Care and Maintenance of Fabrics in Institutions | Class 12 Home Science Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

Care and Maintenance of Fabrics in Institutions – this guide gives you a concise, exam-ready overview of Care and Maintenance of Fabrics in Institutions from Class 12 Home Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
संस्थाओं में वस्त्रों की देखभाल और रखरखाव
इस अध्याय में हम वस्त्रों की देखभाल और रखरखाव के महत्व को समझेंगे, विशेषकर अस्पतालों, होटलों और अन्य संस्थाओं में जहाँ वस्त्रों का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। वस्त्रों की देखभाल का उद्देश्य उनके भौतिक गुणों को बनाए रखना और धब्बों तथा गंदगी से मुक्त रखना है ताकि वे दीर्घकाल तक उपयोगी बने रहें। संस्थाओं में उपयोग होने वाले वस्त्रों में विशेष गुण होते हैं, जैसे अस्पतालों में पिट्टियाँ, मास्क आदि, जिनकी देखभाल और रखरखाव विशेष सावधानी से किया जाता है। वस्त्रों की देखभाल में दो मुख्य पहलू होते हैं: (1) सामग्री को भौतिक क्षति से बचाना और यदि कोई क्षति हुई हो तो उसका सुधार करना, (2) धब्बे और धूल को हटाकर वस्त्रों के रंग, चमक और बनावट को बनाए रखना। इस अध्याय में हम इन पहलुओं के साथ-साथ धुलाई, सुखाने, इस्तरी करने की प्रक्रियाओं और व्यावसायिक धुलाईघरों की कार्यप्रणाली को विस्तार से जानेंगे।
🔗 Connection: यह परिचय अगले भाग में वस्त्रों की देखभाल के मूलभूत संकल्पनाओं और धुलाई की वैज्ञानिक प्रक्रिया की चर्चा से जुड़ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. वस्त्रों की देखभाल और रखरखाव के दो पहलू क्या हैं?
वस्त्रों की देखभाल और रखरखाव के दो पहलू हैं: (1) वस्त्रों की सफाई, जिसमें धुलाई, धूप में सुखाना, और धब्बे हटाना शामिल है; (2) वस्त्रों की मरम्मत और संरक्षण, जिसमें सिलाई, इस्तरी करना, और उचित भंडारण शामिल है।
2. वे कौन-से कारक हैं, जो वस्त्रों की सफ़ाई की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं?
वस्त्रों की सफाई की प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले कारक हैं: (1) वस्त्र का प्रकार (जैसे सूती, रेशमी, ऊनी, संश्लेषित), (2) धब्बे का प्रकार और उसकी ताजगी या पुराना होना, (3) उपयोग की जाने वाली सफाई विधि और रसायन, (4) पानी का तापमान और गुणवत्ता, (5) धुलाई की मशीन या उपकरण की क्षमता।
3. एक व्यावसायिक या औद्योगिक धुलाईघर में विभिन्न विभागों की व्यवस्था कैसे की जाती है?
एक व्यावसायिक या औद्योगिक धुलाईघर में विभागों की व्यवस्था इस प्रकार होती है:
- प्राप्ति विभाग: जहाँ वस्त्र प्राप्त किए जाते हैं और उनकी जांच की जाती है।
- वर्गीकरण विभाग: वस्त्रों को प्रकार, रंग, और धब्बों के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है।
- पूर्व उपचार विभाग: धब्बों को हटाने के लिए विशेष उपचार किया जाता है।
- धुलाई विभाग: वस्त्रों को मशीनों में धोया जाता है।
- सुखाने विभाग: वस्त्रों को सुखाया जाता है।
- इस्तरी और फिनिशिंग विभाग: वस्त्रों को इस्तरी किया जाता है और अंतिम रूप दिया जाता है।
- पैकिं
4. व्यावसायिक धुलाईघरों और अस्पतालों के धुलाईघरों के धुलाई कार्य की प्रक्रिया में क्या अंतर है?
व्यावसायिक धुलाईघर और अस्पतालों के धुलाईघर की प्रक्रिया में मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:
- व्यावसायिक धुलाईघर में सामान्य वस्त्रों की सफाई होती है, जबकि अस्पतालों के धुलाईघर में संक्रमण नियंत्रण के लिए विशेष विसंक्रमण प्रक्रियाएँ अपनाई जाती हैं।
- अस्पतालों में धुलाई के बाद वस्त्रों को उच्च तापमान पर विसंक्रमित किया जाता है, जो व्यावसायिक धुलाईघर में सामान्यतः नहीं होता।
- अस्पतालों के धुलाईघर में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाता है ताकि रोगाणु न फैलें।
- व्यावसायिक धुलाईघर में ग्राहक की
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