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Chapter 1

🎓 Class 12📖 Bharatiya Itihas ke kuchh Vishay-III📖 8 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~12 मिनट
अध्याय 1 / 4Chapter 2

Chapter 1अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

सरकारी अभिलेखों का अध्ययन

व्याख्या

सरकारी अभिलेखों का अध्ययन

इस अध्याय की शुरुआत में हम औपनिवेशिक शासन के प्रभावों को समझेंगे, विशेषकर उन लोगों के दृष्टिकोण से जो देहात में रहते थे। बंगाल के जमींदारों से लेकर राजमहल की पहाड़ियों में रहने वाले पहाड़िया और संथाल लोगों तक, हम देखेंगे कि ईस्ट इंडिया कंपनी ने किस प्रकार देहात में अपना शासन स्थापित किया, राजस्व नीतियाँ लागू कीं, और इन नीतियों का ग्रामीण समाज के विभिन्न वर्गों पर क्या प्रभाव पड़ा। सरकारी अभिलेखों, पत्र-पत्रिकाओं, सर्वेक्षणों, यात्रियों के विवरणों तथा जांच आयोगों की रिपोर्टों के माध्यम से हम इन इतिहासों को समझने का प्रयास करेंगे। इन अभिलेखों से यह भी पता चलता है कि कानूनों के लागू होने के परिणामस्वरूप कौन अमीर बना, कौन गरीब, किसे जमीन मिली और किसने खोई। इसके साथ ही, लोग अन्यायपूर्ण कानूनों का विरोध भी करते थे और कानूनों के अनुपालन में बदलाव भी लाते थे। इस प्रकार, सरकारी अभिलेख इतिहास के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण स्रोत हैं, लेकिन इन्हें सावधानीपूर्वक और आलोचनात्मक दृष्टि से पढ़ना आवश्यक है।

  • औपनिवेशिक शासन का ग्रामीण समाज पर गहरा प्रभाव पड़ा।
  • सरकारी अभिलेखों से शासन की नीतियों और उनके परिणामों को समझा जा सकता है।
  • कानूनों के लागू होने से सामाजिक-आर्थिक स्थिति में बदलाव आया।
  • लोग अन्यायपूर्ण कानूनों का विरोध भी करते थे।
  • 📌 औपनिवेशिक शासन: एक देश द्वारा दूसरे देश पर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक नियंत्रण।
  • 📌 राजस्व नीति: सरकार द्वारा भूमि से कर वसूलने की व्यवस्था।
  • 📌 सरकारी अभिलेख: प्रशासनिक दस्तावेज़ जो इतिहास के अध्ययन में सहायक होते हैं।

बंगाल और वहाँ के जमींदार

व्याख्या

बंगाल और वहाँ के जमींदार

बंगाल में औपनिवेशिक शासन की शुरुआत के साथ ही ग्रामीण समाज और भूमि व्यवस्था में बड़े बदलाव हुए। 1793 में इस्तमरारी बंदोबस्त लागू हुआ, जिसके तहत जमींदारों को एक निश्चित राजस्व राशि अदा करनी होती थी। यदि वे भुगतान में असफल होते, तो उनकी संपत्ति नीलाम कर दी जाती। 1797 में बर्दवान में हुई नीलामी में यह देखा गया कि अधिकांश बिक्री नकली थी, क्योंकि खरीददार राजा के एजेंट थे जो जमीन को फिर उसी के पास वापस ले लेते थे। इसका कारण था कि राजा भारी राजस्व बकाया था। इस व्यवस्था के तहत जमींदार गाँवों के राजस्व संग्रहकर्ता मात्र थे, न कि जमीन के मालिक। कंपनी अधिकारियों ने सोचा था कि स्थायी राजस्व मांग से जमींदार कृषि में निवेश करेंगे और कंपनी के प्रति वफादार रहेंगे, लेकिन जमींदारों ने राजस्व भुगतान में कोताही की। उच्च राजस्व दरें, असमान भुगतान की शर्तें, और किसानों की आर्थिक स्थिति खराब होने से जमींदारों की स्थिति कमजोर हुई। इसके विपरीत, धनी किसानों के कुछ समूह जोतदार के रूप में उभरे, जिन्होंने जमीन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया और जमींदारों की सत्ता को चुनौती दी। जमींदारों ने अपनी सत्ता बचाने के लिए फर्जी नीलामी, जमीन के हिस्से परिवार के सदस्यों को देने जैसे उपाय अपनाए। 1813 की पाँचवीं रिपोर्ट में इन परिवर्तनों का विस्तृत वर्णन है, लेकिन आधुनिक शोधों से पता चलता है कि इस रिपोर्ट में जमींदारों के पतन को अतिरंजित किया गया है।

