Chapter 9
Chapter 9 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 6 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
9.1 भूमिका (Introduction)
व्याख्या9.1 भूमिका (Introduction)
इस अनुभाग में सरल रेखाओं के अध्ययन की पृष्ठभूमि दी गई है। द्विविमीय निर्देशांक ज्यामिति, जो बीजगणित और ज्यामिति का संयोजन है, का प्रारंभ फ्रांसीसी दार्शनिक एवं गणितज्ञ Rene Descartes ने 1637 में अपनी पुस्तक La Geometry में किया था। इस पुस्तक ने ज्यामिति में वक्रों के समीकरण और विश्लेषणात्मक विधियों की शुरुआत की। निर्देशांक ज्यामिति के आधारभूत सिद्धांतों जैसे निर्देशांक अक्ष, तल, बिंदुओं का आलेखन, दो बिंदुओं के बीच दूरी, विभाजन सूत्र आदि का पुनरावलोकन किया गया है। उदाहरण के लिए, XY-तल में बिंदु (6, –4) और (3, 0) को दर्शाया गया है, जहाँ (6, –4) का अर्थ है कि यह बिंदु धन x-अक्ष की दिशा में 6 इकाई और ऋण y-अक्ष की दिशा में 4 इकाई दूर है। इस प्रकार, सरल रेखाएँ ज्यामिति की मूलभूत इकाइयाँ हैं जिनका अध्ययन आगे किया जाएगा।
- द्विविमीय निर्देशांक ज्यामिति बीजगणित और ज्यामिति का संयोजन है।
- Rene Descartes ने 1637 में La Geometry में निर्देशांक ज्यामिति की नींव रखी।
- पूर्व कक्षाओं में निर्देशांक अक्ष, तल, बिंदुओं का आलेखन, दूरी सूत्र आदि पढ़े गए।
- सरल रेखाएँ ज्यामिति की सबसे सरल और महत्वपूर्ण आकृतियाँ हैं।
- सरल रेखाओं का अध्ययन निर्देशांक ज्यामिति के आधार को मजबूत करता है।
- 📌 निर्देशांक ज्यामिति: बीजगणित और ज्यामिति का संयोजन।
- 📌 सरल रेखा: दो बिंदुओं को जोड़ने वाली सबसे छोटी रेखा।
9.2 रेखा की ढाल (Slope of a line)
अवधारणा9.2 रेखा की ढाल (Slope of a line)
इस खंड में रेखा की ढाल की अवधारणा समझाई गई है। निर्देशांक तल में किसी रेखा का झुकाव θ उस रेखा द्वारा x-अक्ष के धनात्मक दिशा के साथ बनाया गया कोण होता है, जहाँ 0° ≤ θ < 180° होता है। रेखा की ढाल m को tan θ के रूप में परिभाषित किया जाता है। क्षैतिज रेखा की ढाल 0 होती है जबकि ऊर्ध्वाधर रेखा की ढाल अपरिभाषित होती है। यदि रेखा पर दो बिंदु P(x₁, y₁) और Q(x₂, y₂) दिए हों, तो रेखा की ढाल m = (y₂ - y₁)/(x₂ - x₁) होती है, बशर्ते x₁ ≠ x₂ हो। इसके बाद, दो रेखाओं के समांतर और लंब होने के नियम बताए गए हैं: दो रेखाएँ तभी समांतर होती हैं जब उनकी ढालें समान हों, और दो रेखाएँ तभी लंब होती हैं जब उनके ढालों का गुणनफल -1 हो। इसके अतिरिक्त, दो रेखाओं के बीच का कोण θ ढालों के आधार पर tan θ = |(m₂ - m₁)/(1 + m₁ m₂)| सूत्र से ज्ञात किया जाता है।
