NCERTCh 4निःशुल्क

Chapter 4

🎓 Class 12📖 Bhautiki-I📖 11 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~17 मिनट
Chapter 3अध्याय 4 / 8Chapter 5

Chapter 4अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

4.1 भूमिका

व्याख्या

4.1 भूमिका

विद्युत और चुंबकत्व के बीच गहरा संबंध 1820 में डच भौतिक विज्ञानी हैंस क्रिश्चियन ऑस्टैंड के प्रयोग द्वारा स्पष्ट हुआ। उन्होंने देखा कि जब किसी सीधे तार में विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो पास रखी चुंबकीय सुई में विक्षेप उत्पन्न होता है। तार के चारों ओर चुंबकीय सुई तार के अभिलंबवत तल में तार की स्थिति के केंद्रत: वृत्त की स्पर्श रेखा के समान संरेखित होती है। धारा की दिशा बदलने पर चुंबकीय सुई भी विपरीत दिशा में घूमती है। धारा का परिमाण बढ़ाने या चुंबकीय सुई को तार के निकट लाने से विक्षेप बढ़ जाता है। तार के चारों ओर लौह चूर्ण छिड़कने पर कण तार के चारों ओर संकेंद्री वृत्तों में व्यवस्थित हो जाते हैं। इससे यह निष्कर्ष निकला कि गतिमान आवेश (विद्युत धारा) अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करते हैं। इसके बाद 19वीं शताब्दी में मैक्सवेल ने विद्युत और चुंबकत्व के नियमों को एकीकृत किया और प्रकाश को विद्युत चुंबकीय तरंगों के रूप में व्याख्यायित किया। 20वीं शताब्दी में इस क्षेत्र में अनेक वैज्ञानिक प्रगति हुई, जैसे हर्ट्ज द्वारा रेडियो तरंगों की खोज और मार्कॉनी द्वारा इनके प्रेषण की तकनीक। इस अध्याय में हम देखेंगे कि चुंबकीय क्षेत्र आवेशित कणों और विद्युत धाराओं पर कैसे प्रभाव डालता है, और विद्युत धाराएँ कैसे चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती हैं। साथ ही, साइक्लोट्रॉन जैसे उपकरणों में आवेशित कणों को उच्च ऊर्जा तक त्वरित करने की प्रक्रिया का अध्ययन करेंगे।

  • 1820 में ऑस्टैंड ने विद्युत धारा के कारण चुंबकीय क्षेत्र की खोज की।
  • धारा की दिशा बदलने पर चुंबकीय सुई का विक्षेप भी बदलता है।
  • लौह चूर्ण तार के चारों ओर संकेंद्री वृत्तों में व्यवस्थित होते हैं।
  • मैक्सवेल ने विद्युत और चुंबकत्व के नियमों को एकीकृत किया।
  • चुंबकीय क्षेत्र आवेशित कणों और विद्युत धाराओं पर बल लगाता है।
  • साइक्लोट्रॉन में आवेशित कणों को उच्च ऊर्जा तक त्वरित किया जाता है।
  • 📌 विद्युत धारा: गतिमान आवेशों का प्रवाह।
  • 📌 चुंबकीय क्षेत्र: गतिमान आवेशों के चारों ओर उत्पन्न क्षेत्र।
  • 📌 विक्षेप: चुंबकीय सुई का धारा के कारण दिशा में परिवर्तन।

4.2 चुंबकीय बल

व्याख्या

4.2 चुंबकीय बल

चुंबकीय क्षेत्र B की अभिधारणा से पहले, विद्युत क्षेत्र E की पुनरावृत्ति आवश्यक है। स्थिर आवेश Q विद्युत क्षेत्र E उत्पन्न करता है जिसका मान E = Q r̂ / (4πε₀ r²) होता है। कोई आवेश q इस क्षेत्र में बल F = q E का अनुभव करता है। विद्युत क्षेत्र ऊर्जा और संवेग संप्रेषित करता है और इसका फैलना समय के साथ होता है। गतिमान आवेश (विद्युत धारा) चुंबकीय क्षेत्र B भी उत्पन्न करता है, जो एक सदिश क्षेत्र है। चुंबकीय क्षेत्र भी अध्यारोपण सिद्धांत का पालन करता है, अर्थात् विभिन्न स्रोतों के चुंबकीय क्षेत्र सदिश योग द्वारा प्राप्त होते हैं। जब कोई आवेश q वेग v से विद्युत क्षेत्र E और चुंबकीय क्षेत्र B में होता है, तो उस पर कुल बल F = q [E + v × B] कार्य करता है, जिसे लोरेंज बल कहते हैं। चुंबकीय बल q (v × B) वेग और चुंबकीय क्षेत्र का सदिश गुणनफल है, जो वेग और चुंबकीय क्षेत्र दोनों के लंबवत होता है, इसलिए यह कार्य नहीं करता। यदि आवेश स्थिर हो (v=0), तो चुंबकीय बल शून्य होता है। चुंबकीय बल की दिशा दक्षिण हस्त पेंच नियम द्वारा निर्धारित होती है। चुंबकीय क्षेत्र की मात्रक टेस्ला (T) है, जो न्यूटन सेकंड/कूलॉम मीटर के बराबर है।

