Care and Maintenance of Fabrics in Institutions
Care and Maintenance of Fabrics in Institutions — Study Notes
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संस्थाओं में वस्त्रों की देखभाल और रखरखाव
Explanationसंस्थाओं में वस्त्रों की देखभाल और रखरखाव
इस अध्याय में हम वस्त्रों की देखभाल और रखरखाव के महत्व को समझेंगे, विशेषकर अस्पतालों, होटलों और अन्य संस्थाओं में जहाँ वस्त्रों का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। वस्त्रों की देखभाल का उद्देश्य उनके भौतिक गुणों को बनाए रखना और धब्बों तथा गंदगी से मुक्त रखना है ताकि वे दीर्घकाल तक उपयोगी बने रहें। संस्थाओं में उपयोग होने वाले वस्त्रों में विशेष गुण होते हैं, जैसे अस्पतालों में पिट्टियाँ, मास्क आदि, जिनकी देखभाल और रखरखाव विशेष सावधानी से किया जाता है। वस्त्रों की देखभाल में दो मुख्य पहलू होते हैं: (1) सामग्री को भौतिक क्षति से बचाना और यदि कोई क्षति हुई हो तो उसका सुधार करना, (2) धब्बे और धूल को हटाकर वस्त्रों के रंग, चमक और बनावट को बनाए रखना। इस अध्याय में हम इन पहलुओं के साथ-साथ धुलाई, सुखाने, इस्तरी करने की प्रक्रियाओं और व्यावसायिक धुलाईघरों की कार्यप्रणाली को विस्तार से जानेंगे।
- संस्थाओं में वस्त्रों की देखभाल विशेष महत्व रखती है क्योंकि यहाँ वस्त्रों का भारी उपयोग होता है।
- वस्त्रों की देखभाल का उद्देश्य उनके भौतिक गुणों और सौंदर्य को बनाए रखना होता है।
- दो मुख्य पहलू हैं: भौतिक क्षति से बचाव और धब्बों तथा गंदगी को हटाना।
- विशेष गुणों वाले वस्त्रों की देखभाल में सावधानी आवश्यक होती है।
- अस्पतालों, होटलों जैसे संस्थानों में वस्त्रों की देखभाल के लिए विशेष प्रक्रियाएँ अपनाई जाती हैं।
- 📌 वस्त्र देखभाल: वस्त्रों को स्वच्छ, सुरक्षित और उपयोगी बनाए रखने की प्रक्रिया।
- 📌 धुलाई: वस्त्रों से गंदगी हटाने की प्रक्रिया।
- 📌 रखरखाव: वस्त्रों की मरम्मत और संरक्षण।
मूलभूत संकल्पनाएँ
Conceptमूलभूत संकल्पनाएँ
स्वच्छ, चमकदार और स्वास्थ्य के अनुकूल वस्त्र प्राप्त करने के लिए धुलाई एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। धुलाई एक विज्ञान और कला दोनों है। विज्ञान इसलिए क्योंकि इसमें रसायन, तापमान, जल की गुणवत्ता और यांत्रिक क्रियाओं का वैज्ञानिक उपयोग होता है। कला इसलिए क्योंकि धुलाई के दौरान वस्त्रों की बनावट, रंग और सौंदर्य बनाए रखने के लिए कौशल और अनुभव की आवश्यकता होती है। वस्त्रों की देखभाल उनके रेशों, धागे के प्रकार, वस्त्र निर्माण तकनीक, सुसज्जा और उपयोग के स्थान पर निर्भर करती है। धुलाई में साबुन, डिटर्जेंट, जल की भूमिका, धुलाई विधियाँ, सुसज्जा उपचार, इस्तरी और गरम प्रेस करना शामिल हैं। इन सभी प्रक्रियाओं के लिए उपयुक्त उपकरणों का प्रयोग आवश्यक होता है। घरेलू स्तर पर हाथ से धुलाई होती है, जबकि संस्थागत स्तर पर मशीनों का उपयोग होता है।
- धुलाई एक विज्ञान और कला दोनों है।
- वस्त्रों की देखभाल उनके रेशों, धागे और निर्माण तकनीक पर निर्भर करती है।
- धुलाई में रसायन, तापमान, जल की गुणवत्ता और यांत्रिक क्रियाएँ शामिल होती हैं।
- साबुन, डिटर्जेंट, जल, इस्तरी और प्रेसिंग वस्त्र देखभाल के महत्वपूर्ण अंग हैं।
- घरेलू और व्यावसायिक स्तर पर धुलाई के उपकरण भिन्न होते हैं।
- 📌 डिटर्जेंट: धुलाई के लिए उपयोग होने वाला रासायनिक पदार्थ जो गंदगी हटाता है।
- 📌 सुसज्जा उपचार: वस्त्रों की चमक और बनावट बनाए रखने के लिए किया जाने वाला उपचार।
- 📌 गरम प्रेस: इस्तरी की एक विधि जो सिलवटों को हटाकर वस्त्र को सुंदर बनाती है।
धुलाई के उपकरण
Explanationधुलाई के उपकरण
धुलाई के उपकरण मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं: ऊपर से भरने वाली मशीनें, सामने से भरने वाली मशीनें और दो टबों वाली मशीनें। ऊपर से भरने वाली मशीनों में कपड़े मशीन के ऊपर से डाले जाते हैं और ये आलोड़न, स्पंदन और खंगालने की क्रियाएँ करती हैं। सामने से भर
Practice Questions — Care and Maintenance of Fabrics in Institutions
Includes NCERT exercise questions with answers
Q1.1. वस्त्रों की देखभाल और रखरखाव के दो पहलू क्या हैं?
