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Chapter 14

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Chapter 13अध्याय 14 / 14

Chapter 14अध्ययन नोट्स

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14.1 घटना (Event)

व्याख्या

14.1 घटना (Event)

इस अनुभाग में हमने यादृच्छिक परीक्षण और उसके प्रतिदर्श समष्टि (Sample Space) के बारे में विस्तार से पढ़ा। किसी परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि उस परीक्षण से संबंधित सभी संभव परिणामों का समूह होता है, जिसे हम S से निरूपित करते हैं। उदाहरण के लिए, एक सिक्के को दो बार उछालने पर संभावित परिणामों का समूह S = {HH, HT, TH, TT} होता है। घटना (Event) को प्रतिदर्श समष्टि का कोई उपसमुच्चय माना जाता है। उदाहरण के लिए, यदि हमारी रुचि उन परिणामों में है जिनमें एक चित्त (Head) प्रकट होता है, तो इस घटना के अनुकूल परिणाम S के अवयव HT और TH हैं, अतः यह घटना E = {HT, TH} होगी। घटना का घटित होना तब कहा जाता है जब परीक्षण का परिणाम उस घटना के उपसमुच्चय में आता है। यदि परिणाम ω घटना E में है, तो घटना E घटित हुई मानी जाती है, अन्यथा नहीं। घटनाओं के प्रकारों में असंभव घटना (Impossible Event), निश्चित घटना (Sure Event), सरल घटना (Simple Event), मिश्र घटना (Compound Event) आदि शामिल हैं। असंभव घटना वह होती है जिसका उपसमुच्चय रिक्त होता है, जैसे पासे पर 7 का गुणज आना। निश्चित घटना वह होती है जो हमेशा घटित होती है, जैसे पासे पर सम या विषम संख्या आना। सरल घटना में केवल एक ही परिणाम होता है, जैसे सिक्के के दो उछालों में HH आना। मिश्र घटना में एक से अधिक परिणाम होते हैं, जैसे न्यूनतम एक चित्त आना। घटनाओं के बीच विभिन्न बीजगणितीय संबंध होते हैं, जैसे पूरक घटना, सम्मिलन (Union), सर्वनिष्ठ (Intersection), अंतर आदि। पूरक घटना A' वह होती है जिसमें वे सभी परिणाम शामिल होते हैं जो घटना A में नहीं हैं। सम्मिलन A ∪ B वह घटना है जिसमें A या B या दोनों घटित होते हैं। सर्वनिष्ठ A ∩ B वह घटना है जिसमें दोनों A और B घटित होते हैं। अंतर A - B वह घटना है जिसमें A घटित होता है लेकिन B नहीं। परस्पर अपवर्जक (Mutually Exclusive) घटनाएँ वे होती हैं जिनका कोई सामान्य परिणाम नहीं होता, अर्थात् वे एक साथ घटित नहीं हो सकतीं। उदाहरण के लिए, पासे पर विषम संख्या आना और सम संख्या आना परस्पर अपवर्जक घटनाएँ हैं। निःशेष (Exhaustive) घटनाएँ वे होती हैं जिनका सम्मिलन पूरा नमूना स्थान कवर करता है, यानी इनमें से कम से कम एक घटना अवश्य घटित होती है। उदाहरण के लिए, पासे पर 4 से छोटी संख्या आना, 2 से बड़ी किंतु 5 से छोटी संख्या आना, और 4 से बड़ी संख्या आना निःशेष घटनाएँ हैं। इस प्रकार, इस अनुभाग में घटना की परिभाषा, प्रकार, घटनाओं के बीच संबंध, परस्पर अपवर्जक और निःशेष घटनाओं की अवधारणा को विस्तार से समझाया गया है। **Table on page 1 (7×2)** | घटना का वर्णन | ‘S’ का संगत उपसमुच्चय | | --- | --- | | पटों की संख्या तथ्यत: दो है | A = {TT} | | पटों की संख्या कम से कम 1 है | B = {HT, TH, TT} | | चित्तों की संख्या अधिकतम 1 है | C = {HT, TH, TT} | | द्वितीय उछाल में चित्त नहीं है | D = { HT, TT} | | चित्तों की संख्या अधिकतम दो है | S = {HH, HT, TH, TT} | | चित्तों की संख्या दो से अधिक है | φ. |

