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Chapter 1

🎓 Class 10📖 Shemushi📖 9 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~14 मिनट
अध्याय 1 / 10Chapter 2

Chapter 1अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

मङ्गलम् - आरम्भिक श्लोक एवं भावार्थ

व्याख्या

मङ्गलम् - आरम्भिक श्लोक एवं भावार्थ

अध्याय 'मङ्गलम्' की शुरुआत यजुर्वेद और ऋग्वेद के दो श्लोकों से होती है, जो सौ वर्षों तक जीवन, दृष्टि, श्रवण और वाणी की शुभता की कामना करते हैं। प्रथम श्लोक में कहा गया है कि शुक्ल वर्ण का नेत्र (सूर्य) पूर्व दिशा में ऊपर उठ चुका है, अतः हम सौ वर्षों तक शुद्ध दृष्टि से देख सकें, सौ वर्षों तक जीवित रह सकें, सौ वर्षों तक सुन सकें, सौ वर्षों तक शुद्ध वाणी से बोल सकें और सौ वर्षों तक स्वावलम्बी बने रहें। यह सौ वर्षों की अवधि प्रतीकात्मक है, जो दीर्घायु और शुभता का संकेत देती है। दूसरे श्लोक में ऋग्वेद से लिया गया है, जिसमें देवों से प्रार्थना की गई है कि वे हमारे चारों ओर से शुभ विचार भेजें, जो किसी से दबे न हों, अज्ञात विषयों को प्रकट करने वाले हों, प्रगति को रोकने वाले न हों और दिन-प्रतिदिन हमारी रक्षा करते हुए वृद्धि करें। यह श्लोक समस्त विश्व के कल्याण और विकास की कामना व्यक्त करता है। इस प्रकार, अध्याय की शुरुआत शुभकामना और सकारात्मक ऊर्जा के साथ होती है, जो आगे के पाठ में प्रकृति और उसके सौंदर्य के वर्णन के लिए आधार तैयार करती है।

  • यजुर्वेद और ऋग्वेद के श्लोकों से अध्याय की शुरुआत।
  • सौ वर्षों तक जीवन, दृष्टि, श्रवण और वाणी की शुभता की कामना।
  • देवों से कल्याणकारी विचारों की प्रार्थना।
  • शुभता, दीर्घायु और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश।
  • प्रकृति और जीवन के लिए आदर और सम्मान की भावना।
  • 📌 शुक्ल वर्ण का नेत्र - सूर्य का प्रतीक
  • 📌 अदीन - स्वावलम्बी, स्वतंत्र
  • 📌 अपरीतास: - बाधा रहित

प्रथम: पाठ: शुचिपर्यावरणम्

व्याख्या

प्रथम: पाठ: शुचिपर्यावरणम्

यह पाठ आधुनिक संस्कृत कवि हरिदत्त शर्मा की रचना 'लसल्लतिका' से लिया गया है, जिसमें महानगरों में बढ़ते प्रदूषण और उसके प्रभावों का वर्णन है। कवि ने महानगरों में चलने वाले लौहचक्रों (वाहनों) को शरीर और मन का शोषक बताया है, जो वायु को प्रदूषित कर रहा है। इस प्रदूषण के कारण जीवन दुर्वह (कठिन) हो गया है। कवि महानगरीय जीवन से दूर, प्राकृतिक और शुद्ध वातावरण की ओर आकर्षित है। वह नदी, निर्जीव वृक्षसमूह, लताकुञ्ज, पक्षियों की कलरव से गूंजते वनप्रदेश की ओर जाने की इच्छा प्रकट करता है। इस पाठ में कवि ने पर्यावरण की शुद्धता और स्वच्छता की महत्ता को उजागर किया है। पाठ में विभिन्न प्राकृतिक तत्वों जैसे जल, वायु, भूमि, वनस्पति और जीव-जंतु की सुंदरता और महत्व को दर्शाया गया है। प्रदूषण के कारण जो अस्वच्छता और जीवन की कठिनाइयाँ उत्पन्न हुई हैं, उनका विरोध करते हुए कवि ने स्वच्छ पर्यावरण की कामना की है।

