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मङ्गलम् | Class 10 Sanskrit Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

मङ्गलम् | Class 10 Sanskrit Notes

मङ्गलम् – this guide gives you a concise, exam-ready overview of मङ्गलम् from Class 10 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

व्याकरण: समास परिचय

इस भाग में समास के चार मुख्य भेदों का परिचय दिया गया है: अव्ययीभाव, तत्पुरुष, बहुव्रीहि, और द्वन्द्व।

1. अव्ययीभाव समास में पहला पद अव्यय होता है और समस्त समास अव्यय ही बन जाता है। उदाहरण: 'निर्मीक्षकम्' (मैक्षिकाणाम् अभाव)।

2. तत्पुरुष समास में प्रायः उत्तरपद प्रधान होता है और पूर्वपद उसका विशेषण। इसके दो प्रकार हैं- कर्मधारय (जैसे 'पीताम्बरम्') और द्विगु (जैसे 'त्रिभुजम्')।

3. बहुव्रीहि समास में neither पूर्वपद nor उत्तरपद प्रधान होता है, बल्कि किसी अन्य पद की प्रधानता होती है। उदाहरण: 'पीताम्बर' (विष्णु)।

4. द्वन्द्व समास में दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं और विग्रह में 'च' का प्रयोग होता है। उदाहरण: 'रामलक्ष्मणौ' (रामश्च लक्ष्मणश्च)।

यह समासों का अध्ययन संस्कृत भाषा की संरचना और शब्द निर्माण को समझने में मदद करता है।

🧪 Activity: विद्यार्थियों को समास के उदाहरण बनाकर उनके प्रकार पहचानने का अभ्यास दिया जाता है।

🔗 Connection: समास के अध्ययन के बाद, पाठ के व्याकरणिक अभ्यास और शब्द रूपों के अध्ययन की ओर बढ़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. एकपदेन उत्तरं लिखत – (क) अत्र जीवितं कीदृशं जातम्? (ख) अनिशं महानगरमध्ये किं प्रचलति? (ग) कुत्तित्सतवस्तुमिश्रितं किमस्ति? (घ) अहं कस्मै जीवनं कामये? (ङ) केषां माला रमणीया?

प्रत्येक प्रश्न का एकपदेन उत्तर निम्नलिखित है: (क) जीवनं शोषकं जातम्। (ख) प्रदूषणं प्रचलति। (ग) धूमः कुत्तित्सतवस्तुमिश्रितः अस्ति। (घ) अहं स्वस्थजीवनाय जीवनं कामये। (ङ) वनस्य माला रमणीया अस्ति।

2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत- (क) कवि: किमर्थ प्रकृते: शरणम् इच्छति? (ख) कस्मात् कारणात् महानगरेषु संसरणं कठिनं वर्तते? (ग) अस्माकं पर्यावरणे किं दूषितम् अस्ति? (घ) कवि: कुत्र सञ्चरणं कर्तुम् इच्छति? (ङ) स्वस्थजीवनाय कौद्दशे वातावरणे भ्रमणीयम्? (च) अन्तिमे पद्यांशे कवे: का कामना अस्ति?

प्रत्येक प्रश्न का संस्कृत में उत्तर निम्नलिखित है: (क) कविः कारणं यत् प्रकृतिः शुद्धा च सन्तोषजनका अस्ति, तस्मात् तस्य शरणं इच्छति। (ख) महानगरेषु यान्त्रिकता अधिका अस्ति, तेन संसरणं कठिनं भवति। (ग) अस्माकं पर्यावरणे वायुमण्डलम्, भूमण्डलम् च दूषितम् अस्ति। (घ) कविः वनप्रदेशे, नदीनिर्द्वारे, पक्षिभिः सह सञ्चरणं कर्तुम् इच्छति। (ङ) स्वस्थजीवनाय शुद्धं, हरितं, स्वच्छं वातावरणं भ्रमणीयम्। (च) अन्तिमे पद्यांशे कविः स्वच्छं, निर्मलं जीवनं कामयते।

3. सन्धि/सन्धिविच्छेदं कुरुत- (क) प्रकृति: + ... = प्रकृतिरेव (ख) स्यात् + ... + ... = स्यान्नैव (ग) ... + अनन्ता: = हानन्ता: (घ) बहि: + अन्त: + जगति = ... (ङ) ... + नगरात् = अस्मान्नगरात् (च) सम् + चरणम् = ... (छ) धूमम् + मुञ्चति = ...

सन्धिविच्छेद एवं पूर्ण रूप निम्नलिखित हैं: (क) प्रकृति: + एव = प्रकृतिरेव (ख) स्यात् + न + एव = स्यान्नैव (ग) ह + अनन्ता: = हानन्ता: (घ) बहि: + अन्त: + जगति = बहिःअन्तजगति (ङ) अस्मान् + नगरात् = अस्मान्नगरात् (च) सम् + चरणम् = समचरणम् (छ) धूमम् + मुञ्चति = धूममुञ्चति

4. अधोलिखितानाम् अव्ययानां सहायतया रिक्तस्थानानि पूर्यत- भूशम्, यत्र, तत्र, अत्र, अपि, एव, सदा, बहि: (क) इदानीं वायुमण्डलं ... प्रदूषितमस्ति। (ख) ... जीवनं दुर्वहम् अस्ति। (ग) प्राकृतिक-वातावरणे क्षणं सञ्चरणम् ... लाभदायकं भवति। (घ) पर्यावरणस्य संरक्षणम् ... प्रकृते: आराधना। (ङ) ... समयस्य सदुपयोग: करणीय:। (च) भूकम्पित-समये ... गमनमेव उचितं भवति। (छ) ... हरितिमा ... शुचि पर्यावरणम्।

रिक्तस्थानों में उचित अव्यय निम्नलिखित हैं: (क) इदानीं वायुमण्डलं अत्र प्रदूषितमस्ति। (ख) जीवनं सदा दुर्वहम् अस्ति। (ग) प्राकृतिक-वातावरणे क्षणं अपि सञ्चरणम् लाभदायकं भवति। (घ) पर्यावरणस्य संरक्षणम् एव प्रकृते: आराधना। (ङ) समयस्य सदुपयोग: सदा करणीय:। (च) भूकम्पित-समये बहि: गमनमेव उचितं भवति। (छ) हरितिमा अपि शुचि पर्यावरणम्।

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