति से चलने में असमर्थ था।

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