  • महानगरों में प्रदूषण और उसके दुष्प्रभावों का वर्णन।
  • लौहचक्रों (वाहनों) को शरीर और मन का शोषक बताया गया।
  • प्रकृति की शुद्धता और स्वच्छता की महत्ता।
  • प्राकृतिक वातावरण की ओर आकर्षण और अभिलाषा।
  • प्रदूषण के कारण जीवन की कठिनाइयाँ।
  • 📌 लौहचक्रम् - लोहे का चक्र, यहाँ वाहनों का प्रतीक
  • 📌 धूमः - धुआं
  • 📌 कञ्जलमलिनम् - काजल जैसा काला प्रदूषण

प्रदूषण के कारण और प्रभाव

व्याख्या

प्रदूषण के कारण और प्रभाव

पाठ में प्रदूषण के विभिन्न कारणों का उल्लेख है, जैसे वाहनों से निकलने वाला धुआं, ध्वनि प्रदूषण, और औद्योगिक कचरा। ये सभी वायुमंडल, जल और भूमि को दूषित करते हैं। प्रदूषित वायु से श्वास रोग होते हैं, जल प्रदूषण से पेयजल असुरक्षित होता है और भूमि प्रदूष

अभ्यास प्रश्नChapter 1

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. एकपदेन उत्तरं लिखत – (क) अत्र जीवितं कीदृशं जातम्? (ख) अनिशं महानगरमध्ये किं प्रचलति? (ग) कुत्तित्सतवस्तुमिश्रितं किमस्ति? (घ) अहं कस्मै जीवनं कामये? (ङ) केषां माला रमणीया?

उत्तर:

प्रत्येक प्रश्न का एकपदेन उत्तर निम्नलिखित है: (क) जीवनं शोषकं जातम्। (ख) प्रदूषणं प्रचलति। (ग) धूमः कुत्तित्सतवस्तुमिश्रितः अस्ति। (घ) अहं स्वस्थजीवनाय जीवनं कामये। (ङ) वनस्य माला रमणीया अस्ति।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर पाठ के अनुसार संक्षेप में दिया गया है। उदाहरणतः जीवन की स्थिति, महानगर में होने वाली घटनाएँ, प्रदूषण का कारण, जीवन की अभिलाषा, तथा रमणीय स्थानों का उल्लेख।

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Q2.2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत- (क) कवि: किमर्थ प्रकृते: शरणम् इच्छति? (ख) कस्मात् कारणात् महानगरेषु संसरणं कठिनं वर्तते? (ग) अस्माकं पर्यावरणे किं दूषितम् अस्ति? (घ) कवि: कुत्र सञ्चरणं कर्तुम् इच्छति? (ङ) स्वस्थजीवनाय कौद्दशे वातावरणे भ्रमणीयम्? (च) अन्तिमे पद्यांशे कवे: का कामना अस्ति?

उत्तर:

प्रत्येक प्रश्न का संस्कृत में उत्तर निम्नलिखित है: (क) कविः कारणं यत् प्रकृतिः शुद्धा च सन्तोषजनका अस्ति, तस्मात् तस्य शरणं इच्छति। (ख) महानगरेषु यान्त्रिकता अधिका अस्ति, तेन संसरणं कठिनं भवति। (ग) अस्माकं पर्यावरणे वायुमण्डलम्, भूमण्डलम् च दूषितम् अस्ति। (घ) कविः वनप्रदेशे, नदीनिर्द्वारे, पक्षिभिः सह सञ्चरणं कर्तुम् इच्छति। (ङ) स्वस्थजीवनाय शुद्धं, हरितं, स्वच्छं वातावरणं भ्रमणीयम्। (च) अन्तिमे पद्यांशे कविः स्वच्छं, निर्मलं जीवनं कामयते।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर पाठ के भावानुसार संस्कृत में दिया गया है, जो कवि की प्रकृति के प्रति अभिलाषा और महानगर के प्रदूषण की समस्या को दर्शाता है।

