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मङ्गलम् | Class 10 Sanskrit Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

मङ्गलम् | Class 10 Sanskrit Notes

मङ्गलम् – this guide gives you a concise, exam-ready overview of मङ्गलम् from Class 10 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

मङ्गलम् - आरम्भिक श्लोक एवं भावार्थ

अध्याय 'मङ्गलम्' की शुरुआत यजुर्वेद और ऋग्वेद के दो श्लोकों से होती है, जो सौ वर्षों तक जीवन, दृष्टि, श्रवण और वाणी की शुभता की कामना करते हैं। प्रथम श्लोक में कहा गया है कि शुक्ल वर्ण का नेत्र (सूर्य) पूर्व दिशा में ऊपर उठ चुका है, अतः हम सौ वर्षों तक शुद्ध दृष्टि से देख सकें, सौ वर्षों तक जीवित रह सकें, सौ वर्षों तक सुन सकें, सौ वर्षों तक शुद्ध वाणी से बोल सकें और सौ वर्षों तक स्वावलम्बी बने रहें। यह सौ वर्षों की अवधि प्रतीकात्मक है, जो दीर्घायु और शुभता का संकेत देती है।

दूसरे श्लोक में ऋग्वेद से लिया गया है, जिसमें देवों से प्रार्थना की गई है कि वे हमारे चारों ओर से शुभ विचार भेजें, जो किसी से दबे न हों, अज्ञात विषयों को प्रकट करने वाले हों, प्रगति को रोकने वाले न हों और दिन-प्रतिदिन हमारी रक्षा करते हुए वृद्धि करें। यह श्लोक समस्त विश्व के कल्याण और विकास की कामना व्यक्त करता है।

इस प्रकार, अध्याय की शुरुआत शुभकामना और सकारात्मक ऊर्जा के साथ होती है, जो आगे के पाठ में प्रकृति और उसके सौंदर्य के वर्णन के लिए आधार तैयार करती है।

🔗 Connection: यह प्रारंभिक श्लोक और भावार्थ अध्याय के मुख्य भाग 'शुचिपर्यावरणम्' में कवि हरिदत्त शर्मा द्वारा प्रदूषण और पर्यावरण की समस्या पर विचार से जुड़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. एकपदेन उत्तरं लिखत – (क) अत्र जीवितं कीदृशं जातम्? (ख) अनिशं महानगरमध्ये किं प्रचलति? (ग) कुत्तित्सतवस्तुमिश्रितं किमस्ति? (घ) अहं कस्मै जीवनं कामये? (ङ) केषां माला रमणीया?

प्रत्येक प्रश्न का एकपदेन उत्तर निम्नलिखित है: (क) जीवनं शोषकं जातम्। (ख) प्रदूषणं प्रचलति। (ग) धूमः कुत्तित्सतवस्तुमिश्रितः अस्ति। (घ) अहं स्वस्थजीवनाय जीवनं कामये। (ङ) वनस्य माला रमणीया अस्ति।

2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत- (क) कवि: किमर्थ प्रकृते: शरणम् इच्छति? (ख) कस्मात् कारणात् महानगरेषु संसरणं कठिनं वर्तते? (ग) अस्माकं पर्यावरणे किं दूषितम् अस्ति? (घ) कवि: कुत्र सञ्चरणं कर्तुम् इच्छति? (ङ) स्वस्थजीवनाय कौद्दशे वातावरणे भ्रमणीयम्? (च) अन्तिमे पद्यांशे कवे: का कामना अस्ति?

प्रत्येक प्रश्न का संस्कृत में उत्तर निम्नलिखित है: (क) कविः कारणं यत् प्रकृतिः शुद्धा च सन्तोषजनका अस्ति, तस्मात् तस्य शरणं इच्छति। (ख) महानगरेषु यान्त्रिकता अधिका अस्ति, तेन संसरणं कठिनं भवति। (ग) अस्माकं पर्यावरणे वायुमण्डलम्, भूमण्डलम् च दूषितम् अस्ति। (घ) कविः वनप्रदेशे, नदीनिर्द्वारे, पक्षिभिः सह सञ्चरणं कर्तुम् इच्छति। (ङ) स्वस्थजीवनाय शुद्धं, हरितं, स्वच्छं वातावरणं भ्रमणीयम्। (च) अन्तिमे पद्यांशे कविः स्वच्छं, निर्मलं जीवनं कामयते।

3. सन्धि/सन्धिविच्छेदं कुरुत- (क) प्रकृति: + ... = प्रकृतिरेव (ख) स्यात् + ... + ... = स्यान्नैव (ग) ... + अनन्ता: = हानन्ता: (घ) बहि: + अन्त: + जगति = ... (ङ) ... + नगरात् = अस्मान्नगरात् (च) सम् + चरणम् = ... (छ) धूमम् + मुञ्चति = ...

सन्धिविच्छेद एवं पूर्ण रूप निम्नलिखित हैं: (क) प्रकृति: + एव = प्रकृतिरेव (ख) स्यात् + न + एव = स्यान्नैव (ग) ह + अनन्ता: = हानन्ता: (घ) बहि: + अन्त: + जगति = बहिःअन्तजगति (ङ) अस्मान् + नगरात् = अस्मान्नगरात् (च) सम् + चरणम् = समचरणम् (छ) धूमम् + मुञ्चति = धूममुञ्चति

4. अधोलिखितानाम् अव्ययानां सहायतया रिक्तस्थानानि पूर्यत- भूशम्, यत्र, तत्र, अत्र, अपि, एव, सदा, बहि: (क) इदानीं वायुमण्डलं ... प्रदूषितमस्ति। (ख) ... जीवनं दुर्वहम् अस्ति। (ग) प्राकृतिक-वातावरणे क्षणं सञ्चरणम् ... लाभदायकं भवति। (घ) पर्यावरणस्य संरक्षणम् ... प्रकृते: आराधना। (ङ) ... समयस्य सदुपयोग: करणीय:। (च) भूकम्पित-समये ... गमनमेव उचितं भवति। (छ) ... हरितिमा ... शुचि पर्यावरणम्।

रिक्तस्थानों में उचित अव्यय निम्नलिखित हैं: (क) इदानीं वायुमण्डलं अत्र प्रदूषितमस्ति। (ख) जीवनं सदा दुर्वहम् अस्ति। (ग) प्राकृतिक-वातावरणे क्षणं अपि सञ्चरणम् लाभदायकं भवति। (घ) पर्यावरणस्य संरक्षणम् एव प्रकृते: आराधना। (ङ) समयस्य सदुपयोग: सदा करणीय:। (च) भूकम्पित-समये बहि: गमनमेव उचितं भवति। (छ) हरितिमा अपि शुचि पर्यावरणम्।

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