Chapter 7
Chapter 7 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
परिचय
व्याख्यापरिचय
इस अध्याय में हम तीन प्रतिच्छेदी रेखाओं की विशेषताओं और उनके बीच के संबंधों को विस्तार से समझेंगे। प्रतिच्छेदी रेखाएँ वे रेखाएँ होती हैं जो किसी बिंदु पर एक-दूसरे को काटती हैं। जब तीन रेखाएँ एक ही बिंदु पर मिलती हैं, तो वे एक विशेष ज्यामितीय आकृति बनाती हैं। इस अध्याय का मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि तीन रेखाओं के प्रतिच्छेदन से किस प्रकार त्रिभुज बनता है और त्रिभुज की विभिन्न विशेषताएँ क्या होती हैं। हम यह भी देखेंगे कि वृत्तों के प्रतिच्छेदन से त्रिभुज की रचना कैसे की जाती है और त्रिभुज की भुजाओं के बीच क्या संबंध होते हैं। इस अध्याय में त्रिभुज के शीर्षों के नामकरण, त्रिभुज के प्रकार, उनके कोणों का योग, और वृत्तों के प्रतिच्छेदन की विभिन्न स्थितियों को समझाया गया है। यह ज्ञान हमें ज्यामिति की गहरी समझ प्रदान करता है और त्रिकोणमिति के लिए आधार तैयार करता है।
- प्रतिच्छेदी रेखाएँ वे रेखाएँ होती हैं जो किसी बिंदु पर मिलती हैं।
- तीन रेखाएँ एक बिंदु पर मिलकर त्रिभुज बनाती हैं।
- त्रिभुज के शीर्षों को उनके नामों से पहचाना जाता है।
- वृत्तों के प्रतिच्छेदन से त्रिभुज की रचना की जा सकती है।
- त्रिभुज की भुजाओं के बीच त्रिभुज असमानता संबंध होता है।
- 📌 प्रतिच्छेदी रेखाएँ: वे रेखाएँ जो किसी बिंदु पर एक-दूसरे को काटती हैं।
- 📌 त्रिभुज: तीन भुजाओं और तीन शीर्षों वाला बहुभुज।
प्रतिच्छेदी रेखाओं की रचना
अवधारणाप्रतिच्छेदी रेखाओं की रचना
प्रतिच्छेदी रेखाएँ वे रेखाएँ होती हैं जो किसी बिंदु पर मिलती हैं। जब दो रेखाएँ एक बिंदु पर मिलती हैं, तो वे उस बिंदु को साझा करती हैं। यदि तीन रेखाएँ एक ही बिंदु पर मिलती हैं, तो वे एक विशेष ज्यामितीय आकृति बनाती हैं। इस अनुभाग में हम देखेंगे कि कैसे दो या तीन रेखाओं का प्रतिच्छेदन होता है और इसका ज्यामितीय महत्व क्या है। उदाहरण के लिए, यदि दो रेखाएँ एक बिंदु पर मिलती हैं, तो वे उस बिंदु को साझा करती हैं, और उस बिंदु को प्रतिच्छेदन बिंदु कहते हैं। जब तीन रेखाएँ एक ही बिंदु पर मिलती हैं, तो वे त्रिभुज के शीर्ष बनाते हैं। इस प्रकार, प्रतिच्छेदी रेखाओं की रचना त्रिभुज की आधारशिला होती है। इस अनुभाग में हम रेखाओं के प्रतिच्छेदन के नियमों और उनके उपयोग को समझेंगे।
- दो रेखाएँ एक बिंदु पर मिलती हैं तो वह बिंदु प्रतिच्छेदन बिंदु कहलाता है।
- तीन रेखाएँ एक बिंदु पर मिलकर त्रिभुज के शीर्ष बनाती हैं।
- प्रतिच्छेदी रेखाओं की रचना ज्यामिति की मूल अवधारणा है।
- प्रतिच्छेदन बिंदु रेखाओं के बीच संबंध स्थापित करता है।
- 📌 प्रतिच्छेदन बिंदु: वह बिंदु जहाँ दो या अधिक रेखाएँ मिलती हैं।
- 📌 त्रिभुज का शीर्ष: त्रिभुज के किनारों के मिलने वाले बिंदु।