- रेखा का झुकाव θ x-अक्ष के धनात्मक दिशा के साथ बनता है।
- रेखा की ढाल m = tan θ होती है।
- दो बिंदुओं से रेखा की ढाल m = (y₂ - y₁)/(x₂ - x₁)।
- दो रेखाएँ समांतर होंगी यदि उनकी ढालें समान हों।
- दो रेखाएँ लंब होंगी यदि उनके ढालों का गुणनफल -1 हो।
- दो रेखाओं के बीच का कोण tan θ = |(m₂ - m₁)/(1 + m₁ m₂)| से ज्ञात होता है।
- 📌 ढाल (Slope): रेखा के झुकाव का टेंजेंट मान।
- 📌 झुकाव (Inclination): रेखा द्वारा x-अक्ष के साथ बनाया गया कोण।
- 📌 समांतर रेखाएँ: वे रेखाएँ जिनकी ढालें समान हों।
9.3 रेखा के समीकरण के विविध रूप (Various Forms of the Equation of a Line)
व्याख्या9.3 रेखा के समीकरण के विविध रूप (Various Forms of the Equation of a Line)
इस खंड में सरल रेखा के समीकरण के विभिन्न रूपों का विस्तार से वर्णन किया गया है। सबसे पहले क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर रेखाओं के समीकरण y = a या y = –a तथा x = b या x = –b के रूप में दिए गए हैं। इसके बाद बिंदु-ढाल रूप में, यदि रेखा पर बिंदु P₀(x₀, y₀) हो और
अभ्यास प्रश्न — Chapter 9
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.कार्तीय तल में एक चतुर्भुज खींचिए जिसके शीर्ष $(-4, 5)$, $(0, 7)$, $(5, -5)$ और $(-4, -2)$ हैं। इसका क्षेत्रफल भी ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
चतुर्भुज के शीर्ष हैं: A(-4,5), B(0,7), C(5,-5), D(-4,-2)। क्षेत्रफल ज्ञात करने के लिए हम शंक्वाकार सूत्र या त्रिभुजों में विभाजन कर सकते हैं। विधि 1: शंक्वाकार सूत्र (Shoelace formula): क्षेत्रफल = 1/2 |x1y2 + x2y3 + x3y4 + x4y1 - (y1x2 + y2x3 + y3x4 + y4x1)| = 1/2 |(-4)(7) + 0(-5) + 5(-2) + (-4)(5) - [5*0 + 7*5 + (-5)*(-4) + (-2)*(-4)]| = 1/2 |(-28) + 0 + (-10) + (-20) - [0 + 35 + 20 + 8]| = 1/2 |(-58) - 63| = 1/2 |-121| = 60.5 अतः क्षेत्रफल 60.5 वर्ग इकाई है।
व्याख्या:
शंक्वाकार सूत्र का प्रयोग कर प्रत्येक शीर्ष के निर्देशांक को सूत्र में रखा गया। ध्यान रखें कि सूत्र में x और y के अनुक्रम सही हो। क्षेत्रफल का मान धनात्मक लिया जाता है।
Q2.$2a$ भुजा के समबाहु त्रिभुज का आधार $y$-अक्ष के अनुदिश इस प्रकार है कि आधार का मध्य बिंदु मूल बिंदु पर है। त्रिभुज के शीर्ष ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
