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Methods of Remunerating Labour 82

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Cost and Management Accounting (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट

Methods of Remunerating Labour 82अध्ययन नोट्स

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6.1 श्रमिकों के पारिश्रमिक की विधियाँ

अवधारणा

6.1 श्रमिकों के पारिश्रमिक की विधियाँ

इस अनुभाग में श्रमिकों के पारिश्रमिक की विभिन्न विधियों का परिचय दिया गया है। पारिश्रमिक का अर्थ है श्रमिकों को उनके कार्य के लिए दिया जाने वाला वेतन या मजदूरी। श्रमिकों के पारिश्रमिक की विधियाँ मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं: समय आधारित और कार्य आधारित। समय आधारित विधि में श्रमिकों को उनके कार्य के लिए निर्धारित समय के अनुसार भुगतान किया जाता है, जबकि कार्य आधारित विधि में श्रमिकों को उनके द्वारा किए गए कार्य की मात्रा के अनुसार भुगतान किया जाता है। इन विधियों का चयन कंपनी की आवश्यकताओं, श्रमिकों की प्रकृति, कार्य की जटिलता और उत्पादन की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। श्रमिकों के पारिश्रमिक की विधियाँ श्रमिकों की प्रेरणा, उत्पादकता और कंपनी की लागत को प्रभावित करती हैं।

  • पारिश्रमिक का अर्थ है श्रमिकों को दिया जाने वाला वेतन या मजदूरी।
  • पारिश्रमिक की विधियाँ मुख्यतः समय आधारित और कार्य आधारित होती हैं।
  • समय आधारित विधि में श्रमिकों को उनके कार्य के समय के अनुसार भुगतान किया जाता है।
  • कार्य आधारित विधि में श्रमिकों को उनके द्वारा किए गए कार्य की मात्रा के अनुसार भुगतान किया जाता है।
  • विधि का चयन कंपनी की आवश्यकताओं और कार्य की प्रकृति पर निर्भर करता है।
  • पारिश्रमिक की विधियाँ श्रमिकों की प्रेरणा और उत्पादकता को प्रभावित करती हैं।
  • 📌 पारिश्रमिक: श्रमिकों को उनके कार्य के लिए दिया जाने वाला वेतन या मजदूरी।
  • 📌 समय आधारित विधि: श्रमिकों को उनके कार्य के समय के अनुसार भुगतान करना।
  • 📌 कार्य आधारित विधि: श्रमिकों को उनके द्वारा किए गए कार्य की मात्रा के अनुसार भुगतान करना।

6.2 समय आधारित पारिश्रमिक प्रणाली

व्याख्या

6.2 समय आधारित पारिश्रमिक प्रणाली

समय आधारित पारिश्रमिक प्रणाली में श्रमिकों को उनके कार्य के लिए निर्धारित समय के अनुसार भुगतान किया जाता है। इस प्रणाली में श्रमिकों को प्रति घंटे, प्रति दिन, या प्रति सप्ताह की दर से वेतन दिया जाता है। यह प्रणाली उन कार्यों के लिए उपयुक्त है जहाँ कार्य की गुणवत्ता, सटीकता और निरंतरता आवश्यक होती है, जैसे मशीनों का संचालन, निरीक्षण, या रखरखाव। समय आधारित प्रणाली में श्रमिकों की उत्पादकता पर कम ध्यान दिया जाता है, बल्कि उनकी उपस्थिति और कार्य के समय पर अधिक ध्यान दिया जाता है। इस प्रणाली के लाभों में श्रमिकों को स्थिर आय, कार्य की गुणवत्ता में सुधार, और श्रमिकों की संतुष्टि शामिल है। इसके कुछ दोष भी हैं, जैसे श्रमिकों की उत्पादकता में कमी, आलस्य, और कंपनी की लागत में वृद्धि।

  • समय आधारित प्रणाली में श्रमिकों को उनके कार्य के समय के अनुसार भुगतान किया जाता है।
  • यह प्रणाली गुणवत्ता और सटीकता वाले कार्यों के लिए उपयुक्त है।
  • इस प्रणाली में श्रमिकों की उत्पादकता पर कम ध्यान दिया जाता है।
  • श्रमिकों को स्थिर आय मिलती है, जिससे उनकी संतुष्टि बढ़ती है।
  • इस प्रणाली में कंपनी की लागत बढ़ सकती है।
  • श्रमिकों में आलस्य और उत्पादकता में कमी की संभावना रहती है।
  • 📌 समय आधारित प्रणाली: श्रमिकों को उनके कार्य के समय के अनुसार भुगतान करना।
  • 📌 स्थिर आय: नियमित और निश्चित वेतन।

6.3 कार्य आधारित पारिश्रमिक प्रणाली

व्याख्या

6.3 कार्य आधारित पारिश्रमिक प्रणाली

कार्य आधारित पारिश्रमिक प्रणाली में श्रमिकों को उनके द्वारा किए गए कार्य की मात्रा के अनुसार भुगतान किया जाता है। इस प्रणाली में श्रमिकों को प्रति यूनिट, प्रति दर्जन, या प्रति सैकड़ा की दर से वेतन दिया जाता है। यह प्रणाली उन कार्यों के लिए उपयुक्त है