Chapter 6
Chapter 6 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
परिचय
व्याख्यापरिचय
न्यायपालिका को सामान्यत: विवादों को सुलझाने वाले पंच के रूप में देखा जाता है, लेकिन यह सरकार का एक महत्वपूर्ण अंग है जो राजनैतिक कार्य भी करता है। भारत का सर्वोच्च न्यायालय विश्व के सबसे शक्तिशाली न्यायालयों में से एक है। 1950 से ही यह संविधान की व्याख्या और सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता, अधिकारों की सुरक्षा, और संसद तथा न्यायपालिका के आपसी संबंध इस अध्याय के मुख्य विषय हैं। **Table on page 11 (6×2)** | (क) बिहार और भारत सरकार के मध्य विवाद की सुनवाई कौन करेगा? | (1) उच्च न्यायालय | | --- | --- | | (ख) हरियाणा के जिला न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध अपील कहाँ की जाएगी? | (2) परामर्श संबंधी क्षेत्राधिकार | | (ग) एकीकृत न्यायपालिका | (3) न्यायिक पुनर्निरीक्षण | | (घ) किसी कानून को असंवैधानिक घोषित करना | (4) मौलिक क्षेत्राधिकार | | | (5) सर्वोच्च न्यायालय | | | (6) एकल संविधान |
- न्यायपालिका विवादों को कानून के अनुसार सुलझाती है।
- भारत का सर्वोच्च न्यायालय विश्व के शक्तिशाली न्यायालयों में से है।
- 1950 से न्यायपालिका ने संविधान की व्याख्या में भूमिका निभाई।
- न्यायपालिका सरकार का एक स्वतंत्र और महत्वपूर्ण अंग है।
- 📌 न्यायपालिका: विवादों को सुलझाने वाली स्वतंत्र संस्था।
- 📌 सर्वोच्च न्यायालय: भारत का उच्चतम न्यायालय।
हमें स्वतंत्र न्यायपालिका क्यों चाहिए?
अवधारणाहमें स्वतंत्र न्यायपालिका क्यों चाहिए?
हर समाज में व्यक्तियों, समूहों और सरकार के बीच विवाद होते हैं जिन्हें कानून के शासन के सिद्धांत के आधार पर स्वतंत्र संस्था द्वारा हल किया जाना चाहिए। न्यायपालिका की स्वतंत्रता का अर्थ है कि विधायिका और कार्यपालिका न्यायपालिका के कार्यों में बाधा न डालें, न्यायाधीश स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्णय लें। न्यायपालिका की स्वतंत्रता स्वेच्छाचरिता नहीं, बल्कि संविधान और जनता के प्रति जवाबदेही है। न्यायपालिका कानून की सर्वोच्चता सुनिश्चित करती है और लोकतंत्र को तानाशाही से बचाती है।
- कानून के शासन का अर्थ है सभी के लिए समान कानून।
- न्यायपालिका को राजनीतिक दबाव से मुक्त होना चाहिए।
- न्यायपालिका की स्वतंत्रता में विधायिका और कार्यपालिका का हस्तक्षेप न होना शामिल है।
- न्यायपालिका संविधान और जनता के प्रति जवाबदेह होती है।
- 📌 कानून के शासन: सभी पर समान कानून लागू होना।
- 📌 न्यायपालिका की स्वतंत्रता: न्यायिक निर्णयों में स्वतंत्रता।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता
व्याख्यान्यायपालिका की स्वतंत्रता
न्यायपालिका की स्वतंत्रता का अर्थ है कि विधायिका और कार्यपालिका न्यायपालिका के कार्यों में बाधा न डालें, न्यायाधीश बिना भय या भेदभाव के निर्णय लें। भारतीय संविधान ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए कई प्रावधान किए हैं। न्यायाधीशों की
अभ्यास प्रश्न — Chapter 6
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के विभिन्न तरीके कौन-कौन से हैं? निम्नलिखित में जो बेमेल हो उसे छाँटें। (क) सर्वोच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से सलाह ली जाती है। (ख) न्यायाधीशों को अमूमन अवकाश प्राप्ति की आयु से पहले नहीं हटाया जाता। (ग) उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का तबादला दूसरे उच्च न्यायालय में नहीं किया जा सकता। (घ) न्यायाधीशों की नियुक्ति में संसद की दखल नहीं है।
उत्तर:
उत्तर: (ग) उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का तबादला दूसरे उच्च न्यायालय में किया जा सकता है। इसलिए यह कथन बेमेल है। अन्य सभी कथन न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के तरीकों के अनुरूप हैं। व्याख्या: (क) मुख्य न्यायाधीश की सलाह से अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति होती है, जो न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखता है। (ख) न्यायाधीशों को आमतौर पर उनकी सेवा अवधि के अंत तक हटाया नहीं जाता, जिससे उनकी स्वतंत्रता सुरक्षित रहती है। (घ) न्यायाधीशों की नियुक्ति में संसद की दखल नहीं होती, जिससे न्यायपालिका स्वतंत्र रहती है।
