Chapter 13
Chapter 13 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
13.1 भूमिका (Introduction)
व्याख्या13.1 भूमिका (Introduction)
सांख्यिकी गणित की वह शाखा है जो विशेष उद्देश्य के लिए एकत्रित आँकड़ों के संग्रह, संगठन, प्रस्तुति और विश्लेषण से संबंधित है। इस अध्याय की शुरुआत में हम समझते हैं कि आँकड़ों का विश्लेषण एवं व्याख्या कर उनके आधार पर निर्णय लेना सांख्यिकी का मूल उद्देश्य है। पिछले अध्यायों में हमने आँकड़ों को तालिका और ग्राफ के रूप में प्रस्तुत करने की विधियाँ सीखी हैं, जिससे आँकड़ों के महत्वपूर्ण गुणों को समझना आसान होता है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय प्रवृत्ति की माप जैसे माध्य (Mean), माध्यिका (Median) और बहुलक (Mode) के माध्यम से आँकड़ों का प्रतिनिधि मान ज्ञात किया जाता है। ये माप हमें आँकड़ों के केंद्र के बारे में जानकारी देते हैं। हालांकि, केवल केंद्रीय प्रवृत्ति की माप से आँकड़ों के पूरे व्यवहार को समझना संभव नहीं है। उदाहरण के लिए, दो बल्लेबाजों A और B के पिछले दस मैचों के रन समान माध्य और माध्यिका (53) होने के बावजूद उनके प्रदर्शन में भिन्नता होती है। बल्लेबाज A के रन 0 से 117 तक फैले हुए हैं जबकि बल्लेबाज B के रन 46 से 60 के बीच सीमित हैं। इसका अर्थ है कि B का प्रदर्शन अधिक स्थिर है जबकि A के रन अधिक बिखरे हुए हैं। इसलिए, आँकड़ों के विश्लेषण के लिए परिवर्तनशीलता (Dispersion) या प्रकीर्णन (Scatter) का अध्ययन आवश्यक है। प्रकीर्णन की माप से पता चलता है कि आँकड़े केंद्रीय प्रवृत्ति के चारों ओर किस प्रकार फैले हुए हैं। इस अध्याय में हम प्रकीर्णन की विभिन्न मापों जैसे परिसर (Range), माध्य विचलन (Mean Deviation), मानक विचलन (Standard Deviation) आदि का अध्ययन करेंगे।
- सांख्यिकी आँकड़ों के संग्रह, संगठन, प्रस्तुति और विश्लेषण की विधा है।
- केंद्रीय प्रवृत्ति की माप (माध्य, माध्यिका, बहुलक) आँकड़ों के केंद्र का प्रतिनिधित्व करती हैं।
- केवल केंद्रीय प्रवृत्ति से आँकड़ों के बिखराव का पता नहीं चलता।
- परिवर्तनशीलता या प्रकीर्णन आँकड़ों के फैलाव को दर्शाती है।
- प्रकीर्णन की मापों के माध्यम से आँकड़ों के वितरण की गहराई से समझ प्राप्त होती है।
- 📌 सांख्यिकी: आँकड़ों के संग्रह, संगठन, प्रस्तुति और विश्लेषण की विधा।
- 📌 केंद्रीय प्रवृत्ति: आँकड़ों के केंद्र का प्रतिनिधि मान।
- 📌 प्रकीर्णन: आँकड़ों के फैलाव या बिखराव की माप।
13.2 प्रकीर्णन की माप (Measures of dispersion)
अवधारणा13.2 प्रकीर्णन की माप (Measures of dispersion)
प्रकीर्णन की माप आँकड़ों में बिखराव या फैलाव को मापने के लिए उपयोग की जाती हैं। ये माप हमें यह बताती हैं कि आँकड़े केंद्रीय प्रवृत्ति के चारों ओर किस प्रकार फैले हुए हैं। प्रकीर्णन की मुख्य मापों में परिसर (Range), चतुर्थक विचलन (Quartile Deviation), माध्य विचलन (Mean Deviation) और मानक विचलन (Standard Deviation) शामिल हैं। इस अध्याय में हम परिसर, माध्य विचलन और मानक विचलन की विधियों पर विशेष ध्यान देंगे। परिसर सबसे सरल