Chapter 8
Chapter 8 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 15 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
8.1 परिचय
व्याख्या8.1 परिचय
इस अनुभाग में व्यवसाय के लिए धन जुटाने की आवश्यकता और उसके विभिन्न स्रोतों का परिचय दिया गया है। किसी भी व्यवसाय को प्रारंभ करने और उसके सुचारू संचालन के लिए धन की आवश्यकता होती है। व्यवसायी को यह समझना आवश्यक है कि धन कहां से और कैसे जुटाया जाए। उचित वित्तीय स्रोत का चयन व्यवसाय की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस अध्याय में व्यवसाय के लिए उपलब्ध वित्तीय स्रोतों की जानकारी दी गई है, साथ ही उनके लाभ और सीमाओं पर भी चर्चा की गई है। इससे व्यवसायी को यह निर्णय लेने में सहायता मिलती है कि किस स्रोत से धन जुटाना अधिक उपयुक्त होगा।
- व्यवसाय प्रारंभ और संचालन के लिए धन की आवश्यकता होती है।
- धन जुटाने के विभिन्न स्रोत होते हैं जिनका अध्ययन आवश्यक है।
- उचित वित्तीय स्रोत का चयन व्यवसाय की सफलता में सहायक होता है।
- विभिन्न स्रोतों के लाभ और सीमाओं को समझना आवश्यक है।
- व्यवसायी को वित्तीय स्रोतों के गुणों का ज्ञान होना चाहिए।
- 📌 व्यावसायिक वित्त: व्यवसाय के संचालन के लिए आवश्यक धन।
- 📌 वित्तीय स्रोत: वह स्थान या माध्यम जहां से धन प्राप्त किया जाता है।
8.2 व्यावसायिक वित्त का अर्थ, प्रकृति एवं महत्व
व्याख्या8.2 व्यावसायिक वित्त का अर्थ, प्रकृति एवं महत्व
व्यावसायिक वित्त का अर्थ है व्यवसाय के संचालन के लिए आवश्यक धन। व्यवसाय वस्तु एवं सेवाओं का उत्पादन और वितरण करता है, जिसके लिए धन की आवश्यकता होती है। वित्त को व्यवसाय का जीवन रक्षक कहा जाता है क्योंकि बिना पर्याप्त वित्त के व्यवसाय चलाना संभव नहीं होता। वित्त की आवश्यकता व्यवसाय के प्रारंभ, दैनिक कार्यों और विकास के लिए होती है। इसे स्थायी पूंजी और कार्यशील पूंजी में वर्गीकृत किया जाता है। स्थायी पूंजी का उपयोग भूमि, भवन, संयंत्र, मशीनरी आदि स्थायी संपत्तियों की खरीद के लिए होता है, जो लंबी अवधि के लिए निवेशित रहती है। कार्यशील पूंजी का उपयोग दैनिक कार्यों जैसे कच्चे माल की खरीद, वेतन भुगतान, चालू खर्चों के लिए होता है। व्यवसाय के विकास के साथ वित्त की आवश्यकताएं बढ़ती हैं। इसलिए विभिन्न वित्तीय स्रोतों का मूल्यांकन और चयन आवश्यक होता है।
- व्यावसायिक वित्त व्यवसाय के लिए आवश्यक धन है।
- स्थायी पूंजी स्थायी संपत्तियों की खरीद के लिए होती है।
- कार्यशील पूंजी दैनिक कार्यों के लिए आवश्यक होती है।
- वित्त की आवश्यकताएं व्यवसाय के विकास के साथ बढ़ती हैं।
- वित्त के स्रोतों का सही चयन व्यवसाय की सफलता के लिए आवश्यक है।
