Chapter 7
Chapter 7 — अध्ययन नोट्स
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गोस्वामी तुलसीदास
व्याख्यागोस्वामी तुलसीदास
गोस्वामी तुलसीदास हिंदी साहित्य के भक्तिकाल के सगुण काव्य-धारा के प्रमुख कवि हैं, जिन्हें रामभक्ति शाखा का सर्वोपरि कवि माना जाता है। उनका जन्म सन् 1532 में उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले के राजापुर गाँव में हुआ था और उनका निधन सन् 1623 में काशी में हुआ। तुलसीदास की प्रमुख रचनाओं में रामचरितमानस, विनयपत्रिका, गीतावली, श्रीकृष्ण गीतावली, दोहावली, कवितावली और रामाज्ञा-प्रश्न शामिल हैं। तुलसीदास की भक्ति लोकमंगल की साधना के रूप में अभिव्यक्त होती है। उन्होंने संस्कृत की शास्त्रीय भाषा के स्थान पर लोकभाषा (अवधी और ब्रजभाषा) को साहित्य रचना का माध्यम चुना, जिससे उनकी काव्य-भाषा जनसाधारण के लिए सुलभ और प्रभावशाली बनी। उनकी रचनाओं में शास्त्रीयता और लोकप्रवाह का समन्वय स्पष्ट दिखाई देता है। वे दार्शनिक और लौकिक द्वंद्वों के चित्रण में पारंगत थे, जो उनके काव्य को गहन और समृद्ध बनाता है। उनकी काव्य-संवेदना में लोक की ओर झुकाव और शास्त्र की ओर शिल्पगत दक्षता दोनों का मेल है। तुलसीदास की रचनाओं में जीवन के विविध भावों का चित्रण मिलता है, विशेषकर रामचरितमानस में जो हिंदी का अद्वितीय महाकाव्य है। इसमें राम और सीता के चरित्र मानवीय धरातल पर प्रस्तुत किए गए हैं, जो उनके युग के सामाजिक और धार्मिक आदर्शों के अनुरूप हैं। वे ग्रामीण और कृषक संस्कृति के कवि थे, जिन्होंने रक्त संबंध और गृहस्थ जीवन की मर्यादा को आदर्श रूप में प्रस्तुत किया। तुलसीदास की काव्य-भाषा में अवधी और ब्रजभाषा दोनों का समावेश है, जो तत्कालीन हिंदी क्षेत्र की भावात्मक और सांस्कृतिक विविधता का प्रतिनिधित्व करती है। उनकी भाषा और शैली में उपमा और सांगरूपक अलंकारों का विशेष प्रयोग है। वे अपने युग की आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक विषमताओं को यथार्थ रूप में प्रस्तुत करते हैं और रामराज्य के आदर्श का स्वप्न देखते हैं।
- गोस्वामी तुलसीदास का जन्म 1532 में बाँदा जिले के राजापुर गाँव में हुआ।
- उन्होंने लोकभाषा (अवधी और ब्रजभाषा) को साहित्य रचना का माध्यम चुना।
- उनकी प्रमुख रचनाएँ रामचरितमानस, कवितावली, दोहावली आदि हैं।
- तुलसीदास की भक्ति लोकमंगल की साधना के रूप में अभिव्यक्त होती है।
- उनकी काव्य-भाषा में शास्त्रीयता और लोकप्रवाह का समन्वय है।
- रामचरितमानस में राम और सीता के मानवीय चरित्र प्रस्तुत हैं।
- 📌 भक्ति: ईश्वर के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना।
- 📌 सगुण काव्य: ऐसा काव्य जिसमें ईश्वर के साकार रूप की भक्ति की जाती है।
- 📌 अवधी भाषा: उत्तर भारत की एक लोकभाषा, जिसका प्रयोग तुलसीदास ने किया।
तुलसीदास की काव्य-भाषा और सामाजिक यथार्थ
व्याख्यातुलसीदास की काव्य-भाषा और सामाजिक यथार्थ
