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Chapter 7

🎓 Class 11📖 Bharat ka Samvidhan Sidhant aur Vyavhar📖 11 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~17 मिनट
Chapter 6अध्याय 7 / 10Chapter 8

Chapter 7अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

इस अध्याय में हम भारत के राजनीतिक मानचित्रों (1947-2017) को देखेंगे, जिनमें राज्यों की सीमाओं, नामों और संख्या में कई परिवर्तन हुए हैं। आजादी के समय अधिकांश प्रांत अंग्रेजों द्वारा प्रशासनिक सुविधा के लिए बनाए गए थे, जिनमें देशी रियासतों का भी विलय हुआ। इन रियासतों को प्रांतों में शामिल किया गया। स्वतंत्रता के बाद से राज्यों की सीमाएँ कई बार बदली गईं और कुछ राज्यों के नाम भी बदले गए, जैसे मैसूर का नाम कर्नाटक और मद्रास का नाम तमिलनाडु। ये मानचित्र 70 वर्षों में हुए परिवर्तनों को दर्शाते हैं और संघवाद के कामकाज की कहानी कहते हैं। इस अध्याय के अंत में आपको संघवाद की अवधारणा, भारतीय संविधान के संघीय प्रावधान, केंद्र और राज्यों के संबंध, तथा विशिष्ट राज्यों के लिए विशेष प्रावधानों की जानकारी प्राप्त होगी।

  • भारत के राजनीतिक मानचित्र में 1947 से 2017 तक कई परिवर्तन हुए।
  • स्वतंत्रता के समय अधिकांश प्रांत अंग्रेजों द्वारा प्रशासनिक सुविधा के लिए बनाए गए थे।
  • देशी रियासतों का स्वतंत्र भारत में विलय हुआ।
  • राज्यों की सीमाएँ और नाम समय-समय पर बदले गए।
  • अध्याय में संघवाद की अवधारणा और भारतीय संघीय व्यवस्था के प्रावधानों का अध्ययन होगा।
  • 📌 संघवाद: दो या दो से अधिक स्तरों के बीच सत्ता का विभाजन।
  • 📌 राज्य: संघीय इकाई जो केंद्र के साथ मिलकर देश का शासन करती है।

7.1 संघवाद क्या है?

व्याख्या

7.1 संघवाद क्या है?

संघवाद एक ऐसी शासन प्रणाली है जिसमें सत्ता का विभाजन दो या दो से अधिक स्तरों के बीच किया जाता है, जैसे केंद्र और राज्य। विश्व के कई संघीय देश विघटित हो गए, जैसे सोवियत संघ, चेकोस्लोवाकिया, यूगोस्लाविया, पाकिस्तान, जबकि भारत ने अपनी एकता और अखंडता बनाए रखी। इसका श्रेय भारतीय संविधान द्वारा अंगीकृत संघीय व्यवस्था को जाता है। संघवाद की प्रकृति और व्यवहार राजनीतिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। संघवाद में दोहरी सरकारें होती हैं, जिनकी शक्तियाँ लिखित संविधान में स्पष्ट होती हैं। भारत में इकहरी नागरिकता है, लेकिन लोगों की दोहरी पहचान होती है - क्षेत्रीय और राष्ट्रीय। संघवाद में न्यायपालिका का महत्वपूर्ण स्थान है जो केंद्र और राज्यों के बीच विवादों को सुलझाती है। यदि संघीय इकाइयों के बीच विश्वास और सहयोग की संस्कृति हो तो संघवाद सफल होता है, अन्यथा अलगाववाद या गृहयुद्ध जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।

  • संघवाद में सत्ता का विभाजन दो या अधिक स्तरों में होता है।
  • भारत ने 1947 के बाद संघीय संविधान अपनाया और अपनी एकता बनाए रखी।
  • संघवाद की सफलता राजनीतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
  • संघवाद में दोहरी सरकारें और दोहरी पहचान होती है।
  • न्यायपालिका केंद्र और राज्यों के बीच विवादों का समाधान करती है।
  • 📌 संघवाद: सत्ता का विभाजन और दोहरी सरकारों की व्यवस्था।
  • 📌 इकहरी नागरिकता: भारत में सभी नागरिकों की एक ही नागरिकता।
  • 📌 न्यायपालिका: संघीय विवादों का समाधान करने वाली स्वतंत्र संस्था।

