NCERTCh 4निःशुल्क

Chapter 4

🎓 Class 12📖 Rasayan vigyan bhag II📖 12 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~18 मिनट
Chapter 3अध्याय 4 / 5Chapter 5

Chapter 4अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 12 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

9.1 ऐमीन की संरचना

व्याख्या

9.1 ऐमीन की संरचना

ऐमीन कार्बनिक यौगिकों का एक महत्वपूर्ण वर्ग हैं, जो अमोनिया (NH₃) के व्युत्पन्न होते हैं। अमोनिया में तीन हाइड्रोजन परमाणु होते हैं, जिन्हें एक या अधिक हाइड्रोजन परमाणुओं को ऐल्किल (R) या ऐरिल (Ar) समूहों द्वारा प्रतिस्थापित कर ऐमीन प्राप्त होते हैं। ऐमीनों का नाइट्रोजन परमाणु त्रिसंयोजी होता है तथा इस पर एक असहभाजित इलेक्ट्रॉन युगल होता है। नाइट्रोजन के कक्षक sp³ संकरित होते हैं और ऐमीन की आकृति पिरैमिडी होती है। नाइट्रोजन के तीन कक्षक हाइड्रोजन अथवा कार्बन के कक्षकों से अतिव्यापन करते हैं। असहभाजित इलेक्ट्रॉन युगल की उपस्थिति के कारण C–N–E कोण (जहाँ E = C या H) 109.5° से कम होता है, जैसे ट्राईमेथिलएमीन में यह 108° होता है। ऐमीनों का मुख्य व्यावसायिक उपयोग औषधियों और तंतुओं के संश्लेषण में मध्यवर्तियों के रूप में होता है। प्रकृति में ये प्रोटीन, विटामिन, ऐल्केलॉइड तथा हॉर्मोनों में पाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, ऐड्रिनिलिन और इफेक्ट्रिन रक्त-चाप बढ़ाने के लिए उपयोगी द्वितीयक ऐमीन हैं। नोवोकेन दंतचिकित्सा में निश्चेतक के रूप में प्रयुक्त होता है। डाइऐन्शोनियम लवण विभिन्न ऐरोमैटिक यौगिकों के संश्लेषण में मध्यवर्ती होते हैं।

  • ऐमीन अमोनिया के हाइड्रोजन परमाणुओं के प्रतिस्थापन से बनते हैं।
  • नाइट्रोजन परमाणु sp³ संकरित होता है और पिरैमिडी आकृति बनाता है।
  • ऐमीनों में नाइट्रोजन पर एक असहभाजित इलेक्ट्रॉन युगल होता है।
  • ऐमीनों का उपयोग औषधि, तंतु, रंजक आदि के संश्लेषण में होता है।
  • प्राकृतिक स्रोतों में ऐमीन प्रोटीन, विटामिन, हॉर्मोन आदि में पाए जाते हैं।
  • ट्राईमेथिलएमीन में C–N–C कोण लगभग 108° होता है।
  • 📌 ऐमीन: अमोनिया के हाइड्रोजन परमाणुओं के प्रतिस्थापन से प्राप्त कार्बनिक यौगिक।
  • 📌 असहभाजित इलेक्ट्रॉन युगल: नाइट्रोजन पर उपस्थित इलेक्ट्रॉन जो बंधन में नहीं जुड़ा होता।
  • 📌 पिरैमिडी आकृति: तीन आयामी त्रिकोणीय आकृति जिसमें नाइट्रोजन केंद्र होता है।

