Chapter 5
Chapter 5 — अध्ययन नोट्स
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परिचय
व्याख्यापरिचय
इस अध्याय की शुरुआत में विश्व-राजनीति के संदर्भ में 'सुरक्षा' और 'राष्ट्रीय सुरक्षा' जैसे शब्दों की सामान्य समझ पर प्रश्न उठाए गए हैं। आमतौर पर हम सोचते हैं कि सुरक्षा का अर्थ स्पष्ट है, लेकिन वास्तव में यह एक जटिल और बहुआयामी अवधारणा है। अक्सर सुरक्षा के मुद्दे को इतना संवेदनशील और गुप्त माना जाता है कि उस पर खुली चर्चा नहीं की जाती। फिल्मों और मीडिया में भी राष्ट्रीय सुरक्षा को एक रहस्यमय और खतरनाक विषय के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जिससे आम नागरिक दूर रहते हैं। लेकिन लोकतंत्र में सुरक्षा से जुड़ी हर बात को जनता के समक्ष लाना आवश्यक है क्योंकि सुरक्षा का संबंध सीधे नागरिकों के जीवन से जुड़ा होता है। इस अध्याय में सुरक्षा की दो मुख्य धाराओं — पारंपरिक और अपारंपरिक — की चर्चा की गई है और यह बताया गया है कि सुरक्षा की धारणा संदर्भ और स्थिति के अनुसार बदलती रहती है। साथ ही सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं को समझने के लिए म्वेटामाला के गृह-युद्ध और बांग्लादेश की प्राकृतिक आपदा के चित्रों का उपयोग किया गया है, जो सुरक्षा के भिन्न-भिन्न पहलुओं को दर्शाते हैं।
- सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा की अवधारणा जटिल और बहुआयामी है।
- सुरक्षा को अक्सर गुप्त और संवेदनशील विषय माना जाता है।
- लोकतंत्र में सुरक्षा पर खुली चर्चा आवश्यक है।
- सुरक्षा की धारणा संदर्भ और स्थिति के अनुसार बदलती है।
- सुरक्षा के दो मुख्य पहलू: पारंपरिक और अपारंपरिक।
- चित्रों के माध्यम से सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं को समझाया गया है।
- 📌 सुरक्षा: खतरे से मुक्ति या आजादी।
- 📌 राष्ट्रीय सुरक्षा: एक देश की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा।
- 📌 पारंपरिक सुरक्षा: सैन्य खतरे से सुरक्षा।
सुरक्षा क्या है?
व्याख्यासुरक्षा क्या है?
सुरक्षा का मूल अर्थ है खतरे से आजादी या मुक्ति। मानव जीवन और किसी देश का अस्तित्व अनेक प्रकार के खतरों से घिरा होता है। लेकिन हर खतरे को सुरक्षा का खतरा नहीं माना जाता। यदि हम खतरे को बहुत व्यापक रूप में लें तो हर समय और हर जगह सुरक्षा का सवाल उठेगा, जो व्यावहारिक नहीं है। इसलिए सुरक्षा के अध्ययन में केवल उन्हीं खतरों को शामिल किया जाता है जो जीवन के केंद्रीय मूल्यों को प्रभावित करते हैं। केंद्रीय मूल्य वे होते हैं जो किसी व्यक्ति या राष्ट्र के अस्तित्व और मूलभूत हितों से जुड़े होते हैं। सुरक्षा की धारणा संदर्भ पर निर्भर करती है, अर्थात् सुरक्षा किसके लिए और किस संदर्भ में चाहिए। उदाहरण के लिए, नागरिकों, सरकार या राज्य के लिए सुरक्षा की धारणा अलग-अलग हो सकती है। इसके अलावा खतरे की गंभीरता भी मायने रखती है कि कौन-से खतरे को सुरक्षा का मुद्दा माना जाए। इसलिए सुरक्षा की धारणा विवादास्पद और संदर्भ-निर्भर है। इस संदर्भ में यह भी समझना जरूरी है कि सदियों से विभिन्न समाजों में सुरक्षा की एकसमान धारणा नहीं रही है और न ही विश्व के सभी समाजों में एक समान सुरक्षा की धारणा होती है। इस कारण सुरक्षा की धारणा को दो मुख्य कोटियों में बांटा गया है: पारंपरिक और अपारंपरिक।
- सुरक्षा का अर्थ है खतरे से आजादी।
- हर खतरे को सुरक्षा का खतरा नहीं माना जाता।
- सुरक्षा केवल जीवन के केंद्रीय मूल्यों को प्रभावित करने वाले खतरों से जुड़ी होती है।
- सुरक्षा की धारणा संदर्भ और स्थिति पर निर्भर करती है।
- सुरक्षा की धारणा विवादास्पद और बहुआयामी है।
- सुरक्षा की दो मुख्य कोटियाँ: पारंपरिक और अपारंपरिक।
- 📌 केंद्रीय मूल्य: वे मूल्य जो जीवन और अस्तित्व के लिए अनिवार्य होते हैं।
- 📌 संदर्भ: सुरक्षा किसके लिए और किस परिस्थिति में चाहिए।
- 📌 विवादप्रस्त धारणा: जिस पर विभिन्न मत हो।
पारंपरिक धारणा – बाहरी सुरक्षा
व्याख्यापारंपरिक धारणा – बाहरी सुरक्षा
पारंपरिक सुरक्षा की धारणा में मुख्य रूप से सैन्य खतरे को सबसे बड़ा खतरा माना जाता है। यह खतरा किसी अन्य देश से आता है जो सैन्य हमले की धमकी देकर किसी देश की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता को खतरे में डालता है। युद्ध की स्थिति में आम नागरिक
अभ्यास प्रश्न — Chapter 5
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.अवधारणा- अमेरिका से भारत के संबंध सिलिकॉन वैली में अधिकतर कर्मचारी कहां के हैं?
उत्तर:
भारत
Q2.अवधारणा -अमेरिकी शक्ति के रास्ते में अवरोध नाटो किस देश का संगठन है?
उत्तर:
अमेरिका
Q3.अवधारणा-ढांचागत ताकत के अर्थ में विश्व बैंक की स्थापना कब हुई?
उत्तर:
जुलाई 1944
Q4.अवधारणा- सैन्य शक्ति के अर्थ में अमेरिका का वार्षिक रक्षा बजट कितना है?
उत्तर:
12000 अरब डॉलर
Q5.अवधारणा -नई विश्व व्यवस्था की शुरुआत ऑपरेशन डेवर्ट स्टॉर्म में कितने देश शामिल थे?
उत्तर:
34
Q6.अवधारणा -नई विश्व व्यवस्था की शुरुआत प्रथम खाड़ी विश्व युद्ध कब हुआ?
उत्तर:
1990-91
Q7.अवधारणा - वर्चस्व से कैसे निपटे अमेरिकी वर्चस्व से कैसे निपटा जा सकता है?
उत्तर:
भारत चीन और रूस
Q8.अवधारणा -अमेरिकी शक्ति के रास्ते में अवरोध निम्नलिखित में से अमेरिकी वर्चस्व में बाधा क्या है ?
उत्तर:
नाटो
Samkalin Vishwa Rajniti के सभी 7 अध्याय
Political Science · Class 12