नाइजीरिया में संघवाद

व्याख्या

नाइजीरिया में संघवाद

नाइजीरिया एक संघीय देश है जहाँ तीन मुख्य जातीय समूह - एरुबा, इबो और हटसा-फुलानी - अपने-अपने क्षेत्रों पर नियंत्रण रखते थे। 1914 तक उत्तरी और दक्षिणी नाइजीरिया ब्रिटेन के उपनिवेश थे। 1950 में नाइजीरिया के नेताओं ने संघीय संविधान बनाने का निर्णय लिया।

अभ्यास प्रश्नChapter 7

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. नीचे कुछ घटनाओं की सूची दी गई है। इनमें से किसको आप संघवाद की कार्य-प्रणाली के रूप में चिह्नित करेंगे और क्यों? (क) केंद्र सरकार ने मंगलवार को जीएनएलएफ के नेतृत्व वाले दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल को छठी अनुसूची में वर्णित दर्जा देने की घोषणा की। इससे पश्चिम बंगाल के इस पर्वतीय जिले के शासकीय निकाय को ज्यादा स्वायत्तता प्राप्त होगी। दो दिन के गहन विचार-विमर्श के बाद नई दिल्ली में केंद्र सरकार, पश्चिम बंगाल सरकार और सुभाष घोसिंग के नेतृत्व वाले गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) के बीच त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर हुए। (ख) वर्षा प्रभावित प्रदेशों के लिए सरकार कार्य-योजना लाएगी। केंद्र सरकार ने वर्षा प्रभावित प्रदेशों से पुनर्निर्माण की विस्तृत योजना भेजने को कहा है ताकि वह अतिरिक्त राहत प्रदान करने की उनकी माँग पर फौरन कार्रवाई कर सके। (ग) दिल्ली के लिए नए आयुक्त। देश की राजधानी दिल्ली में नए नगरपालिका आयुक्त को बहाल किया जाएगा। इस बात की पुष्टि करते हुए एमसीडी के वर्तमान आयुक्त राकेश मेहता ने कहा कि उन्हें अपने तबादले के आदेश मिल गए हैं और संभावना है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अशोक कुमार उनकी जगह संभालेंगे। अशोक कुमार अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिव की हैसियत से काम कर रहे हैं। 1975 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री मेहता पिछले साढ़े तीन साल से आयुक्त की हैसियत से काम कर रहे हैं। (घ) मणिपुर विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा। राज्यसभा ने बुधवार को मणिपुर विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान करने वाला विधेयक पारित किया। मानव संसाधन विकास मंत्री ने वायदा किया है कि अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा और सिक्किम जैसे पूर्वोत्तर के राज्यों में भी ऐसी संस्थाओं का निर्माण होगा। (ड) केंद्र ने धन दिया। केंद्र सरकार ने अपनी ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत अरुणाचल प्रदेश को 553 लाख रुपए दिए हैं। इस धन की पहली किश्त के रूप में अरुणाचल प्रदेश को 466 लाख रुपए दिए गए हैं। (च) हम बिहारियों को बताएँगे कि मुंबई में कैसे रहना है। करीब 100 शिवसैनिकों ने मुंबई के जे.जे. अस्पताल में उठा-पटक करके रोजमर्रा के कामधंधे में बाधा पहुँचाई, नारे लगाए और धमकी दी कि गैर-मराठियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई तो इस मामले को वे स्वयं ही निपटाएँगे। (छ) सरकार को भंग करने की माँग। काँग्रेस विधायक दल ने प्रदेश के राज्यपाल को हाल में सौंपे एक ज्ञापन में सत्तारूढ़ डमोक्रेटिक एलायंस ऑफ नगालैंड (डीएएन) की सरकार को तथाकथित वित्तीय अनियमितता और सार्वजनिक धन के गबन के आरोप में भंग करने की माँग की है। (ज) एनडीए सरकार ने नक्सलियों से हथियार रखने को कहा। विपक्षी दल राजद और उसके सहयोगी काँग्रेस तथा सीपीआई (एम) के बॉक आऊट के बीच बिहार सरकार ने आज नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा का रास्ता छोड़ दें। बिहार को विकास के नए युग में ले जाने के लिए बेरोजगारी को जड़ से खत्म करने के अपने वादे को भी सरकार ने दोहराया।

उत्तर:

संघवाद की कार्य-प्रणाली में वह घटनाएँ आती हैं जिनमें केंद्र और राज्यों के बीच सत्ता, अधिकार और स्वायत्तता का बँटवारा होता है, जिसमें राज्यों को कुछ स्वायत्तता दी जाती है और केंद्र तथा राज्य दोनों मिलकर काम करते हैं। (क) यह घटना संघवाद की कार्य-प्रणाली का उदाहरण है क्योंकि इसमें केंद्र सरकार ने दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल को छठी अनुसूची के तहत विशेष दर्जा देकर अधिक स्वायत्तता दी है, जो संघीय ढांचे में राज्यों या क्षेत्रीय निकायों को अधिकार देने का उदाहरण है। (ख) यह भी संघवाद की कार्य-प्रणाली का उदाहरण है क्योंकि केंद्र सरकार ने वर्षा प्रभावित प्रदेशों से पुनर्निर्माण योजना मांगी है और राहत देने के लिए राज्यों के साथ समन्वय कर रही है। यह केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को दर्शाता है। (ग) यह घटना संघवाद की कार्य-प्रणाली का उदाहरण नहीं है क्योंकि इसमें केवल केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली के नगरपालिका आयुक्त के तबादले की बात है, जो प्रशासनिक नियुक्ति का मामला है और सीधे संघवाद से संबंधित नहीं है। (घ) मणिपुर विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देना संघवाद की कार्य-प्रणाली का उदाहरण है क्योंकि यह केंद्र सरकार द्वारा राज्यों में शिक्षा के क्षेत्र में हस्तक्षेप और विकास का संकेत है, जो संघीय ढांचे में केंद्र और राज्यों के बीच संबंध दर्शाता है। (ड) केंद्र द्वारा अरुणाचल प्रदेश को धन देना भी संघवाद की कार्य-प्रणाली का उदाहरण है क्योंकि यह वित्तीय संसाधनों का वितरण है, जो संघीय व्यवस्था का हिस्सा है। (च) यह घटना संघवाद की कार्य-प्रणाली से संबंधित नहीं है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक संघर्ष का उदाहरण है। (छ) सरकार को भंग करने की माँग भी संघवाद की कार्य-प्रणाली से सीधे संबंधित नहीं है, बल्कि राजनीतिक विवाद का मामला है। (ज) नक्सलियों से हथियार छोड़ने की अपील भी संघवाद की कार्य-प्रणाली का हिस्सा नहीं है, बल्कि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का मामला है। इस प्रकार, (क), (ख), (घ), और (ड) संघवाद की कार्य-प्रणाली के उदाहरण हैं क्योंकि इनमें केंद्र और राज्यों के बीच अधिकार, स्वायत्तता और संसाधनों का बँटवारा या सहयोग दिखता है।

व्याख्या:

संघवाद की कार्य-प्रणाली में केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों का बँटवारा, स्वायत्तता, और सहयोग होता है। इसलिए उन घटनाओं को संघवाद की कार्य-प्रणाली के रूप में चिह्नित किया जाता है जिनमें केंद्र और राज्य दोनों की भूमिका स्पष्ट होती है। अन्य घटनाएँ प्रशासनिक, सामाजिक या राजनीतिक विवाद से संबंधित हैं, जो संघवाद से सीधे जुड़ी नहीं हैं।

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Q2.2. बताएँ कि निम्नलिखित में कौन-सा कथन सही होगा और क्यों? (क) संघवाद से इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि विभिन्न क्षेत्रों के लोग मेल-जोल से रहेंगे और उन्हें इस बात का भय नहीं रहेगा कि एक की संस्कृति दूसरे पर लाद दी जाएगी। (ख) अलग-अलग किस्म के संसाधनों वाले दो क्षेत्रों के बीच आर्थिक लेनदेन को संघीय प्रणाली से बाधा पहुँचेगी। (ग) संघीय प्रणाली इस बात को सुनिश्चित करती है कि जो केंद्र में सत्तासीन हैं उनकी शक्तियाँ सीमित रहें।

उत्तर:

(क) यह कथन सही है क्योंकि संघवाद में केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों का बँटवारा होता है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक विविधताओं को सम्मान मिलता है। इससे लोगों को यह भय नहीं रहता कि उनकी संस्कृति पर कोई अन्य क्षेत्र या समूह हावी होगा। संघवाद मेल-जोल और सह-अस्तित्व को बढ़ावा देता है। (ख) यह कथन गलत है क्योंकि संघीय प्रणाली में विभिन्न क्षेत्रों के बीच आर्थिक लेनदेन को प्रोत्साहित किया जाता है। संसाधनों का वितरण और आर्थिक सहयोग संघीय ढांचे की विशेषता है, जिससे आर्थिक बाधाएँ कम होती हैं। (ग) यह कथन सही है क्योंकि संघीय प्रणाली में केंद्र की शक्तियाँ संविधान द्वारा सीमित होती हैं और राज्यों को भी स्वायत्तता दी जाती है। इससे केंद्र में सत्तासीन लोगों की शक्तियाँ सीमित रहती हैं और संतुलन बना रहता है।

व्याख्या:

संघवाद का मूल उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों की विविधताओं को मान्यता देना और केंद्र तथा राज्यों के बीच शक्तियों का संतुलन स्थापित करना है। इसलिए (क) और (ग) सही हैं जबकि (ख) गलत है।

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Q3.3. बेल्जियम के संविधान के कुछ प्रारंभिक अनुच्छेद नीचे लिखे गए हैं। इसके आधार पर बताएँ कि बेल्जियम में संघवाद को किस रूप में साकार किया गया है। भारत के संविधान के लिए ऐसा ही अनुच्छेद लिखने का प्रयास करके देखें। शीर्षक-I : संघीय बेल्जियम, इसके घटक और इसका क्षेत्र अनुच्छेद-1 – बेल्जियम एक संघीय राज्य है – जो समुदायों और क्षेत्रों से बना है। अनुच्छेद-2 – बेल्जियम तीन समुदायों से बना है – फ्रेंच समुदाय, फ्लेमिश समुदाय और जर्मन समुदाय। अनुच्छेद-3 – बेल्जियम तीन क्षेत्रों को मिलाकर बना है – वैलून क्षेत्र, फ्लेमिश क्षेत्र और ब्रूसेल्स क्षेत्र अनुच्छेद-4 – बेल्जियम में 4 भाषाई क्षेत्र हैं – फ्रेंच-भाषी क्षेत्र, डच-भाषी क्षेत्र, ब्रूसेल्स की राजधानी का द्विभाषी क्षेत्र तथा जर्मन भाषी क्षेत्र। राज्य का प्रत्येक ‘कम्यून’ इन भाषाई क्षेत्रों में से किसी एक का हिस्सा है। अनुच्छेद-5 – वैलून क्षेत्र के अंतर्गत आनेवाले प्रांत हैं – वैलून ब्रावैंट, हेनॉल्ट, लेग, लक्जमबर्ग और नामूर। फ्लेमिश क्षेत्र के अंतर्गत शामिल प्रांत हैं – एंटीवर्प, फ्लेमिश ब्रावैंट, वेस्ट फ्लैंडर्स, ईस्ट फ्लैंडर्स और लिंबर्ग।

उत्तर:

बेल्जियम में संघवाद को इस प्रकार साकार किया गया है कि देश को समुदायों और क्षेत्रों के आधार पर विभाजित किया गया है। संविधान में स्पष्ट रूप से तीन समुदाय (फ्रेंच, फ्लेमिश, जर्मन) और तीन क्षेत्र (वैलून, फ्लेमिश, ब्रूसेल्स) निर्धारित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त भाषाई आधार पर चार क्षेत्र बनाए गए हैं। इस प्रकार, बेल्जियम में संघवाद का स्वरूप सांस्कृतिक, भाषाई और क्षेत्रीय आधार पर शक्तियों का बँटवारा है। भारत के संविधान के लिए ऐसा अनुच्छेद इस प्रकार लिखा जा सकता है: "भारत एक संघीय गणराज्य है जो विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बना है। प्रत्येक राज्य अपनी भाषा, संस्कृति और प्रशासनिक स्वायत्तता के आधार पर केंद्र के साथ साझा सत्ता में भागीदार है। केंद्र और राज्यों के अधिकार संविधान में स्पष्ट रूप से विभाजित हैं।" इस प्रकार, बेल्जियम की तरह भारत में भी संघवाद का स्वरूप क्षेत्रीय और सांस्कृतिक विविधताओं को मान्यता देते हुए शक्तियों का बँटवारा है।

व्याख्या:

बेल्जियम के संविधान के अनुच्छेदों से पता चलता है कि संघवाद में समुदायों और क्षेत्रों को अलग-अलग अधिकार और स्वायत्तता दी गई है। भारत में भी इसी तरह राज्यों को सांस्कृतिक और प्रशासनिक स्वायत्तता दी गई है। इसलिए भारत के संविधान के लिए भी ऐसा अनुच्छेद लिखा जा सकता है जो संघीयता को स्पष्ट करता हो।

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Q4.4. कल्पना करें कि आपको संघवाद के संबंध में प्रावधान लिखने हैं। लगभग 300 शब्दों का एक लेख लिखें जिसमें निम्नलिखित बिंदुओं पर आपके सुझाव हों – - (क) केंद्र और प्रदेशों के बीच शक्तियों का बँटवारा - (ख) वित्त-संसाधनों का वितरण - (ग) राज्यपालों की नियुक्ति

उत्तर:

संघवाद के संबंध में प्रावधानों में निम्नलिखित सुझाव दिए जा सकते हैं: (क) केंद्र और प्रदेशों के बीच शक्तियों का बँटवारा स्पष्ट और संतुलित होना चाहिए। संविधान में केंद्र और राज्यों के अधिकारों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाना चाहिए ताकि दोनों के बीच टकराव न हो। कुछ विषय जैसे रक्षा, विदेश नीति केंद्र के अधिकार क्षेत्र में हों, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि जैसे विषय राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हों। (ख) वित्त-संसाधनों का वितरण भी संघवाद की सफलता के लिए आवश्यक है। केंद्र को राज्यों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना चाहिए ताकि वे अपने कार्यों को प्रभावी ढंग से कर सकें। टैक्सेशन के अधिकारों का स्पष्ट बँटवारा होना चाहिए और वित्त आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण होनी चाहिए। (ग) राज्यपालों की नियुक्ति निष्पक्ष और संवैधानिक होनी चाहिए। राज्यपालों को केंद्र सरकार का प्रतिनिधि माना जाता है, लेकिन उन्हें राज्यों की स्वायत्तता का सम्मान करना चाहिए। उनकी नियुक्ति में पारदर्शिता होनी चाहिए और वे राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर काम करें। इस प्रकार, संघवाद के प्रावधानों में संतुलन, स्पष्टता और सहयोग की भावना होनी चाहिए ताकि केंद्र और राज्यों के बीच सामंजस्य बना रहे और देश का विकास हो सके।

व्याख्या:

यह लेख संघवाद के मूल तत्वों को समझाते हुए केंद्र-प्रदेश संबंधों, वित्तीय संसाधनों के वितरण और राज्यपालों की भूमिका पर सुझाव देता है। इससे संघीय व्यवस्था में संतुलन और सहयोग सुनिश्चित होता है।

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Q5.5. निम्नलिखित में कौन-सा प्रांत के गठन का आधार होना चाहिए और क्यों? - (क) सामान्य भाषा - (ख) सामान्य आर्थिक हित - (ग) सामान्य क्षेत्र - (घ) प्रशासनिक सुविधा

उत्तर:

प्रांत के गठन का आधार सामान्य भाषा होना चाहिए क्योंकि भाषा लोगों की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रमुख आधार होती है। जब लोग एक ही भाषा बोलते हैं, तो वे बेहतर संवाद कर सकते हैं और सामाजिक-सांस्कृतिक मेलजोल बढ़ता है। इससे प्रशासनिक कार्य भी सुचारू रूप से होते हैं। सामान्य आर्थिक हित भी महत्वपूर्ण है, लेकिन भाषा की तुलना में यह कम प्रभावी आधार हो सकता है क्योंकि आर्थिक हित समय के साथ बदल सकते हैं। सामान्य क्षेत्र और प्रशासनिक सुविधा भी प्रांत गठन के लिए सहायक हैं, लेकिन वे प्राथमिक आधार नहीं हो सकते। इसलिए, सामान्य भाषा को प्रांत गठन का मुख्य आधार माना जाना चाहिए।

व्याख्या:

भाषा लोगों की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान से जुड़ी होती है, जिससे एकता और प्रशासनिक सुगमता बढ़ती है। अन्य आधार सहायक हैं लेकिन भाषा सबसे प्रभावी आधार है।

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Q6.6. उत्तर भारत के प्रदेशों – राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश तथा बिहार के अधिकांश लोग हिंदी बोलते हैं। यदि इन सभी प्रांतों को मिलाकर एक प्रदेश बना दिया जाय तो क्या ऐसा करना संघवाद के विचार से संगत होगा? तर्क दीजिए।