  • प्रतिदर्श समष्टि (Sample Space) परीक्षण के सभी संभव परिणामों का समूह होता है।
  • घटना (Event) प्रतिदर्श समष्टि का कोई उपसमुच्चय होती है।
  • घटना का घटित होना तब होता है जब परीक्षण का परिणाम उस घटना के उपसमुच्चय में हो।
  • असंभव घटना का उपसमुच्चय रिक्त होता है, निश्चित घटना का उपसमुच्चय पूरा नमूना स्थान होता है।
  • सरल घटना में केवल एक परिणाम होता है, मिश्र घटना में एक से अधिक परिणाम होते हैं।
  • घटनाओं के बीच पूरक, सम्मिलन, सर्वनिष्ठ, अंतर जैसे बीजगणितीय संबंध होते हैं।
  • परस्पर अपवर्जक घटनाएँ एक साथ घटित नहीं हो सकतीं, निःशेष घटनाएँ पूरा नमूना स्थान कवर करती हैं।
  • 📌 प्रतिदर्श समष्टि (Sample Space): सभी संभव परिणामों का समूह।
  • 📌 घटना (Event): प्रतिदर्श समष्टि का उपसमुच्चय।
  • 📌 असंभव घटना (Impossible Event): कोई परिणाम न होने वाली घटना।

14.1.4 परस्पर अपवर्जी घटनाएँ (Mutually exclusive events)

व्याख्या

14.1.4 परस्पर अपवर्जी घटनाएँ (Mutually exclusive events)

परस्पर अपवर्जी घटनाएँ वे घटनाएँ होती हैं जिनका कोई सामान्य परिणाम नहीं होता, अर्थात् वे एक साथ घटित नहीं हो सकतीं। उदाहरण के लिए, पासा फेंकने पर घटना A ‘विषम संख्या आना’ और घटना B ‘सम संख्या आना’ परस्पर अपवर्जी हैं क्योंकि कोई भी संख्या सम और विषम दोनों नहीं हो सकती। यदि दो घटनाएँ A और B परस्पर अपवर्जी हैं, तो उनका सर्वनिष्ठ (Intersection) रिक्त समुच्चय होगा, अर्थात् A ∩ B = φ। इसका अर्थ है कि दोनों घटनाएँ एक साथ घटित नहीं हो सकतीं। परस्पर अपवर्जी घटनाओं के लिए प्रायिकता के नियम सरल हो जाते हैं, जैसे P(A ∪ B) = P(A) + P(B)। यदि घटनाएँ परस्पर अपवर्जी नहीं हैं, तो वे एक साथ घटित हो सकती हैं, और उनकी सम्मिलित प्रायिकता निकालने के लिए सम्मिलन और सर्वनिष्ठ दोनों की प्रायिकता को ध्यान में रखना आवश्यक होता है। इस अनुभाग में उदाहरणों के माध्यम से यह भी समझाया गया है कि परस्पर अपवर्जी घटनाएँ हमेशा निःशेष (Exhaustive) नहीं होतीं, और निःशेष घटनाएँ भी परस्पर अपवर्जी हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, तीन सिक्कों को उछालने पर घटनाएँ ‘कोई चित्त नहीं’, ‘एक चित्त’, और ‘दो या तीन चित्त’ परस्पर अपवर्जी और निःशेष दोनों हैं क्योंकि ये घटनाएँ एक साथ नहीं घटित होतीं और उनका सम्मिलन पूरा नमूना स्थान कवर करता है। इस प्रकार, परस्पर अपवर्जी घटनाओं की अवधारणा प्रायिकता के नियमों को समझने और लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

  • परस्पर अपवर्जी घटनाएँ एक साथ घटित नहीं हो सकतीं।
  • यदि A और B परस्पर अपवर्जी हैं, तो A ∩ B = φ।
  • परस्पर अपवर्जी घटनाओं के लिए P(A ∪ B) = P(A) + P(B)।
  • परस्पर अपवर्जी घटनाएँ हमेशा निःशेष नहीं होतीं।
  • निःशेष घटनाएँ वे हैं जिनका सम्मिलन पूरा नमूना स्थान बनाता है।
  • परस्पर अपवर्जी और निःशेष घटनाएँ दोनों गुण एक साथ हो सकते हैं।
  • 📌 परस्पर अपवर्जी घटनाएँ: ऐसी घटनाएँ जिनका कोई सामान्य परिणाम नहीं होता।
  • 📌 निःशेष घटनाएँ: ऐसी घटनाएँ जिनका सम्मिलन पूरा नमूना स्थान बनाता है।