त्रिभुज के शीर्ष और नामकरण
अवधारणात्रिभुज के शीर्ष और नामकरण
त्रिभुज एक बहुभुज है जिसमें तीन भुजाएँ और तीन शीर्ष होते हैं। त्रिभुज को उसके शीर्षों के नाम से पहचाना जाता है, जैसे त्रिभुज ABC जिसमें A, B और C शीर्ष हैं। त्रिभुज के शीर्षों को सही क्रम में लिखना आवश्यक होता है ताकि त्रिभुज की भुजाओं और कोणों का सह
अभ्यास प्रश्न — Chapter 7
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.जब आँकड़ों को आरोही क्रम (ascending order) या अवरोही क्रम (descending order) में व्यवस्थित किया जाता है तो मध्य (middle most) में उपस्थित प्रेक्षण को उसका ______ कहा जाता है।
उत्तर:
माध्यक (median)
व्याख्या:
[{"id": "c63ac91d-2006-4991-9617-26a85aeb231a", "type": "html", "value": " जब आँकड़ों को आरोही (ascending) क्रम (या अवरोही (decending) क्रम) में व्यवस्थित किया जाता है तो मध्य में उपस्थित प्रेक्षण को उसका माध्यक (median) कहा जाता है। उदाहरण के लिए: इन आँकड़ों में 2, 4, 8, 12, 24 मध्य मान है 8 । इसलिए इन आंकड़ों का मध्य मान 8 है। इसलिए विकल्प 2 सही उत्तर है। "}]
Q2.निम्नलिखित में से कौनसी घटना का होना निश्चित है?
उत्तर:
कल सूर्य का उदय पूर्व से होगा।
व्याख्या:
[{"id": "716edc65-024e-4ad3-b076-f414fe9af452", "type": "html", "value": " जब एक सिक्का उछाला जाता है तो हमें चित (head) या पट (tail) प्राप्त हो सकता है। इसलिए यह घटना होना निश्चित नहीं है। पासा फेंकने पर हमें 1, 2, 3, 4, 5 या 6 प्राप्त हो सकता है। इसलिए एक बार पासा फेंकने पर 6 से बड़ी संख्या प्राप्त होना असंभव है। सूर्य हमेशा पूर्व से ही उद्य होता है। इसलिए कल सूर्य पूर्व से उद्य होगा यह घटना होनी निश्चित है। कल बारिश हो भी सकती है और नहीं भी हो भी सकती है। इसलिए यह घटना होनी निश्चित नहीं है। इसलिए विकल्प 3 सही उत्तर है। "}]
Q3.कागज की पर्चीयों पर शब्द PROBABILITY के अक्षर लिखे गए है और पर्चियाँ एक थैली में डाली गयी हैं। यदि थैली में बिना देखे एक पर्ची निकाली जाती है तो उसमें अक्षर B लिखे होने कि प्रायिकता (probability) क्या है?
उत्तर:
2/11
व्याख्या:
[{"id": "4c9098d3-6df1-4156-ab54-2acbd88de8a1", "type": "html", "value": " शब्द PROBABILITY में, कुल 11 अक्षर हैं। तो थैली में कुल 11 पर्चीयाँ है। शब्द PROBABILITY में अक्षर B, 2 बार दोहराया गया है। इसलिए कुल 2 पर्चीयों पर अक्षर B लिखा हुआ है। तो अनुकूल परिणामों की संख्या = 2 और कुल परिणामों की संख्या = 11 । प्रायिकता = अनुकूल परिणामों की संख्या/ कुल परिणामों की संख्या = 2/11। इसलिए पर्ची अक्षर B लिखे होने कि प्रायिकता 2/11 है। "}]
Q4.एक छात्र को 15 प्रेक्षणों का माध्य (mean) 50 प्राप्त हुआ। पुनः जाँच करने पर उसे ज्ञात हुआ कि 42 को गलती से 24 लिखा गया था। तो सही माध्य (mean) क्या होगा?