- 📌 स्थायी पूंजी: दीर्घकालीन निवेश के लिए आवश्यक धन।
- 📌 कार्यशील पूंजी: दैनिक संचालन के लिए आवश्यक धन।
8.3 वित्त/धन के स्त्रोतों का वर्गीकरण
व्याख्या8.3 वित्त/धन के स्त्रोतों का वर्गीकरण
इस अनुभाग में व्यावसायिक वित्त के स्रोतों को विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत किया गया है। मुख्य वर्गीकरण अवधि, स्वामित्व और आंतरिक एवं बाह्य स्रोतों के आधार पर किया जाता है। अवधि के आधार पर स्रोतों को दीर्घ अवधि (5 वर्ष से अधिक), मध्य अवधि (1 से 5 वर्ष) औ
अभ्यास प्रश्न — Chapter 8
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.व्यवसाय वित्त किसे कहते हैं? व्यवसाय को कोषों की आवश्यकता क्यों होती है? समझाइये।
उत्तर:
व्यवसाय वित्त का अर्थ है व्यवसाय के लिए आवश्यक धन-संसाधनों का प्रबंध करना। व्यवसाय को कोषों की आवश्यकता इसलिए होती है क्योंकि किसी भी व्यवसाय को प्रारंभ करने, संचालन करने, विस्तार करने और विकास के लिए धन की आवश्यकता होती है। बिना पर्याप्त वित्त के व्यवसाय के कार्य सुचारू रूप से नहीं चल सकते।
व्याख्या:
व्यवसाय के विभिन्न कार्यों जैसे कच्चा माल खरीदना, मजदूरों को वेतन देना, मशीनरी खरीदना, विपणन करना आदि के लिए धन की आवश्यकता होती है। इसलिए व्यवसाय वित्त का प्रबंध आवश्यक है।
Q2.दीर्घ अवधि एवं अल्प अवधि वित्त जुटाने के स्त्रोतों की सूची बनाइए।
उत्तर:
दीर्घ अवधि वित्त के स्त्रोत: 1) शेयर पूंजी, 2) ऋण पूंजी (लंबी अवधि के ऋण), 3) डिबेंचर, 4) पुनर्निवेशित लाभ, 5) लीज फाइनेंस। अल्प अवधि वित्त के स्त्रोत: 1) व्यापारिक साख, 2) बैंक साख, 3) वाणिज्यिक पत्र, 4) अग्रिम भुगतान, 5) चालू ऋण।
व्याख्या:
दीर्घ अवधि वित्त वे होते हैं जो एक वर्ष से अधिक समय के लिए जुटाए जाते हैं, जबकि अल्प अवधि वित्त एक वर्ष से कम अवधि के लिए होते हैं। इनके स्त्रोत अलग-अलग होते हैं।
Q3.कोष जुटाने के आंतरिक एवं बाह्य स्त्रोतों में क्या अंतर है? समझाइये।
उत्तर:
आंतरिक स्त्रोत वे होते हैं जो व्यवसाय के भीतर से प्राप्त होते हैं जैसे लाभ का पुनर्निवेश, अवमूल्यन, आदि। बाह्य स्त्रोत वे होते हैं जो व्यवसाय के बाहर से प्राप्त होते हैं जैसे बैंक ऋण, शेयर पूंजी, डिबेंचर, आदि। अंतर यह है कि आंतरिक स्त्रोत व्यवसाय की अपनी संपत्ति या लाभ से आते हैं जबकि बाह्य स्त्रोत बाहरी संस्थाओं या व्यक्तियों से आते हैं।
व्याख्या:
आंतरिक स्त्रोतों से वित्त जुटाने में व्यवसाय की स्वायत्तता बनी रहती है और ब्याज या लाभांश का बोझ कम होता है। बाह्य स्त्रोतों से वित्त जुटाने पर ब्याज या लाभांश देना पड़ता है और नियंत्रण में भी प्रभाव पड़ सकता है।
Q4.पूर्वाधिकार अंशधारकों को कौन-कौन से पूर्वाधिकार प्राप्त हैं?