तुलसीदास की काव्य-भाषा में लोक और शास्त्र दोनों की गहरी पैठ है। वे जीवन और जगत की व्यापक अनुभूति रखते थे और मार्मिक प्रसंगों की अचूक समझ रखते थे, जो उन्हें महाकवि बनाती है। उनकी सर्वश्रेष्ठ रचना 'रामचरितमानस' हिंदी साहित्य का अद्वितीय महाकाव्य है, जिसकी विश्वप्रसिद्धि का कारण लोक-संवेदना और समाज की नैतिक बनावट की समझ है। रामचरितमानस में राम और सीता को ईश्वर के रूप में नहीं, बल्कि मानवीय धरातल पर प्रस्तुत किया गया है, जो उनके युग के आदर्शों के अनुरूप है। तुलसीदास ग्रामीण और कृषक संस्कृति के कवि हैं, जिन्होंने रक्त संबंध की मर्यादा और आदर्श गृहस्थ जीवन को चित्रित किया। वे हिंदी के जातीय कवि हैं क्योंकि उन्होंने अपने समय की हिंदी क्षेत्र की सभी भावात्मक और काव्यभाषायी तत्वों का प्रतिनिधित्व किया। उनकी भाषा में अवधी और ब्रजभाषा दोनों का समावेश है, जो तत्कालीन संस्कृति कथाओं—सीताराम और राधाकृष्ण—का प्रतिनिधित्व करती है। तुलसीदास उपमा अलंकार के क्षेत्र में कालिदास के समान प्रसिद्ध हैं, जबकि सांगरूपक के क्षेत्र में उनकी पहचान विशेष है। वे अपने युग की आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक विषमताओं को यथार्थ रूप में प्रस्तुत करते हैं। उनकी राम-भक्ति जीवन के यथार्थ संकटों का समाधान करने वाली है, जो पेट की आग बुझाने वाली है।
- तुलसीदास की काव्य-भाषा में लोक और शास्त्र दोनों का समन्वय है।
- रामचरितमानस में राम और सीता को मानवीय रूप में प्रस्तुत किया गया है।
- वे ग्रामीण और कृषक संस्कृति के कवि हैं।
- अवधी और ब्रजभाषा दोनों का प्रयोग उनकी भाषा में है।
- उनकी भक्ति जीवन के यथार्थ संकटों का समाधान प्रस्तुत करती है।
- उपमा और सांगरूपक अलंकारों में उनकी विशेष पहचान है।
- 📌 लोक-संवेदना: आम जनता की भावनाओं और समस्याओं की समझ।
- 📌 जातीय कवि: वह कवि जो अपनी भाषा और संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है।
- 📌 उपमा अलंकार: किसी वस्तु या व्यक्ति की तुलना किसी अन्य वस्तु या व्यक्ति से करना।
कवितावली (उत्तर कांड से)
व्याख्याकवितावली (उत्तर कांड से)
कवितावली तुलसीदास की रचना है जिसमें उन्होंने अपने युग की आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक विषमताओं का यथार्थ चित्रण किया है। इसमें तीन प्रमुख छंद हैं: पहला छंद "किसबी, किसान-कुल..." में संसार के अच्छे-बुरे लीला-प्रपंचों का आधार 'पेट की आग' बताया गया है। य
अभ्यास प्रश्न — Chapter 7
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.‘खेती न किसान को, भिखारी को न भीख, बलि’- कवित्त में वर्णन है -
उत्तर:
बेरोज़गारी का
Q2.मानव की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति का साधन तुलसीदास ने किसे बताया है ?
उत्तर:
राम
Q3.तुलसीदास के अनुसार समुद्र की आग से भी अधिक भयानक आग कौन सी है ?
उत्तर:
पेट की आग
Q4.‘माँगि कै खैबो, मसीत को सोइबो’- पंक्ति में प्रयुक्त ‘मसीत’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर:
मस्जिद
Q5.‘कवितावली’ के बारे में त्रुटिपूर्ण कथन है -
उत्तर:
कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम की अभिव्यक्ति की गई है ।
Q6.‘तुलसी बुझाइ एक राम घनस्याम ही तें’ पंक्ति में कौन सा अलंकार निहित है ?
उत्तर:
रूपक
Q7.‘कवितावली’ की रचना किस भाषा में की गई है ?
उत्तर:
ब्रजभाषा
Q8.राम, लक्ष्मण को अपने जीवन में किसके समान महत्त्वपूर्ण मानते हैं ?
उत्तर:
सर्प की मणि के समान
Aroh के सभी 15 अध्याय
Hindi · Class 12