14.2 प्रायिकता की अभिगृहीतीय दृष्टिकोण (Axiomatic Approach to Probability)

व्याख्या

14.2 प्रायिकता की अभिगृहीतीय दृष्टिकोण (Axiomatic Approach to Probability)

इस अनुभाग में प्रायिकता की अभिगृहीतीय (Axiomatic) परिभाषा प्रस्तुत की गई है, जो प्रायिकता सिद्धांत का आधार है। किसी यादृच्छिक परीक्षण का प्रतिदर्श समष्टि S होता है, और प्रायिकता P एक फलन है जो S के उपसमुच्चयों (घटनाओं) को [0,1] के बीच वास्तविक संख्या

अभ्यास प्रश्नChapter 14

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. एक पासा फेंका जाता है। मान लीजिए घटना E 'पासे पर संख्या 4 दर्शाता' है और घटना F 'पासे पर सम संख्या दर्शाता' है। क्या E और F परस्पर अपवर्जी हैं?

उत्तर:

E घटना पासे पर संख्या 4 दर्शाती है, जो कि एक सम संख्या है। F घटना पासे पर सम संख्या दर्शाती है। अतः E और F के बीच E ⊆ F है। इसलिए E और F परस्पर अपवर्जी नहीं हैं क्योंकि E और F का अंतःस्थ (intersection) खाली सेट नहीं है।

व्याख्या:

परस्पर अपवर्जी घटनाएँ वे होती हैं जिनका कोई सामान्य परिणाम न हो। यहाँ E = {4} और F = {2,4,6} हैं। E ∩ F = {4} ≠ ∅, अतः परस्पर अपवर्जी नहीं।

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Q2.2. एक पासा फेंका जाता है। निम्नलिखित घटनाओं का वर्णन कीजिए: (i) A: संख्या 7 से कम है। (ii) B: संख्या 7 से बड़ी है। (iii) C: संख्या 3 का गुणज है। (iv) D: संख्या 4 से कम है। (v) E: 4 से बड़ी सम संख्या है। (vi) F: संख्या 3 से कम नहीं है। A ∪ B, A ∩ B, B ∪ C, E ∩ F, D ∩ E, A – C, D – E, E ∩ F, F' भी ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

पहले पासे के संभावित परिणाम: {1,2,3,4,5,6} (i) A: संख्या 7 से कम है = {1,2,3,4,5,6} (ii) B: संख्या 7 से बड़ी है = ∅ (क्योंकि पासे पर 7 से बड़ी संख्या नहीं) (iii) C: संख्या 3 का गुणज है = {3,6} (iv) D: संख्या 4 से कम है = {1,2,3} (v) E: 4 से बड़ी सम संख्या है = {6} (vi) F: संख्या 3 से कम नहीं है = {3,4,5,6} अब, A ∪ B = A ∪ ∅ = A = {1,2,3,4,5,6} A ∩ B = A ∩ ∅ = ∅ B ∪ C = ∅ ∪ {3,6} = {3,6} E ∩ F = {6} ∩ {3,4,5,6} = {6} D ∩ E = {1,2,3} ∩ {6} = ∅ A – C = A ackslash C = {1,2,3,4,5,6} ackslash {3,6} = {1,2,4,5} D – E = {1,2,3} ackslash {6} = {1,2,3} F' = S ackslash F = {1,2,3,4,5,6} ackslash {3,4,5,6} = {1,2} अतः सभी घटनाएँ ज्ञात हो गईं।

व्याख्या:

प्रत्येक घटना को पासे के संभावित परिणामों के आधार पर सेट के रूप में लिखा गया। फिर सेट के संघ, छेद, अंतर आदि का उपयोग कर परिणाम निकाले गए।

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Q3.3. एक परीक्षण में पासे के एक जोड़े को फेंकते हैं और उन पर प्रकट संख्याओं को लिखते हैं। निम्नलिखित घटनाओं का वर्णन कीजिए: A: प्राप्त संख्याओं का योग 8 से अधिक है। B: दोनों पासों पर संख्या 2 प्रकट होती है। C: प्रकट संख्याओं का योग कम से कम 7 है और 3 का गुणज है। इन घटनाओं के कौन-कौन से युग्म परस्पर अपवर्जी हैं?