उत्तर:
51.2
व्याख्या:
[{"id": "8105e269-e220-49c6-aa0b-a418fdb0385e", "type": "html", "value": " यहाँ, माध्य (mean) = 50 और प्रेक्षणों की संख्या = 15 माध्य = सभी प्रेक्षणों का योग/ प्रेक्षणों की कुल संख्या इसलिए 50 = सभी प्रेक्षणों का योग/ 15 तो सभी प्रेक्षणों का योग = 50 × 15 = 750 । चूँकि मान 42 को गलती से 24 लिखा गया था इसलिए यह प्रेक्षणों का योग गलत है। तो सही योग = गलत योग - गलत प्रेक्षण + सही प्रेक्षण सही योग = 750 - 24 + 42 = 726 + 42 = 768 है। इसलिए सही माध्य = सही योग/ प्रेक्षणों की कुल संख्या = 768/15 = 51.2। इसलिए विकल्प 3 सही उत्तर है। "}]
Q5.जब दो कोणों के उभयनिष्ठ शीर्ष (common vertex) और उभयनिष्ठ भुजा (common side) होती है, पर उभयनिष्ठ अंत: बिंदु (common interior points) नहीं होते ऐसे कोणों के युग्म (pair of angles) को ________ कहते है।
उत्तर:
आसन्न कोण (Adjacent angles)
व्याख्या:
[{"id": "25dcad4e-58c1-478a-b344-31bff46f5610", "type": "html", "value": " जब दो कोणों के उभयनिष्ठ शीर्ष (common vertex) और उभयनिष्ठ भुजा (common side) होती है, पर उभयनिष्ठ अंत: बिंदु (common interior points) नहीं होते, ऐसे कोणों के युग्म (pair of angles) को आसन्न कोण (adjacent angles) कहते है। "}]
Q6.रैखिक (linear) कोणों के युग्म _________ होते है।
उत्तर:
आसन्न और संपूरक कोण (Adjacent and supplementary angles)
व्याख्या:
[{"id": "6a9d09f0-5131-436f-8e18-a91ea31ab429", "type": "html", "value": " रैखिक कोणों के युग्म (angles of linear pair) के उभयनिष्ठ शीर्ष (common vertex), उभयनिष्ठ भुजा (common arm) होती है, पर उभयनिष्ठ अंत: बिंदु (common interior points) नहीं होते और वे सरल रेखा पर स्थित (lie) होते है। इसलिए रैखिक कोणों के युग्म आसन्न और संपूरक कोण (adjacent and supplemeantary angles) होते है। "}]
Q7.रैखिक युग्म में, अगर एक कोण दूसरे कोण का दो तिहाई (2/3) है। तो दोनों कोणों का माप ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
108⁰ और 72⁰
व्याख्या:
[{"id": "f9b846d6-2c05-44d0-b14a-912cb823346f", "type": "html", "value": " रैखिक कोणों के युग्म संपूरक होते है। संपूरक कोणों के मापों का योग 180⁰ होता है। अब एक कोण को x माने और दूसरा कोण x का 2/3 है, मतलब 2/3x है। मतलब x + 2/3x = 180⁰ 2/3x = 180⁰ - x 2x = (180⁰ - x)3 2x = 540⁰ - 3x 2x + 3x = 540⁰ 5x = 540⁰ x = 540⁰/5 = 108⁰ यानि एक कोण 108⁰ है और दूसरा कोण 180⁰ - 108⁰ = 72⁰ है। इसलिए विकल्प 3 सही उत्तर है। "}]
Q8.किसी भी चीज के खरीदने वाले मूल्य (Buying price) को क्या कहते है?
उत्तर:
क्रय मूल्य (Cost price)
व्याख्या:
[{"id": "b4dab8b3-5f43-4f44-8592-ee56b83c4de4", "type": "html", "value": " किसी भी चीज के खरीदने वाले मूल्य (Buying price) को क्रय मूल्य (Cost price) कहते है। "}]
Ganita Prakash(Hindi) के सभी 8 अध्याय
Mathematics · Class 7