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Legality of object and Consideration and Agreements

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Legal Aspects of Business (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
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Legality of object and Consideration and Agreementsअध्ययन नोट्स

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6.1 प्रस्तावना

व्याख्या

6.1 प्रस्तावना

इस अध्याय की प्रस्तावना में 'वस्तु और विचार की वैधता' तथा 'विचार और समझौते की वैधता' के महत्व को समझाया गया है। व्यापारिक कानूनों में अनुबंध की वैधता का निर्धारण करने के लिए यह आवश्यक है कि अनुबंध का उद्देश्य और विचार (consideration) वैध हो। यदि अनुबंध का उद्देश्य या विचार अवैध है, तो वह अनुबंध शून्य (void) माना जाता है। भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 के अनुसार, अनुबंध की वैधता के लिए आवश्यक है कि वह किसी कानून का उल्लंघन न करे, समाज के नैतिक मूल्यों के विपरीत न हो, और सार्वजनिक नीति के विरुद्ध न हो। प्रस्तावना में यह भी बताया गया है कि व्यापारिक अनुबंधों में वैधता का निर्धारण किस प्रकार किया जाता है और इसके क्या परिणाम होते हैं।

  • अनुबंध की वैधता के लिए वस्तु और विचार का वैध होना आवश्यक है।
  • अवैध उद्देश्य या विचार वाला अनुबंध शून्य (void) होता है।
  • भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 के अनुसार अनुबंध की वैधता निर्धारित होती है।
  • वैधता का निर्धारण कानून, नैतिकता और सार्वजनिक नीति के आधार पर होता है।
  • व्यापारिक अनुबंधों में वैधता का विशेष महत्व है।
  • अवैध अनुबंधों के परिणाम गंभीर होते हैं।
  • 📌 अनुबंध: दो या दो से अधिक पक्षों के बीच कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता।
  • 📌 विचार (Consideration): अनुबंध में दी जाने वाली वस्तु, सेवा या धन।
  • 📌 वैधता: कानून के अनुसार अनुबंध का सही होना।

6.2 वस्तु और विचार की वैधता

अवधारणा

6.2 वस्तु और विचार की वैधता

इस अनुभाग में वस्तु (object) और विचार (consideration) की वैधता के बारे में विस्तार से बताया गया है। अनुबंध की वैधता के लिए आवश्यक है कि उसका उद्देश्य और विचार दोनों वैध हों। भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 की धारा 23 के अनुसार, अनुबंध का उद्देश्य और विचार निम्नलिखित परिस्थितियों में अवैध माना जाएगा: (i) यदि वह किसी कानून द्वारा निषिद्ध है, (ii) यदि वह किसी धोखाधड़ी या छल के लिए किया गया है, (iii) यदि वह किसी व्यक्ति को नुकसान पहुँचाता है, (iv) यदि वह सार्वजनिक नीति के विरुद्ध है। यदि अनुबंध का उद्देश्य या विचार अवैध है, तो वह अनुबंध शून्य (void) हो जाता है।

  • अनुबंध का उद्देश्य और विचार दोनों का वैध होना आवश्यक है।
  • धारा 23 के अनुसार अवैध उद्देश्य या विचार वाला अनुबंध शून्य होता है।
  • अवैधता का निर्धारण कानून, धोखाधड़ी, नुकसान और सार्वजनिक नीति के आधार पर होता है।
  • अवैध अनुबंधों को लागू नहीं किया जा सकता।
  • अवैध अनुबंधों के पक्षों को कानूनी संरक्षण नहीं मिलता।
  • वैधता का निर्धारण न्यायालय द्वारा किया जाता है।
  • 📌 वस्तु (Object): अनुबंध का उद्देश्य या मकसद।
  • 📌 विचार (Consideration): अनुबंध में दी जाने वाली वस्तु, सेवा या धन।
  • 📌 अवैधता: कानून, नैतिकता या सार्वजनिक नीति के विरुद्ध होना।

6.3 अवैध उद्देश्य और विचार

व्याख्या

6.3 अवैध उद्देश्य और विचार

इस अनुभाग में अवैध उद्देश्य और विचार की विभिन्न श्रेणियों का विस्तार से वर्णन किया गया है। भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 की धारा 23 के अनुसार, निम्नलिखित परिस्थितियों में अनुबंध का उद्देश्य या विचार अवैध माना जाता है: (i) यदि वह किसी कानून द्वारा निषिद

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