9.2 वर्गीकरण

व्याख्या

9.2 वर्गीकरण

ऐमीनों का वर्गीकरण अमोनिया के हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या के आधार पर किया जाता है, जिन्हें ऐल्किल (R) या ऐरिल (Ar) समूहों द्वारा प्रतिस्थापित किया गया हो। यदि एक हाइड्रोजन प्रतिस्थापित हो तो प्राथमिक (1°) ऐमीन बनती है, जिसका सामान्य सूत्र R–NH₂ या Ar–NH₂ होता है। यदि दो हाइड्रोजन प्रतिस्थापित हों, तो द्वितीयक (2°) ऐमीन बनती है, जिसका सूत्र R–NH–R' होता है, जहाँ R और R' समान या भिन्न हो सकते हैं। तीन प्रतिस्थापन होने पर तृतीयक (3°) ऐमीन बनती है, जिसका सूत्र R₃N होता है। यदि सभी प्रतिस्थापित समूह समान हों तो इसे सरल ऐमीन कहते हैं, अन्यथा मिश्रित ऐमीन। अमोनिया से क्रमशः प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐमीनों का निर्माण इस प्रकार होता है: NH₃ → RNH₂ → R₂NH → R₃N। इस वर्गीकरण से ऐमीनों की संरचना और उनके गुणों को समझना आसान होता है।

  • ऐमीनों का वर्गीकरण प्रतिस्थापित हाइड्रोजन की संख्या पर आधारित है।
  • प्राथमिक (1°) ऐमीन में एक हाइड्रोजन प्रतिस्थापित होता है।
  • द्वितीयक (2°) ऐमीन में दो हाइड्रोजन प्रतिस्थापित होते हैं।
  • तृतीयक (3°) ऐमीन में तीन हाइड्रोजन प्रतिस्थापित होते हैं।
  • सरल ऐमीन में सभी प्रतिस्थापित समूह समान होते हैं, मिश्रित में भिन्न।
  • संरचनात्मक सूत्रों से वर्गीकरण स्पष्ट होता है।
  • 📌 प्राथमिक ऐमीन: एक हाइड्रोजन प्रतिस्थापित।
  • 📌 द्वितीयक ऐमीन: दो हाइड्रोजन प्रतिस्थापित।
  • 📌 तृतीयक ऐमीन: तीन हाइड्रोजन प्रतिस्थापित।

9.3 नामपद्धति

व्याख्या

9.3 नामपद्धति

ऐमीनों का नामकरण दो प्रकार से किया जाता है: सामान्य पद्धति और IUPAC पद्धति। सामान्य पद्धति में ऐल्किल समूह के नाम के बाद 'ऐमीन' शब्द जोड़कर नाम दिया जाता है, जैसे मेथिलऐमीन। द्वितीयक और तृतीयक ऐमीनों में जब दो या अधिक समूह समान होते हैं, तो पूर्वलग्न

अभ्यास प्रश्नChapter 4

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.9.3 निम्नलिखित के कारण बताइए- (i) ऐनिलीन का pKₗ मेथिलएमीन की तुलना में अधिक होता है। (ii) ऐथिलऐमीन जल में विलेय है जबकि ऐनिलीन नहीं। (iii) मेथिलऐमीन फेरिक क्लोराइड के साथ जल में अभिक्रिया करने पर जलयोजित फेरिक आक्साइड का अवक्षेप देता है। (iv) यद्यपि ऐमीनों समूह इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं में आर्थो एवं पैरा निर्देशक होता है फिर भी ऐनिलीन नाइट्रोकरण द्वारा यथेष्ट मात्रा में मेटानाइट्रोऐनीलीन देती है। (v) ऐनिलीन फ्रिडेल क्राफ्ट्स अभिक्रिया प्रदर्शित नहीं करती। (vi) ऐरोमैटिक ऐमीनों के डाइऐजोनियम लवण ऐलीफैटिक ऐमीनों से प्राप्त लवण से अधिक स्थायी होते हैं। (vii) प्राथमिक ऐमीन के संश्लेषण में गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण को प्राथमिकता दी जाती है।

उत्तर:

उत्तर: (i) ऐनिलीन का pKₗ मेथिलएमीन की तुलना में अधिक होता है क्योंकि ऐनिलीन में नाइट्रोजन के lone pair इलेक्ट्रॉन बेंज़ीन रिंग के π-तंत्र के साथ संलग्न होते हैं, जिससे उसका availability कम हो जाता है, अतः वह कम क्षारक होता है। मेथिलएमीन में lone pair पूरी तरह से नाइट्रोजन पर उपलब्ध होता है, इसलिए उसका pKₗ कम होता है। (ii) ऐथिलऐमीन जल में विलेय है क्योंकि यह एक अल्काइल ऐमीन है और जल के साथ हाइड्रोजन बांड बना सकता है। जबकि ऐनिलीन में नाइट्रोजन का lone pair बेंज़ीन रिंग के साथ संलग्न होता है, जिससे जल के साथ हाइड्रोजन बांड बनाना कठिन होता है, अतः वह जल में कम विलेय होता है। (iii) मेथिलऐमीन फेरिक क्लोराइड के साथ जल में अभिक्रिया करता है और जलयोजित फेरिक आक्साइड का अवक्षेप देता है क्योंकि मेथिलऐमीन एक क्षारक है जो फेरिक आयन के साथ अभिक्रिया कर जलयोजित फेरिक आक्साइड (Fe(OH)₃) का अवक्षेप बनाता है। (iv) यद्यपि ऐमीन समूह इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं में आर्थो एवं पैरा निर्देशक होता है, फिर भी ऐनिलीन नाइट्रोकरण द्वारा यथेष्ट मात्रा में मेटानाइट्रोऐनीलीन देता है क्योंकि नाइट्रोकरण की स्थिति में नाइट्रो समूह इलेक्ट्रोनाभावित होता है और बेंज़ीन रिंग पर इलेक्ट्रॉन घनत्व कम कर देता है, जिससे मेटा स्थिति पर नाइट्रोकरण अधिक होता है। (v) ऐनिलीन फ्रिडेल क्राफ्ट्स अभिक्रिया प्रदर्शित नहीं करती क्योंकि नाइट्रोजन का lone pair बेंज़ीन रिंग के साथ संलग्न होता है और यह Lewis बेस की तरह व्यवहार करता है, जो Lewis एसिड (AlCl₃) के साथ अभिक्रिया कर अभिक्रिया को रोकता है। (vi) ऐरोमैटिक ऐमीनों के डाइऐजोनियम लवण ऐलीफैटिक ऐमीनों से प्राप्त लवण से अधिक स्थायी होते हैं क्योंकि ऐरोमैटिक डाइऐजोनियम आयन में रेजोनेंस स्थिरीकरण होता है, जो इसे अधिक स्थिर बनाता है। (vii) प्राथमिक ऐमीन के संश्लेषण में गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि यह विधि विशिष्ट रूप से प्राथमिक ऐमीन देती है और अन्य विधियों की तुलना में कम साइड प्रोडक्ट बनते हैं।

व्याख्या:

प्रत्येक कारण के पीछे रासायनिक और संरचनात्मक तर्क दिए गए हैं, जो ऐमीनों के व्यवहार को समझाते हैं।

MediumNCERT
Q2.9.4 निम्नलिखित को क्रम में लिखिए— (i) $pK_{b}$ मान के घटते क्रम में— $C_2H_5NH_2, C_6H_5NHCH_3, (C_2H_5)_2NH$ एवं $C_6H_5NH_2$ (ii) क्षारकीय प्राबल्य के घटते क्रम में— $C_6H_5NH_2, C_6H_5N(CH_3)_2, (C_2H_5)_2NH$ एवं $CH_3NH_2$ (iii) क्षारकीय प्राबल्य के बढ़ते क्रम में— (क) ऐनिलीन, पैरा-नाइट्रोऐनिलीन, एवं पैरा-टॉल्ड्रीन (ख) $C_6H_5NH_2, C_6H_5NHCH_3, C_6H_5CH_2NH_2$ (iv) गैस अवस्था में घटते हुए क्षारकीय प्राबल्य के क्रम में— $C_2H_5NH_2, (C_2H_5)_2NH, (C_2H_5)_3N$ एवं $NH_3$ (v) क्वथनांक के बढ़ते क्रम में— $C_2H_5OH, (CH_3)_2NH, C_2H_5NH_2$ (vi) जल में विलेयता के बढ़ते क्रम में— $C_6H_5NH_2, (C_2H_5)_2NH, C_2H_5NH_2$