प्रकीर्णन की माप है जो केवल अधिकतम और न्यूनतम मान के बीच का अंतर दर्शाता है। हालांकि, यह माप केवल बिखराव का मोटा अनुमान देती है और आँकड़ों के वितरण के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं देती। इसलिए, अधिक सटीक मापों की आवश्यकता होती है जो प्रेक्षणों के केंद्रीय प्रवृत्ति से विचलन को ध्यान में रखते हैं। माध्य विचलन और मानक विचलन इसी उद्देश्य से विकसित किए गए हैं। माध्य विचलन में प्रेक्षणों के केंद्रीय मान से विचलनों के निरपेक्ष मानों का औसत लिया जाता है, जबकि मानक विचलन में विचलनों के वर्गों का औसत लेकर उसका वर्गमूल निकाला जाता है। ये माप हमें आँकड़ों के फैलाव की अधिक सटीक और गणितीय रूप से उपयोगी जानकारी देते हैं।
- प्रकीर्णन आँकड़ों के फैलाव को मापने के लिए उपयोगी है।
- मुख्य प्रकीर्णन माप हैं: परिसर, चतुर्थक विचलन, माध्य विचलन, मानक विचलन।
- परिसर अधिकतम और न्यूनतम मान के बीच का अंतर है।
- माध्य विचलन और मानक विचलन प्रेक्षणों के केंद्रीय मान से विचलन पर आधारित हैं।
- माध्य विचलन में विचलनों के निरपेक्ष मानों का औसत लिया जाता है।
- मानक विचलन में विचलनों के वर्गों का औसत लेकर उसका वर्गमूल निकाला जाता है।
- 📌 प्रकीर्णन (Dispersion): आँकड़ों के फैलाव की माप।
- 📌 परिसर (Range): अधिकतम और न्यूनतम मान के बीच का अंतर।
- 📌 माध्य विचलन (Mean Deviation): केंद्रीय मान से विचलनों के निरपेक्ष मानों का औसत।
13.3 परिसर (Range)
व्याख्या13.3 परिसर (Range)
परिसर प्रकीर्णन की सबसे सरल माप है जो किसी आँकड़ों के समूह में अधिकतम और न्यूनतम मान के बीच के अंतर को दर्शाती है। इसे इस प्रकार परिभाषित किया जाता है: परिसर = अधिकतम मान – न्यूनतम मान यह माप हमें आँकड़ों के फैलाव का मोटा अनुमान देती है। उदाहरण के
अभ्यास प्रश्न — Chapter 13
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. आठ प्रेक्षणों का औसत तथा विचरण क्रमशः 9 तथा 9.25 हैं। यदि इनमें से छह प्रेक्षण 6, 7, 10, 12, 12 तथा 13 हैं, तो शेष दो प्रेक्षण ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दी गई जानकारी: प्रेक्षणों की संख्या (n) = 8 औसत (x̄) = 9 विचरण (σ²) = 9.25 छः प्रेक्षण: 6, 7, 10, 12, 12, 13 मान लीजिए शेष दो प्रेक्षण x और y हैं। 1. औसत के अनुसार: (6 + 7 + 10 + 12 + 12 + 13 + x + y)/8 = 9 ⇒ (60 + x + y)/8 = 9 ⇒ 60 + x + y = 72 ⇒ x + y = 12 2. विचरण के अनुसार: विचरण σ² = [Σ(xᵢ - x̄)²]/n Σ(xᵢ²) = 6² + 7² + 10² + 12² + 12² + 13² + x² + y² = 36 + 49 + 100 + 144 + 144 + 169 + x² + y² = 642 + x² + y² विचरण: σ² = [Σ(xᵢ²)/n] - (x̄)² 9.25 = [(642 + x² + y²)/8] - (9)² 9.25 = [(642 + x² + y²)/8] - 81 ⇒ (642 + x² + y²)/8 = 90.25 ⇒ 642 + x² + y² = 722 ⇒ x² + y² = 80 अब x + y = 12, x² + y² = 80 (x + y)² = x² + 2xy + y² = 144 ⇒ x² + y² = 80 ⇒ 2xy = 144 - 80 = 64 ⇒ xy = 32 अब x और y दो संख्याएँ हैं जिनका योग 12 और गुणनफल 32 है। x, y के लिए: x + y = 12, xy = 32 x² - 12x + 32 = 0 x = [12 ± √(144 - 128)]/2 = [12 ± √16]/2 = [12 ± 4]/2 तो x = 8, y = 4 या x = 4, y = 8 अतः शेष दो प्रेक्षण 4 और 8 हैं।
