Chapter 15
Chapter 15 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर
व्याख्याबाबा साहेब भीमराव आंबेडकर
डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू नगर में हुआ था। वे भारतीय संविधान के प्रमुख निर्माता थे और दलितों के अधिकारों के लिए संघर्षरत एक महान समाज सुधारक, विधिवेता, अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री, शिक्षाविद् तथा धर्म-दर्शन के व्याख्याता थे। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका के न्यूयॉर्क और फिर इंग्लैंड के लंदन में अध्ययन किया। उन्होंने संस्कृत, वैदिक साहित्य, इतिहास, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, और समाजशास्त्र में गहन अध्ययन किया। आंबेडकर ने दलितों, महिलाओं और मजदूरों के अधिकारों के लिए जीवन भर संघर्ष किया। बचपन में जाति-आधारित भेदभाव का सामना करने के कारण उन्होंने संकल्प लिया कि वे वकील बनकर छुआछूत और अन्याय के खिलाफ कानून बनाएंगे। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'द कास्ट्स इन इंडिया', 'एनीहिलेशन ऑफ कास्ट', 'हू आर द शूद्राज', 'बुद्धा एंड हिज धम्मा' आदि शामिल हैं। 1956 में उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया और दलितों के उद्धार के लिए बुद्ध के समतावादी दर्शन को अपनाया। आंबेडकर का योगदान केवल संविधान निर्माण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने सामाजिक समता, स्वतंत्रता और भ्रातृता के सिद्धांतों को भारतीय समाज में स्थापित करने का प्रयास किया।
- आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को महू में हुआ।
- वे भारतीय संविधान के प्रमुख निर्माता थे।
- दलितों, महिलाओं और मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
- उच्च शिक्षा अमेरिका और इंग्लैंड में प्राप्त की।
- बौद्ध धर्म अपनाकर सामाजिक समता का संदेश दिया।
- प्रमुख रचनाओं में 'एनीहिलेशन ऑफ कास्ट' शामिल है।
- 📌 जाति-आधारित उत्पीड़न: किसी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर भेदभाव करना।
- 📌 समता: सभी मनुष्यों के बीच समानता का सिद्धांत।
- 📌 स्वतंत्रता: व्यक्ति की अपनी इच्छा से जीवन जीने की क्षमता।
श्रम विभाजन और जाति-प्रथा
अवधारणाश्रम विभाजन और जाति-प्रथा
आंबेडकर ने जाति-प्रथा और श्रम विभाजन के बीच के संबंध को स्पष्ट करते हुए कहा है कि आधुनिक सभ्य समाज में श्रम विभाजन कार्य-कुशलता के लिए आवश्यक है, लेकिन जाति-प्रथा श्रम विभाजन का अस्वाभाविक और दोषपूर्ण रूप है। जाति-प्रथा न केवल श्रम विभाजन करती है, बल्कि श्रमिकों का अस्वाभाविक और जन्मजात विभाजन करती है। इसमें व्यक्ति की रुचि, क्षमता या स्वेच्छा का कोई स्थान नहीं होता, बल्कि व्यक्ति का पेशा जन्म से ही निर्धारित हो जाता है। यह व्यवस्था व्यक्ति को जीवन-भर एक ही पेशे में बांध देती है, चाहे वह पेशा उसके लिए उपयुक्त हो या नहीं। इससे बेरोजगारी और भुखमरी जैसी समस्याएं जन्म लेती हैं क्योंकि व्यक्ति को अपने पेशे को बदलने की स्वतंत्रता नहीं मिलती। जाति-प्रथा श्रम विभाजन के साथ-साथ श्रमिक-विभाजन भी करती है, जो कि किसी सभ्य समाज की निशानी नहीं हो सकती। इस प्रकार जाति-प्रथा आर्थिक दृष्टि से भी हानिकारक है क्योंकि यह व्यक्ति की स्वाभाविक प्रेरणा, रुचि और आत्म-शक्ति को दबा देती है, जिससे कार्य-कुशलता और उत्पादकता प्रभावित होती है।
- जाति-प्रथा श्रम विभाजन का अस्वाभाविक रूप है।
- व्यक्ति का पेशा जन्म से निर्धारित होता है, न कि उसकी इच्छा से।
- जाति-प्रथा बेरोजगारी और भुखमरी का कारण बनती है।
- यह श्रमिकों का अस्वाभाविक और जन्मजात विभाजन करती है।
- व्यक्ति को पेशा बदलने की स्वतंत्रता नहीं मिलती।
- आर्थिक दृष्टि से जाति-प्रथा हानिकारक है।
- 📌 श्रम विभाजन: कार्यों का विभिन्न व्यक्तियों या समूहों में विभाजन।
- 📌 जाति-प्रथा: जन्म आधारित सामाजिक वर्गीकरण।
- 📌 अस्वाभाविक विभाजन: प्राकृतिक या स्वेच्छा के विरुद्ध विभाजन।
मेरी कल्पना का आदर्श-समाज
अवधारणामेरी कल्पना का आदर्श-समाज
आंबेडकर ने जाति-प्रथा की आलोचना के बाद अपने आदर्श समाज की रूपरेखा प्रस्तुत की है। उनका आदर्श समाज स्वतंत्रता, समता और भ्रातृता के सिद्धांतों पर आधारित होगा। भ्रातृता का अर्थ है भाईचारा, जिसमें सभी को समान सम्मान और अधिकार प्राप्त हों। इस समाज में साम
अभ्यास प्रश्न — Chapter 15
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.साहित्य-संसार में प्रभाष जोशी को किस रूप में जाना जाता है?
उत्तर:
पत्रकार
Q2.‘चवथ का चाँद’ से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
चतुर्थी का चाँद
Q3.‘सदानीरा नदियाँ’ किसे कहते हैं?
उत्तर:
सदैव प्रवाहित नदियों को
Q4.‘कार्बन डाई ऑक्साइड’ का सबसे बड़ा उत्पादक देश किसे माना जाता है?
उत्तर:
अमेरिका
Q5.हम अपनी नदियों को कैसे बचा सकते हैं?
उत्तर:
प्रदूषण से बचा कर
Q6.मालवा में पहले जैसा पानी क्यों नहीं गिरता है?
उत्तर:
वातावरण प्रदूषित होने के कारण
Q7.इस युग में भी किसका होना लेखक को विडंबना की बात लगती है ?
उत्तर:
जातिवाद का
Q8.‘श्रम विभाजन निश्चय ही सभ्य समाज की.......................है ।’
उत्तर:
आवश्यकता
Aroh के सभी 15 अध्याय
Hindi · Class 12