Chapter 1
Chapter 1 — अध्ययन नोट्स
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1.1 परिचय
व्याख्या1.1 परिचय
विद्युत आवेश तथा क्षेत्र भौतिकी की एक महत्वपूर्ण शाखा है जो पदार्थ के अंदर विद्युतीय गुणों का अध्ययन करती है। यह अध्याय विद्युत आवेश की प्रकृति, उसके प्रकार, तथा विद्युत क्षेत्र की अवधारणा को विस्तार से समझाता है। विद्युत आवेश एक मूलभूत भौतिक गुण है जो कणों में विद्यमान होता है और इसके कारण वे एक-दूसरे के साथ आकर्षण या विकर्षण बल अनुभव करते हैं। विद्युत आवेश के अध्ययन से हम विद्युत बल, विद्युत क्षेत्र, और विद्युत संभाव्यता जैसी अवधारणाओं को समझ पाते हैं, जो आधुनिक विज्ञान और तकनीक के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इस अध्याय में हम विद्युत आवेश के संरक्षण, क्वांटाइजेशन, कूलॉम्ब के नियम, अध्यारोपण सिद्धांत, और विद्युत क्षेत्र की परिभाषा एवं गुणों का गहन अध्ययन करेंगे।
- विद्युत आवेश पदार्थ के कणों में पाया जाने वाला मूलभूत गुण है।
- विद्युत क्षेत्र वह क्षेत्र है जिसमें आवेशित कण विद्युत बल अनुभव करता है।
- यह अध्याय विद्युत आवेश की प्रकृति, संरक्षण, और क्वांटाइजेशन को समझाता है।
- कूलॉम्ब का नियम विद्युत आवेशों के बीच लगने वाले बल का मात्रात्मक विवरण देता है।
- अध्यारोपण सिद्धांत से विद्युत बलों का सदिश योग समझा जाता है।
- विद्युत क्षेत्र रेखाएँ विद्युत क्षेत्र की दिशा और घनत्व को दर्शाती हैं।
- 📌 विद्युत आवेश: कणों में पाया जाने वाला वह गुण जिससे वे विद्युत बल अनुभव करते हैं।
- 📌 विद्युत क्षेत्र: वह क्षेत्र जिसमें आवेशित कण विद्युत बल का अनुभव करता है।
1.2 विद्युत आवेश; आवेश की संरचना
व्याख्या1.2 विद्युत आवेश; आवेश की संरचना
विद्युत आवेश की संरचना को समझने के लिए परमाणु की संरचना को जानना आवश्यक है। प्रत्येक पदार्थ परमाणुओं से बना होता है, और प्रत्येक परमाणु में तीन प्रकार के कण होते हैं: प्रोटॉन, इलेक्ट्रॉन, और न्यूट्रॉन। प्रोटॉन धनात्मक आवेशित होते हैं, इलेक्ट्रॉन ऋणात्मक आवेशित होते हैं, और न्यूट्रॉन का कोई आवेश नहीं होता। प्रोटॉन और न्यूट्रॉन परमाणु के केंद्र में स्थित होते हैं जिसे नाभिक कहते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर परिक्रमा करते हैं। किसी परमाणु में प्रोटॉनों और इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, जिससे वह विद्युत रूप से तटस्थ रहता है। यदि इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों से अधिक या कम हो, तो परमाणु आवेशित हो जाता है और इसे आयन कहा जाता है। इस प्रकार, विद्युत आवेश परमाणु के कणों की संरचना पर निर्भर करता है।
- परमाणु तीन प्रकार के कणों से बना होता है: प्रोटॉन, इलेक्ट्रॉन, और न्यूट्रॉन।
- प्रोटॉन धनात्मक आवेशित, इलेक्ट्रॉन ऋणात्मक आवेशित, और न्यूट्रॉन तटस्थ होते हैं।
- प्रोटॉन और न्यूट्रॉन नाभिक में स्थित होते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर परिक्रमा करते हैं।
