Sanskritकक्षा 10मङ्गलम्हिंदी

मङ्गलम् | Class 10 Sanskrit Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 6 मिनट का पठन

मङ्गलम् | Class 10 Sanskrit Notes

मङ्गलम् – this guide gives you a concise, exam-ready overview of मङ्गलम् from Class 10 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

शब्दार्थाः (कठिन शब्दों के अर्थ)

इस अनुभाग में पाठ में प्रयुक्त कठिन शब्दों के अर्थ विस्तार से दिए गए हैं। जैसे 'दुर्वहम्' का अर्थ कठिन या दूभर, 'कालायसचक्रम्' का अर्थ लौहचक्र (वाहन), 'कञ्जलमलिनम्' का अर्थ काजल जैसा काला, 'वाष्पयानमाला' का अर्थ रेलगाड़ियों की कतार, 'धूमः' का अर्थ धुआं आदि।

यह शब्दार्थ विद्यार्थियों को पाठ की गहन समझ प्रदान करते हैं और संस्कृत भाषा के शब्दों के विभिन्न पर्यायवाची और भावों को समझने में मदद करते हैं। इसके अलावा, तत्सम और तद्भव शब्दों का परिचय भी दिया गया है, जो संस्कृत और हिंदी के बीच संबंध को स्पष्ट करते हैं।

📊 Diagram: See table_1: Table on page 5 (23×7); See table_2: Table on page 6 (1×7); See table_3: Table on page 6 (4×7); See table_4: Table on page 6 (1×7); See table_5: Table on page 12 (10×2)

🧪 Activity: विद्यार्थियों को कठिन शब्दों के पर्यायवाची और विलोम शब्द लिखने के अभ्यास दिए जाते हैं।

🔗 Connection: यह अनुभाग व्याकरण और समास के अध्ययन की ओर बढ़ता है, जहाँ शब्दों के रूप और उनके संयोजन की चर्चा होती है।

Table on page 5 (23×7)

दुर्वहम्-दुष्करम्-कठिन, दूभर-Difficult
जीवितम्-जीवनम्-जीवन-Life
अनिशम्-अहर्निशम्-दिन-रात-Day and Night
कालायसचक्रम्-लौहचक्रम्-लोह का चक्र-Iron wheel
शोषयत्-शुष्कीकुर्वत्-सुखाते हुए-Drying
तनूः-शरीराणि-शरीर-Bodies
पेषयद्-पिष्टीकुर्वत्-पीसते हुए-Grinding
वक्रम्-कुटिलम्-टेढ़ा-Askew
दुर्दान्तैः-भयङ्करैः-भयानक (से)-Scary
दशनैः-दन्तैः-दाँतों से-By teeth
अमुना-अनेन-इससे-By thus
जनग्रसनम्-जनभक्षणम्-मानव विनाश-Destruction of humans
कज्जलमलिनम्-कज्जलम् इव मलिनम्-काजल-सा मलिन (काला)-Black as kohl
धूमः-अग्निवाहः-धुआँ-Smoke
मुज्चति-त्यजति-छोड़ता है-Releasing
शतशकटीयानम्-शकटीयानानां शतम्-सैकड़ों मोटर गाड़ियाँ-Hundreds of vehicles
वाष्पयानमाला-वाष्पयानानां पंक्ति:-रेलगाड़ी की पंक्ति-Row of trains
वितरन्ती-ददती/वितरणं कुर्वाणा-देती हुई-Distributing
ध्वानम्-ध्वनिम्-कोलाहल-Sound
संसरणम्-सञ्चलनम्-चलना-Movement
भूशां-अत्यधिकम्-अत्यधिक-Enormous
भक्ष्यम्-खाद्यपदार्थ-भोज्य पदार्थ-Eatable
समलम्-मलेन सह-मलयुक्त, गन्दगी से युक्त-Dirty

Table on page 6 (1×7)

---------------------

| पय:पूरम् | - | जलाशयम् | - | जल से भरा

Table on page 6 (4×7)

कान्तारे-वने-जंगल में-In the forest
कुसुमावलि:-कुसुमानां पंक्ति:-फूलों की पंक्ति-Row of flowers
समीरचालिता-वायुचालिता-हवा से चलायी हुई-Moved by wind
रुचिरम्-सुन्दरम्-सुन्दर-Attractive

| खगकुलकलरव | - | खगकुलानां कलरव:

Table on page 6 (1×7)

पाषाणी-पर्वतमयी-पथरीली-Stony
निसर्गें-प्रकृत्याम्-प्रकृति में-In the nature

Table on page 12 (10×2)

तत्समतद्भव
प्रस्तरपत्थर
वाष्पभाप
दुर्बहदूभर
वक्रबाँका
कञ्जलकाजल
चाकचिक्यचकाचक, चकाचौंध
धूम:धुऔ
शतम्सौ (100)
बहि:बाहर

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. एकपदेन उत्तरं लिखत – (क) अत्र जीवितं कीदृशं जातम्? (ख) अनिशं महानगरमध्ये किं प्रचलति? (ग) कुत्तित्सतवस्तुमिश्रितं किमस्ति? (घ) अहं कस्मै जीवनं कामये? (ङ) केषां माला रमणीया?

