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Folk Goddesses (Lok Deviyan)

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Folk Goddesses (Lok Deviyan)अध्ययन नोट्स

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लोक देवियाँ: परिचय एवं महत्व

व्याख्या

लोक देवियाँ: परिचय एवं महत्व

राजस्थान की सांस्कृतिक परंपरा में लोक देवियों (Folk Goddesses) का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। ये देवियाँ समाज की आस्था, श्रद्धा और लोक विश्वास की प्रतीक मानी जाती हैं। राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में लोक देवियों की पूजा विशेष रूप से की जाती है। इन देवियों को समाज के विभिन्न वर्गों, जातियों और जनजातियों द्वारा अपने-अपने रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा जाता है। लोक देवियाँ आमजन की समस्याओं का समाधान, संकटों से रक्षा, और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाली मानी जाती हैं। इनकी कथाएँ, लोकगीतों, लोकनाट्यों, चित्रकला, स्थापत्य और मेले-त्योहारों में प्रमुखता से दिखाई देती हैं। लोक देवियों की पूजा राजस्थान की सामाजिक एकता, महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक विविधता का भी प्रतीक है। ⭐ परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य: • लोक देवियों की पूजा राजस्थान के 33 जिलों में प्रचलित है। • लोक देवी मंदिरों में वर्ष में एक बार मेला अवश्य लगता है। • इनकी पूजा में विशेष रूप से महिलाओं की भागीदारी होती है। • लोक देवियों के नाम और उनके प्रमुख मंदिरों को याद रखें। • कई बार परीक्षा में लोक देवी और उनके स्थान से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।

  • राजस्थान में प्रमुख लोक देवियों की संख्या 15 से अधिक है।
  • लोक देवियों की पूजा विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में होती है।
  • इनकी कथाएँ लोक साहित्य, गीत, नृत्य और चित्रकला में मिलती हैं।
  • लोक देवियों के मंदिर प्रायः गाँव के बाहर या सीमांत क्षेत्रों में स्थित होते हैं।
  • इनकी पूजा में स्थानीय रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है।
  • 📌 लोक देवी: ग्रामीण समाज द्वारा पूजित महिला देवी
  • 📌 आस्था: श्रद्धा और विश्वास की भावना

करणी माता: चूहों वाली देवी

अवधारणा

करणी माता: चूहों वाली देवी

करणी माता राजस्थान की सर्वाधिक प्रसिद्ध लोक देवी मानी जाती हैं। इनका जन्म विक्रम संवत 1444 (सन् 1387) में नागौर जिले के सुआप गाँव में चारण जाति में हुआ था। करणी माता को चूहों वाली देवी भी कहा जाता है, क्योंकि इनके देशनोक (बीकानेर) स्थित मंदिर में हजारों चूहे निवास करते हैं, जिन्हें 'काबा' कहा जाता है। मान्यता है कि ये चूहे करणी माता के अनुयायियों के रूप में पुनर्जन्म लेते हैं। करणी माता ने बीकानेर राज्य की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी तथा राव बीका को आशीर्वाद दिया था। इनकी मृत्यु विक्रम संवत 1538 (सन् 1481) में बताई जाती है। करणी माता के मंदिर में प्रतिवर्ष चैत्र और आश्विन नवरात्रि में विशाल मेला लगता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। ⭐ परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य: • करणी माता का मंदिर 15वीं शताब्दी में निर्मित हुआ। • बीकानेर के राव बीका ने करणी माता के आशीर्वाद से राज्य की स्थापना की। • मंदिर का निर्माण महाराजा गंगा सिंह ने 20वीं शताब्दी में कराया। • करणी माता के मंदिर का स्थान (देशनोक, बीकानेर) अवश्य याद रखें। • चूहों वाली देवी के रूप में करणी माता का नाम पूछा जाता है।

  • करणी माता का जन्म 1387 ई. में सुआप गाँव, नागौर में हुआ।
  • देशनोक (बीकानेर) में करणी माता का विश्व प्रसिद्ध मंदिर है।
  • मंदिर में लगभग 25,000 चूहे निवास करते हैं।
  • राव बीका को बीकानेर राज्य की स्थापना के लिए आशीर्वाद दिया।
  • चैत्र और आश्विन नवरात्रि में विशाल मेला आयोजित होता है।
  • 📌 काबा: करणी माता के मंदिर में निवास करने वाले चूहे
  • 📌 चारण जाति: करणी माता का जन्म इसी जाति में हुआ

शीतला माता: रोगों की निवारक देवी

अवधारणा

शीतला माता: रोगों की निवारक देवी

शीतला माता राजस्थान की एक प्रमुख लोक देवी हैं, जिन्हें विशेष रूप से चेचक (Smallpox) जैसी बीमारियों की निवारक देवी के रूप में पूजा जाता है। शीतला माता की पूजा मुख्यतः चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को की जाती है, जिसे 'शीतला अष्टमी' या 'बसोड़ा' कहा