आधार की लंबाई = 2a है और इसका मध्य बिंदु मूल बिंदु (0,0) है। इसलिए आधार के दो सिरों के निर्देशांक होंगे: (-a, 0) और (a, 0)। समबाहु त्रिभुज में, शीर्ष का y-निर्देशांक होगा h और x=0 होगा क्योंकि त्रिभुज का शीर्ष आधार के मध्य बिंदु के ऊपर होगा। त्रिभुज की भुजा की लंबाई 2a है, अतः प्रत्येक भुजा की लंबाई 2a है। आधार की भुजा = 2a, अन्य दो भुजाएँ भी 2a होंगी। अब, शीर्ष बिंदु को (0, h) मानते हैं। भुजा की लंबाई = 2a = दूरी ((0,h), (-a,0)) = \sqrt{(0 + a)^2 + (h - 0)^2} = \sqrt{a^2 + h^2} इसलिए, \sqrt{a^2 + h^2} = 2a \Rightarrow a^2 + h^2 = 4a^2 \Rightarrow h^2 = 3a^2 \Rightarrow h = \pm a \sqrt{3} अतः शीर्ष के निर्देशांक होंगे (0, a\sqrt{3}) या (0, -a\sqrt{3})।
व्याख्या:
मध्य बिंदु के आधार पर आधार के सिरों के निर्देशांक निर्धारित किए। फिर समबाहु त्रिभुज की भुजा की लंबाई के सूत्र से शीर्ष बिंदु की ऊंचाई ज्ञात की।
Q3.$P(x_1, y_1)$ और $Q(x_2, y_2)$ के बीच की दूरी ज्ञात कीजिए जब: (i) PQ, $y$-अक्ष के समांतर है, (ii) PQ, $x$-अक्ष के समांतर है।
उत्तर:
(i) यदि PQ, y-अक्ष के समांतर है, तो x-निर्देशांक समान होंगे। अतः $x_1 = x_2$। दूरी = |y_2 - y_1| (ii) यदि PQ, x-अक्ष के समांतर है, तो y-निर्देशांक समान होंगे। अतः $y_1 = y_2$। दूरी = |x_2 - x_1|।
व्याख्या:
जब रेखा y-अक्ष के समांतर होती है तो x-निर्देशांक समान होते हैं और दूरी y-निर्देशांकों के अंतर के बराबर होती है। इसी प्रकार x-अक्ष के समांतर रेखा में y-निर्देशांक समान होते हैं।
Q4.$x$-अक्ष पर एक बिंदु ज्ञात कीजिए जो $(7, 6)$ और $(3, 4)$ बिंदुओं से समान दूरी पर है।
उत्तर:
मान लीजिए $x$-अक्ष पर बिंदु $P = (x, 0)$ है। $P$ की दूरी $(7,6)$ से = $\sqrt{(x - 7)^2 + (0 - 6)^2} = \sqrt{(x - 7)^2 + 36}$ $P$ की दूरी $(3,4)$ से = $\sqrt{(x - 3)^2 + (0 - 4)^2} = \sqrt{(x - 3)^2 + 16}$ चूंकि दूरी समान है, \[ \sqrt{(x - 7)^2 + 36} = \sqrt{(x - 3)^2 + 16} \] दोनों पक्षों का वर्ग करें: \[(x - 7)^2 + 36 = (x - 3)^2 + 16\] \[x^2 - 14x + 49 + 36 = x^2 - 6x + 9 + 16\] \[-14x + 85 = -6x + 25\] \[-14x + 85 + 6x - 25 = 0\] \[-8x + 60 = 0\] \[8x = 60 \Rightarrow x = \frac{60}{8} = 7.5\] अतः वह बिंदु $(7.5, 0)$ है।
व्याख्या:
दूरी सूत्र लगाकर दोनों दूरी बराबर रखी और समीकरण हल किया।
Q5.रेखा की ढाल ज्ञात कीजिए जो मूल बिंदु और P (0, –4) तथा B (8, 0) बिंदुओं को मिलाने वाले रेखाखंड के मध्य बिंदु से जाती हैं।
उत्तर:
P(0, -4) और B(8, 0) के मध्य बिंदु M है: \[ M = \left( \frac{0 + 8}{2}, \frac{-4 + 0}{2} \right) = (4, -2) \] अब, रेखा मूल बिंदु O(0,0) से M(4,-2) से जाती है। ढाल $m = \frac{y_2 - y_1}{x_2 - x_1} = \frac{-2 - 0}{4 - 0} = \frac{-2}{4} = -\frac{1}{2}$। अतः रेखा की ढाल $-\frac{1}{2}$ है।
