NCERTCh 1निःशुल्क

Chapter 1

🎓 Class 12📖 Rasayan vigyan bhag II📖 10 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~15 मिनट
अध्याय 1 / 5Chapter 2

Chapter 1अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन कार्बनिक रसायन विज्ञान के महत्वपूर्ण यौगिक हैं जिनमें कार्बन और हैलोजन तत्वों के बीच बंध होता है। हैलोऐल्केन वे यौगिक होते हैं जिनमें एक या अधिक हाइड्रोजन परमाणु को हैलोजन (जैसे क्लोरीन, ब्रोमीन, आयोडीन, फ्लोरीन) से प्रतिस्थापित किया गया होता है। इन्हें अल्केन के हैलोजन युक्त व्युत्पन्न भी कहा जाता है। हैलोऐरीन वे यौगिक हैं जिनमें अल्कीन की कार्बन-कार्बन डबल बंध में से एक हाइड्रोजन परमाणु हैलोजन से प्रतिस्थापित होता है। इन यौगिकों में C–X बंध (जहाँ X हैलोजन है) की उपस्थिति उनके रासायनिक और भौतिक गुणों को प्रभावित करती है। हैलोऐल्केन और हैलोऐरीन का अध्ययन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ये औद्योगिक रसायनों, दवाओं, कीटनाशकों, और अन्य उपयोगी यौगिकों के निर्माण में आधारभूत भूमिका निभाते हैं। इस अध्याय में हम इनके नामकरण, संरचना, भौतिक और रासायनिक गुणों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

  • हैलोऐल्केन में हाइड्रोजन के स्थान पर हैलोजन जुड़ा होता है।
  • हैलोऐरीन में अल्कीन के C=C डबल बंध में से एक हाइड्रोजन हैलोजन से प्रतिस्थापित होता है।
  • C–X बंध की उपस्थिति से यौगिकों के गुण प्रभावित होते हैं।
  • हैलोऐल्केन और हैलोऐरीन औद्योगिक और जैविक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
  • 📌 हैलोऐल्केन: अल्केन के हैलोजन युक्त व्युत्पन्न
  • 📌 हैलोऐरीन: अल्कीन के हैलोजन युक्त व्युत्पन्न
  • 📌 C–X बंध: कार्बन-हैलोजन बंध

हैलोऐल्केन का नामकरण

व्याख्या

हैलोऐल्केन का नामकरण

हैलोऐल्केन के नामकरण के लिए IUPAC नियमों का पालन किया जाता है। सबसे पहले, मुख्य कार्बन श्रृंखला का चयन किया जाता है जो सबसे लंबी और सरल अल्केन श्रृंखला होती है जिसमें हैलोजन जुड़ा होता है। श्रृंखला को इस प्रकार संख्या दी जाती है कि हैलोजन का स्थान सबसे कम संख्या पर हो। हैलोजन को उपसर्ग के रूप में लिखा जाता है, जैसे फ्लोरीनो-, क्लोरीनो-, ब्रोमीनो-, आयोडीनो-। यदि एक से अधिक हैलोजन समूह हों तो उन्हें संख्या सहित क्रमबद्ध किया जाता है। इसके बाद, मुख्य श्रृंखला के नाम के साथ उपसर्ग जोड़ा जाता है। उदाहरण के लिए, CH3–CH2–Cl को क्लोरोएथेन कहा जाता है। नामकरण में ध्यान रखना होता है कि हैलोजन समूह को प्राथमिकता दी जाती है ताकि उनका स्थान कम से कम संख्या पर आए।

  • मुख्य कार्बन श्रृंखला सबसे लंबी अल्केन श्रृंखला होती है जिसमें हैलोजन जुड़ा हो।
  • श्रृंखला को इस प्रकार संख्या दी जाती है कि हैलोजन का स्थान न्यूनतम हो।
  • हैलोजन को उपसर्ग के रूप में लिखा जाता है: फ्लोरीनो-, क्लोरीनो-, ब्रोमीनो-, आयोडीनो-।
  • यदि एक से अधिक हैलोजन समूह हों तो उन्हें संख्या सहित क्रमबद्ध किया जाता है।
  • नामकरण में हैलोजन समूह को प्राथमिकता दी जाती है।
  • 📌 IUPAC नामकरण: अंतरराष्ट्रीय रासायनिक नामकरण प्रणाली
  • 📌 उपसर्ग: नाम के प्रारंभ में जोड़ा गया शब्द जो हैलोजन को दर्शाता है

हैलोऐल्केन की संरचना

व्याख्या

हैलोऐल्केन की संरचना

हैलोऐल्केन की संरचना में कार्बन परमाणु sp³ हाइब्रिडाइज्ड होते हैं, जिससे चार σ-बंध बनते हैं। इनमें से तीन बंध कार्बन-हाइड्रोजन या कार्बन-कार्बन के होते हैं और एक बंध कार्बन-हैलोजन (C–X) का होता है। C–X बंध ध्रुवीय होता है क्योंकि हैलोजन परमाणु की इले

अभ्यास प्रश्नChapter 1

15 विस्तृत उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न

Q1.हैलोऐल्केन और हैलोऐरीन में मुख्य अंतर क्या है?
A.A) हैलोऐल्केन में हैलोजन परमाणु सीधे अल्केन श्रृंखला के कार्बन से जुड़े होते हैं, जबकि हैलोऐरीन में हैलोजन परमाणु अल्कीन श्रृंखला के कार्बन से जुड़े होते हैं।
B.B) हैलोऐल्केन में डबल बॉन्ड होता है, हैलोऐरीन में केवल एकल बॉन्ड होता है।
C.C) हैलोऐल्केन में हैलोजन परमाणु नहीं होते, हैलोऐरीन में होते हैं।
D.D) हैलोऐल्केन में केवल आयोडीन होता है, हैलोऐरीन में केवल क्लोरीन होता है।

