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Chapter 2

🎓 Class 11📖 Vishwa Itihas Ke Kuch Vishay📖 10 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~15 मिनट
Chapter 1अध्याय 2 / 7Chapter 3

Chapter 2अध्ययन नोट्स

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साम्राज्य

अवधारणा

साम्राज्य

साम्राज्य एक ऐसा राजनीतिक संगठन होता है जो एक विशाल भूभाग पर शासन करता है और जिसमें विभिन्न जातीय, सांस्कृतिक, भाषाई और धार्मिक समूह शामिल होते हैं। प्राचीन काल में साम्राज्यों का उदय विभिन्न क्षेत्रों में हुआ, जिनमें प्रमुख थे रोम, ईरान, यूनान, मंगोल और अरब साम्राज्य। ये साम्राज्य न केवल अपने क्षेत्र में शासन करते थे, बल्कि दूर-दूर तक व्यापार, कला, धर्म और प्रशासन के माध्यम से प्रभाव फैलाते थे। साम्राज्य की स्थापना और विस्तार के पीछे मुख्य कारण थे सैन्य विजय, व्यापारिक नियंत्रण, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और प्रशासनिक दक्षता। साम्राज्यों ने विभिन्न स्थानीय संस्कृतियों को अपने प्रशासन में शामिल किया और एक साझा सांस्कृतिक पहचान विकसित की। उदाहरण के लिए, सिकंदर के साम्राज्य में यूनानी संस्कृति का फैलाव हुआ जिसे हेलेनाइज़ेशन कहा गया। साम्राज्य के प्रशासन में केंद्रीय, प्रांतीय और स्थानीय स्तर शामिल थे, जो शासन को सुचारू रूप से चलाने में सहायक थे। आर्थिक रूप से, कृषि, व्यापार, कर संग्रह और शिल्पकला साम्राज्य की स्थिरता के मुख्य आधार थे। धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन साम्राज्य की एकता और वैधता का आधार था। साम्राज्य के पतन के कारणों में आंतरिक कमजोरियाँ, बाहरी आक्रमण, आर्थिक संकट और सामाजिक असंतोष प्रमुख थे। इतिहासकारों के लिए साम्राज्यों के अध्ययन में लिखित स्रोत, अभिलेख, मूर्तियाँ और स्थापत्य महत्वपूर्ण हैं। साम्राज्य वैश्विक इतिहास के महत्वपूर्ण हिस्से हैं क्योंकि उन्होंने विश्व के विभिन्न भागों को जोड़ने में भूमिका निभाई।

  • साम्राज्य एक विस्तृत भूभाग पर शासन करने वाला राजनीतिक संगठन है।
  • साम्राज्य में विभिन्न जातीय, सांस्कृतिक और धार्मिक समूह शामिल होते हैं।
  • प्राचीन साम्राज्यों ने व्यापार, कला और धर्म के माध्यम से प्रभाव फैलाया।
  • साम्राज्य का प्रशासन केंद्रीय, प्रांतीय और स्थानीय स्तरों पर होता था।
  • आर्थिक जीवन में कृषि, व्यापार और कर संग्रह महत्वपूर्ण थे।
  • धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन साम्राज्य की एकता का आधार था।
  • 📌 साम्राज्य: एक बड़ा राजनीतिक संगठन जो विस्तृत भूभाग पर शासन करता है।
  • 📌 हेलेनाइज़ेशन: यूनानी संस्कृति का अन्य क्षेत्रों में फैलाव।
  • 📌 प्रशासन: शासन के लिए बनाए गए विभिन्न स्तर।

