Chapter 7
Chapter 7 — अध्ययन नोट्स
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7.1 परिचय
व्याख्या7.1 परिचय
आज के युग में व्यवसाय के लिए बड़ी मात्रा में धन की आवश्यकता होती है और प्रतियोगिता भी तीव्र होती जा रही है। इस संदर्भ में, मध्य और बड़े पैमाने के व्यावसायिक संगठन स्थापित करने के लिए कंपनी संगठन को प्राथमिकता दी जाती है। कंपनी निर्माण की प्रक्रिया में व्यवसाय के विचार के जन्म से लेकर कंपनी के वैधानिक रूप से व्यवसाय प्रारंभ करने तक के विभिन्न चरण शामिल होते हैं। इन चरणों को कंपनी निर्माण की विभिन्न स्थितियाँ कहा जाता है। जो लोग कंपनी के निर्माण के लिए पहल करते हैं और उससे जुड़े जोखिम उठाते हैं, उन्हें कंपनी के प्रवर्तक कहा जाता है। इस अध्याय में कंपनी निर्माण की विभिन्न स्थितियों और प्रत्येक स्थिति के विभिन्न चरणों का विस्तृत वर्णन किया गया है, जिससे विद्यार्थी कंपनी निर्माण की प्रक्रिया को समझ सकें।
- व्यवसाय के लिए बड़ी पूंजी की आवश्यकता होती है।
- प्रतियोगिता के कारण कंपनी संगठन को प्राथमिकता मिलती है।
- कंपनी निर्माण की प्रक्रिया में विभिन्न चरण होते हैं।
- कंपनी के निर्माण के लिए जो पहल करते हैं उन्हें प्रवर्तक कहते हैं।
- यह अध्याय कंपनी निर्माण की विभिन्न स्थितियों का वर्णन करता है।
- 📌 कंपनी निर्माण: व्यवसाय के विचार से लेकर कंपनी के वैधानिक रूप से व्यवसाय प्रारंभ तक की प्रक्रिया।
- 📌 प्रवर्तक: वे व्यक्ति जो कंपनी के निर्माण के लिए पहल करते हैं और जोखिम उठाते हैं।
7.2 कंपनी की संरचना
व्याख्या7.2 कंपनी की संरचना
कंपनी की संरचना एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें कई वैधानिक औपचारिकताएँ और प्रक्रियाएँ शामिल होती हैं। इसे समझने के लिए इसे तीन मुख्य चरणों में बांटा गया है: (क) प्रवर्तन, (ख) समामेलन, और (ग) पूंजी का अभिदान। प्रवर्तन में व्यवसाय के अवसरों की खोज और कंपनी स्थापना के लिए पहल शामिल है। समामेलन में कंपनी के पंजीकरण की औपचारिकताएँ पूरी की जाती हैं और समामेलन प्रमाण पत्र प्राप्त किया जाता है, जो कंपनी के अस्तित्व का प्रमाण होता है। पूंजी अभिदान में कंपनी जनता से पूंजी जुटाने के लिए आवश्यक कदम उठाती है। निजी कंपनी समामेलन प्रमाण पत्र मिलने के बाद तुरंत व्यापार प्रारंभ कर सकती है, जबकि सार्वजनिक कंपनी को पूंजी अभिदान की प्रक्रिया से गुजरना होता है। इस प्रकार, कंपनी निर्माण की प्रक्रिया में ये तीन स्थितियाँ महत्वपूर्ण हैं।
- कंपनी निर्माण की प्रक्रिया तीन चरणों में होती है: प्रवर्तन, समामेलन, पूंजी अभिदान।
- प्रवर्तन में व्यवसाय के अवसरों की खोज और कंपनी स्थापना की पहल होती है।
- समामेलन में कंपनी का पंजीकरण और समामेलन प्रमाण पत्र प्राप्त होता है।
- पूंजी अभिदान में जनता से पूंजी जुटाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते हैं।
- निजी कंपनी समामेलन के बाद तुरंत व्यापार प्रारंभ कर सकती है।
- सार्वजनिक कंपनी को पूंजी अभिदान की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
- 📌 प्रवर्तन: कंपनी निर्माण की पहली स्थिति जिसमें व्यवसाय के अवसरों की खोज और पहल होती है।
- 📌 समामेलन: कंपनी के पंजीकरण की प्रक्रिया और समामेलन प्रमाण पत्र प्राप्ति।
- 📌 पूंजी अभिदान: जनता से पूंजी जुटाने की प्रक्रिया।
7.2.1 कंपनी प्रवर्तन
व्याख्या7.2.1 कंपनी प्रवर्तन
कंपनी निर्माण की प्रक्रिया में प्रवर्तन प्रथम स्थिति है। इसमें व्यवसाय के अवसरों की खोज और कंपनी स्थापना के लिए पहल शामिल होती है। जो व्यक्ति या समूह कंपनी स्थापना की दिशा में कदम बढ़ाते हैं, उन्हें प्रवर्तक कहा जाता है। प्रवर्तक व्यवसाय के अवसरों की