  • स्थिर आवेश विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है।
  • गतिमान आवेश विद्युत क्षेत्र के साथ-साथ चुंबकीय क्षेत्र भी उत्पन्न करता है।
  • लोरेंज बल F = q [E + v × B] होता है।
  • चुंबकीय बल वेग और चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत होता है।
  • चुंबकीय बल कार्य नहीं करता क्योंकि यह वेग की दिशा में नहीं होता।
  • चुंबकीय क्षेत्र की इकाई टेस्ला (T) है।
  • 📌 लोरेंज बल: गतिमान आवेश पर विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र द्वारा लगने वाला कुल बल।
  • 📌 चुंबकीय क्षेत्र: गतिमान आवेशों के कारण उत्पन्न सदिश क्षेत्र।
  • 📌 टेस्ला: चुंबकीय क्षेत्र की SI इकाई।

4.3 चुंबकीय क्षेत्र में गति

व्याख्या

4.3 चुंबकीय क्षेत्र में गति

जब कोई आवेश q चुंबकीय क्षेत्र B में वेग v से गतिमान होता है, तो उस पर चुंबकीय बल q (v × B) कार्य करता है। यह बल वेग की दिशा के लंबवत होता है, अतः यह कण की गति की दिशा को बदलता है लेकिन गति की परिमाण को नहीं। यदि वेग चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत है, तो आव

अभ्यास प्रश्नChapter 4

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.तार की एक वृत्ताकार कुंडली में 100 फेरे हैं, प्रत्येक की त्रिज्या 8.0 cm है और इनमें 0.40 A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है। कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण क्या है?

उत्तर:

दी गई जानकारी: N = 100 (फेरे), r = 8.0 cm = 0.08 m, I = 0.40 A कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण B = \( \frac{\mu_0 N I}{2r} \) जहाँ \( \mu_0 = 4\pi \times 10^{-7} \, Tm/A \) B = \( \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 100 \times 0.40}{2 \times 0.08} \) = \( \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 40}{0.16} \) = \( \frac{160\pi \times 10^{-7}}{0.16} \) = \( 1000\pi \times 10^{-7} = 3.14 \times 10^{-4} \, T \) अतः चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण लगभग 3.14 × 10⁻⁴ टेस्ला होगा।

व्याख्या:

कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र का सूत्र है B = (μ₀NI)/(2r)। सभी मानों को SI इकाइयों में बदलकर सूत्र में रखकर हल किया गया।

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Q2.एक लंबे, सीधे तार में 35 A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है। तार से 20 cm दूरी पर स्थित किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण क्या है?

उत्तर:

दी गई जानकारी: I = 35 A, r = 20 cm = 0.20 m लंबे सीधे तार के बाहर चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण: B = \( \frac{\mu_0 I}{2\pi r} \) B = \( \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 35}{2\pi \times 0.20} \) = \( \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 35}{1.2566} \) = \( 5.6 \times 10^{-5} \, T \) अतः चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण लगभग 5.6 × 10⁻⁵ टेस्ला होगा।

व्याख्या:

लंबे सीधे तार के लिए चुंबकीय क्षेत्र का सूत्र B = (μ₀I)/(2πr) है। मानों को SI इकाइयों में बदलकर सूत्र में रखा गया।

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Q3.क्षैतिज तल में रखे एक लंबे सीधे तार में 50 A विद्युत धारा उत्तर से दक्षिण की ओर प्रवाहित हो रही है। तार के पूर्व में 2.5 m दूरी पर स्थित किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र B का परिमाण और उसकी दिशा ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

दी गई जानकारी: I = 50 A, r = 2.5 m चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण: B = \( \frac{\mu_0 I}{2\pi r} = \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 50}{2\pi \times 2.5} = \frac{2 \times 10^{-5}}{2.5} = 8 \times 10^{-6} \, T \) दिशा: धारा उत्तर से दक्षिण की ओर है। तार के पूर्व में चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दाहिने हाथ के नियम से पश्चिम से उत्तर की ओर होगी। अर्थात्, चुंबकीय क्षेत्र बिंदु पर पश्चिम से उत्तर की ओर है।

व्याख्या:

चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण सूत्र B = (μ₀I)/(2πr) से निकाला गया। दिशा दाहिने हाथ के नियम से निर्धारित की गई।

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Q4.व्योमस्थ खिंचे क्षैतिज बिजली के तार में 90 A विद्युत धारा पूर्व से पश्चिम की ओर प्रवाहित हो रही है। तार के 1.5 m नीचे विद्युत धारा के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण और दिशा क्या है?