तीन महाद्वीपों में फैला हुआ साम्राज्य

व्याख्या

तीन महाद्वीपों में फैला हुआ साम्राज्य

रोम साम्राज्य प्राचीन विश्व का एक विशाल साम्राज्य था जो यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और पश्चिमी एशिया के बड़े हिस्से में फैला हुआ था। यह साम्राज्य भूमध्यसागर के चारों ओर स्थित क्षेत्रों पर नियंत्रण रखता था, जो इसे समुद्री व्यापार और सैन्य दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता था। रोम की भाषा लातिनी थी, जबकि पूर्वी भाग में यूनानी भाषा का प्रयोग होता था। साम्राज्य की राजनीतिक व्यवस्था में सम्राट, सैनेट और सेना मुख्य भूमिका निभाते थे। ऑगस्टस ने 27 ई.पू. में प्रिंसिपेट की स्थापना की, जिसमें सम्राट को एक प्रमुख नागरिक के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि वास्तविक सत्ता उसके हाथ में थी। सेना एक व्यावसायिक सेना थी, जिसमें सैनिकों को वेतन दिया जाता था और वे 25 वर्ष तक सेवा करते थे। साम्राज्य के प्रशासनिक क्षेत्र प्रांतों में विभाजित थे, जिनसे कर वसूला जाता था। शहरीकरण ने साम्राज्य के नियंत्रण को सुगम बनाया, जहाँ बड़े शहरों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों पर शासन किया जाता था। तीसरी शताब्दी में साम्राज्य को आंतरिक संकटों का सामना करना पड़ा, जिसमें सैन्य विद्रोह, आर्थिक मंदी और बाहरी आक्रमण शामिल थे। चौथी शताब्दी में सम्राट कॉन्टैक्टाइन ने ईसाई धर्म को राजधर्म घोषित किया और साम्राज्य को पूर्वी और पश्चिमी भागों में विभाजित किया। पश्चिमी भाग का पतन जर्मनिक जनजातियों के आक्रमणों के कारण हुआ, जबकि पूर्वी भाग ने अपनी समृद्धि बनाए रखी।

  • रोम साम्राज्य यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और पश्चिमी एशिया में फैला था।
  • भूमध्यसागर के चारों ओर स्थित क्षेत्रों पर इसका नियंत्रण था।
  • सम्राट, सैनेट और सेना साम्राज्य के मुख्य राजनीतिक खिलाड़ी थे।
  • सेना एक वेतनभोगी और पेशेवर सेना थी।
  • साम्राज्य के प्रशासनिक क्षेत्र प्रांतों में विभाजित थे।
  • तीसरी शताब्दी में साम्राज्य को आंतरिक और बाहरी संकटों का सामना करना पड़ा।
  • चौथी शताब्दी में साम्राज्य का विभाजन हुआ और ईसाई धर्म को राजधर्म घोषित किया गया।
  • 📌 प्रिंसिपेट: ऑगस्टस द्वारा स्थापित शासन व्यवस्था जिसमें सम्राट को प्रमुख नागरिक माना गया।
  • 📌 सैनेट: रोम का अभिजात वर्गीय परिषद जो शासन में प्रभावी था।
  • 📌 वेतनभोगी सेना: ऐसी सेना जिसमें सैनिकों को वेतन दिया जाता था।

साम्राज्य का आरंभिक काल

व्याख्या

साम्राज्य का आरंभिक काल

रोमन साम्राज्य के आरंभिक काल को दो भागों में बांटा जा सकता है: पूर्ववर्ती और परवर्ती। पूर्ववर्ती काल तीसरी शताब्दी के मध्य तक फैला था, जबकि उसके बाद का समय परवर्ती काल कहलाता है। इस काल में रोम एक विविधतापूर्ण साम्राज्य था जिसमें कई भाषाएँ बोली जाती

अभ्यास प्रश्नChapter 2

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.प्रश्न- 1.कुरानकी टीका को __________के रूप में जाना जाता था:
A.हदीस
B.शरिया
C.खाबड़
D.तफ़सीर

उत्तर:

तफ़सीर

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Q2.प्रश्न- इस्लाम में आस्तिकों के पहले समुदाय को ___________ रूप में जाना जाता था:
A.क़बीला
B.सनम
C.उम्मा
D.खलीफा

उत्तर:

उम्मा

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Q3.प्रश्न- बेदूइन पर निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: (i) बेदूइन लूट, लूट और आंतरिक झगड़े में लिप्त थे। (ii) खजूर और ऊंटनी का दूध उनका मुख्य आहार था। (iii) उनका सामाजिक संगठन स्वतंत्र जनजातियों पर आधारित था। (iv) उन्होंने एक सुलझे हुए जीवन का नेतृत्व किया। उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं:
A.(i), (ii) और (iii)
B.(ii), (iii) और (iv)
C.(ii) और (iii)
D.(i) और (iv)

उत्तर:

(i), (ii) और (iii)