  • 1793 में बंगाल में इस्तमरारी बंदोबस्त लागू हुआ।
  • जमींदारों को निश्चित राजस्व अदा करना होता था, असफलता पर संपत्ति नीलाम।
  • नीलामी में अधिकांश बिक्री नकली थीं, जमीन फिर उसी के पास आती थी।
  • जोतदारों का उदय हुआ जो जमींदारों की सत्ता को चुनौती देते थे।
  • जमींदारों ने सत्ता बचाने के लिए फर्जी नीलामी और अन्य उपाय अपनाए।
  • पाँचवीं रिपोर्ट में जमींदारों के पतन को अतिरंजित बताया गया।
  • 📌 इस्तमरारी बंदोबस्त: स्थायी राजस्व व्यवस्था जिसमें जमींदारों को निश्चित राशि अदा करनी होती थी।
  • 📌 जमींदार: वह व्यक्ति जो राज्य के लिए राजस्व संग्रह करता था।
  • 📌 जोतदार: धनी किसान जो जमीन के बड़े हिस्से के मालिक होते थे।

कुदाल और हल

व्याख्या

कुदाल और हल

बंगाल की गीली जमीनों से हटकर अब हम सूखे अंचलों और झूम कृषि के क्षेत्रों की ओर बढ़ते हैं, जहाँ राजमहल की पहाड़ियों में पहाड़िया और संथाल लोग रहते थे। 19वीं सदी की शुरुआत में फ्रांसिस बुकानन ने इन पहाड़ियों का दौरा किया और वहाँ के लोगों की जीवनशैली और

अभ्यास प्रश्नChapter 1

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.अवधारणा 8 - कपास और वैश्विक स्थिति (ज) भारत में ब्रिटिश शासनकाल में सबसे पहले कपास का सर्वाधिक उत्पादन कब हुआ जिससे इसकी वैश्विक स्थिति बदल गई ?
A.1820
B.1855
C.1861
D.1875

उत्तर:

1861

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Q2.अवधारणा 7 - बक्सर युद्ध (छ) बक्सर युद्ध के बादअंग्रेज़ किन किन क्षेत्रों के शासक बन गए थे ?
A.बंगाल और नेपाल
B.बंगाल, बिहार और उड़ीसा
C.कलकत्ता, बिहार और बम्बई
D.मद्रास, बिहार और बंगाल

उत्तर:

बंगाल, बिहार और उड़ीसा

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Q3.अवधारणा 6– पाँचवी रिपोर्ट से उद्धृत (च) अंग्रेजों के नए कर-क़ानून के तहत ऋण संबंधी बदलाव क्या था?
A.जो ऋण है वह मूलधन से ज्यादा होगा।
B.जमींदार इसकी शर्तें कभी भी बदल सकते हैं।
C.ऋण की नीति 3 साल तक लागू रहेगी।
D.रैयत को मजबूर किया गया कि नई ऋण नीति को हर तीन साल में बदला जाए।

उत्तर:

रैयत को मजबूर किया गया कि नई ऋण नीति को हर तीन साल में बदला जाए।

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Q4.अवधारणा 5 – देहात में विद्रोह (ङ) 1875 के विद्रोह के आरंभिक चरण में किसानों ने किसके खिलाफ विद्रोह किया था?
A.भूमि मालिक
B.किसान
C.भूमिहीन मजदूर
D.जमींदार और व्यापारी

उत्तर:

जमींदार और व्यापारी

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Q5.अवधारणा 4 -राजमहल की पहाड़ियाँ (घ)18वीं शताब्दी में ब्रिटिश शासकों द्वारा चलाए गएवन अधिग्रहण अभियान के कारण किसके बीच झगड़ा हुआ?
A.संथाल व जमींदार
B.ब्रिटिश और जमींदार
C.संथाल और ब्रिटिश
D.परिहार और स्थानीय किसान

उत्तर:

परिहार और स्थानीय किसान

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Q6.अवधारणा 3 – कर-भुगतान (ग) जमींदर के सूर्यास्त संबंधी नियम क्या थे?
A.सभी कर सूर्यास्त के बाद दिया जाए।
B.फसल के संदर्भ के बिना ही भुगतान।
C.क़र्ज़ दाता की ओर से ज़मींदार को दी जाने वाली भुगतान राशी तय की गई तिथि के दिन सूर्यास्त तक जमा करना होगा |
D.फसल खराब होने की स्थिति में प्रार्थना करने परकर में छूट।

उत्तर:

क़र्ज़ दाता की ओर से ज़मींदार को दी जाने वाली भुगतान राशी तय की गई तिथि के दिन सूर्यास्त तक जमा करना होगा |

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Q7.अवधारणा 2 - स्थायी कर (ख) कंपनी की योजना के अनुसार स्थाई कर-बंदोबस्त नीति से लोग किस दिशा में प्रोत्साहित होंगे?
A.धन एकत्रित करने में
B.खेती-बाड़ी में
C.भूमि संबंधी
D.व्यापार संबंधी

उत्तर:

भूमि संबंधी

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Q8.अवधारणा 1 - बंगाल और जमींदार (क) नई कर नीति किस क्षेत्र में लागू हुई?
A.नागेश्वर
B.सूरत
C.ढाका
D.बंगाल

उत्तर:

बंगाल

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