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Chapter 12

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Micro Economic Theory (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Chapter 11अध्याय 12 / 17Chapter 13

Chapter 12अध्ययन नोट्स

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12.1 पूर्ण प्रतियोगिता : अर्थ एवं विशेषताएँ

परिभाषा

12.1 पूर्ण प्रतियोगिता : अर्थ एवं विशेषताएँ

पूर्ण प्रतियोगिता वह बाजार संरचना है जिसमें बहुत अधिक संख्या में विक्रेता और खरीदार होते हैं, सभी विक्रेता एक ही प्रकार का उत्पाद बेचते हैं, और बाजार में प्रवेश एवं निकास पर कोई प्रतिबंध नहीं होता। इस बाजार में किसी भी विक्रेता या खरीदार का बाजार मूल्य पर कोई नियंत्रण नहीं होता। सभी प्रतिभागी 'मूल्य-ग्रहिता' होते हैं, अर्थात् वे बाजार द्वारा निर्धारित मूल्य को स्वीकार करते हैं। पूर्ण प्रतियोगिता की मुख्य विशेषताएँ हैं: (1) बड़ी संख्या में विक्रेता और खरीदार, (2) उत्पाद की समरूपता, (3) स्वतंत्र प्रवेश और निकास, (4) पूर्ण जानकारी, (5) संसाधनों की पूर्ण गतिशीलता।

  • पूर्ण प्रतियोगिता में विक्रेताओं और खरीदारों की संख्या बहुत अधिक होती है।
  • सभी विक्रेता एक समान उत्पाद बेचते हैं, जिसे समरूप उत्पाद कहा जाता है।
  • बाजार में प्रवेश और निकास पर कोई प्रतिबंध नहीं होता।
  • सभी प्रतिभागियों के पास पूर्ण जानकारी होती है।
  • संसाधनों की पूर्ण गतिशीलता होती है।
  • कोई भी विक्रेता या खरीदार मूल्य निर्धारण में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
  • 📌 पूर्ण प्रतियोगिता: वह बाजार जिसमें बहुत अधिक विक्रेता और खरीदार हों तथा उत्पाद समरूप हो।
  • 📌 मूल्य-ग्रहिता: वह विक्रेता या खरीदार जो बाजार द्वारा निर्धारित मूल्य को स्वीकार करता है।

12.2 पूर्ण प्रतियोगिता के अंतर्गत फर्म की मांग

अवधारणा

12.2 पूर्ण प्रतियोगिता के अंतर्गत फर्म की मांग

पूर्ण प्रतियोगिता के अंतर्गत, फर्म की मांग वक्र (Demand Curve) पूर्णतः लचीला होता है, अर्थात् फर्म को बाजार मूल्य पर जितनी मात्रा चाहिए, उतनी बेच सकती है। फर्म के लिए मांग वक्र क्षैतिज (Horizontal) होता है, जो दर्शाता है कि फर्म अपने उत्पाद को बाजार मूल्य पर बेच सकती है, लेकिन मूल्य में कोई परिवर्तन नहीं कर सकती। बाजार में मांग और आपूर्ति के आधार पर मूल्य निर्धारित होता है, और प्रत्येक फर्म को उस मूल्य को स्वीकार करना पड़ता है।

  • फर्म की मांग वक्र पूर्णतः लचीला होता है।
  • फर्म बाजार मूल्य पर जितनी चाहे उतनी मात्रा बेच सकती है।
  • फर्म के लिए मांग वक्र क्षैतिज होता है।
  • फर्म मूल्य निर्धारण में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
  • बाजार में मांग और आपूर्ति के आधार पर मूल्य निर्धारित होता है।
  • फर्म को बाजार मूल्य स्वीकार करना पड़ता है।
  • 📌 मांग वक्र: वह रेखा जो विभिन्न मूल्य पर मांग की गई मात्रा दर्शाती है।
  • 📌 लचीला मांग वक्र: ऐसा वक्र जिसमें मूल्य परिवर्तन पर मांग में अत्यधिक परिवर्तन होता है।

12.3 पूर्ण प्रतियोगिता के अंतर्गत राजस्व

व्याख्या

12.3 पूर्ण प्रतियोगिता के अंतर्गत राजस्व

पूर्ण प्रतियोगिता के अंतर्गत, फर्म के लिए कुल राजस्व (Total Revenue), औसत राजस्व (Average Revenue) और सीमांत राजस्व (Marginal Revenue) की गणना की जाती है। कुल राजस्व (TR) = मूल्य × बेची गई मात्रा। औसत राजस्व (AR) = कुल राजस्व ÷ बेची गई मात्रा। सीमांत