Chapter 4
Chapter 4 — अध्ययन नोट्स
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4.1 धारकीय मूलक का परिचय
व्याख्या4.1 धारकीय मूलक का परिचय
धारकीय मूलक (Radical) रसायन विज्ञान में वे आयन या अणु होते हैं जिनमें एक या अधिक अप्रयुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं। ये मूलक अत्यंत अभिक्रियाशील होते हैं और विभिन्न रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग लेते हैं। आग्नि परीक्षण के अनुसार धारकीय मूलकों का वर्गीकरण उनकी रंगीन ज्वाला, तापमान, तथा अन्य विशेषताओं के आधार पर किया जाता है। इस अध्याय में हम धारकीय मूलकों के आग्नि परीक्षण के सिद्धांत, प्रक्रिया, तथा उनके वर्गीकरण के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे।
- धारकीय मूलक में एक या अधिक अप्रयुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं।
- ये मूलक अत्यंत अभिक्रियाशील होते हैं।
- आग्नि परीक्षण से मूलकों की पहचान की जाती है।
- मूलकों का वर्गीकरण उनकी ज्वाला के रंग के आधार पर किया जाता है।
- धारकीय मूलक रासायनिक अभिक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- 📌 धारकीय मूलक: वे आयन या अणु जिनमें अप्रयुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं।
- 📌 आग्नि परीक्षण: मूलकों की पहचान हेतु प्रयोग की जाने वाली विधि।
4.2 आग्नि परीक्षण की विधि
व्याख्या4.2 आग्नि परीक्षण की विधि
आग्नि परीक्षण रासायनिक मूलकों की पहचान के लिए प्रयोगशाला में प्रयुक्त एक सरल एवं प्रभावी विधि है। इसमें किसी मूलक के नमूने को प्लैटिनम या निकेल के तार पर लेकर बन्सेन बर्नर की ज्वाला में रखा जाता है। मूलक की उपस्थिति में ज्वाला का रंग बदल जाता है, जिससे उसकी पहचान की जाती है। आग्नि परीक्षण में तार को पहले हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से साफ किया जाता है ताकि कोई अन्य मूलक उसमें न रह जाए। इसके बाद नमूना तार पर लेकर ज्वाला में रखा जाता है।
- आग्नि परीक्षण में प्लैटिनम या निकेल तार का उपयोग होता है।
- तार को हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से साफ किया जाता है।
- मूलक की उपस्थिति में ज्वाला का रंग बदलता है।
- इस विधि से विभिन्न मूलकों की पहचान की जाती है।
- आग्नि परीक्षण सरल और त्वरित विधि है।
- 📌 प्लैटिनम तार: आग्नि परीक्षण में प्रयुक्त धातु का तार।
- 📌 हाइड्रोक्लोरिक अम्ल: तार को साफ करने हेतु प्रयुक्त अम्ल।
4.3 आग्नि परीक्षण का सिद्धांत
अवधारणा4.3 आग्नि परीक्षण का सिद्धांत
आग्नि परीक्षण का सिद्धांत इलेक्ट्रॉन के ऊर्जा स्तरों में परिवर्तन पर आधारित है। जब किसी मूलक का नमूना ज्वाला में रखा जाता है, तो उसमें उपस्थित आयन ऊर्जा ग्रहण करते हैं और उच्च ऊर्जा स्तर पर चले जाते हैं। जब ये आयन पुनः अपने मूल ऊर्जा स्तर पर लौटते है
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Practical Chemistry · Vardhman Mahaveer Open University