व्याख्या:
सभी प्रेक्षणों का योग और औसत से x+y निकाला। विचरण के सूत्र से x²+y² निकाला। फिर x+y और x²+y² से xy निकाला। द्विघात समीकरण हल कर दोनों प्रेक्षण प्राप्त किए।
Q2.2. सात प्रेक्षणों का औसत तथा विचरण क्रमशः 8 तथा 16 हैं। यदि इनमें से पाँच प्रेक्षण 2, 4, 10, 12, 14 हैं, तो शेष दो प्रेक्षण ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दी गई जानकारी: प्रेक्षणों की संख्या (n) = 7 औसत (x̄) = 8 विचरण (σ²) = 16 पाँच प्रेक्षण: 2, 4, 10, 12, 14 मान लीजिए शेष दो प्रेक्षण x और y हैं। 1. औसत के अनुसार: (2 + 4 + 10 + 12 + 14 + x + y)/7 = 8 ⇒ (42 + x + y)/7 = 8 ⇒ 42 + x + y = 56 ⇒ x + y = 14 2. विचरण के अनुसार: Σ(xᵢ²) = 2² + 4² + 10² + 12² + 14² + x² + y² = 4 + 16 + 100 + 144 + 196 + x² + y² = 460 + x² + y² विचरण: σ² = [Σ(xᵢ²)/n] - (x̄)² 16 = [(460 + x² + y²)/7] - 64 ⇒ (460 + x² + y²)/7 = 80 ⇒ 460 + x² + y² = 560 ⇒ x² + y² = 100 अब x + y = 14, x² + y² = 100 (x + y)² = x² + 2xy + y² = 196 ⇒ x² + y² = 100 ⇒ 2xy = 196 - 100 = 96 ⇒ xy = 48 अब x और y दो संख्याएँ हैं जिनका योग 14 और गुणनफल 48 है। x + y = 14, xy = 48 x² - 14x + 48 = 0 x = [14 ± √(196 - 192)]/2 = [14 ± √4]/2 = [14 ± 2]/2 तो x = 8, y = 6 या x = 6, y = 8 अतः शेष दो प्रेक्षण 6 और 8 हैं।
व्याख्या:
औसत से x+y निकाला, विचरण से x²+y² निकाला, फिर x+y और x²+y² से xy निकाला। द्विघात समीकरण हल कर दोनों प्रेक्षण प्राप्त किए।
Q3.3. चार प्रेक्षणों का औसत तथा मानक विचरण क्रमशः 8 तथा 4 हैं। यदि प्रत्येक प्रेक्षण को 3 से गुणा कर दिया जाए, तो परिणामी प्रेक्षणों का औसत और मानक विचरण ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दी गई जानकारी: औसत (x̄) = 8 मानक विचरण (σ) = 4 प्रेक्षणों की संख्या (n) = 4 यदि प्रत्येक प्रेक्षण को 3 से गुणा किया जाए: नए प्रेक्षण: 3x₁, 3x₂, 3x₃, 3x₄ नया औसत = 3 × पुराना औसत = 3 × 8 = 24 नया मानक विचरण = 3 × पुराना मानक विचरण = 3 × 4 = 12 अतः परिणामी प्रेक्षणों का औसत 24 और मानक विचरण 12 है।
व्याख्या:
गुणन के नियम अनुसार औसत और मानक विचरण दोनों को गुणा कर दिया जाता है।
Q4.4. यदि n प्रेक्षण x₁, x₂, ..., xₙ का औसत x̄ तथा विचरण σ² हैं, तो सिद्ध कीजिए कि प्रेक्षणों ax₁, ax₂, ..., axₙ का औसत तथा विचरण क्रमशः ax̄ तथा a²σ² (a ≠ 0) हैं।
उत्तर:
सिद्ध करने के लिए: माना n प्रेक्षण x₁, x₂, ..., xₙ का औसत x̄ तथा विचरण σ² है। नए प्रेक्षण: ax₁, ax₂, ..., axₙ नया औसत: = (ax₁ + ax₂ + ... + axₙ)/n = a(x₁ + x₂ + ... + xₙ)/n = a x̄ नया विचरण: = [Σ(axᵢ - ax̄)²]/n = [Σa²(xᵢ - x̄)²]/n = a² [Σ(xᵢ - x̄)²]/n = a² σ² अतः सिद्ध हुआ कि नए औसत ax̄ तथा नया विचरण a²σ² है।
व्याख्या:
औसत और विचरण के सूत्र में गुणन का प्रभाव दिखाया गया।
Q5.5. सात प्रेक्षणों का औसत तथा मानक विचरण क्रमशः 10 तथा 2 हैं। जाँच करने पर यह पाया गया कि एक प्रेक्षण 8 गलत है। निम्न में से प्रत्येक के लिए सही औसत तथा मानक विचरण ज्ञात कीजिए: (i) गलत प्रेक्षण हटा दिया जाए। (ii) उसे 12 से बदल दिया जाए।