उत्तर:

दी गई जानकारी: I = 90 A, r = 1.5 m चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण: B = \( \frac{\mu_0 I}{2\pi r} = \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 90}{2\pi \times 1.5} = \frac{3.6 \times 10^{-5}}{1.5} = 2.4 \times 10^{-5} \, T \) दिशा: धारा पूर्व से पश्चिम है। दाहिने हाथ के नियम से, तार के नीचे चुंबकीय क्षेत्र दक्षिण से उत्तर की ओर होगा।

व्याख्या:

चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण सूत्र B = (μ₀I)/(2πr) से निकाला गया। दिशा दाहिने हाथ के नियम से निर्धारित की गई।

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Q5.एक तार जिसमें 8 A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है, 0.15 T के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में, क्षेत्र से 30° का कोण बनाते हुए रखा है। इसकी एकांक लंबाई पर लगने वाले बल का परिमाण और इसकी दिशा क्या है?

उत्तर:

दी गई जानकारी: I = 8 A, B = 0.15 T, θ = 30° बल का सूत्र: F = I L B sinθ यहाँ, एकांक लंबाई पर बल है, अतः L = 1 m F = 8 × 1 × 0.15 × sin 30° = 8 × 0.15 × 0.5 = 0.6 N दिशा: बल चुंबकीय क्षेत्र और धारा के वेक्टरों के लम्बवत दिशा में होगा, दाहिने हाथ के नियम से।

व्याख्या:

बल का परिमाण F = I L B sinθ से निकाला गया। दिशा दाहिने हाथ के नियम द्वारा निर्धारित की गई।

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Q6.एक 3.0 cm लंबा तार जिसमें 10 A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है, एक परिनालिका के भीतर उसके अक्ष के लंबवत रखा है। परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र का मान 0.27 T है। तार पर लगने वाला चुंबकीय बल क्या है?

उत्तर:

दी गई जानकारी: L = 3.0 cm = 0.03 m, I = 10 A, B = 0.27 T चुंबकीय बल: F = I L B sinθ चूंकि तार अक्ष के लंबवत है, θ = 90°, sin 90° = 1 F = 10 × 0.03 × 0.27 × 1 = 0.081 N अतः तार पर लगने वाला चुंबकीय बल 0.081 न्यूटन होगा।

व्याख्या:

बल का सूत्र F = I L B sinθ है। θ = 90° होने पर sinθ = 1 होता है। मानों को सूत्र में रखकर हल किया गया।

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Q7.एक-दूसरे से 4.0 cm की दूरी पर रखे दो लंबे, सीधे, समांतर तारों A एवं B से क्रमशः 8.0 A एवं 5.0 A की विद्युत धाराएँ एक ही दिशा में प्रवाहित हो रही हैं। तार A के 10 cm खंड पर बल का आकलन कीजिए।

उत्तर:

दी गई जानकारी: I₁ = 8.0 A (तार A), I₂ = 5.0 A (तार B), d = 4.0 cm = 0.04 m, L = 10 cm = 0.10 m दो समांतर धाराओं के बीच बल: F = \( \frac{\mu_0 I_1 I_2 L}{2\pi d} \) F = \( \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 8.0 \times 5.0 \times 0.10}{2\pi \times 0.04} \) = \( \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 4.0}{0.08\pi} \) = \( \frac{1.6 \times 10^{-6}}{0.08} = 2.0 \times 10^{-5} \, N \) चूंकि धाराएँ समान दिशा में हैं, बल आकर्षक होगा।

व्याख्या:

दो समांतर धाराओं के बीच बल का सूत्र F = (μ₀ I₁ I₂ L)/(2π d) है। मानों को SI इकाइयों में बदलकर हल किया गया।

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Q8.पास-पास फेरों वाली एक परिनालिका 80 cm लंबी है और इसमें 5 परतें हैं जिनमें से प्रत्येक में 400 फेरे हैं। परिनालिका का व्यास 1.8 cm है। यदि इसमें 8.0 A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है तो परिनालिका के भीतर केंद्र के पास चुंबकीय क्षेत्र B के परिमाण परिकलित कीजिए।

उत्तर:

दी गई जानकारी: लंबाई l = 80 cm = 0.80 m, परतें n = 5, प्रत्येक परत में फेरों की संख्या N = 400 कुल फेरों की संख्या = N_total = n × N = 5 × 400 = 2000 व्यास d = 1.8 cm = 0.018 m, अतः त्रिज्या r = 0.009 m धारा I = 8.0 A कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र: B = \( \frac{\mu_0 N_{total} I}{2r} \) B = \( \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 2000 \times 8.0}{2 \times 0.009} \) = \( \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 16000}{0.018} \) = \( \frac{2.01 \times 10^{-2}}{0.018} = 1.12 \times 10^{-3} \, T \) अतः चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण लगभग 1.12 × 10⁻³ टेस्ला होगा।

व्याख्या:

कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र का सूत्र B = (μ₀ N I)/(2r) है। कुल फेरों की संख्या को ध्यान में रखकर मानों को सूत्र में रखा गया।

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