Nutrition and Health | Class 12 Home Science Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

Nutrition and Health – this guide gives you a concise, exam-ready overview of Nutrition and Health from Class 12 Home Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
महत्व
भारत में पोषण संबंधी समस्याएँ गंभीर हैं और विशेष रूप से पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। लगभग 50 प्रतिशत बच्चों की मृत्यु कुपोषण के कारण होती है। भारत में जन्म के समय लगभग 1/5 बच्चे कम जन्म-भार वाले होते हैं, जिनका जन्म का वजन 2500 ग्राम से कम होता है। ये बच्चे विकास के दौरान कई स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त रहते हैं। सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों में वृद्धि मंदन और मध्यम से साधारण अल्पपोषण व्यापक रूप से पाया जाता है। सूक्ष्मपोषकों की कमी जैसे लौहतत्व, जिंक, विटामिन A, विटामिन C, विटामिन D, आयोडीन, फॉलिक अम्ल और विटामिन B12 भी बड़ी संख्या में बच्चों और वयस्कों में देखी जाती है। यदि इन समस्याओं को समय पर नियंत्रित नहीं किया गया तो शारीरिक वृद्धि के साथ-साथ मानसिक और संज्ञानात्मक विकास भी प्रभावित होता है, जिससे जीवन की गुणवत्ता और उत्पादकता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कुपोषण के कारण आर्थिक हानि भी होती है, जो जीवन भर की कमाई का 10 प्रतिशत से अधिक हो सकती है। इसके अतिरिक्त भारत में अतिपोषण की समस्या भी बढ़ रही है, जो जीवनशैली में बदलाव, कम शारीरिक गतिविधि और अस्वास्थ्यकर आहार के कारण होती है। अतिपोषण से उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर जैसे रोग होते हैं। इस प्रकार भारत 'कुपोषण का दोहरा भार' उठा रहा है।
🔗 Connection: यह खंड भारत में पोषण संबंधी समस्याओं के मूलभूत कारणों और उनके नियंत्रण के लिए आवश्यक नीतियों की चर्चा की ओर ले जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. निम्नलिखित शब्दों को समझाइए — बौनापन, जन्म के समय कम भार वाला शिशु, आई. डी. डी., क्षयकारी, कुपोषण का दोहरा भार, मरास्मस, क्वाशिओरकोर, समुदाय।
उत्तर:
1. बौनापन: शारीरिक विकास में कमी या सामान्य से कम विकास को बौनापन कहते हैं। 2. जन्म के समय कम भार वाला शिशु: ऐसा शिशु जिसका जन्म के समय वजन 2.5 किलोग्राम से कम होता है। 3. आई. डी. डी. (आयोडीन की कमी विकार): आयोडीन की कमी के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याएँ, जैसे गंडमाला। 4. क्षयकारी: वह रोग जो शरीर की ऊर्जा और पोषण को कम कर देता है, जैसे तपेदिक। 5. कुपोषण का दोहरा भार: एक ही समय में पोषण की कमी और अधिकता दोनों की समस्या होना। 6. मरास्मस: प्रोटीन और कैलोरी की गंभीर कमी से होने वाला कुपोष
2. जन पोषण समस्याओं से जूझने के लिए उपयोग में लाई जा सकने वाली विभिन्न कार्य नीतियों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
जन पोषण समस्याओं से निपटने के लिए विभिन्न कार्य नीतियाँ अपनाई जाती हैं, जिनमें शामिल हैं:
1. पोषण शिक्षा: लोगों को सही आहार और पोषण के बारे में जागरूक करना। 2. पूरक आहार कार्यक्रम: विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और वृद्धों के लिए पोषण पूरक प्रदान करना। 3. स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार: टीकाकरण, रोग नियंत्रण और स्वास्थ्य जांच। 4. स्वच्छता और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना। 5. सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ: गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों के लिए सहायता। 6. बाल विकास कार्यक्
3. जन स्वास्थ्य पोषण क्या है?
उत्तर:
जन स्वास्थ्य पोषण वह क्षेत्र है जो पूरे समुदाय या जनसंख्या के पोषण स्तर को सुधारने और पोषण संबंधी समस्याओं को रोकने के लिए कार्य करता है। इसमें पोषण की निगरानी, मूल्यांकन, शिक्षा, और पोषण कार्यक्रमों का विकास शामिल है। इसका उद्देश्य स्वस्थ जीवन और रोगों से बचाव सुनिश्चित करना है।
4. भारत किन सामान्य पोषण समस्याओं का सामना कर रहा है?
उत्तर:
भारत में सामान्य पोषण समस्याएँ निम्नलिखित हैं:
1. कुपोषण (अल्प पोषण) विशेषकर बच्चों में। 2. आयरन की कमी से होने वाली एनीमिया। 3. आयोडीन की कमी से होने वाले विकार (आई.डी.डी.)। 4. विटामिन A की कमी। 5. प्रोटीन और कैलोरी की कमी। 6. मोटापा और उससे जुड़ी बीमारियाँ। 7. बाल विकास में देरी।
ये समस्याएँ सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय कारणों से उत्पन्न होती हैं।
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