Chapter 4
Chapter 4 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 13 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
जल-संसाधन
व्याख्याजल-संसाधन
जल-संसाधन अध्याय की शुरुआत इस विचार से होती है कि वर्तमान में जो जल उपलब्ध है, वह भविष्य में भी वैसा ही रहेगा, यह निश्चित नहीं है। समाज में जनांकिकीय परिवर्तन, जनसंख्या का भौगोलिक स्थानांतरण, प्रौद्योगिकी की उन्नति, पर्यावरणीय निम्नीकरण और जल अभाव जैसी समस्याएँ उत्पन्न होंगी। जल अभाव मुख्यतः जल की बढ़ती माँग, अति उपयोग और प्रदूषण के कारण होता है। जल एक चक्रीय संसाधन है जो पृथ्वी पर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, लेकिन पृथ्वी के कुल जल का केवल लगभग 3 प्रतिशत ही अलवणीय जल है, जो मानव उपयोग के लिए उपलब्ध है। जल की उपलब्धता स्थान और समय के अनुसार भिन्न होती है। जल संसाधन के आवंटन और नियंत्रण पर तनाव, झगड़े, संप्रदायों, प्रदेशों और राज्यों के बीच विवाद भी होते हैं। इसलिए विकास के लिए जल का मूल्यांकन, कार्यक्षम उपयोग और संरक्षण आवश्यक हो गया है। इस अध्याय में भारत के जल संसाधनों, उनके भौगोलिक वितरण, क्षेत्रीय उपयोग, संरक्षण और प्रबंधन की विधियों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
- जल एक चक्रीय संसाधन है, पृथ्वी पर लगभग 71% भाग जल से आच्छादित है।
- अलवणीय जल केवल 3% है, जिसमें से मानव उपयोग के लिए उपलब्ध जल और भी कम है।
- जल की उपलब्धता स्थान और समय के अनुसार भिन्न होती है।
- जल संसाधन के उपयोग और संरक्षण में सामाजिक और राजनीतिक तनाव उत्पन्न होते हैं।
- जल का मूल्यांकन, कार्यक्षम उपयोग और संरक्षण विकास के लिए आवश्यक हैं।
- 📌 अलवणीय जल: वह जल जिसमें लवणों की मात्रा बहुत कम होती है और जो मानव उपयोग के लिए उपयुक्त होता है।
- 📌 चक्रीय संसाधन: वह संसाधन जो प्रकृति में लगातार पुनः उत्पन्न होता रहता है।
भारत के जल संसाधन
व्याख्याभारत के जल संसाधन
भारत विश्व के कुल धरातलीय क्षेत्र का लगभग 2.45% है, जबकि जल संसाधनों का लगभग 4% भाग भारत के पास है। भारत की जनसंख्या विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 17% से अधिक है। भारत में एक वर्ष में वर्षा से प्राप्त कुल जल की मात्रा लगभग 4,000 घन कि.मी. है। इसमें से धरातलीय जल और पुनः पूर्तियोग्य भौम जल मिलाकर 1,869 घन कि.मी. जल उपलब्ध है, लेकिन केवल 60 प्रतिशत जल का ही लाभदायक उपयोग किया जा सकता है। इस प्रकार भारत में कुल उपयोगी जल संसाधन लगभग 1,122 घन कि.मी. हैं। यह जल संसाधन देश के विभिन्न भागों में असमान रूप से वितरित हैं। जल संसाधनों की उपलब्धता और उपयोग की क्षमता क्षेत्रीय और मौसमी विविधताओं पर निर्भर करती है।
- भारत का धरातलीय क्षेत्र विश्व का 2.45% है, जबकि जल संसाधनों का 4%.
- भारत की जनसंख्या विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 17% से अधिक है।
- वर्षा से प्राप्त कुल जल लगभग 4,000 घन कि.मी. है।
- धरातलीय और भौम जल मिलाकर 1,869 घन कि.मी. जल उपलब्ध है।
- केवल 60% जल का ही लाभदायक उपयोग संभव है।
- 📌 धरातलीय जल: सतह पर उपलब्ध जल जैसे नदियाँ, झीलें, तालाब।
- 📌 भौम जल: भूमिगत जल जो कुओं, नलकूपों आदि से प्राप्त होता है।
धरातलीय जल संसाधन
व्याख्याधरातलीय जल संसाधन
धरातलीय जल के मुख्य स्रोत नदियाँ, झीलें, तलैया और तालाब हैं। भारत में कुल 10,360 नदियाँ हैं जिनकी लंबाई 1.6 कि.मी. से अधिक है। सभी नदी बेसिनों में औसत वार्षिक जल प्रवाह लगभग 1,869 घन कि.मी. है, लेकिन स्थलाकृतिक, जलीय और अन्य दबावों के कारण केवल लगभग
अभ्यास प्रश्न — Chapter 4
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.निम्न में से कौन सा शहर साबरमती नदी के तट पर बसा है
उत्तर:
साबरमती
Q2.पर्यावरण संरक्षण अधिनियम कब पास किया गया
उत्तर:
1986
Q3.नीरू मीरू कार्यक्रम किस राज्य द्वारा चलाया जाता है?
उत्तर:
आंध्र प्रदेश
Q4.किस राज्य ने जल संरक्षण हेतु जल संग्रहण की अवसंरचना के निर्माण को आवश्यक कर दिया है
उत्तर:
तमिल नाडु
Q5.राष्ट्रीय जल नीति की शुरुआत कब की गई थी
उत्तर:
2002 ईसवी
Q6.पृथ्वी पर अलवणीयजल का कुल प्रतिशत कितना है-
उत्तर:
3%
Q7.निम्न में से कौन सी नदी हिमालय अपवाह तंत्र का भाग नहीं है
उत्तर:
महानदी
Q8.भारत में जल की मांग सबसे अधिक किस सेक्टर में है?
उत्तर:
कृषि
Bharat log aur arthvyasastha(Bhugol) के सभी 9 अध्याय
Geography · Class 12