Chapter 3
Chapter 3 — अध्ययन नोट्स
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अपवाह तंत्र
व्याख्याअपवाह तंत्र
अपवाह तंत्र का अर्थ है किसी क्षेत्र की नदियों, नालों और जल वाहिकाओं का वह जाल या व्यवस्था जिसके माध्यम से वर्षा ऋतु में अतिरिक्त जल बहकर जाता है। यदि ये वाहिकाएँ न हों तो जल का संचय होने से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। अपवाह तंत्र उस क्षेत्र की स्थलाकृति, भूवैज्ञानिक संरचना, चट्टानों की प्रकृति, ढाल, जल की मात्रा और बहाव की अवधि के आधार पर विकसित होता है। नदी सदैव ढाल के अनुसार बहती है, इसलिए हिमालय से निकलने वाली नदियाँ पूर्व की ओर बहती हैं और पश्चिमी घाट से निकलने वाली नदियाँ भी पूर्व की ओर बंगाल की खाड़ी में मिलती हैं। नदी का जलग्रहण क्षेत्र वह क्षेत्र होता है जहाँ से नदी जल प्राप्त करती है। नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा जलग्रहण क्षेत्र को अपवाह द्रोणी कहते हैं। अपवाह द्रोणी को अलग करने वाली सीमा को जल विभाजक या जल-संभर कहा जाता है। नदी द्रोणी बड़ा क्षेत्र होती है जबकि जल-संभर छोटा क्षेत्र होता है। अपवाह तंत्र के विभिन्न प्रकार होते हैं जैसे वृक्षाकार (डेंड्राइटिक), अरीय (रेडियल), जालीनुमा (ट्रेलिस), अभिकेंद्री (सेंट्रीपेटल)। ये प्रतिरूप नदी के बहाव के मार्ग और भू-आकृतिक संरचना पर निर्भर करते हैं।
- अपवाह तंत्र वर्षा ऋतु में अतिरिक्त जल के बहाव का जाल है।
- नदी सदैव ढाल के अनुसार बहती है, इसलिए हिमालयी नदियाँ पूर्व की ओर बहती हैं।
- जलग्रहण क्षेत्र वह क्षेत्र है जहाँ से नदी जल प्राप्त करती है।
- अपवाह द्रोणी और जल-संभर नदी के जलग्रहण क्षेत्र की सीमाएँ हैं।
- अपवाह तंत्र के प्रमुख प्रकार: वृक्षाकार, अरीय, जालीनुमा, अभिकेंद्री।
- जल विभाजक नदी द्रोणी को अलग करता है।
- 📌 अपवाह तंत्र: वर्षा ऋतु में जल के बहाव की व्यवस्था।
- 📌 जलग्रहण क्षेत्र: वह क्षेत्र जहाँ से नदी जल प्राप्त करती है।
- 📌 अपवाह द्रोणी: नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा जलग्रहण क्षेत्र।
भारत के अपवाह तंत्र का विभाजन
व्याख्याभारत के अपवाह तंत्र का विभाजन
भारत का अपवाह तंत्र मुख्यतः दो भागों में विभाजित है: (1) हिमालयी अपवाह तंत्र और (2) प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र। ये विभाजन नदियों के उद्गम, प्रवाह की दिशा, और जलग्रहण क्षेत्र के आधार पर किए गए हैं। हिमालयी नदियाँ मुख्यतः हिमनदों और वर्षा जल से पोषित होती हैं और बारहमासी होती हैं, जबकि प्रायद्वीपीय नदियाँ मुख्यतः वर्षा जल पर निर्भर होती हैं और अधिकांशतः अनित्यवाही होती हैं। भारत में कुल अपवाह क्षेत्र का लगभग 77% भाग बंगाल की खाड़ी में जल विसर्जित करता है, जिसमें गंगा, ब्रह्मपुत्र, महानदी, कृष्णा आदि नदियाँ शामिल हैं। शेष 23% क्षेत्र अरब सागर में जल विसर्जित करता है, जिसमें सिंधु, नर्मदा, तापी आदि नदियाँ हैं। जल-संभर क्षेत्र के आकार के आधार पर नदी द्रोणियों को प्रमुख (20,000 वर्ग कि.मी. से अधिक), मध्यम (2,000-20,000 वर्ग कि.मी.) और लघु (2,000 वर्ग कि.मी. से कम) में बांटा गया है।
- भारत के अपवाह तंत्र दो भागों में: हिमालयी और प्रायद्वीपीय।
- 77% जल बंगाल की खाड़ी में और 23% अरब सागर में जाता है।
- जल-संभर क्षेत्र के आधार पर नदी द्रोणियाँ प्रमुख, मध्यम और लघु होती हैं।
- जल विभाजक दिल्ली-कटक, अरावली और सहयाद्रि पर्वत श्रृंखलाएँ हैं।
- हिमालयी नदियाँ बारहमासी, प्रायद्वीपीय नदियाँ अधिकांशतः अनित्यवाही।
- प्रमुख नदियाँ गंगा, ब्रह्मपुत्र, सिंधु, नर्मदा, तापी, गोदावरी, कृष्णा आदि।
- 📌 हिमालयी अपवाह तंत्र: हिमालय से निकलने वाली बारहमासी नदियाँ।
- 📌 प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र: प्रायद्वीप से निकलने वाली नदियाँ, ज्यादातर अनित्यवाही।
- 📌 जल विभाजक: दो अपवाह द्रोणियों के बीच की सीमा।
हिमालयी अपवाह तंत्र
व्याख्याहिमालयी अपवाह तंत्र
हिमालयी अपवाह तंत्र भूगर्भिक इतिहास में लंबे समय से विकसित हुआ है। इसमें मुख्यतः गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र शामिल हैं। ये नदियाँ हिमालय की बर्फ पिघलने और वर्षा दोनों से पोषित होती हैं, इसलिए बारहमासी होती हैं। हिमालयी नदियाँ गहरे महाखड्डों,
अभ्यास प्रश्न — Chapter 3
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.जब नदियाँ किसी पर्वत से निकल कर सभी दिशाओं में बहती है, ये नदियों का कौन सा प्रतिरूप कहलाता है?
उत्तर:
अरीयप्रतिरूप
Q2.प्रायद्वीपीय पठार की बड़ी नदियों का उद्गम सथल कहाँ है ?
उत्तर:
पश्चिमीघाट
Q3.मायोसीन कल्प में किस विशाल नदी का विकास हुआ ?
उत्तर:
इन्डोब्राह्मा
Q4.किस नदी का उद्गम कैलाश पर्वत मे बोखुरचू के नजदीक हुआ है ?
उत्तर:
सिंधु
Q5.सिंधु नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी कौन सी है ?
उत्तर:
चेनाब
Q6.किस स्थान पर भागीरथी नदी अलकनंदा नदी से मिलती है ?
उत्तर:
देवप्रयाग
Q7.उस नदी का नाम बताइये जो कि मालवा पठार के महू क्षेत्र से निकलती है?
उत्तर:
चम्बल
Q8.किस नदी का उद्गम स्थल मानसरोवर झील के पास चेमयुंगडुंग हिमनद के पास है ?
उत्तर:
बह्मपुत्र
Bhart Bhautik Paryabaran के सभी 6 अध्याय
Geography · Class 11