Answer:
वस्त्रों की देखभाल और रखरखाव के दो पहलू हैं: (1) वस्त्रों की सफाई, जिसमें धुलाई, धूप में सुखाना, और धब्बे हटाना शामिल है; (2) वस्त्रों की मरम्मत और संरक्षण, जिसमें सिलाई, इस्तरी करना, और उचित भंडारण शामिल है।
Explanation:
वस्त्रों की देखभाल में उन्हें साफ और अच्छी स्थिति में बनाए रखना आवश्यक होता है। सफाई से वस्त्रों पर लगे धब्बे और गंदगी हटती है, जबकि मरम्मत से वस्त्रों की आयु बढ़ती है।
Q2.2. वे कौन-से कारक हैं, जो वस्त्रों की सफ़ाई की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं?
Answer:
वस्त्रों की सफाई की प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले कारक हैं: (1) वस्त्र का प्रकार (जैसे सूती, रेशमी, ऊनी, संश्लेषित), (2) धब्बे का प्रकार और उसकी ताजगी या पुराना होना, (3) उपयोग की जाने वाली सफाई विधि और रसायन, (4) पानी का तापमान और गुणवत्ता, (5) धुलाई की मशीन या उपकरण की क्षमता।
Explanation:
विभिन्न वस्त्रों और धब्बों के अनुसार सफाई की विधि और रसायन अलग-अलग होते हैं। सही विधि और कारकों का चयन वस्त्र की सुरक्षा और सफाई की गुणवत्ता सुनिश्चित करता है।
Q3.3. एक व्यावसायिक या औद्योगिक धुलाईघर में विभिन्न विभागों की व्यवस्था कैसे की जाती है?
Answer:
एक व्यावसायिक या औद्योगिक धुलाईघर में विभागों की व्यवस्था इस प्रकार होती है: - प्राप्ति विभाग: जहाँ वस्त्र प्राप्त किए जाते हैं और उनकी जांच की जाती है। - वर्गीकरण विभाग: वस्त्रों को प्रकार, रंग, और धब्बों के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है। - पूर्व उपचार विभाग: धब्बों को हटाने के लिए विशेष उपचार किया जाता है। - धुलाई विभाग: वस्त्रों को मशीनों में धोया जाता है। - सुखाने विभाग: वस्त्रों को सुखाया जाता है। - इस्तरी और फिनिशिंग विभाग: वस्त्रों को इस्तरी किया जाता है और अंतिम रूप दिया जाता है। - पैकिंग और वितरण विभाग: वस्त्रों को पैक कर ग्राहक को दिया जाता है। इस व्यवस्था से कार्य कुशलता बढ़ती है और वस्त्रों की गुणवत्ता बनी रहती है।
Explanation:
धुलाईघर में विभागों का स्पष्ट विभाजन कार्य को सुव्यवस्थित करता है और प्रत्येक चरण में वस्त्रों की उचित देखभाल सुनिश्चित करता है।
Q4.4. व्यावसायिक धुलाईघरों और अस्पतालों के धुलाईघरों के धुलाई कार्य की प्रक्रिया में क्या अंतर है?
