Chapter 5
Chapter 5 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
प्रस्तावना
व्याख्याप्रस्तावना
इस खंड में 'नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया' पाठ का परिचय प्रस्तुत किया गया है। यह कहानी 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान घटित एक अत्यंत दुखद और मार्मिक घटना पर आधारित है। स्वतंत्रता संग्राम भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना थी, जिसमें भारतीयों ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अत्याचारों के विरुद्ध विद्रोह किया। इस विद्रोह के दौरान कई वीरांगनाओं और परिवारों ने अपने प्राणों की आहुति दी। नाना साहब की पुत्री देवी मैना की कहानी इसी संघर्ष और बलिदान की गाथा है। इस प्रस्तावना में पाठ के भाव, विषय और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का संक्षिप्त परिचय दिया गया है, जिससे पाठक को आगे की कहानी समझने में सहायता मिलती है। यह खंड पाठ को समझने के लिए आवश्यक ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भ प्रदान करता है। **Table on page 8 (12×3)** | उपहास | - | खिल्ली उड़ाना, मजाक उड़ाने वाली हँसी | | --- | --- | --- | | आग्रह | - | पुन: पुन: निवेदन करना | | क्लेश | - | दुख | | तगादा | - | तकाजा | | पन्हैया | - | देशी जूतियाँ | | बिसरना | - | भूल जाना | | नेम | - | नियम | | धरम | - | कर्तव्य | | बंद | - | फीता | | बेतरतीब | - | अव्यवस्थित | | ठाठ | - | शान | | बरकाकर | - | बचाकर |
- 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि पर आधारित कहानी।
- नाना साहब की पुत्री देवी मैना की दुखद घटना का परिचय।
- स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हुए अत्याचारों का संकेत।
- देशभक्ति और बलिदान की भावना को उजागर करना।
- 📌 स्वतंत्रता संग्राम: भारत के ब्रिटिश शासन के विरुद्ध 1857 में हुआ पहला बड़ा विद्रोह।
- 📌 नाना साहब: 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख नेता।
- 📌 देवी मैना: नाना साहब की पुत्री, जिनके साथ हुई दुखद घटना।
नाना साहब और उनका परिवार
व्याख्यानाना साहब और उनका परिवार
इस खंड में नाना साहब के जीवन, उनके परिवार और विशेषकर उनकी पुत्री देवी मैना का विस्तृत परिचय दिया गया है। नाना साहब का असली नाम धनाजी बालाजी टिळक था, जो मराठा कुल के एक प्रतिष्ठित परिवार से थे। वे पेशवा बाजीराव द्वितीय के पौत्र थे। नाना साहब ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ विद्रोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके परिवार में देवी मैना उनकी पुत्री थीं, जिनका चरित्र साहस, देशभक्ति और त्याग से भरा था। इस खंड में नाना साहब के व्यक्तित्व, उनके संघर्ष और परिवार की स्थिति का वर्णन है। साथ ही, यह बताया गया है कि कैसे उनके परिवार को ब्रिटिशों द्वारा प्रताड़ित किया गया, जिससे देवी मैना की दुखद कहानी जन्मी। इस खंड का उद्देश्य पाठक को नाना साहब के परिवार की पृष्ठभूमि से परिचित कराना है ताकि आगे की घटनाओं की गंभीरता को समझा जा सके।
- नाना साहब का असली नाम धनाजी बालाजी टिळक था।
- वे मराठा कुल के प्रतिष्ठित परिवार से थे।
- नाना साहब 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेता थे।
- उनकी पुत्री देवी मैना साहस और देशभक्ति की प्रतीक थीं।
- ब्रिटिशों ने नाना साहब के परिवार को अत्याचारों का शिकार बनाया।
- 📌 पेशवा: मराठा साम्राज्य के प्रधान मंत्री।
- 📌 धनाजी बालाजी टिळक: नाना साहब का असली नाम।
- 📌 देवी मैना: नाना साहब की पुत्री, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में बलिदान दिया।
स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि
व्याख्यास्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि
इस खंड में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि और कारणों का विस्तृत वर्णन किया गया है। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अत्याचार, भारतीय राजाओं की सत्ता छिनना, आर्थिक शोषण, धार्मिक और सामाजिक असंतोष इस विद्रोह के मुख्य कारण थे। ब्रिटिशों ने भारतीयों
अभ्यास प्रश्न — Chapter 5
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.हरिशंकर परसाई ने प्रेमचंद का जो शब्दचित्र हमारे सामने प्रस्तुत किया है उससे प्रेमचंद के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताएँ उभरकर आती हैं?