प्रत्येक प्रश्न का एकपदेन उत्तर निम्नलिखित है: (क) जीवनं शोषकं जातम्। (ख) प्रदूषणं प्रचलति। (ग) धूमः कुत्तित्सतवस्तुमिश्रितः अस्ति। (घ) अहं स्वस्थजीवनाय जीवनं कामये। (ङ) वनस्य माला रमणीया अस्ति।

2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत- (क) कवि: किमर्थ प्रकृते: शरणम् इच्छति? (ख) कस्मात् कारणात् महानगरेषु संसरणं कठिनं वर्तते? (ग) अस्माकं पर्यावरणे किं दूषितम् अस्ति? (घ) कवि: कुत्र सञ्चरणं कर्तुम् इच्छति? (ङ) स्वस्थजीवनाय कौद्दशे वातावरणे भ्रमणीयम्? (च) अन्तिमे पद्यांशे कवे: का कामना अस्ति?

प्रत्येक प्रश्न का संस्कृत में उत्तर निम्नलिखित है: (क) कविः कारणं यत् प्रकृतिः शुद्धा च सन्तोषजनका अस्ति, तस्मात् तस्य शरणं इच्छति। (ख) महानगरेषु यान्त्रिकता अधिका अस्ति, तेन संसरणं कठिनं भवति। (ग) अस्माकं पर्यावरणे वायुमण्डलम्, भूमण्डलम् च दूषितम् अस्ति। (घ) कविः वनप्रदेशे, नदीनिर्द्वारे, पक्षिभिः सह सञ्चरणं कर्तुम् इच्छति। (ङ) स्वस्थजीवनाय शुद्धं, हरितं, स्वच्छं वातावरणं भ्रमणीयम्। (च) अन्तिमे पद्यांशे कविः स्वच्छं, निर्मलं जीवनं कामयते।

3. सन्धि/सन्धिविच्छेदं कुरुत- (क) प्रकृति: + ... = प्रकृतिरेव (ख) स्यात् + ... + ... = स्यान्नैव (ग) ... + अनन्ता: = हानन्ता: (घ) बहि: + अन्त: + जगति = ... (ङ) ... + नगरात् = अस्मान्नगरात् (च) सम् + चरणम् = ... (छ) धूमम् + मुञ्चति = ...

सन्धिविच्छेद एवं पूर्ण रूप निम्नलिखित हैं: (क) प्रकृति: + एव = प्रकृतिरेव (ख) स्यात् + न + एव = स्यान्नैव (ग) ह + अनन्ता: = हानन्ता: (घ) बहि: + अन्त: + जगति = बहिःअन्तजगति (ङ) अस्मान् + नगरात् = अस्मान्नगरात् (च) सम् + चरणम् = समचरणम् (छ) धूमम् + मुञ्चति = धूममुञ्चति

4. अधोलिखितानाम् अव्ययानां सहायतया रिक्तस्थानानि पूर्यत- भूशम्, यत्र, तत्र, अत्र, अपि, एव, सदा, बहि: (क) इदानीं वायुमण्डलं ... प्रदूषितमस्ति। (ख) ... जीवनं दुर्वहम् अस्ति। (ग) प्राकृतिक-वातावरणे क्षणं सञ्चरणम् ... लाभदायकं भवति। (घ) पर्यावरणस्य संरक्षणम् ... प्रकृते: आराधना। (ङ) ... समयस्य सदुपयोग: करणीय:। (च) भूकम्पित-समये ... गमनमेव उचितं भवति। (छ) ... हरितिमा ... शुचि पर्यावरणम्।

रिक्तस्थानों में उचित अव्यय निम्नलिखित हैं: (क) इदानीं वायुमण्डलं अत्र प्रदूषितमस्ति। (ख) जीवनं सदा दुर्वहम् अस्ति। (ग) प्राकृतिक-वातावरणे क्षणं अपि सञ्चरणम् लाभदायकं भवति। (घ) पर्यावरणस्य संरक्षणम् एव प्रकृते: आराधना। (ङ) समयस्य सदुपयोग: सदा करणीय:। (च) भूकम्पित-समये बहि: गमनमेव उचितं भवति। (छ) हरितिमा अपि शुचि पर्यावरणम्।

इस अध्याय में महारत हासिल करें

पूरा मङ्गलम् अध्याय — इंटरैक्टिव नोट्स, चित्र, हल किए गए प्रश्न, पोल्स और मुफ़्त अभ्यास क्विज़ — ConceptScroll ऐप में।

ConceptScroll में खोलें →

ConceptScroll के साथ स्मार्ट पढ़ें

रोज़ाना एनसीईआरटी रील्स, एआई डाउट सॉल्विंग और अध्याय क्विज़ — सब मुफ़्त।

मुफ़्त सीखना शुरू करें
#cbse notes#class 10#ncert#sanskrit

और पढ़ें