Major Saint Sects (Bhakti Movement in Rajasthan)
Major Saint Sects (Bhakti Movement in Rajasthan) — अध्ययन नोट्स
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भक्ति आंदोलन का उद्भव और राजस्थान में प्रवेश
व्याख्याभक्ति आंदोलन का उद्भव और राजस्थान में प्रवेश
भक्ति आंदोलन (Bhakti Movement) भारत के मध्यकालीन इतिहास का एक महत्वपूर्ण धार्मिक-सांस्कृतिक आंदोलन था, जिसने समाज में धार्मिक सहिष्णुता, सामाजिक समरसता और मानवता के मूल्यों को स्थापित किया। राजस्थान में भक्ति आंदोलन का प्रवेश 14वीं-15वीं शताब्दी के मध्य हुआ। इस आंदोलन ने समाज के सभी वर्गों में भगवान के प्रति व्यक्तिगत भक्ति (Personal Devotion) को महत्व दिया और जातिवाद, पाखंड, अंधविश्वास, कर्मकांड का विरोध किया। राजस्थान में भक्ति आंदोलन के प्रचार-प्रसार में संतों, कवियों, लोकदेवताओं और साधु-संतों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यहाँ के प्रमुख संत सम्प्रदायों ने न केवल धार्मिक चेतना का विस्तार किया, बल्कि सामाजिक सुधार, लोककल्याण और सांस्कृतिक एकता का भी संदेश दिया। राजस्थान में भक्ति आंदोलन का प्रभाव विशेष रूप से मेवाड़, मारवाड़, शेखावाटी, ढूंढाड़, हाड़ौती आदि क्षेत्रों में देखा गया। ⭐ परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य: • राजस्थान में भक्ति आंदोलन का मुख्य केंद्र जयपुर, टोंक, अजमेर, भीलवाड़ा, सीकर आदि रहा। • राजस्थान के संतों ने समाज सुधार, स्त्री-शिक्षा, छुआछूत उन्मूलन पर बल दिया। • भक्ति आंदोलन के प्रभाव से राजस्थान में कई धार्मिक मेलों, उत्सवों की शुरुआत हुई। • भक्ति आंदोलन के राजस्थान में प्रवेश से जुड़े वर्ष, स्थान और संतों के नाम अवश्य याद रखें। • भक्ति आंदोलन के सामाजिक प्रभाव से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।
- भक्ति आंदोलन की शुरुआत दक्षिण भारत में 7वीं-8वीं शताब्दी में हुई, राजस्थान में इसका प्रभाव 14वीं-15वीं शताब्दी में दिखा।
- राजस्थान में भक्ति आंदोलन ने जातिवाद, ऊँच-नीच, पाखंडवाद का विरोध किया।
- राजस्थान के संतों ने स्थानीय भाषा (राजस्थानी, ब्रज, ढूंढाड़ी) में भक्ति साहित्य की रचना की।
- भक्ति आंदोलन ने समाज में धार्मिक सहिष्णुता, सामाजिक समरसता को बढ़ावा दिया।
- राजस्थान के प्रमुख संत सम्प्रदायों में रामानंदी, दादूपंथी, निर्गुण, नाथपंथी, ख्याति सम्प्रदाय आदि शामिल हैं।
- 📌 भक्ति: भगवान के प्रति व्यक्तिगत प्रेम व समर्पण
- 📌 सम्प्रदाय: किसी विशेष गुरु या विचारधारा के अनुयायियों का समूह
रामानंदी सम्प्रदाय
अवधारणारामानंदी सम्प्रदाय
रामानंदी सम्प्रदाय राजस्थान के प्रमुख वैष्णव सम्प्रदायों में से एक है, जिसकी स्थापना संत रामानंद (14वीं शताब्दी) ने की थी। रामानंदाचार्य ने जातिवाद का विरोध करते हुए समाज के सभी वर्गों को भक्ति पथ पर चलने के लिए प्रेरित किया। राजस्थान में रामानंदी सम्प्रदाय का प्रभाव विशेष रूप से मेवाड़, मारवाड़, जयपुर, कोटा, बूंदी, झालावाड़ आदि क्षेत्रों में देखा जाता है। इस सम्प्रदाय के अनुयायी राम, सीता, हनुमान की उपासना करते हैं और 'रामनाम' जप को सर्वोच्च मानते हैं। रामानंदी सम्प्रदाय के संतों ने हिंदी, राजस्थानी, ब्रज भाषा में भक्ति साहित्य की रचना की। राजस्थान में रामानंदी सम्प्रदाय के प्रमुख मठ, मंदिर और अखाड़े स्थापित हैं। ⭐ परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य: • धन्ना जाट का जन्म 1415 ई. में टोंक जिले के धुआ गाँव में हुआ। • रामानंदी सम्प्रदाय के अनुयायी राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात में भी हैं। • रामानंदी सम्प्रदाय के संतों ने सामाजिक समरसता, छुआछूत उन्मूलन पर बल दिया। • रामानंदी सम्प्रदाय के प्रमुख संतों, मठों और उनके योगदान को याद रखें। • धन्ना जाट, पीपा, रैदास से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।
- रामानंदी सम्प्रदाय की स्थापना संत रामानंद (14वीं शताब्दी) ने की।
- राजस्थान में रामानंदी सम्प्रदाय के प्रमुख केंद्र जयपुर, कोटा, बूंदी, झालावाड़ में हैं।
- रामानंदी संतों में धन्ना जाट, पीपा, रैदास, कबीर आदि प्रमुख हैं।
- रामानंदी सम्प्रदाय के अनुयायी राम, सीता, हनुमान की उपासना करते हैं।
- रामानंदी मठों में 'रामनाम' जप, भजन-कीर्तन, सत्संग आदि होते हैं।
- 📌 रामानंदी: रामानंदाचार्य के अनुयायी
- 📌 मठ: संतों का निवास एवं उपासना स्थल
दादूपंथ (दादू सम्प्रदाय)
व्याख्यादादूपंथ (दादू सम्प्रदाय)
दादूपंथ राजस्थान का सबसे बड़ा और प्रभावशाली निर्गुण भक्ति सम्प्रदाय है, जिसकी स्थापना संत दादू दयाल (1544-1603) ने की थी। दादू दयाल का जन्म अहमदाबाद (गुजरात) में हुआ, परंतु उनका अधिकांश जीवन राजस्थान के नरैना (जयपुर) और सांभर क्षेत्र में बीता। दादू द
राजस्थान की कला और संस्कृति के सभी 20 अध्याय
Art and Culture of Rajasthan · Rajasthan General Knowledge
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