उत्तर:
(i) गलत प्रेक्षण हटाने पर: प्रेक्षणों की संख्या (n) = 7 औसत (x̄) = 10 मानक विचरण (σ) = 2 गलत प्रेक्षण = 8 सही प्रेक्षणों का योग = 7 × 10 = 70 सही योग = 70 - 8 = 62 नए n = 6 नया औसत = 62/6 = 10.33 मानक विचरण: σ² = [Σxᵢ²/n] - (x̄)² Σxᵢ² = n [σ² + (x̄)²] = 7 × [4 + 100] = 7 × 104 = 728 सही योग = 728 - 8² = 728 - 64 = 664 नया σ² = [664/6] - (10.33)² = 110.67 - 106.78 = 3.89 नया σ = √3.89 ≈ 1.97 (ii) गलत प्रेक्षण को 12 से बदलने पर: सही योग = 70 - 8 + 12 = 74 नया औसत = 74/7 = 10.57 Σxᵢ² = 728 - 64 + 144 = 728 - 64 + 144 = 808 नया σ² = [808/7] - (10.57)² = 115.43 - 111.74 = 3.69 नया σ = √3.69 ≈ 1.92 अतः: (i) औसत = 10.33, मानक विचरण ≈ 1.97 (ii) औसत = 10.57, मानक विचरण ≈ 1.92
व्याख्या:
औसत और मानक विचरण के सूत्र से गलत प्रेक्षण हटाने और बदलने पर नए मान निकाले।
Q6.6. 100 प्रेक्षणों का औसत तथा मानक विचरण क्रमशः 20 तथा 3 हैं। बाद में यह पाया गया कि तीन प्रेक्षण 21, 21 तथा 18 गलत थे। यदि गलत प्रेक्षणों को हटा दिया जाए, तो औसत और मानक विचरण ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दी गई जानकारी: प्रेक्षणों की संख्या (n) = 100 औसत (x̄) = 20 मानक विचरण (σ) = 3 गलत प्रेक्षण: 21, 21, 18 सही योग = 100 × 20 = 2000 सही योग = 2000 - (21 + 21 + 18) = 2000 - 60 = 1940 नया n = 97 नया औसत = 1940/97 ≈ 20 Σxᵢ² = n [σ² + (x̄)²] = 100 × [9 + 400] = 100 × 409 = 40900 सही योग = 40900 - (21² + 21² + 18²) = 40900 - (441 + 441 + 324) = 40900 - 1206 = 39694 नया σ² = [39694/97] - (20)² = 409.22 - 400 = 9.22 नया σ = √9.22 ≈ 3.04 अतः औसत ≈ 20, मानक विचरण ≈ 3.04
व्याख्या:
औसत और मानक विचरण के सूत्र से गलत प्रेक्षण हटाकर नए मान निकाले।
Q7.सांख्यिकी का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
आंकड़ों को संग्रहित और व्यवस्थित करना
व्याख्या:
सांख्यिकी का मुख्य उद्देश्य बड़ी संख्या में प्राप्त आंकड़ों को इस प्रकार व्यवस्थित करना है कि वे समझने और विश्लेषण करने में सरल हों। यह आंकड़ों के संग्रहण, वर्गीकरण, प्रस्तुति और विश्लेषण की विधि प्रदान करता है।
Q8.आंकड़ों के कितने मुख्य प्रकार होते हैं और वे कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
आंकड़ों के दो मुख्य प्रकार होते हैं: असमूहित आंकड़े और समूहित आंकड़े। असमूहित आंकड़े वे होते हैं जो बिना वर्गीकरण के सीधे उपलब्ध होते हैं, जबकि समूहित आंकड़े वे होते हैं जिन्हें वर्गों में बांटकर प्रस्तुत किया जाता है।
व्याख्या:
आंकड़ों के मुख्य दो प्रकार होते हैं: 1. असमूहित आंकड़े: सीधे उपलब्ध, बिना वर्गीकरण के। 2. समूहित आंकड़े: वर्गों में विभाजित, बड़ी संख्या में आंकड़ों के लिए। उदाहरण: किसी कक्षा के छात्रों के अंक (असमूहित), परीक्षा के अंक वर्गों में (समूहित)।
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Mathematics · Class 11