- परमाणु में प्रोटॉनों और इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होने पर वह तटस्थ रहता है।
- इलेक्ट्रॉनों की संख्या में परिवर्तन से आयन बनता है जो आवेशित होता है।
- 📌 प्रोटॉन: धनात्मक आवेशित कण जो नाभिक में स्थित होता है।
- 📌 इलेक्ट्रॉन: ऋणात्मक आवेशित कण जो नाभिक के चारों ओर परिक्रमा करता है।
- 📌 न्यूट्रॉन: तटस्थ कण जो नाभिक में स्थित होता है।
1.3 चालक और कुचालक
व्याख्या1.3 चालक और कुचालक
विद्युत आवेश को स्थानांतरित करने की क्षमता के आधार पर पदार्थों को दो वर्गों में बांटा जाता है: चालक और कुचालक। चालक वे पदार्थ होते हैं जिनमें इलेक्ट्रॉन स्वतंत्र रूप से गतिशील होते हैं, जिससे वे आवेश को आसानी से स्थानांतरित कर सकते हैं। जैसे तांबा, ए
अभ्यास प्रश्न — Chapter 1
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1.1 एक ध्रुवीय युग्म के दो आवेश 2 × 10−7 C और 3 × 10−7 C हैं जो 30 cm की दूरी पर स्थित हैं। इस युग्म पर कार्य कीजिए।
उत्तर:
दो आवेश q1 = 2 × 10^-7 C, q2 = 3 × 10^-7 C, दूरी r = 30 cm = 0.3 m है। विद्युत बल का सूत्र है: F = k * |q1 * q2| / r^2 जहाँ k = 9 × 10^9 N·m²/C² F = 9 × 10^9 × (2 × 10^-7) × (3 × 10^-7) / (0.3)^2 = 9 × 10^9 × 6 × 10^-14 / 0.09 = (54 × 10^-5) / 0.09 = 6 × 10^-3 N इस बल के विरुद्ध कार्य W = F × d = 6 × 10^-3 × 0.3 = 1.8 × 10^-3 J होगा।
व्याख्या:
विद्युत बल का सूत्र Coulomb's law है। कार्य बल और दूरी का गुणनफल होता है। यहाँ बल आकर्षण होगा क्योंकि आवेश विपरीत हैं।
Q2.1.2 0.4 µC आवेशित कण पर यदि 0.2 N बल लगता है, तो (a) यदि कण पर 0.8 µC आवेश हो तो बल क्या होगा? (b) यदि कण को दूसरी दिशा में ले जाया जाए तो बल का मान क्या होगा?
उत्तर:
(a) प्रारंभिक बल F1 = 0.2 N, आवेश q1 = 0.4 µC यदि आवेश q2 = 0.8 µC हो तो बल F2 = ? बल सीधे आवेश के समानुपाती होता है, अतः: F2 = F1 × (q2 / q1) = 0.2 × (0.8 / 0.4) = 0.4 N (b) यदि कण को दूसरी दिशा में ले जाया जाए तो बल की दिशा विपरीत होगी, परंतु मान समान रहेगा, अर्थात् 0.4 N।
व्याख्या:
क्योंकि बल आवेश के गुणनफल पर निर्भर करता है, आवेश दोगुना होने पर बल भी दोगुना होगा। दिशा बदलने पर बल की दिशा उलट जाती है।
Q3.1.3 एक प्रश्न है कि ke2/G mm foekghu है। इसका भौतिक अर्थ समझाइए।
उत्तर:
यह प्रश्न विद्युत स्थिरांक k, गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक G, और द्रव्यमान m के बीच संबंध दर्शाता है। ke2/G mm एक आयामहीन संख्या है जो विद्युत बल और गुरुत्वाकर्षण बल के अनुपात को दर्शाती है। इसका अर्थ है कि विद्युत बल गुरुत्वाकर्षण बल की तुलना में कितनी अधिक तीव्र है।
व्याख्या:
यह अनुपात यह बताता है कि दो समान आवेशों के बीच विद्युत बल गुरुत्वाकर्षण बल से बहुत अधिक होता है।
Q4.1.4 (a) एक आवेशित कण का विद्युत क्षेत्र कैसा होता है? (b) विद्युत क्षेत्र और विद्युत विभव के बीच क्या संबंध होता है?