उत्तर:

हैलोऐल्केन में हैलोजन परमाणु सीधे अल्केन श्रृंखला के कार्बन से जुड़े होते हैं, जबकि हैलोऐरीन में हैलोजन परमाणु अल्कीन श्रृंखला के कार्बन से जुड़े होते हैं।

व्याख्या:

हैलोऐल्केन वे यौगिक हैं जिनमें हैलोजन परमाणु अल्केन श्रृंखला के कार्बन से जुड़े होते हैं (single bond, sp3 hybridized), जबकि हैलोऐरीन में हैलोजन परमाणु अल्कीन श्रृंखला के कार्बन से जुड़े होते हैं (double bond, sp hybridized)।

Easy
Q2.IUPAC नामकरण में हैलोऐल्केन के लिए हैलोजन समूहों को किस क्रम में नामित किया जाता है?
A.A) वर्णानुक्रम (Alphabetical order) के अनुसार
B.B) उनके आणविक भार के अनुसार
C.C) उनकी ध्रुवीयता के अनुसार
D.D) उनके बंध की ताकत के अनुसार

उत्तर:

वर्णानुक्रम (Alphabetical order) के अनुसार

व्याख्या:

IUPAC नामकरण में हैलोजन समूहों को फ्लुओरो (F), क्लोरो (Cl), ब्रोमो (Br), आयोडो (I) के वर्णानुक्रम के अनुसार नामित किया जाता है।

Easy
Q3.हैलोऐरीन के नामकरण में डबल बॉन्ड को किस प्राथमिकता के साथ संख्या दी जाती है?
A.A) हैलोजन समूह से न्यूनतम दूरी पर
B.B) डबल बॉन्ड को प्राथमिकता देते हुए, डबल बॉन्ड वाले कार्बन को न्यूनतम संख्या देते हैं
C.C) सबसे पहले अंत से संख्या देते हैं
D.D) सबसे बड़े समूह को प्राथमिकता देते हैं

उत्तर:

डबल बॉन्ड को प्राथमिकता देते हुए, डबल बॉन्ड वाले कार्बन को न्यूनतम संख्या देते हैं

व्याख्या:

हैलोऐरीन के नामकरण में डबल बॉन्ड को प्राथमिकता दी जाती है और डबल बॉन्ड वाले कार्बन को संख्या इस प्रकार दी जाती है कि वह न्यूनतम हो।

Medium
Q4.हैलोऐल्केन में कार्बन का हाइब्रिडीकरण किस प्रकार होता है?
A.A) sp³
B.B) sp²
C.C) sp
D.D) dsp²

उत्तर:

sp³

व्याख्या:

हैलोऐल्केन में कार्बन का हाइब्रिडीकरण sp³ होता है क्योंकि यह अल्केन श्रृंखला का हिस्सा होता है जिसमें सभी बंध एकल होते हैं।

Easy
Q5.हैलोऐरीन में कार्बन का हाइब्रिडीकरण किस प्रकार होता है?
A.A) sp³
B.B) sp²
C.C) sp
D.D) dsp²

उत्तर:

sp

व्याख्या:

हैलोऐरीन में कार्बन का हाइब्रिडीकरण sp होता है क्योंकि इसमें डबल बॉन्ड होता है जिसमें एक सिग्मा और एक पाई बंध होता है।

Medium
Q6.हैलोऐल्केन और हैलोऐरीन के कार्बन-हैलोजन बंध की प्रकृति क्या होती है?
A.A) गैर-ध्रुवीय सिग्मा बंध
B.B) ध्रुवीय सिग्मा बंध
C.C) पाई बंध
D.D) ध्रुवीय पाई बंध

उत्तर:

ध्रुवीय सिग्मा बंध

व्याख्या:

कार्बन-हैलोजन बंध इलेक्ट्रोनगेटिविटी के अंतर के कारण ध्रुवीय होता है और यह एक सिग्मा बंध होता है।

Medium
Q7.हैलोऐल्केन के क्वथनांक पर निम्न में से कौन सा प्रभाव सबसे अधिक होता है?
A.A) अणु का आकार और वान डर वाल बल
B.B) कार्बन श्रृंखला की लंबाई
C.C) हैलोजन का प्रकार (जैसे फ्लोरीन से आयोडीन तक)
D.D) दोनों A और C

उत्तर:

दोनों A और C

व्याख्या:

हैलोऐल्केन के क्वथनांक पर अणु के आकार, वान डर वाल बल और हैलोजन के प्रकार का प्रभाव होता है। जैसे फ्लोरीन से आयोडीन तक क्वथनांक बढ़ता है क्योंकि अणु का आकार और वान डर वाल बल बढ़ते हैं।

Medium
Q8.हैलोऐल्केन जल में कम घुलनशील होते हैं क्योंकि:
A.A) वे ध्रुवीय होते हैं
B.B) वे गैर-ध्रुवीय होते हैं और जल ध्रुवीय होता है
C.C) उनका आणविक भार बहुत कम होता है
D.D) वे आयनिक यौगिक होते हैं

उत्तर:

वे गैर-ध्रुवीय होते हैं और जल ध्रुवीय होता है

व्याख्या:

हैलोऐल्केन मुख्यतः गैर-ध्रुवीय होते हैं और जल एक ध्रुवीय विलायक है, इसलिए हैलोऐल्केन जल में कम घुलनशील होते हैं।

Easy