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Q3.3. सन्धि/सन्धिविच्छेदं कुरुत- (क) प्रकृति: + ... = प्रकृतिरेव (ख) स्यात् + ... + ... = स्यान्नैव (ग) ... + अनन्ता: = हानन्ता: (घ) बहि: + अन्त: + जगति = ... (ङ) ... + नगरात् = अस्मान्नगरात् (च) सम् + चरणम् = ... (छ) धूमम् + मुञ्चति = ...

उत्तर:

सन्धिविच्छेद एवं पूर्ण रूप निम्नलिखित हैं: (क) प्रकृति: + एव = प्रकृतिरेव (ख) स्यात् + न + एव = स्यान्नैव (ग) ह + अनन्ता: = हानन्ता: (घ) बहि: + अन्त: + जगति = बहिःअन्तजगति (ङ) अस्मान् + नगरात् = अस्मान्नगरात् (च) सम् + चरणम् = समचरणम् (छ) धूमम् + मुञ्चति = धूममुञ्चति

व्याख्या:

प्रत्येक सन्धि को उसके घटकों में विभाजित कर पूर्ण रूप प्रस्तुत किया गया है। उदाहरणतः 'प्रकृतिरेव' में 'प्रकृति:' और 'एव' का सन्धि है।

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Q4.4. अधोलिखितानाम् अव्ययानां सहायतया रिक्तस्थानानि पूर्यत- भूशम्, यत्र, तत्र, अत्र, अपि, एव, सदा, बहि: (क) इदानीं वायुमण्डलं ... प्रदूषितमस्ति। (ख) ... जीवनं दुर्वहम् अस्ति। (ग) प्राकृतिक-वातावरणे क्षणं सञ्चरणम् ... लाभदायकं भवति। (घ) पर्यावरणस्य संरक्षणम् ... प्रकृते: आराधना। (ङ) ... समयस्य सदुपयोग: करणीय:। (च) भूकम्पित-समये ... गमनमेव उचितं भवति। (छ) ... हरितिमा ... शुचि पर्यावरणम्।

उत्तर:

रिक्तस्थानों में उचित अव्यय निम्नलिखित हैं: (क) इदानीं वायुमण्डलं अत्र प्रदूषितमस्ति। (ख) जीवनं सदा दुर्वहम् अस्ति। (ग) प्राकृतिक-वातावरणे क्षणं अपि सञ्चरणम् लाभदायकं भवति। (घ) पर्यावरणस्य संरक्षणम् एव प्रकृते: आराधना। (ङ) समयस्य सदुपयोग: सदा करणीय:। (च) भूकम्पित-समये बहि: गमनमेव उचितं भवति। (छ) हरितिमा अपि शुचि पर्यावरणम्।

व्याख्या:

प्रत्येक रिक्त स्थान में अर्थानुसार उपयुक्त अव्यय भरा गया है जो वाक्य को पूर्ण और अर्थपूर्ण बनाता है।

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Q5.5. (अ) अधोलिखितानां पदानां पर्यायपदं लिखत- (क) सलिलम् ... (ख) आम्रम् ... (ग) वनम् (घ) शरीरम् (ङ) कुटिलम् (च) पाषाण:

उत्तर:

प्रत्येक पद के पर्यायपद निम्नलिखित हैं: (क) सलिलम् – जलम् (ख) आम्रम् – फलं (ग) वनम् – अरण्यम् (घ) शरीरम् – देहः (ङ) कुटिलम् – वक्रम् (च) पाषाण: – शिला

व्याख्या:

प्रत्येक शब्द के समानार्थी शब्द पाठ के संदर्भ और सामान्य ज्ञान के अनुसार दिए गए हैं।

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Q6.(आ) अधोलिखितपदानां विलोमपदानि पाठात् चित्वा लिखत- (क) सुकरम् (ख) दूषितम् (ग) गृहणन्ती (घ) निर्मलम् (ङ) दानवाय (च) सान्ता:

उत्तर:

प्रत्येक शब्द के विलोम पद निम्नलिखित हैं: (क) सुकरम् – दुकरम् (ख) दूषितम् – निर्मलम् (ग) गृहणन्ती – त्यजन्ती (घ) निर्मलम् – दूषितम् (ङ) दानवाय – देवताय (च) सान्ता: – क्रुद्धा:

व्याख्या:

प्रत्येक शब्द के विलोम शब्द पाठ और सामान्य संस्कृत ज्ञान के अनुसार दिए गए हैं।

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Q7.6. उदाहरणमनुसृत्य पाठात् चित्वा च समस्तपदानि समासनाम च लिखत- विग्रहवाक्यानि समस्तपदानि समासनाम यथा-मलेन सहितम् समलम् अव्ययीभाव (क) हरिता: च ये तरव: (तेषां) (ख) ललिता: च या: लता: (तासाम्) (ग) नवा मालिका (घ) धृत: सुखसन्देश: येन (तम्) (ङ) कञ्जलम् इव मलिनम् (च) दुर्दान्तै: दशनै:

उत्तर:

प्रत्येक वाक्य के समस्तपद और समास निम्नलिखित हैं: (क) हरिताः च ये तरवः (तेषां) – हरिततरवः – तत्पुरुष समास (ख) ललिताः च या: लता: (तासाम्) – ललितलता: – तत्पुरुष समास (ग) नवा मालिका – नवमालिका – कर्मधारय समास (घ) धृतः सुखसन्देशः येन (तम्) – सुखसन्देशकः – तत्पुरुष समास (ङ) कञ्जलम् इव मलिनम् – कञ्जलमलिनम् – कर्मधारय समास (च) दुर्दान्तै: दशनै: – दुर्दान्तदशनै: – बहुव्रीहि समास

व्याख्या:

प्रत्येक उदाहरण में पदों का समास रूप और उसके प्रकार को पाठ के अनुसार दर्शाया गया है।

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Q8.7. रेखाङ्कृत-पदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत- (क) शकटीयानम् कञ्जलमलिनं धूमं मुञ्चति। (ख) उद्याने पक्षिणां कलरवं चेत: प्रसादयति। (ग) पाषाणीसभ्यतायां लतातरुगुल्मा: प्रस्तरतले पिष्टा: सन्ति। (घ) महानगरेषु वाहनानाम् अनन्ता: पड्क्तय: धावन्ति। (ङ) प्रकृत्या: सन्निधौ वास्तविकं सुखं विद्यते।

उत्तर:

प्रत्येक वाक्य से प्रश्न निम्नलिखित प्रकार से बनाए जा सकते हैं: (क) शकटीयानम् कञ्चलमलिनं धूमं किम् मुञ्चति? (ख) उद्याने पक्षिणां कलरवं किम् चेत: प्रसादयति? (ग) पाषाणीसभ्यतायां लतातरुगुल्मा: कुत्र सन्ति? (घ) महानगरेषु वाहनानाम् कियत: पड्क्तय: धावन्ति? (ङ) प्रकृत्या: सन्निधौ किम् विद्यते? प्रत्येक प्रश्न पाठ के वाक्यों के आधार पर सरल और स्पष्ट रूप में निर्मित हैं।

व्याख्या:

प्रत्येक वाक्य के मुख्य तत्वों को प्रश्न के रूप में परिवर्तित किया गया है ताकि छात्र पाठ की समझ को परख सकें।

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