Chapter 5
Chapter 5 — अध्ययन नोट्स
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परिचय: फेडरलिज़्म (संघवाद)
व्याख्यापरिचय: फेडरलिज़्म (संघवाद)
फेडरलिज़्म या संघवाद एक ऐसी शासन व्यवस्था है जिसमें सत्ता का वितरण केंद्र और राज्यों के बीच होता है। यह व्यवस्था भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देशों के लिए उपयुक्त होती है, जहाँ विभिन्न क्षेत्रों की अपनी विशेषताएँ, भाषाएँ, संस्कृतियाँ और आवश्यकताएँ होती हैं। भारत में संविधान ने संघीय ढांचे को अपनाया है, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों के पास अपनी-अपनी शक्तियाँ होती हैं। संघवाद का मुख्य उद्देश्य विभिन्न राज्यों को उनकी स्वायत्तता देना और साथ ही एक मजबूत केंद्र सरकार के माध्यम से राष्ट्रीय एकता बनाए रखना है। इस व्यवस्था में केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों का स्पष्ट विभाजन होता है, जिससे दोनों स्तरों की सरकारें स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकती हैं। संघवाद की यह संरचना भारत की विविधता को संरक्षित करते हुए लोकतंत्र को मजबूत बनाती है।
- फेडरलिज़्म में सत्ता का वितरण केंद्र और राज्यों के बीच होता है।
- भारत में संघीय ढांचा संविधान द्वारा स्थापित है।
- संघवाद का उद्देश्य राज्यों को स्वायत्तता देना और राष्ट्रीय एकता बनाए रखना है।
- केंद्र और राज्यों के अधिकार संविधान में स्पष्ट रूप से निर्धारित होते हैं।
- यह व्यवस्था विविधता में एकता को सुनिश्चित करती है।
- 📌 फेडरलिज़्म: ऐसी शासन व्यवस्था जिसमें सत्ता केंद्र और राज्यों के बीच विभाजित होती है।
- 📌 संघवाद: केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों का संवैधानिक वितरण।
संघवाद की अवधारणा
व्याख्यासंघवाद की अवधारणा
संघवाद एक ऐसी शासन प्रणाली है जिसमें दो या दो से अधिक सरकारें होती हैं — एक राष्ट्रीय या केंद्र सरकार और अन्य क्षेत्रीय या राज्य सरकारें। इन दोनों सरकारों के अधिकार और कर्तव्य संविधान द्वारा स्पष्ट रूप से निर्धारित किए जाते हैं। संघवाद की विशेषता यह है कि दोनों सरकारें अपने-अपने क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से कार्य करती हैं और एक-दूसरे के अधिकारों का सम्मान करती हैं। यह व्यवस्था विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक, भाषाई और सामाजिक विविधताओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें स्वायत्तता प्रदान करती है। संघवाद में सरकारों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन होता है, जिससे टकराव की संभावना कम होती है। भारत में संघवाद की यह अवधारणा ब्रिटिश काल के बाद राजनीतिक विचारकों और संविधान निर्माताओं द्वारा अपनाई गई, ताकि देश की विशालता और विविधता को ध्यान में रखते हुए शासन व्यवस्था को प्रभावी बनाया जा सके।
- संघवाद में दो या अधिक सरकारें होती हैं: केंद्र और राज्य।
- दोनों सरकारों के अधिकार संविधान द्वारा निर्धारित होते हैं।
- संघवाद में सरकारें अपने-अपने क्षेत्र में स्वतंत्र होती हैं।
- यह व्यवस्था सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को मान्यता देती है।
- शक्तियों का स्पष्ट विभाजन टकराव को कम करता है।
- 📌 राष्ट्रीय सरकार: पूरे देश के लिए जिम्मेदार सरकार।
- 📌 क्षेत्रीय सरकार: राज्य या क्षेत्र के लिए जिम्मेदार सरकार।
भारतीय संविधान में संघवाद
व्याख्याभारतीय संविधान में संघवाद
भारतीय संविधान ने संघीय ढांचे को अपनाया है, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का स्पष्ट वितरण किया गया है। संविधान की सातवीं अनुसूची में तीन सूचियाँ दी गई हैं — केंद्र सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची। केंद्र सूची में वे विषय आते हैं जिन पर के
अभ्यास प्रश्न — Chapter 5
15 विस्तृत उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न
Q1.फेडरलिज़्म या संघवाद क्या है और यह भारत जैसे देशों के लिए क्यों उपयुक्त है?