व्याख्या:
पहले दिए गए दो बिंदुओं का मध्य बिंदु निकाला। फिर मूल बिंदु से उस मध्य बिंदु तक की रेखा की ढाल ज्ञात की।
Q6.पाइथागोरस प्रमेय के प्रयोग बिना दिखलाइए कि बिंदु (4, 4), (3, 5) और (–1, –1) एक समकोण त्रिभुज के शीर्ष हैं।
उत्तर:
बिंदु A(4,4), B(3,5), C(-1,-1) हैं। त्रिभुज समकोण है यदि किसी दो भुजाओं का आंतरिक गुणनफल शून्य हो। AB का वेक्टर = B - A = (3-4, 5-4) = (-1, 1) BC का वेक्टर = C - B = (-1-3, -1-5) = (-4, -6) AC का वेक्टर = C - A = (-1-4, -1-4) = (-5, -5) अब, AB · BC = (-1)(-4) + (1)(-6) = 4 - 6 = -2 ≠ 0 AB · AC = (-1)(-5) + (1)(-5) = 5 - 5 = 0 इसलिए AB और AC पर बने कोण समकोण है। अतः त्रिभुज ABC समकोण त्रिभुज है।
व्याख्या:
पाइथागोरस प्रमेय के बजाय, दो भुजाओं के वेक्टर का आंतरिक गुणनफल लेकर जांच की कि वे परस्पर लम्ब हैं या नहीं।
Q7.उस रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए जो y-अक्ष की धन दिशा से वामावर्त्त मापा गया 30° का कोण बनाती है।
उत्तर:
y-अक्ष की धन दिशा से 30° का कोण बनाती रेखा की ढाल होगी: \[ m = \tan 30^\circ = \frac{1}{\sqrt{3}} \] चूंकि रेखा y-अक्ष से 30° वामावर्त्त (anticlockwise) है, इसका मतलब रेखा x-अक्ष के साथ 60° का कोण बनाएगी। परंतु प्रश्न में y-अक्ष से मापा गया कोण दिया है, इसलिए ढाल $m = \tan 30^\circ = \frac{1}{\sqrt{3}}$ ही सही है। इसलिए, रेखा का समीकरण (यदि वह मूल बिंदु से गुजरती है) होगा: \[ y = \frac{1}{\sqrt{3}} x \] यदि कोई अन्य बिंदु ज्ञात हो तो समीकरण बदलेगा।
व्याख्या:
ढाल ज्ञात करने के लिए कोण का टैंजन्ट लिया गया।
Q8.दूरी सूत्र का प्रयोग किए बिना दिखलाइए कि बिंदु (–2, –1), (4, 0), (3, 3) और (–3, 2) एक समांतर चतुर्भुज के शीर्ष हैं।
उत्तर:
बिंदु A(-2,-1), B(4,0), C(3,3), D(-3,2) हैं। समांतर चतुर्भुज के लिए, AB और DC समानांतर और बराबर होंगे, तथा BC और AD समानांतर और बराबर होंगे। हम वेक्टर AB, BC, CD, DA निकालते हैं: \[ \vec{AB} = B - A = (4 - (-2), 0 - (-1)) = (6, 1) \] \[ \vec{DC} = C - D = (3 - (-3), 3 - 2) = (6, 1) \] \[ \vec{BC} = C - B = (3 - 4, 3 - 0) = (-1, 3) \] \[ \vec{AD} = D - A = (-3 - (-2), 2 - (-1)) = (-1, 3) \] \vec{AB} = \vec{DC} और \vec{BC} = \vec{AD} हैं। इसलिए, यह एक समांतर चतुर्भुज है।
व्याख्या:
दूरी सूत्र का प्रयोग न करते हुए, वेक्टरों की समानता से समांतरता और समानता सिद्ध की गई।
Ganit के सभी 14 अध्याय
Mathematics · Class 11