Answer:
व्यावसायिक धुलाईघर और अस्पतालों के धुलाईघर की प्रक्रिया में मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं: - व्यावसायिक धुलाईघर में सामान्य वस्त्रों की सफाई होती है, जबकि अस्पतालों के धुलाईघर में संक्रमण नियंत्रण के लिए विशेष विसंक्रमण प्रक्रियाएँ अपनाई जाती हैं। - अस्पतालों में धुलाई के बाद वस्त्रों को उच्च तापमान पर विसंक्रमित किया जाता है, जो व्यावसायिक धुलाईघर में सामान्यतः नहीं होता। - अस्पतालों के धुलाईघर में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाता है ताकि रोगाणु न फैलें। - व्यावसायिक धुलाईघर में ग्राहक की वस्त्रों की विविधता होती है, जबकि अस्पतालों में मुख्यतः चिकित्सा वस्त्र ही धोए जाते हैं।
Explanation:
अस्पतालों में संक्रमण फैलने की संभावना अधिक होती है, इसलिए वहाँ की धुलाई प्रक्रिया अधिक कठोर और सुरक्षित होती है। व्यावसायिक धुलाईघर में सामान्य वस्त्रों की सफाई पर ध्यान दिया जाता है।
Q5.वस्त्रों की देखभाल और रखरखाव के दो मुख्य पहलू क्या हैं?
Answer:
सामग्री को भौतिक क्षति से बचाना और धब्बों तथा धूल को हटाना
Explanation:
वस्त्रों की देखभाल और रखरखाव के दो मुख्य पहलू होते हैं: (1) सामग्री को भौतिक क्षति से मुक्त रखना और यदि कोई क्षति हुई हो तो उसका सुधार करना, तथा (2) धब्बों और धूल को हटाकर वस्त्रों के रंग, चमक और बनावट को बनाए रखना।
Q6.धुलाई को विज्ञान और कला दोनों क्यों कहा जाता है?
Answer:
धुलाई एक विज्ञान है क्योंकि इसमें रसायन, तापमान, जल की गुणवत्ता और यांत्रिक क्रियाओं का वैज्ञानिक उपयोग होता है। यह एक कला भी है क्योंकि वस्त्रों की बनावट, रंग और सौंदर्य बनाए रखने के लिए कौशल और अनुभव आवश्यक होता है।
Explanation:
धुलाई में वैज्ञानिक सिद्धांतों का उपयोग होता है, जैसे कि सही तापमान पर धुलाई, उपयुक्त साबुन और डिटर्जेंट का चयन, और यांत्रिक क्रियाओं का नियंत्रण। साथ ही, वस्त्रों की सुंदरता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए धुलाई की कला में अनुभव और कौशल की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, रंगीन कपड़ों की धुलाई में सावधानी बरतनी पड़ती है ताकि रंग फीका न पड़े।
Q7.नीचे दिए गए विकल्पों में से कौन-सी धुलाई मशीन पूर्णतया स्वचालित है?
Answer:
मशीन जिसमें प्रत्येक चक्र के लिए नियंत्रण एक बार सेट करने के बाद मशीन स्वतः चलती है
Explanation:
पूर्णतया स्वचालित मशीनों में पानी भरना, गरम करना, धुलाई चक्र और खंगालने की संख्या एक बार सेट करने के बाद मशीन बिना हस्तक्षेप के काम करती है। जबकि अर्ध-स्वचालित और हस्त-चालित मशीनों में उपयोगकर्ता को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ता है।
Q8.धुलाई मशीनों में 'आलोड़न' विधि क्या है और यह किस प्रकार की मशीनों में प्रयोग होती है?
Answer:
आलोड़न विधि वह प्रक्रिया है जिसमें मशीन के ब्लेड घूमते हैं या दोलन करते हैं जिससे कपड़े जल में गतिशील रहते हैं। यह ऊपर से भरने वाली मशीनों में प्रयोग होती है।
Explanation:
आलोड़न में ब्लेड एक दिशा में घूमते हैं या दो दिशाओं में बारी-बारी से गति करते हैं जिससे जल में प्रवाह उत्पन्न होता है और कपड़े अच्छी तरह गीले होते हैं। यह विधि ऊपर से भरने वाली मशीनों में कपड़ों की सफाई के लिए उपयोगी होती है। उदाहरण के लिए, ऊपर से भरने वाली मशीन में ब्लेड कपड़ों को जल में घुमाकर गंदगी हटाते हैं।
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