उत्तर:
फेडरलिज़्म एक ऐसी शासन व्यवस्था है जिसमें सत्ता का वितरण केंद्र और राज्यों के बीच होता है। यह भारत जैसे विविधतापूर्ण देशों के लिए उपयुक्त है क्योंकि इसमें विभिन्न क्षेत्रों की अपनी भाषाएँ, संस्कृतियाँ और आवश्यकताएँ होती हैं।
व्याख्या:
फेडरलिज़्म वह शासन प्रणाली है जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच सत्ता का स्पष्ट वितरण होता है। भारत में यह व्यवस्था इसलिए उपयुक्त है क्योंकि देश में अनेक भाषाएँ, संस्कृतियाँ और क्षेत्रीय आवश्यकताएँ हैं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए राज्यों को स्वायत्तता दी जाती है। इससे राष्ट्रीय एकता बनी रहती है और लोकतंत्र मजबूत होता है।
Q2.संघवाद की मुख्य विशेषता क्या है?
उत्तर:
केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन होना
व्याख्या:
संघवाद की मुख्य विशेषता यह है कि केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों और कर्तव्यों का स्पष्ट विभाजन होता है, जिससे दोनों स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकते हैं।
Q3.भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में कितनी सूचियाँ हैं और वे कौन-कौन सी हैं?
उत्तर:
तीन सूचियाँ / केंद्र सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची
व्याख्या:
भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में तीन सूचियाँ दी गई हैं: केंद्र सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची। ये सूचियाँ केंद्र और राज्यों के अधिकारों का विभाजन स्पष्ट करती हैं।
Q4.सातवीं अनुसूची में समवर्ती सूची के विषयों पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं। यदि दोनों ने कानून बनाए तो किसका कानून प्राथमिकता रखता है?
उत्तर:
केंद्र का कानून
व्याख्या:
समवर्ती सूची के विषयों पर यदि केंद्र और राज्य दोनों ने कानून बनाए हैं, तो केंद्र का कानून प्राथमिकता रखता है।
Q5.भारतीय संविधान में केंद्र को किन विशेष अधिकारों का प्रावधान दिया गया है जो संघवाद को प्रभावित करते हैं?
उत्तर:
केंद्र को आपातकाल की घोषणा करने का अधिकार दिया गया है, जिससे वह राज्यों के मामलों में हस्तक्षेप कर सकता है।
व्याख्या:
भारतीय संविधान में केंद्र को विशेष अधिकार प्राप्त हैं जैसे कि आपातकाल की घोषणा करना, जिससे वह राज्यों के प्रशासन में हस्तक्षेप कर सकता है। यह संघीय ढांचे को लचीला बनाता है लेकिन राज्यों की स्वायत्तता पर प्रभाव डालता है।
Q6.निम्नलिखित में से कौन-से विषय केवल राज्य सूची में आते हैं?
उत्तर:
पुलिस, स्वास्थ्य और कृषि
व्याख्या:
राज्य सूची में वे विषय आते हैं जिन पर केवल राज्य सरकारें कानून बना सकती हैं, जैसे पुलिस, स्वास्थ्य और कृषि।
Q7.भारतीय संघवाद में केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संबंधों में किस संस्था की भूमिका महत्वपूर्ण है?
उत्तर:
वित्त आयोग
व्याख्या:
वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व वितरण और वित्तीय सहायता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Q8.केंद्र और राज्यों के बीच प्रशासनिक संबंधों में केंद्र की क्या भूमिका होती है?
उत्तर:
केंद्र सरकार राज्यों को निर्देश दे सकती है और उनके प्रशासन की समीक्षा कर सकती है।
व्याख्या:
प्रशासनिक संबंधों में केंद्र सरकार राज्यों के प्रशासनिक कार्यों की निगरानी करती है, निर्देश जारी करती है और आवश्यकतानुसार हस्तक्षेप कर सकती है। इससे संघीय ढांचे में नियंत्रण और समन्वय बना रहता है।
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Political Science · Class 11