उत्तर:

पासों के संभावित परिणामों का समष्टि S = {(i,j) | i,j = 1 से 6} घटनाएँ: A: योग > 8 संभव योग: 9,10,11,12 A = {(3,6),(4,5),(4,6),(5,4),(5,5),(5,6),(6,3),(6,4),(6,5),(6,6)} B: दोनों पासों पर 2 B = {(2,2)} C: योग ≥ 7 और 3 का गुणज योग के गुणज जो ≥7 हैं: 9,12 C = {(3,6),(4,5),(5,4),(6,3),(6,6)} अब, A ∩ B = ∅ क्योंकि B में (2,2) है जिसका योग 4 है जो A में नहीं A ∩ C ≠ ∅ क्योंकि (3,6),(4,5),(5,4),(6,3),(6,6) सभी A में हैं B ∩ C = ∅ क्योंकि (2,2) का योग 4 है जो C में नहीं अतः परस्पर अपवर्जी युग्म हैं: (A,B) और (B,C) (A,C) परस्पर अपवर्जी नहीं हैं।

व्याख्या:

घटनाओं के सेट बनाकर उनके अंतःस्थ (intersection) की जाँच की गई। यदि intersection खाली है तो वे परस्पर अपवर्जी हैं।

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Q4.4. तीन सिक्कों को एक बार उछाला जाता है। मान लीजिए कि घटना 'तीन चित्त दिखना' को A से, घटना 'दो चित्त और एक पट्ट दिखना' को B से, घटना 'तीन पट्ट दिखना' को C और घटना 'पहले सिक्के पर चित्त दिखना' को D से निरूपित किया गया है। बताइए कि इनमें से कौन सी घटनाएँ (i) परस्पर अपवर्जी हैं? (ii) सरल हैं? (iii) मिश्र हैं?

उत्तर:

(i) परस्पर अपवर्जी घटनाएँ: A = {HHH} B = {HHT, HTH, THH} C = {TTT} A और C परस्पर अपवर्जी हैं क्योंकि A ∩ C = ∅ A और B भी परस्पर अपवर्जी हैं क्योंकि A ∩ B = ∅ B और C भी परस्पर अपवर्जी हैं क्योंकि B ∩ C = ∅ (ii) सरल घटनाएँ: सरल घटना वह होती है जिसमें केवल एक परिणाम होता है। A (तीन चित्त) सरल है क्योंकि इसमें केवल HHH है। C (तीन पट्ट) सरल है क्योंकि इसमें केवल TTT है। D (पहले सिक्के पर चित्त) मिश्र है क्योंकि इसमें कई परिणाम हैं जैसे HHH, HHT, HTH, HTT (iii) मिश्र घटनाएँ: B (दो चित्त और एक पट्ट) मिश्र है क्योंकि इसमें तीन परिणाम हैं। D (पहले सिक्के पर चित्त) मिश्र है क्योंकि इसमें चार परिणाम हैं।

व्याख्या:

घटनाओं के परिणामों के आधार पर उनके प्रकार और परस्पर संबंध निर्धारित किए गए। सरल घटना में एक ही परिणाम होता है, मिश्र में कई। परस्पर अपवर्जी घटनाओं का कोई साझा परिणाम नहीं होता।

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Q5.5. तीन सिक्के एक बार उछाले जाते हैं। वर्णन कीजिए। (i) दो घटनाएँ जो परस्पर अपवर्जी हैं। (ii) तीन घटनाएँ जो परस्पर अपवर्जी और निःशेष हैं। (iii) दो घटनाएँ जो परस्पर अपवर्जी नहीं हैं। (iv) दो घटनाएँ जो परस्पर अपवर्जी हैं किंतु निःशेष नहीं हैं। (v) तीन घटनाएँ जो परस्पर अपवर्जी हैं किंतु निःशेष नहीं हैं।

उत्तर:

(i) दो परस्पर अपवर्जी घटनाएँ: A = 'तीन चित्त' = {HHH} C = 'तीन पट्ट' = {TTT} A ∩ C = ∅ (ii) तीन परस्पर अपवर्जी और निःशेष घटनाएँ: A = {HHH} B = {HHT, HTH, THH} C = {HTT, THT, TTH, TTT} ये तीनों घटनाएँ परस्पर अपवर्जी हैं और उनका संघ पूरा नमूना स्थान है। (iii) दो घटनाएँ जो परस्पर अपवर्जी नहीं हैं: D = 'पहले सिक्के पर चित्त' = {HHH, HHT, HTH, HTT} E = 'दूसरे सिक्के पर चित्त' = {HHH, HHT, THT, TTH} D ∩ E ≠ ∅ (जैसे HHH, HHT) (iv) दो परस्पर अपवर्जी किंतु निःशेष नहीं: F = 'तीन चित्त' = {HHH} G = 'दो चित्त और एक पट्ट' = {HHT, HTH, THH} F ∩ G = ∅ लेकिन F ∪ G ≠ पूरा नमूना स्थान (v) तीन परस्पर अपवर्जी किंतु निःशेष नहीं: A = {HHH} B = {HHT, HTH, THH} D = {HHH, HHT, HTH, HTT} यहाँ A और B परस्पर अपवर्जी हैं, लेकिन D में A और B दोनों के परिणाम हैं, इसलिए ये तीनों परस्पर अपवर्जी नहीं हैं।

व्याख्या:

घटनाओं के परिणामों के आधार पर उनके परस्पर संबंध और निःशेषता की जाँच की गई।

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Q6.6. दो पासे फेंके जाते हैं। घटनाएँ A, B और C निम्नलिखित प्रकार से हैं: A: पहले पासे पर सम संख्या प्राप्त होना B: पहले पासे पर विषम संख्या प्राप्त होना C: पासों पर प्राप्त संख्याओं का योग ≤ 5 होना निम्नलिखित घटनाओं का वर्णन कीजिए: (i) A' (ii) B - नहीं (iii) A या B (iv) A और B (v) A किंतु C नहीं (vi) B या C (vii) B और C (viii) A ∩ B' ∩ C'

उत्तर:

पासों के संभावित परिणाम: S = {(i,j) | i,j = 1 से 6} A: पहले पासे पर सम संख्या = {2,4,6} × {1..6} B: पहले पासे पर विषम संख्या = {1,3,5} × {1..6} C: योग ≤ 5 C = {(1,1),(1,2),(1,3),(1,4),(2,1),(2,2),(2,3),(3,1),(3,2),(4,1)} (i) A' = A का पूरक = S ackslash A = {1,3,5} × {1..6} = B (ii) B - नहीं = B' = S ackslash B = A (iii) A या B = A ∪ B = पूरा नमूना स्थान S (iv) A और B = A ∩ B = ∅ (पहला पासा सम और विषम एक साथ नहीं हो सकता) (v) A किंतु C नहीं = A ∩ C' = A ackslash C पहले पासे पर सम संख्या और योग ≤ 5 नहीं (vi) B या C = B ∪ C (vii) B और C = B ∩ C (viii) A ∩ B' ∩ C' = A ∩ (S ackslash B) ∩ (S ackslash C) = A ∩ A ∩ C' = A ∩ C' अर्थात् पहले पासे पर सम संख्या और योग ≤ 5 नहीं होना।

व्याख्या:

घटनाओं के सेट बनाकर उनके पूरक, संघ, छेद आदि निकाले गए।

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Q7.7. उपर्युक्त प्रश्न 6 को देखिए और निम्नलिखित में सत्य या असत्य बताइए (अपने उत्तर का कारण दीजिए): (i) A और B परस्पर अपवर्जी हैं। (ii) A और B परस्पर अपवर्जी और निःशेष हैं। (iii) A = B' (iv) A और C परस्पर अपवर्जी हैं। (v) A और B' परस्पर अपवर्जी हैं। (vi) A', B', C परस्पर अपवर्जी और निःशेष घटनाएँ हैं।

उत्तर:

(i) सत्य: A और B परस्पर अपवर्जी हैं क्योंकि पहले पासे पर एक संख्या सम और विषम दोनों नहीं हो सकती। (ii) असत्य: परस्पर अपवर्जी तो हैं, लेकिन निःशेष नहीं क्योंकि A ∪ B = S है, अतः निःशेष हैं। (यहाँ प्रश्न में निःशेष का अर्थ पूरा नमूना स्थान होना है) (iii) सत्य: A = B' क्योंकि B = पहले पासे पर विषम संख्या, A = पहले पासे पर सम संख्या, ये पूरक हैं। (iv) असत्य: A और C परस्पर अपवर्जी नहीं हैं क्योंकि कुछ परिणाम ऐसे हैं जो दोनों में हैं (जैसे (2,1), (2,2) आदि जहाँ पहले पासे पर सम संख्या और योग ≤ 5 है)। (v) असत्य: B' = A, अतः A और B' समान हैं, इसलिए परस्पर अपवर्जी नहीं। (vi) असत्य: A', B', C परस्पर अपवर्जी नहीं हैं क्योंकि A' = B, B' = A, और C के बीच कुछ ओवरलैप है।

व्याख्या:

घटनाओं के परस्पर संबंधों का विश्लेषण कर सत्य/असत्य निर्धारित किया गया।

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Q8.1. प्रतिदर्श समष्टि $S = \{\omega_1, \omega_2, \omega_3, \omega_4, \omega_5, \omega_6, \omega_7\}$ के परिणामों के लिए निम्नलिखित में से कौन से प्रायिकता निर्धारण वैध नहीं है: | परिणाम | $\omega_1$ | $\omega_2$ | $\omega_3$ | $\omega_4$ | $\omega_5$ | $\omega_6$ | $\omega_7$ | | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | | (a) | 0.1 | 0.01 | 0.05 | 0.03 | 0.01 | 0.2 | 0.6 | | (b) | $\frac{1}{7}$ | $\frac{1}{7}$ | $\frac{1}{7}$ | $\frac{1}{7}$ | $\frac{1}{7}$ | $\frac{1}{7}$ | $\frac{1}{7}$ | | (c) | 0.1 | 0.2 | 0.3 | 0.4 | 0.5 | 0.6 | 0.7 | | (d) | -0.1 | 0.2 | 0.3 | 0.4 | -0.2 | 0.1 | 0.3 | | (e) | $\frac{1}{14}$ | $\frac{2}{14}$ | $\frac{3}{14}$ | $\frac{4}{14}$ | $\frac{5}{14}$ | $\frac{6}{14}$ | $\frac{15}{14}$ |
A.A) (a) 0.1, 0.01, 0.05, 0.03, 0.01, 0.2, 0.6
B.B) (b) 1/7 for all outcomes
C.C) (c) 0.1, 0.2, 0.3, 0.4, 0.5, 0.6, 0.7
D.D) (d) -0.1, 0.2, 0.3, 0.4, -0.2, 0.1, 0.3
E.E) (e) 1/14, 2/14, 3/14, 4/14, 5/14, 6/14, 15/14

उत्तर:

वैध प्रायिकता निर्धारण के लिए सभी प्रायिकताएँ 0 और 1 के बीच होनी चाहिए और उनका योग 1 होना चाहिए। (a) योग = 0.1 + 0.01 + 0.05 + 0.03 + 0.01 + 0.2 + 0.6 = 1.0 → वैध (b) सभी 1/7 हैं, योग = 7 × 1/7 = 1 → वैध (c) योग = 0.1 + 0.2 + 0.3 + 0.4 + 0.5 + 0.6 + 0.7 = 2.8 > 1 → अवैध (d) प्रायिकता में नकारात्मक मान (-0.1, -0.2) हैं → अवैध (e) योग = (1+2+3+4+5+6+15)/14 = 36/14 > 1 → अवैध इस प्रकार (c), (d), और (e) अवैध हैं।

व्याख्या:

प्रायिकता के नियम: 1) प्रत्येक प्रायिकता 0 ≤ P(ω) ≤ 1 होनी चाहिए। 2) सभी प्रायिकताओं का योग 1 होना चाहिए। (c) में योग 2.8 है जो 1 से अधिक है। (d) में नकारात्मक प्रायिकताएँ हैं जो अस्वीकार्य हैं। (e) में योग 36/14 = 2.57 है जो 1 से अधिक है। इसलिए ये तीनों अवैध हैं।

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