NCERTCh 1निःशुल्क

Chapter 1

🎓 Class 12📖 Bharatiya Itihas ke kuchh Vishay-III📖 8 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~12 मिनट
अध्याय 1 / 4Chapter 2

Chapter 1अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

इस अध्याय की शुरुआत उपनिवेशवाद और भारतीय देहात के बीच के गहरे संबंधों की पड़ताल से होती है। उपनिवेशवाद का अर्थ है किसी एक देश का दूसरे देश पर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक नियंत्रण स्थापित करना। भारत में ब्रिटिश उपनिवेशवाद ने ग्रामीण जीवन को गहराई से प्रभावित किया। ब्रिटिश सत्ता ने न केवल राजनीतिक नियंत्रण स्थापित किया, बल्कि आर्थिक रूप से भी भारत के ग्रामीण क्षेत्रों को अपने हितों के अनुरूप बदल दिया। उपनिवेशवाद ने भारतीय देहात की सामाजिक संरचना, कृषि व्यवस्था, और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया। इस अध्याय में हम देखेंगे कि कैसे अंग्रेजों की भूमि व्यवस्था, कृषि उत्पादन, किसानों की समस्याएँ, और उनके प्रतिरोध ने भारतीय ग्रामीण समाज को बदल दिया। साथ ही, हम यह भी समझेंगे कि उपनिवेशवाद के कारण ग्रामीण समाज में सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर क्या-क्या परिवर्तन हुए।

  • उपनिवेशवाद का अर्थ राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक नियंत्रण है।
  • ब्रिटिश उपनिवेशवाद ने भारतीय ग्रामीण समाज को गहराई से प्रभावित किया।
  • अंग्रेजों की भूमि व्यवस्था ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदला।
  • किसानों की समस्याएँ और उनके प्रतिरोध उपनिवेशवाद के प्रभाव को दर्शाते हैं।
  • ग्रामीण समाज में सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन हुए।
  • 📌 उपनिवेशवाद: एक देश द्वारा दूसरे देश पर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक नियंत्रण।
  • 📌 देहात: ग्रामीण क्षेत्र या गाँव।

भूमि व्यवस्था और ग्रामीण समाज

व्याख्या

भूमि व्यवस्था और ग्रामीण समाज

अंग्रेजों के शासनकाल में भारत की भूमि व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए। ब्रिटिश सरकार ने राजस्व संग्रहण को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न प्रकार की भूमि व्यवस्थाएँ लागू कीं, जिनका उद्देश्य था स्थायी और सुनिश्चित राजस्व प्राप्त करना। प्रमुख भूमि व्यवस्थाओं में ज़मींदारी प्रणाली, रैयतवारी प्रणाली, और मलकानी प्रणाली शामिल थीं। ज़मींदारी प्रणाली में ज़मींदारों को भूमि का मालिक माना गया और वे किसानों से लगान वसूल करते थे। रैयतवारी प्रणाली में किसानों को सीधे सरकार से लगान देना पड़ता था। इन व्यवस्थाओं ने ग्रामीण समाज की संरचना को प्रभावित किया। ज़मींदारों का प्रभाव बढ़ा और किसानों की स्थिति कमजोर हुई। भूमि के मालिकाना हक़ में बदलाव से सामाजिक असमानताएँ बढ़ीं। इसके अलावा, भूमि के व्यावसायीकरण और नकदी फसलों की खेती ने पारंपरिक कृषि व्यवस्था को प्रभावित किया। ग्रामीण समाज में जाति, वर्ग और आर्थिक स्थिति के आधार पर विभाजन और भी गहरा हुआ।

  • ब्रिटिशों ने ज़मींदारी, रैयतवारी और मलकानी जैसी भूमि व्यवस्थाएँ लागू कीं।
  • ज़मींदारी प्रणाली में ज़मींदारों को भूमि का मालिक माना गया।
  • रैयतवारी प्रणाली में किसान सीधे सरकार को लगान देते थे।
  • भूमि व्यवस्था ने ग्रामीण समाज की सामाजिक और आर्थिक संरचना को बदला।
  • किसानों की स्थिति कमजोर हुई और ज़मींदारों का प्रभाव बढ़ा।
  • 📌 ज़मींदारी प्रणाली: भूमि का मालिकाना हक़ ज़मींदारों के पास।
  • 📌 रैयतवारी प्रणाली: किसानों द्वारा सीधे सरकार को लगान देना।
  • 📌 मलकानी प्रणाली: भूमि का मालिकाना हक़ सामूहिक रूप से कुछ परिवारों के पास।