उत्तर:
पूर्वाधिकार अंशधारकों को निम्नलिखित पूर्वाधिकार प्राप्त होते हैं: 1) लाभांश में प्राथमिकता, 2) कंपनी के परिसमापन में पूंजी की वापसी में प्राथमिकता, 3) वोटिंग अधिकारों में सीमित या कोई अधिकार नहीं, 4) लाभांश निश्चित होता है।
व्याख्या:
पूर्वाधिकार अंशधारक सामान्य अंशधारकों की तुलना में लाभांश और पूंजी वापसी में प्राथमिकता पाते हैं, लेकिन उनके वोटिंग अधिकार सीमित होते हैं।
Q5.किन्हीं तीन विशिष्ट वित्तीय संस्थानों के नाम दीजिए एवं उनके उद्देश्य भी बताइए।
उत्तर:
1) भारतीय रिजर्व बैंक - मुद्रा नीति का संचालन और बैंकिंग प्रणाली का नियंत्रण। 2) स्टेट बैंक ऑफ इंडिया - वाणिज्यिक बैंकिंग सेवाएं प्रदान करना। 3) भारतीय विकास बैंक - औद्योगिक विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना।
व्याख्या:
विभिन्न वित्तीय संस्थान विभिन्न उद्देश्यों के लिए काम करते हैं जैसे मुद्रा नियंत्रण, बैंकिंग सेवाएं, औद्योगिक विकास आदि।
Q6.GDR एवं ADR में क्या अंतर है? समझाइये।
उत्तर:
GDR (Global Depository Receipt) और ADR (American Depository Receipt) दोनों विदेशी निवेशकों को भारतीय कंपनियों के शेयरों में निवेश करने का माध्यम हैं। अंतर यह है कि GDR विश्व स्तर पर विभिन्न देशों में ट्रेड होते हैं जबकि ADR विशेष रूप से अमेरिका में ट्रेड होते हैं।
व्याख्या:
GDR और ADR दोनों विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए उपयोगी हैं, परंतु उनके ट्रेडिंग स्थान और नियम अलग होते हैं।
Q7.व्यापारिक साख एवं बैंक साख को व्यावसायिक इकाइयों के अल्प अवधि वित्त के स्त्रोत के रूप में समझाइए।
उत्तर:
व्यापारिक साख वह साख होती है जो व्यापारिक संस्थान अपने विक्रेताओं से प्राप्त करते हैं, जिससे वे माल या सेवाएं क्रेडिट पर प्राप्त कर सकते हैं। बैंक साख वह वित्तीय सुविधा है जो बैंक द्वारा अल्प अवधि के लिए प्रदान की जाती है, जैसे ओवरड्राफ्ट, कैश क्रेडिट आदि। ये दोनों अल्प अवधि के वित्त के स्त्रोत हैं जो व्यवसाय को तात्कालिक वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करते हैं।
व्याख्या:
व्यापारिक साख से व्यवसाय बिना तत्काल भुगतान के माल प्राप्त कर सकता है, जिससे नकदी प्रवाह में सुधार होता है। बैंक साख से व्यवसाय को आवश्यक धनराशि मिलती है जो वेतन, कच्चा माल आदि के लिए उपयोग होती है।
Q8.आधुनिकीकरण एवं विस्तार के लिए वित्तीयन हेतु एक बड़ी औद्योगिक इकाई किन स्त्रोतों से पूँजी जुटा सकती है, उन पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
एक बड़ी औद्योगिक इकाई निम्नलिखित स्त्रोतों से पूंजी जुटा सकती है: 1) शेयर पूंजी (सामान्य और पूर्वाधिकार शेयर), 2) डिबेंचर और ऋण, 3) बैंक ऋण, 4) पुनर्निवेशित लाभ, 5) वित्तीय संस्थानों से ऋण। इन स्त्रोतों से इकाई अपने विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक धन जुटा सकती है।
व्याख्या:
शेयर पूंजी से दीर्घकालिक पूंजी मिलती है, डिबेंचर और ऋण से निश्चित अवधि के लिए धन मिलता है, बैंक ऋण से अल्पकालिक आवश्यकताएं पूरी होती हैं। पुनर्निवेशित लाभ से आंतरिक वित्त उपलब्ध होता है।
Vyavsay Adhyanan के सभी 11 अध्याय
Business Studies · Class 11