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Chapter 14

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Business Communication (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Chapter 13अध्याय 15 / 16Chapter 15

Chapter 14अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

इस अध्याय के प्रारंभ में संचार के सांकेतिक पहलुओं का महत्व बताया गया है। संचार केवल शब्दों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संकेत, हाव-भाव, मुद्राएँ, और अन्य गैर-मौखिक विधियाँ भी शामिल होती हैं। व्यापारिक संचार में, संकेतों का उपयोग बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि वे भावनाओं, दृष्टिकोणों और विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में सहायक होते हैं। इस अध्याय में मौखिक और सांकेतिक संचार के बीच के अंतर, उनके लाभ, सीमाएँ तथा व्यापारिक संदर्भ में इनका प्रयोग विस्तार से समझाया गया है।

  • संचार के दो मुख्य प्रकार: मौखिक और सांकेतिक
  • सांकेतिक संचार में शब्दों का प्रयोग नहीं होता
  • व्यापारिक संचार में संकेतों का विशेष महत्व
  • मौखिक और सांकेतिक संचार दोनों का प्रभावी उपयोग आवश्यक
  • संचार की गुणवत्ता संकेतों की समझ पर निर्भर करती है
  • 📌 संचार: विचारों, भावनाओं, सूचनाओं का आदान-प्रदान।
  • 📌 सांकेतिक संचार: संकेतों, हाव-भाव, मुद्राओं द्वारा संचार।

मौखिक संचार की परिभाषा एवं विशेषताएँ

परिभाषा

मौखिक संचार की परिभाषा एवं विशेषताएँ

मौखिक संचार वह प्रक्रिया है जिसमें विचारों, सूचनाओं एवं भावनाओं का आदान-प्रदान शब्दों के माध्यम से किया जाता है। यह आमने-सामने, टेलीफोन, वीडियो कॉल, या किसी भी माध्यम से हो सकता है जिसमें भाषा का प्रयोग होता है। मौखिक संचार की प्रमुख विशेषताएँ हैं: त्वरित प्रतिक्रिया, स्पष्टता, व्यक्तिगत स्पर्श, और संवाद की सहजता। व्यापारिक संदर्भ में, मौखिक संचार का प्रयोग बैठकों, प्रस्तुतियों, साक्षात्कारों, और ग्राहक सेवा में अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

  • मौखिक संचार में शब्दों का प्रयोग होता है
  • त्वरित प्रतिक्रिया संभव होती है
  • संदेश की स्पष्टता बनी रहती है
  • व्यक्तिगत संबंध मजबूत होते हैं
  • संवाद में लचीलापन होता है
  • 📌 मौखिक संचार: शब्दों द्वारा विचारों का आदान-प्रदान।
  • 📌 प्रत्यक्ष संचार: आमने-सामने संवाद।

सांकेतिक संचार की परिभाषा एवं विशेषताएँ

परिभाषा

सांकेतिक संचार की परिभाषा एवं विशेषताएँ

सांकेतिक संचार वह प्रक्रिया है जिसमें बिना शब्दों के, संकेतों, हाव-भाव, मुद्राओं, आँखों के इशारों, शरीर की भाषा, रंग, प्रतीकों, चित्रों आदि के माध्यम से संदेश का आदान-प्रदान किया जाता है। यह संचार का अत्यंत प्रभावी रूप है, विशेषकर तब जब मौखिक संचार स