कृषि उत्पादन और फसलें

व्याख्या

कृषि उत्पादन और फसलें

अंग्रेजों के शासन में कृषि उत्पादन और फसलों के प्रकार में बड़े बदलाव आए। ब्रिटिश सरकार ने नकदी फसलों (Cash Crops) जैसे नील, कपास, अफीम, चाय, और गन्ना की खेती को बढ़ावा दिया क्योंकि इनका निर्यात ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों को किया जाता था। इस नीति क

अभ्यास प्रश्नChapter 1

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.अवधारणा 8 - कपास और वैश्विक स्थिति (ज) भारत में ब्रिटिश शासनकाल में सबसे पहले कपास का सर्वाधिक उत्पादन कब हुआ जिससे इसकी वैश्विक स्थिति बदल गई ?
A.1820
B.1855
C.1861
D.1875

उत्तर:

1861

MediumNCERT
Q2.अवधारणा 7 - बक्सर युद्ध (छ) बक्सर युद्ध के बादअंग्रेज़ किन किन क्षेत्रों के शासक बन गए थे ?
A.बंगाल और नेपाल
B.बंगाल, बिहार और उड़ीसा
C.कलकत्ता, बिहार और बम्बई
D.मद्रास, बिहार और बंगाल

उत्तर:

बंगाल, बिहार और उड़ीसा

MediumNCERT
Q3.अवधारणा 6– पाँचवी रिपोर्ट से उद्धृत (च) अंग्रेजों के नए कर-क़ानून के तहत ऋण संबंधी बदलाव क्या था?
A.जो ऋण है वह मूलधन से ज्यादा होगा।
B.जमींदार इसकी शर्तें कभी भी बदल सकते हैं।
C.ऋण की नीति 3 साल तक लागू रहेगी।
D.रैयत को मजबूर किया गया कि नई ऋण नीति को हर तीन साल में बदला जाए।

उत्तर:

रैयत को मजबूर किया गया कि नई ऋण नीति को हर तीन साल में बदला जाए।

MediumNCERT
Q4.अवधारणा 5 – देहात में विद्रोह (ङ) 1875 के विद्रोह के आरंभिक चरण में किसानों ने किसके खिलाफ विद्रोह किया था?
A.भूमि मालिक
B.किसान
C.भूमिहीन मजदूर
D.जमींदार और व्यापारी

उत्तर:

जमींदार और व्यापारी

MediumNCERT
Q5.अवधारणा 4 -राजमहल की पहाड़ियाँ (घ)18वीं शताब्दी में ब्रिटिश शासकों द्वारा चलाए गएवन अधिग्रहण अभियान के कारण किसके बीच झगड़ा हुआ?
A.संथाल व जमींदार
B.ब्रिटिश और जमींदार
C.संथाल और ब्रिटिश
D.परिहार और स्थानीय किसान

उत्तर:

परिहार और स्थानीय किसान

MediumNCERT
Q6.अवधारणा 3 – कर-भुगतान (ग) जमींदर के सूर्यास्त संबंधी नियम क्या थे?
A.सभी कर सूर्यास्त के बाद दिया जाए।
B.फसल के संदर्भ के बिना ही भुगतान।
C.क़र्ज़ दाता की ओर से ज़मींदार को दी जाने वाली भुगतान राशी तय की गई तिथि के दिन सूर्यास्त तक जमा करना होगा |
D.फसल खराब होने की स्थिति में प्रार्थना करने परकर में छूट।

उत्तर:

क़र्ज़ दाता की ओर से ज़मींदार को दी जाने वाली भुगतान राशी तय की गई तिथि के दिन सूर्यास्त तक जमा करना होगा |

MediumNCERT
Q7.अवधारणा 2 - स्थायी कर (ख) कंपनी की योजना के अनुसार स्थाई कर-बंदोबस्त नीति से लोग किस दिशा में प्रोत्साहित होंगे?
A.धन एकत्रित करने में
B.खेती-बाड़ी में
C.भूमि संबंधी
D.व्यापार संबंधी

उत्तर:

भूमि संबंधी

MediumNCERT
Q8.अवधारणा 1 - बंगाल और जमींदार (क) नई कर नीति किस क्षेत्र में लागू हुई?
A.नागेश्वर
B.सूरत
C.ढाका
D.बंगाल

उत्तर:

बंगाल

MediumNCERT