व्याख्या:
यह प्रश्न न्यायपालिका की स्वतंत्रता के तरीकों को समझने के लिए है। (ग) कथन गलत है क्योंकि उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का तबादला किया जा सकता है। अन्य कथन सही हैं। इसलिए (ग) बेमेल है।
Q2.2. क्या न्यायपालिका की स्वतंत्रता का अर्थ यह है कि न्यायपालिका किसी के प्रति जवाबदेह नहीं है। अपना उत्तर अधिकतम 100 शब्दों में लिखें।
उत्तर:
न्यायपालिका की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि वह किसी के प्रति जवाबदेह नहीं है। न्यायपालिका स्वतंत्र होकर कानून के अनुसार निर्णय करती है, लेकिन वह संविधान और कानून के प्रति जवाबदेह होती है। न्यायपालिका की जवाबदेही का अर्थ है कि वह न्यायसंगत, निष्पक्ष और पारदर्शी निर्णय दे। स्वतंत्रता का मतलब है कि वह कार्यपालिका या विधायिका के दबाव में नहीं आए।
व्याख्या:
यह प्रश्न न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जवाबदेही के बीच अंतर को समझने के लिए है। स्वतंत्रता का मतलब दबाव मुक्त निर्णय लेना है, जबकि जवाबदेही का मतलब कानून और संविधान के प्रति उत्तरदायी होना है।
Q3.3. न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए संविधान के विभिन्न प्रावधान कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए संविधान में निम्नलिखित प्रावधान हैं: 1. न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया में स्वतंत्रता: न्यायाधीशों की नियुक्ति में मुख्य न्यायाधीश की सलाह ली जाती है। 2. न्यायाधीशों की सेवा अवधि और सुरक्षा: न्यायाधीशों को अवकाश प्राप्ति की आयु तक सेवा का अधिकार होता है और उन्हें बिना उचित कारण हटाया नहीं जा सकता। 3. न्यायाधीशों का वेतन और भत्ते: न्यायाधीशों के वेतन और भत्तों को संसद द्वारा घटाया नहीं जा सकता, जिससे उनकी आर्थिक स्वतंत्रता बनी रहती है। 4. न्यायालयों का स्वतंत्र कार्य: न्यायालय स्वतंत्र होकर कानून के अनुसार निर्णय देते हैं, बिना किसी बाहरी दबाव के। 5. विधायिका और कार्यपालिका से स्वतंत्रता: न्यायपालिका को विधायिका और कार्यपालिका से स्वतंत्र रखा गया है ताकि वह निष्पक्ष निर्णय दे सके।
व्याख्या:
यह प्रश्न संविधान में न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने वाले प्रावधानों को समझने के लिए है। ये प्रावधान न्यायपालिका को निष्पक्ष, स्वतंत्र और प्रभावी बनाते हैं।
Q4.4. नीचे दी गई समाचार-रिपोर्ट पढ़ें और उनमें निम्नलिखित पहलुओं की पहचान करें। (क) मामला किस बारे में है? (ख) इस मामले में लाभार्थी कौन है? (ग) इस मामले में फरियादी कौन है? (घ) सोचकर बताएँ कि कंपनी की तरफ से कौन-कौन से तर्क दिए जाएँगे? (ड) किसानों की तरफ से कौन-से तर्क दिए जाएँगे? सर्वोच्च न्यायालय ने रिलायंस से दहानु के किसानों को 300 करोड़ रुपए देने को कहा – निजी कारपोरेट ब्यूरो, 24 मार्च 2005 मुंबई – सर्वोच्च न्यायालय ने रिलायंस एनर्जी से मुंबई के बाहरी इलाके दहानु में चीकू फल उगाने वाले किसानों को 300 करोड़ रुपए देने के लिए कहा है। चीकू उत्पादक किसानों ने अदालत में रिलायंस के ताप-ऊर्जा संयंत्र से होने वाले प्रदूषण के विरुद्ध अर्जी दी थी। अदालत ने इसी मामले में अपना फ़ैसला सुनाया है। (अधिक जानकारी के लिए समाचार रिपोर्ट देखें)
उत्तर:
(क) मामला प्रदूषण और उसके कारण किसानों की फसल नष्ट होने के संबंध में है। (ख) लाभार्थी दहानु के चीकू फल उगाने वाले किसान हैं जिन्हें 300 करोड़ रुपए दिए जाने का आदेश दिया गया है। (ग) फरियादी रिलायंस एनर्जी कंपनी है, जो ताप-ऊर्जा संयंत्र चलाती है और प्रदूषण का कारण बनी है। (घ) कंपनी के तर्क हो सकते हैं कि उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं या वे प्रदूषण के लिए सीधे जिम्मेदार नहीं हैं। (ड) किसानों के तर्क होंगे कि प्रदूषण के कारण उनकी फसलें नष्ट हुईं, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हुई है और उन्हें मुआवजा मिलना चाहिए।
व्याख्या:
यह प्रश्न समाचार रिपोर्ट के आधार पर विश्लेषण करने के लिए है। छात्रों को मामले के विभिन्न पक्षों को समझकर तर्क प्रस्तुत करने हैं।
Q5.5. नीचे की समाचार-रिपोर्ट पढ़ें और, चिह्नित करें कि रिपोर्ट में किस-किस स्तर की सरकार सक्रिय दिखाई देती है। (क) सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका की निशानदेही करें। (ख) कार्यपालिका और न्यायपालिका के कामकाज की कौन-सी बातें आप इसमें पहचान सकते हैं? (ग) इस प्रकरण से संबद्ध नीतिगत मुद्दे, कानून बनाने से संबंधित बातें, क्रियान्वयन तथा कानून की व्याख्या से जुड़ी बातों की पहचान करें। सीएनजी - मुद्दे पर केंद्र और दिल्ली सरकार एक साथ (अधिक जानकारी के लिए समाचार रिपोर्ट देखें)
उत्तर:
(क) सर्वोच्च न्यायालय ने सीएनजी के मुद्दे पर केंद्र और दिल्ली सरकार को संयुक्त रूप से अदालत का सहारा लेने की अनुमति दी है, जिससे न्यायपालिका की सक्रिय भूमिका स्पष्ट होती है। (ख) कार्यपालिका (केंद्र और दिल्ली सरकार) ने नीति बनाने और क्रियान्वयन के लिए अदालत से मदद ली है, जबकि न्यायपालिका ने कानून की व्याख्या और निर्देश जारी किए हैं। (ग) नीतिगत मुद्दे जैसे ईंधन नीति, पर्यावरण सुरक्षा, कानून निर्माण, क्रियान्वयन की चुनौतियाँ और न्यायपालिका द्वारा निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना इस प्रकरण से जुड़े हैं।
व्याख्या:
यह प्रश्न समाचार रिपोर्ट के माध्यम से विभिन्न सरकारी स्तरों की भूमिका और न्यायपालिका तथा कार्यपालिका के बीच संबंध को समझने के लिए है।
Q6.6. निम्नलिखित कथन इक्वाडोर के बारे में है। इस उदाहरण और भारत की न्यायपालिका के बीच आप क्या समानता अथवा असमानता पाते हैं?
उत्तर:
उत्तर: इक्वाडोर की अदालतें सामान्य कानूनों की संहिता या पूर्व न्यायिक फैसलों का पालन नहीं करतीं, जिससे पत्रकारों के अधिकार स्पष्ट नहीं होते। भारत की न्यायपालिका में संविधान और पूर्व न्यायिक फैसलों का पालन होता है, जिससे अधिकारों की स्पष्टता और न्यायपालिका की विश्वसनीयता बनी रहती है। इसलिए, भारत की न्यायपालिका अधिक संगठित, स्वतंत्र और जवाबदेह है जबकि इक्वाडोर की अदालतें इस मामले में कमजोर हैं।
व्याख्या:
यह प्रश्न न्यायपालिका की कार्यप्रणाली और स्वतंत्रता के अंतर को समझने के लिए है। भारत में न्यायपालिका का ढांचा अधिक व्यवस्थित और संवैधानिक है, जबकि इक्वाडोर में ऐसा नहीं है।
Q7.न्यायपालिका की स्वतंत्रता का क्या अर्थ है और इसे सुनिश्चित करने के लिए भारतीय संविधान ने कौन-कौन से प्रावधान किए हैं?
उत्तर:
न्यायपालिका की स्वतंत्रता का अर्थ है कि विधायिका और कार्यपालिका न्यायपालिका के कार्यों में बाधा न डालें और न्यायाधीश बिना भय या भेदभाव के निर्णय लें। भारतीय संविधान ने न्यायाधीशों की नियुक्ति में विधायिका की भूमिका सीमित की है, न्यायाधीशों का कार्यकाल निश्चित किया है, उन्हें हटाना कठिन बनाया है, और न्यायपालिका को वित्तीय रूप से स्वतंत्र रखा है।
व्याख्या:
न्यायपालिका की स्वतंत्रता का अर्थ है कि सरकार के अन्य अंग न्यायपालिका के काम में हस्तक्षेप न करें ताकि न्यायाधीश स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्णय दे सकें। संविधान ने नियुक्ति प्रक्रिया में दलगत राजनीति को कम करने के लिए विधायिका की भूमिका सीमित की है। न्यायाधीशों का कार्यकाल निश्चित होता है और हटाने की प्रक्रिया कठिन है। न्यायपालिका के वेतन और भत्ते संसद द्वारा नियंत्रित नहीं होते। इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित होती है।
Q8.निम्नलिखित में से कौन-सी बात न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए आवश्यक नहीं है?
उत्तर:
न्यायपालिका को स्वेच्छाचरिता की पूर्ण स्वतंत्रता हो
व्याख्या:
न्यायपालिका की स्वतंत्रता का अर्थ स्वेच्छाचरिता नहीं है। इसका मतलब है कि न्यायपालिका को बिना किसी राजनीतिक दबाव के स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्णय करने की आज़ादी होनी चाहिए, लेकिन वह संविधान और जनता के प्रति जवाबदेह होती है। इसलिए विकल्प C सही नहीं है।
Bharat ka Samvidhan Sidhant aur Vyavhar के सभी 10 अध्याय
Political Science · Class 11