उत्तर:

ऐसा करना संघवाद के विचार से संगत नहीं होगा। संघवाद में राज्यों को उनकी सांस्कृतिक, सामाजिक और क्षेत्रीय विविधताओं के आधार पर स्वायत्तता दी जाती है। भले ही इन प्रदेशों में हिंदी भाषा सामान्य है, परन्तु इनके सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक हालात अलग-अलग हैं। प्रत्येक प्रदेश की अपनी पहचान, प्रशासनिक आवश्यकताएँ और स्थानीय मुद्दे होते हैं जिन्हें बेहतर तरीके से स्थानीय सरकारें ही समझती और संभालती हैं। यदि इन सभी को एक प्रदेश में मिला दिया गया तो स्थानीय विविधताओं की उपेक्षा होगी और प्रशासनिक जटिलताएँ बढ़ेंगी। इसलिए, संघवाद के सिद्धांत के अनुसार राज्यों का गठन केवल भाषा के आधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर होना चाहिए।

व्याख्या:

संघवाद में राज्यों को उनकी विविधताओं के अनुसार स्वायत्तता दी जाती है ताकि वे अपने स्थानीय मुद्दों को बेहतर तरीके से संभाल सकें। केवल भाषा के आधार पर बड़े प्रदेश बनाना संघवाद के उद्देश्य के विरुद्ध होगा।

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Q7.7. भारतीय संविधान की ऐसी चार विशेषताओं का उल्लेख करें जिसमें प्रादेशिक सरकार की अपेक्षा केंद्रीय सरकार को ज्यादा शक्ति प्रदान की गई है।

उत्तर:

भारतीय संविधान में केंद्रीय सरकार को प्रादेशिक सरकार की तुलना में अधिक शक्ति प्रदान करने वाली चार विशेषताएँ हैं: 1. एकात्मकता की भावना: संविधान में संघीयता के साथ-साथ एकात्मकता का भी तत्व है, जिससे केंद्र सरकार को अधिक शक्तियाँ प्राप्त होती हैं। 2. आपातकाल की व्यवस्था: केंद्र सरकार को आपातकाल लगाने का अधिकार है, जिससे वह किसी भी राज्य में शासन कर सकती है। 3. वित्तीय नियंत्रण: केंद्र सरकार के पास वित्तीय संसाधनों पर अधिक नियंत्रण है और वह राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। 4. विधायी अधिकारों का बँटवारा: केंद्र सूची में अधिक विषय शामिल हैं और राज्य सूची में सीमित विषय, जिससे केंद्र के पास अधिक विधायी अधिकार होते हैं।

व्याख्या:

भारतीय संविधान में केंद्र की शक्तियाँ राज्यों की तुलना में अधिक हैं ताकि राष्ट्रीय एकता और अखंडता बनी रहे। आपातकाल, वित्तीय नियंत्रण, विधायी अधिकारों का बँटवारा और एकात्मकता की भावना इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

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Q8.8. बहुत-से प्रदेश राज्यपाल की भूमिका को लेकर नाखुश क्यों हैं?

उत्तर:

बहुत-से प्रदेश राज्यपाल की भूमिका को लेकर नाखुश हैं क्योंकि राज्यपाल को केंद्र सरकार का प्रतिनिधि माना जाता है और उनकी नियुक्ति केंद्र सरकार करती है। कई बार राज्यपाल राजनीतिक दबाव में आकर केंद्र की नीतियों के पक्ष में निर्णय लेते हैं, जिससे प्रदेश सरकारों की स्वायत्तता प्रभावित होती है। इसके अलावा, राज्यपाल द्वारा सरकार को भंग करने या राष्ट्रपति शासन लगाने के निर्णय विवादास्पद होते हैं, जो प्रदेशों में असंतोष का कारण बनते हैं। इस प्रकार, राज्यपाल की भूमिका को लेकर प्रदेशों में असंतोष रहता है क्योंकि वे केंद्र की ओर से हस्तक्षेप करते हैं और राज्यों की स्वायत्तता सीमित होती है।

व्याख्या:

राज्यपाल की नियुक्ति केंद्र द्वारा होती है और वे केंद्र के एजेंट के रूप में कार्य करते हैं, जिससे वे प्रदेश सरकारों के निर्णयों में हस्तक्षेप कर सकते हैं। इससे प्रदेशों को अपनी स्वायत्तता में बाधा महसूस होती है।

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