उत्तर:

उत्तर: (i) $pK_b$ के घटते क्रम में: $(C_2H_5)_2NH > C_6H_5NHCH_3 > C_2H_5NH_2 > C_6H_5NH_2$ (ii) क्षारकीय प्राबल्य के घटते क्रम में: $ (C_2H_5)_2NH > CH_3NH_2 > C_6H_5N(CH_3)_2 > C_6H_5NH_2$ (iii) क्षारकीय प्राबल्य के बढ़ते क्रम में: (क) पैरा-नाइट्रोऐनिलीन < ऐनिलीन < पैरा-टॉल्ड्रीन (ख) $C_6H_5NH_2 < C_6H_5NHCH_3 < C_6H_5CH_2NH_2$ (iv) गैस अवस्था में घटते हुए क्षारकीय प्राबल्य के क्रम में: $C_2H_5NH_2 > (C_2H_5)_2NH > (C_2H_5)_3N > NH_3$ (v) क्वथनांक के बढ़ते क्रम में: $ (CH_3)_2NH < C_2H_5NH_2 < C_2H_5OH$ (vi) जल में विलेयता के बढ़ते क्रम में: $C_6H_5NH_2 < (C_2H_5)_2NH < C_2H_5NH_2$

व्याख्या:

यह क्रम क्षारकता, pKb मान, क्वथनांक और जल में विलेयता के आधार पर दिया गया है।

MediumNCERT
Q3.9.5 इन्हें आप कैसे परिवर्तित करेंगे— (i) एथेनॉइक अम्ल को मेथेनेमीन में (ii) हैक्सेननाइट्राइल को 1-ऐमीनोपेस्टेन में (iii) मेथेनॉल को एथेनॉइक अम्ल में (iv) एथेनेमीन को मेथेनेमीन में (v) एथेनॉइक अम्ल को प्रोपेनॉइक अम्ल में (vi) मेथेनेमीन को ऐथेनेमीन में (vii) नाइट्रोमेथेन को डाइमेथिलऐमीन में (viii) प्रोपेनॉइक अम्ल को ऐथेनॉइक अम्ल में?

उत्तर:

उत्तर: (i) एथेनॉइक अम्ल को मेथेनेमीन में: एथेनॉइक अम्ल को पहले क्लोराइड में परिवर्तित करें (एथेनॉयल क्लोराइड), फिर अमोनिया के साथ अभिक्रिया कर अमाइड बनाएं, अंत में अमाइड को हाइड्रोजन गैस और निकेल उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजनीकरण कर मेथेनेमीन प्राप्त करें। (ii) हैक्सेननाइट्राइल को 1-ऐमीनोपेस्टेन में: हाइड्रोजन गैस और निकेल उत्प्रेरक की उपस्थिति में हैक्सेननाइट्राइल का हाइड्रोजनीकरण करें। (iii) मेथेनॉल को एथेनॉइक अम्ल में: मेथेनॉल को ऑक्सीकरण के द्वारा एथेनॉइक अम्ल में बदला जा सकता है। (iv) एथेनेमीन को मेथेनेमीन में: एथेनेमीन को हाइड्रोजन गैस और निकेल उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजनीकरण करें। (v) एथेनॉइक अम्ल को प्रोपेनॉइक अम्ल में: एथेनॉइक अम्ल को कार्बन श्रृंखला बढ़ाने के लिए कार्बन सम्मिलित करें, जैसे कि कार्बनिल यौगिक के साथ अभिक्रिया। (vi) मेथेनेमीन को ऐथेनेमीन में: मेथेनेमीन को एथिल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया कर ऐथेनेमीन बनाएं। (vii) नाइट्रोमेथेन को डाइमेथिलऐमीन में: नाइट्रोमेथेन को पहले अमीन में बदलें, फिर मेथिलेशन द्वारा डाइमेथिलऐमीन बनाएं। (viii) प्रोपेनॉइक अम्ल को ऐथेनॉइक अम्ल में: प्रोपेनॉइक अम्ल को कार्बन श्रृंखला कम करने के लिए डिकार्बॉक्सिलेशन करें।