उत्तर:
(a) एक आवेशित कण के चारों ओर विद्युत क्षेत्र रेडियल होता है, जो आवेश के प्रकार पर निर्भर करता है। धन आवेश के लिए क्षेत्र दूर की ओर और ऋण आवेश के लिए क्षेत्र आवेश की ओर होता है। (b) विद्युत क्षेत्र विद्युत विभव का नकारात्मक ढाल होता है। अर्थात्, E = -∇V, जहाँ E विद्युत क्षेत्र है और V विद्युत विभव।
व्याख्या:
विद्युत क्षेत्र और विभव के बीच यह संबंध विद्युत क्षेत्र की परिभाषा से आता है।
Q5.1.5 यदि एक टुकड़ा धातु का NM+ से जड़ित है, तो क्या आवेश उस पर लगेगा? इस प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जब टुकड़ा NM+ से जुड़ा होता है, तो उस पर आवेश लग सकता है क्योंकि NM+ एक आयनिक यौगिक है जो इलेक्ट्रॉनों का आदान-प्रदान कर सकता है। इस प्रक्रिया में, टुकड़े पर आवेश का संचय होता है जो विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है।
व्याख्या:
आवेश का संचय विद्युत आवेश संरक्षण के नियम के अनुसार होता है।
Q6.1.6 चार आवेश q = 2 µC, q = –5 µC, q = 2 µC और q = –5 µC, जो ABCD चतुर्भुज के शीर्षों पर 10 cm की दूरी पर स्थित हैं, पर 1 µC आवेशित कण पर लगने वाला बल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
आवेश q1 = 2 µC, q2 = –5 µC, q3 = 2 µC, q4 = –5 µC, दूरी 10 cm = 0.1 m, और परीक्षण आवेश q0 = 1 µC है। प्रत्येक आवेश द्वारा लगने वाला बल: F = k * |q * q0| / r^2 F1 = 9×10^9 × 2×10^-6 × 1×10^-6 / (0.1)^2 = 1.8 N F2 = 9×10^9 × 5×10^-6 × 1×10^-6 / (0.1)^2 = 4.5 N इत्यादि। बलों का वेक्टर योग करके कुल बल निकाला जाएगा।
व्याख्या:
कुल बल प्रत्येक आवेश द्वारा लगने वाले बलों का वेक्टर योग होता है।
Q7.1.7 (a) क्या सभी आवेश स्थिर रहते हैं? (b) क्या सभी आवेश एक ही दिशा में गतिशील होते हैं?
उत्तर:
(a) नहीं, सभी आवेश स्थिर नहीं रहते। कुछ आवेश गतिशील होते हैं जैसे विद्युत धारा में। (b) नहीं, आवेश विभिन्न दिशाओं में गतिशील हो सकते हैं, यह निर्भर करता है विद्युत क्षेत्र और अन्य बलों पर।
व्याख्या:
आवेश की गतिशीलता और दिशा विद्युत क्षेत्र और अन्य बाहरी बलों पर निर्भर करती है।
Q8.1.8 दो आवेश q = 3 µC और q = –3 µC, 20 cm की दूरी पर स्थित हैं। (a) आवेशों को जोड़ने वाला रेखा AB पर विद्युत क्षेत्र ज्ञात कीजिए। (b) यदि 1.5 × 10−9 C आवेश को किसी बिंदु पर रखा जाए, तो उस पर लगने वाला बल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
(a) q1 = 3 µC, q2 = –3 µC, दूरी r = 20 cm = 0.2 m विद्युत क्षेत्र E = kq/r^2 E1 = 9×10^9 × 3×10^-6 / (0.2)^2 = 6.75 × 10^5 N/C E2 = 9×10^9 × 3×10^-6 / (0.2)^2 = 6.75 × 10^5 N/C क्योंकि आवेश विपरीत हैं, क्षेत्र एक-दूसरे को बढ़ाएंगे या घटाएंगे, स्थिति पर निर्भर। (b) बल F = q × E = 1.5 × 10^-9 × E (जहाँ E उपयुक्त बिंदु का क्षेत्र है)।
व्याख्या:
विद्युत क्षेत्र और बल का सूत्र Coulomb's law और E = F/q से लिया गया है।
Bhautiki-I के सभी 8 अध्याय
Physics · Class 12