उत्तर:
हरिशंकर परसाई के शब्दचित्र से प्रेमचंद के व्यक्तित्व की कई विशेषताएँ उभरकर आती हैं, जैसे कि उनकी सादगी, विनम्रता, सामाजिक चेतना, व्यंग्यात्मक दृष्टिकोण, और उनकी गहरी मानवीय समझ। वे अपने पहनावे में सरल थे, परन्तु उनके विचार और लेखन समाज की गहरी समस्याओं को उजागर करते थे। उनकी व्यंग्यात्मक मुस्कान उनके साहस और हिम्मत को दर्शाती है।
व्याख्या:
प्रेमचंद के व्यक्तित्व की विशेषताएँ उनके पहनावे, व्यवहार और लेखन से स्पष्ट होती हैं। परसाई ने उनके फटे जूते और साधारण पोशाक के माध्यम से उनकी सादगी और समाज के प्रति उनकी संवेदनशीलता को उजागर किया है।
Q2.सही कथन के सामने (✓) का निशान लगाइए— (क) बाएँ पाँव का जूता ठीक है मगर दाहिने जूते में बड़ा छेद हो गया है जिसमें से अँगुली बाहर निकल आई है। (ख) लोग तो इत्र चुपड़कर फोटो खिंचाते हैं जिससे फोटो में खुशबू आ जाए। (ग) तुम्हारी यह व्यंग्य मुसकान मेरे हौसले बढ़ाती है। (घ) जिसे तुम घृणित समझते हो, उसकी तरफ अँगूठे से इशारा करते हो?
उत्तर:
(क) ✓ (ख) ✗ (ग) ✓ (घ) ✗
व्याख्या:
कथन (क) और (ग) सही हैं क्योंकि वे पाठ के अनुसार हैं। (ख) गलत है क्योंकि लोग इत्र चुपड़कर फोटो नहीं खिंचवाते। (घ) गलत है क्योंकि घृणित समझे जाने वाले व्यक्ति की तरफ अँगूठे से इशारा नहीं किया जाता।
Q3.नीचे दी गई पंक्तियों में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए— (क) जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है। अब तो जूते की कीमत और बढ़ गई है और एक जूते पर पचीसों टोपियाँ न्योछावर होती हैं। (ख) तुम परदे का महत्व ही नहीं जानते, हम परदे पर कुर्बान हो रहे हैं। (ग) जिसे तुम घृणित समझते हो, उसकी तरफ़ हाथ की नहीं, पाँव की अँगुली से इशारा करते हो?
उत्तर:
(क) यहाँ जूते की कीमत बढ़ने का अर्थ है कि जूते इतने फटे हुए हैं कि उन्हें छुपाने के लिए कई टोपी (ढकने वाली चीजें) लगानी पड़ती हैं। यह व्यंग्य है कि जूते की कीमत टोपी से अधिक हो गई है। (ख) 'परदा' का अर्थ यहाँ सामाजिक छुपाव या दिखावा है। व्यंग्य यह है कि वे लोग जो दिखावे के लिए परदा रखते हैं, वे खुद उस परदे पर कुर्बान हो रहे हैं यानी अपनी असलियत छुपा रहे हैं। (ग) यहाँ व्यंग्य यह है कि घृणित समझे जाने वाले व्यक्ति की तरफ इशारा करने के लिए हाथ की बजाय पाँव की अँगुली का प्रयोग किया जाता है, जो असभ्यता को दर्शाता है।
व्याख्या:
व्यंग्य का उद्देश्य पाठकों को सोचने पर मजबूर करना और सामाजिक या मानवीय विसंगतियों को उजागर करना होता है। इन पंक्तियों में व्यंग्य के माध्यम से जूते, परदा और इशारे की असलियत को मजाकिया ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
Q4.पाठ में एक जगह पर लेखक सोचता है कि ‘फोटो खिंचाने की अगर यह पोशाक है तो पहनने की कैसी होगी?’ लेकिन अगले ही पल वह विचार बदलता है कि ‘नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी।’ आपके अनुसार इस संदर्भ में प्रेमचंद के बारे में लेखक के विचार बदलने की क्या वजहें हो सकती हैं?