व्याख्या:

प्रत्येक परिवर्तन के लिए उपयुक्त रासायनिक अभिक्रियाओं और प्रक्रियाओं का वर्णन किया गया है।

MediumNCERT
Q4.9.6 प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों को पहचान की विधि का वर्णन कीजिए। इन अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण भी लिखिए।

उत्तर:

उत्तर: प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐमीनों की पहचान के लिए निम्नलिखित विधियाँ हैं: 1. हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया: प्राथमिक ऐमीन हॉफमान ब्रोमेमाइड के साथ अभिक्रिया कर एक अमीनो समूह को हटाकर एल्केन बनाती है। द्वितीयक और तृतीयक ऐमीन इस अभिक्रिया में भाग नहीं लेते। रासायनिक समीकरण: R-NH_2 + Br_2 + 4NaOH → R-H + Na_2CO_3 + 2NaBr + 2H_2O 2. डाइऐजोकरण अभिक्रिया: प्राथमिक ऐमीन नाइट्रस अम्ल के साथ डाइऐजोनीकरण करती है, द्वितीयक और तृतीयक ऐमीन नहीं। रासायनिक समीकरण: R-NH_2 + HNO_2 + HCl → R-N_2^+Cl^- + 2H_2O 3. युग्मन अभिक्रिया: द्वितीयक ऐमीनों में युग्मन अभिक्रिया होती है, जो तृतीयक और प्राथमिक ऐमीनों में नहीं होती। 4. अन्य परीक्षण जैसे कि फेरिक क्लोराइड परीक्षण, जो प्राथमिक और द्वितीयक ऐमीनों में भिन्न प्रतिक्रिया देते हैं।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रकार के ऐमीन की विशिष्ट अभिक्रियाओं के आधार पर पहचान की जाती है।

MediumNCERT
Q5.9.7 निम्न पर लघु टिप्पणी लिखिए— (i) कार्बिलऐमीन अभिक्रिया (ii) डाइऐजोकरण (iii) हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया (iv) युग्मन अभिक्रिया (v) अमोनीअपघटन (vi) ऐसीटिलन (vii) गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण

उत्तर:

उत्तर: (i) कार्बिलऐमीन अभिक्रिया: यह अभिक्रिया ऐमीनों के साथ कार्बिल क्लोराइड के अभिक्रिया को दर्शाती है, जिससे कार्बिलऐमीन बनते हैं। (ii) डाइऐजोकरण: प्राथमिक ऐमीनों का नाइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया कर डाइऐजोनियम लवण बनाना। (iii) हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया: प्राथमिक ऐमीनों का ब्रोमीन और क्षारीय माध्यम में अभिक्रिया कर एल्केन बनाना। (iv) युग्मन अभिक्रिया: द्वितीयक ऐमीनों की विशिष्ट अभिक्रिया जो तृतीयक और प्राथमिक ऐमीनों में नहीं होती। (v) अमोनीअपघटन: अमोनिया के अपघटन की प्रक्रिया। (vi) ऐसीटिलन: ऐमीनों का ऐसीटिल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया कर ऐसीटिल ऐमीन बनाना। (vii) गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण: प्राथमिक ऐमीनों के संश्लेषण की एक विधि जो थैलिमाइड से होती है।

व्याख्या:

प्रत्येक अभिक्रिया का संक्षिप्त परिचय और महत्व दिया गया है।

MediumNCERT
Q6.9.8 निम्न परिवर्तन निष्पादित कीजिए— (i) नाइट्रोबेन्जीन सें बेन्जोइक अम्ल (ii) बेन्जीन से $m$-ब्रोमोफीनॉल (iii) बेन्जोइक अम्ल से ऐनिलीन (iv) ऐनिलीन से 2, 4, 6-ट्राइब्रोमोफ्लुओरोबेन्जीन (v) बेन्जिल क्लोराइड से 2-फ़ेनिलएथेनेमीन (vi) क्लोरोबेन्जीन से $p$-क्लोरोऐनिलीन (vii) ऐनिलीन से $p$-ब्रोमोऐनिलीन (viii) बेन्ज़एमाइड से टॉल्ड्रेन (ix) ऐनीलीन से बेन्ज़ाइल ऐल्कोहॉल।

उत्तर:

उत्तर: (i) नाइट्रोबेन्जीन को पहले रिडक्शन कर ऐनिलीन बनाएं, फिर ऐनिलीन को नाइट्रोकरण कर बेन्जोइक अम्ल प्राप्त करें। (ii) बेन्जीन को ब्रोमिनेशन कर $m$-ब्रोमोफीनॉल बनाएं। (iii) बेन्जोइक अम्ल को पहले रिडक्शन कर बेन्जाइल ऐल्कोहॉल बनाएं, फिर ऐल्कोहॉल को ऐनिलीन में परिवर्तित करें। (iv) ऐनिलीन को ब्रोमिनेशन कर 2,4,6-ट्राइब्रोमोफ्लुओरोबेन्जीन बनाएं। (v) बेन्जिल क्लोराइड को अमोनिया के साथ अभिक्रिया कर 2-फ़ेनिलएथेनेमीन बनाएं। (vi) क्लोरोबेन्जीन को नाइट्रेशन कर $p$-क्लोरोऐनिलीन बनाएं। (vii) ऐनिलीन को ब्रोमिनेशन कर $p$-ब्रोमोऐनिलीन बनाएं। (viii) बेन्ज़एमाइड को टॉल्ड्रेन में परिवर्तित करें। (ix) ऐनिलीन को बेन्ज़ाइल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया कर बेन्ज़ाइल ऐल्कोहॉल बनाएं।

व्याख्या:

प्रत्येक परिवर्तन के लिए उपयुक्त रासायनिक अभिक्रियाओं का वर्णन किया गया है।

MediumNCERT
Q7.9.9 निम्न अभिक्रियाओं में A, B, तथा C की संरचना दीजिए— (i) $ ext{CH}_3 ext{CH}_2 ext{I} ightarrow^{NaCN} A ightarrow^{OH^-} B ightarrow^{NaOH + Br_2} C$ (ii) $ ext{C}_6 ext{H}_5 ext{N}_2 ext{Cl} ightarrow^{CuCN} A ightarrow^{H_2O/H^+} B ightarrow^{NH_3} C$ (iii) $ ext{CH}_3 ext{CH}_2 ext{Br} ightarrow^{KCN} A ightarrow^{LiAlH_4} B ightarrow^{HNO_3} C$ (iv) $ ext{C}_6 ext{H}_5 ext{NO}_2 ightarrow^{Fe/HCl} A ightarrow^{NaNO_2 + HCl} B ightarrow^{H_2O/H^+} C$ (v) $ ext{CH}_3 ext{COOH} ightarrow^{NH_3} A ightarrow^{NaOBr} B ightarrow^{NaNO_2/HCl} C$ (vi) $ ext{C}_6 ext{H}_5 ext{NO}_2 ightarrow^{Fe/HCl} A ightarrow^{HNO_2} B ightarrow^{C_6H_5OH} C$

उत्तर:

उत्तर: (i) $ ext{CH}_3 ext{CH}_2 ext{I} ightarrow^{NaCN} ext{CH}_3 ext{CH}_2 ext{CN} (A) ightarrow^{OH^-} ext{CH}_3 ext{CH}_2 ext{COOH} (B) ightarrow^{NaOH + Br_2} ext{CH}_3 ext{CH}_3 (C)$ (हॉफमान अपघटन) (ii) $ ext{C}_6 ext{H}_5 ext{N}_2 ext{Cl} ightarrow^{CuCN} ext{C}_6 ext{H}_5 ext{CN} (A) ightarrow^{H_2O/H^+} ext{C}_6 ext{H}_5 ext{COOH} (B) ightarrow^{NH_3} ext{C}_6 ext{H}_5 ext{CONH}_2 (C)$ (iii) $ ext{CH}_3 ext{CH}_2 ext{Br} ightarrow^{KCN} ext{CH}_3 ext{CH}_2 ext{CN} (A) ightarrow^{LiAlH_4} ext{CH}_3 ext{CH}_2 ext{CH}_2 ext{NH}_2 (B) ightarrow^{HNO_3} ext{CH}_3 ext{CH}_2 ext{CH}_2 ext{NO}_2 (C)$ (iv) $ ext{C}_6 ext{H}_5 ext{NO}_2 ightarrow^{Fe/HCl} ext{C}_6 ext{H}_5 ext{NH}_2 (A) ightarrow^{NaNO_2 + HCl} ext{C}_6 ext{H}_5 ext{N}_2^+Cl^- (B) ightarrow^{H_2O/H^+} ext{C}_6 ext{H}_5 ext{OH} (C)$ (v) $ ext{CH}_3 ext{COOH} ightarrow^{NH_3} ext{CH}_3 ext{CONH}_2 (A) ightarrow^{NaOBr} ext{CH}_3 ext{NH}_2 (B) ightarrow^{NaNO_2/HCl} ext{CH}_3 ext{N}_2^+Cl^- (C)$ (vi) $ ext{C}_6 ext{H}_5 ext{NO}_2 ightarrow^{Fe/HCl} ext{C}_6 ext{H}_5 ext{NH}_2 (A) ightarrow^{HNO_2} ext{C}_6 ext{H}_5 ext{N}_2^+Cl^- (B) ightarrow^{C_6H_5OH} ext{C}_6 ext{H}_5 ext{OH} (C)$

व्याख्या:

प्रत्येक अभिक्रिया में मध्यवर्ती यौगिकों (A, B, C) की संरचना उनके रासायनिक रूपांतरणों के आधार पर निर्धारित की गई है।

HardNCERT
Q8.9.10 एक ऐरोमैटिक यौगिक 'A' जलीय अमोनिया के साथ गरम करने पर यौगिक 'B' बनाता है जो $ ext{Br}_2$ एवं KOH के साथ गरम करने पर अणु सूत्र $ ext{C}_6 ext{H}_7 ext{N}$ वाला यौगिक 'C' बनाता है। A, B एवं C यौगिकों की संरचना एवं इनके आइयूपीएसी नाम लिखिए।

उत्तर:

उत्तर: A: $ ext{C}_6 ext{H}_5 ext{Cl}$ (क्लोरोबेन्जीन) B: $ ext{C}_6 ext{H}_5 ext{NH}_2$ (ऐनिलीन) C: $ ext{C}_6 ext{H}_5 ext{NH}_2$ (ब्रूमोफ्लुओरोबेन्जीन) या $ ext{C}_6 ext{H}_7 ext{N}$ (2-फ़ेनिलएथेनेमीन) व्याख्या: क्लोरोबेन्जीन (A) जलीय अमोनिया के साथ गरम करने पर ऐनिलीन (B) बनाता है। ऐनिलीन को $ ext{Br}_2$ एवं KOH के साथ गरम करने पर 2-फ़ेनिलएथेनेमीन (C) बनता है जिसका अणु सूत्र $ ext{C}_6 ext{H}_7 ext{N}$ है।

व्याख्या:

यह अभिक्रिया क्लोरोबेन्जीन के अमोनियाकीय प्रतिस्थापन और बाद में ब्रोमिनेशन तथा क्षारीय अभिक्रिया को दर्शाती है।

MediumNCERT