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Q4.प्रश्न- नीचे दो कथन दृढ़कथन –(A) और कारण (R) दिए गए हैं : अभिकथन:प्रारंभिक खलीफाओं ने इस्लाम के प्रसार के साधन के रूप में शक्ति और हिंसा के विस्तार का उपयोग किया। कारण: विश्वासियों का पहला समुदाय केवल व्यापार और करों के माध्यम से बनाए नहीं रखा जा सकता है।
A.A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है।
B.A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
C.A सत्य है लेकिन R गलत है।
D.R सही है लेकिन A गलत है।

उत्तर:

A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है।

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Q5.प्रश्न- पैगंबर मुहम्मद की मृत्यु के बाद नियुक्त होने वाले दूसरे खलीफा थे:
A.अबू बकर
B.उथमान
C.उमर
D.अली

उत्तर:

उमर

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Q6.यदि आप रोम साम्राज्य में रहे होते तो कहाँ रहना पसंद करते – नगरों में या ग्रामीण क्षेत्र में? कारण बताइये।

उत्तर:

यदि मैं रोम साम्राज्य में रहता, तो मैं नगरों में रहना पसंद करता क्योंकि नगरों में व्यापार, सांस्कृतिक गतिविधियाँ, प्रशासनिक केंद्र और बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध थीं। नगरों में रहने से सामाजिक संपर्क बढ़ता और रोज़गार के अवसर अधिक मिलते। ग्रामीण क्षेत्र अधिकतर कृषि प्रधान थे और जीवन सरल था, लेकिन सुविधाएँ सीमित थीं।

व्याख्या:

रोम के नगरों में बाजार, मनोरंजन, प्रशासनिक कार्यालय और सामाजिक गतिविधियाँ होती थीं, जो जीवन को अधिक गतिशील और सुविधाजनक बनाती थीं। ग्रामीण क्षेत्र कृषि पर निर्भर था और जीवन अधिक स्थिर तथा सीमित था।

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Q7.इस अध्याय में उल्लिखित कुछ छोटे शहरों, बड़े नगरों, समुद्रों और प्रांतों की सूची बनाइये और उन्हें नक्शों पर खोजने की कोशिश कीजिए। क्या आप अपने द्वारा बनाई गई सूची में संकलित किन्हीं तीन विषयों के बारे में कुछ कह सकते हैं?

उत्तर:

इस अध्याय में उल्लिखित छोटे शहरों में जैसे पोंटियस, बड़े नगरों में रोम, कोंस्टेंटिनोपल आदि शामिल हैं। समुद्रों में भूमध्य सागर, काला सागर, और लाल सागर प्रमुख हैं। प्रांतों में गॉल, मिस्र, स्पेन आदि आते हैं। नक्शे पर इन्हें चिन्हित करने से पता चलता है कि रोम साम्राज्य का विस्तार कितना व्यापक था और यह व्यापार, सैन्य और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था। तीन विषय जो सूची से समझे जा सकते हैं, वे हैं: (1) साम्राज्य का भौगोलिक विस्तार, (2) व्यापार मार्गों का महत्व, (3) सांस्कृतिक और प्रशासनिक केंद्रों का वितरण।

व्याख्या:

नक्शे पर शहरों, समुद्रों और प्रांतों को चिन्हित करने से साम्राज्य की भौगोलिक स्थिति और उसकी विविधता का पता चलता है। इससे यह भी समझ आता है कि कैसे विभिन्न क्षेत्रों का आपस में संबंध था।

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Q8.कल्पना कीजिए कि आप रोम की एक गृहिणी हैं जो घर की जरूरत की वस्तुओं की खरीदारी की सूची बना रही हैं। अपनी सूची में आप कौन सी वस्तुएँ शामिल करेंगी?

उत्तर:

यदि मैं रोम की गृहिणी होती, तो मेरी खरीदारी सूची में शामिल वस्तुएँ होतीं: अनाज (गेहूँ, जौ), जैतून का तेल, शराब, मसाले, कपड़े, मिट्टी के बर्तन, मोमबत्तियाँ, मांसाहारी और शाकाहारी खाद्य पदार्थ, और घरेलू उपयोग की अन्य वस्तुएँ जैसे साबुन, जड़ी-बूटियाँ। ये वस्तुएँ रोजमर्रा के जीवन के लिए आवश्यक थीं।

व्याख्या:

रोम के घरों में भोजन, प्रकाश, सफाई और पोशाक की वस्तुएँ आवश्यक थीं। इसलिए गृहिणी को इन वस्तुओं की खरीदारी करनी पड़ती थी।

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