उत्तर:
लेखक के विचार बदलने की वजह यह हो सकती है कि उन्होंने प्रारंभ में प्रेमचंद की पोशाक को देखकर उसे असामान्य और अलग समझा, परन्तु बाद में यह महसूस किया कि प्रेमचंद के पास अलग-अलग पोशाकें नहीं हो सकतीं क्योंकि वे साधारण जीवन जीते थे और उनके पास सीमित संसाधन थे। इसलिए उनकी पोशाकें भी सीमित और एक जैसी होंगी। यह बदलाव लेखक की समझ और प्रेमचंद के जीवन के प्रति सहानुभूति को दर्शाता है।
व्याख्या:
यह विचार परिवर्तन प्रेमचंद के व्यक्तित्व की सादगी और सीमित संसाधनों की ओर संकेत करता है। लेखक ने अपनी पहली धारणा को संशोधित किया और प्रेमचंद की वास्तविकता को समझा।
Q5.आपने यह व्यंग्य पढ़ा। इसे पढ़कर आपको लेखक की कौन सी बातें आकर्षित करती हैं?
उत्तर:
लेखक की बातें जो आकर्षित करती हैं, उनमें उनकी सादगी, व्यंग्यात्मक दृष्टिकोण, सामाजिक चेतना, और मानवीय संवेदनाएँ शामिल हैं। वे साधारण वस्तुओं जैसे जूते के माध्यम से गहरी सामाजिक सच्चाइयों को उजागर करते हैं। उनकी भाषा सरल लेकिन प्रभावशाली है, जो पाठक को सोचने पर मजबूर करती है।
व्याख्या:
व्यंग्य के माध्यम से लेखक ने समाज की विसंगतियों को उजागर किया है, जो पाठक को प्रभावित करता है। उनकी सोच में मानवीयता और सामाजिक सुधार की भावना झलकती है।
Q6.पाठ में ‘टीले’ शब्द का प्रयोग किन संदर्भों को इंगित करने के लिए किया गया होगा?
उत्तर:
पाठ में ‘टीले’ शब्द का प्रयोग संभवतः छोटे-छोटे ढेर या ऊँचे स्थान के लिए किया गया होगा, जो किसी वस्तु या स्थिति के अस्थायी या छोटे रूप को दर्शाता है। यह शब्द सामाजिक या भौतिक संदर्भ में किसी चीज़ के छोटे समूह या ढेर को इंगित कर सकता है।
व्याख्या:
टीले शब्द का अर्थ छोटे-छोटे ढेर या ऊँचे स्थान होते हैं, जो पाठ के संदर्भ में किसी वस्तु की स्थिति या उसके महत्व को दर्शाने के लिए प्रयुक्त हुआ होगा।
Q7.प्रेमचंद के फटे जूते को आधार बनाकर परसाई जी ने यह व्यंग्य लिखा है। आप भी किसी व्यक्ति की पोशाक को आधार बनाकर एक व्यंग्य लिखिए।
उत्तर:
यह एक रचनात्मक प्रश्न है। विद्यार्थी को किसी व्यक्ति की पोशाक के आधार पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी लिखनी होगी, जिसमें वे सामाजिक या मानवीय पहलुओं को व्यंग्य के माध्यम से उजागर करें। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति के अत्यधिक फैशनेबल लेकिन असहज कपड़ों पर व्यंग्य किया जा सकता है कि वे अपनी असली पहचान छुपाने के लिए इतने कपड़े पहनते हैं कि खुद को भी पहचानना मुश्किल हो जाता है।
व्याख्या:
यह प्रश्न विद्यार्थियों की रचनात्मकता और व्यंग्यात्मक सोच को बढ़ावा देता है। इसमें वे अपने आस-पास की सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर व्यंग्यात्मक टिप्पणी लिख सकते हैं।
Q8.आपकी दृष्टि में वेश-भूषा के प्रति लोगों की सोच में आज क्या परिवर्तन आया है?
उत्तर:
आज के समय में वेश-भूषा के प्रति लोगों की सोच में कई परिवर्तन आए हैं। पहले जहाँ सादगी और पारंपरिक पोशाक को अधिक महत्व दिया जाता था, वहीं अब फैशन, ब्रांड और आधुनिकता को प्राथमिकता मिलती है। लोग अपनी पहचान और व्यक्तित्व को वेश-भूषा के माध्यम से व्यक्त करते हैं। साथ ही, सामाजिक और आर्थिक बदलावों के कारण पोशाक के प्रति दृष्टिकोण में विविधता आई है।
व्याख्या:
समय के साथ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों ने वेश-भूषा के प्रति सोच को प्रभावित किया है। यह प्रश्न विद्यार्थियों को वर्तमान और पूर्व की सोच में तुलना करने के लिए प्रेरित करता है।
Kshitij के सभी 13 अध्याय
Hindi · Class 9